Saturday, June 15, 2024
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पाकुड़ जिले में जमीन के घपलों की है अजब गजब कहानी

पाकुड़। जिले के महेशपुर अंचल के जनसूचना पदाधिकारी – सह अंचल अधिकारी ने अपने ज्ञापंक 317/राo/20/11/21 के द्वारा एक सूचनाधिकार आवेदन का जवाब देते हुए कहा कि राजस्व उपनिरीक्षक एवं अंचल निरीक्षक द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मौजा देवीनगर, दाग संख्या 409 , रकवा 03 बीघा 01 कट्टा 16 धूर जमीन सर्वे खतियान में अनाबादी खतान्तर्गत दर्ज है। फिर इसी ज्ञापंक में कहा गया कि उक्त जमीन हेमंत कुमार सिंह, उज्वल कुमार सिंह और विजय कुमार सिंह सभी के पिता अश्विनी कुमार सिंह, सकिम देवीनगर के नाम से प्रतिव्यक्ति 1 बीघा करके राजस्व पंजी 2 में जमाबंदी क़ायम है। ये भी कहा कि भूमि का हस्तांतरण अंचल कार्यालय के माध्यम से नहीं होता है।

इसी ज्ञापंक में कण्डिकावार सूचना उपलब्ध कराते हुए कहा गया कि उक्त स्थान पर हाट लगता है, शेड निर्मित है, शेड का निर्माण अंचल ने नहीं करवाया, हाट का बंदोबस्ती स्थगित है (मतलब पहले बंदोबस्ती होती थी)।

उक्त ज्ञापंक से स्पष्ट है कि उक्त जमीन अनाबादी है, वहाँ हाट लगती है, हाट के लिए शेड भी बना हुआ है, बंदोबस्ती होती थी जो फिलवक्त स्थगित है तथा रजिस्टर 2 में उपर्युक्त दिये नामधारियों के नाम दर्ज है।

सवाल बहुत सारे उठते हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ़ इतना कि जब शेड बन रहा था और बंदोबस्ती का डाक होता था, तो जमीन के तथाकथित मलिकों ने आपत्ति दर्ज क्यूँ नहीं कराई? एक सूचना अनुसार उस जमीन को कट्टा स्तर पर बेचा जा रहा है, तो खतियान में दर्ज अनाबादी जमीन के आधार पर अंचल आपत्ति दर्ज क्यूँ नहीं कर रहा?

बाँकी कहानी और है, जो आश्चर्य जनक है

चलिए उस ओर भी चलें —

रजिस्टर 2 में जिस हेमंत कुमार सिंह, उज्वल कुमार सिंह एवं बिजय कुमार सिंह के नाम हैं, उनका कहना है कि स्वर्गीय इंद्रजीत सिंह के नाम तत्कालीन राजा ने उक्त जमीन बंदोबस्त की थीं। (जमींदारी उन्मूलन कानून आने से पहले राजा यानी जमींदार ही जमीन बंदोबस्ती देते थे)। इंद्रजीत सिंह के पुत्र स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह की मृत्यु तकरीबन 70 वर्ष पूर्व हुई थी। उनका नाम सरकारी कागज़ातों में नहीं है। हटिया उनके समय से ही लग रहा है। स्वाभाविक रूप से उन्होंने अपने जीवनकाल में हटिया का कभी विरोध नही किया होगा, इसलिए हाट लगता रहा।

स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह को पाँच पुत्र है। अश्विनी कुमार सिंह, मनोरंजन सिंह, सत्यनारायण सिंह, सत्यवान सिंह एवं नोनिगोपाल सिंह। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सिर्फ़ अश्विनी कुमार सिंह के ही तीन पुत्रों के नाम से ही रजिस्टर 2 में दाख़िल ख़ारिज दिखाया गया है।

जबकि जब तक अश्विनी कुमार सिंह जीवित थे, उक्त जमीन सरकारी हाट ही रहा था। तो फिर अचानक ये बदलाव कैसे आया? ये एक यक्ष प्रश्न है।

जानकार बताते हैं कि 2018 से 2021 के बीच ये गड़बड़-झाला हुआ है, और इस गड़बड़-झाले के लिए बुद्धि और व्यवस्था अंचल कार्यालय के कर्मी द्वारा ही किया गया है। कहते हैं कि महेशपुर के एक गाँव में तत्कालीन राजा के हस्ताक्षर की हु-ब-हु नकल करनेवाले की सहायता से नक़ली पर्ची तैयार की गई है, जिसमें बंदोबस्ती दिखाई गई है।

बात कुछ भी हो लेकिन मामला जाँच का बनता है। क्योंकि जब इंच भर जमीन हत्याओं और षडयंत्रों का कारण बनता है, वहाँ स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह के अन्य चार पुत्र एवं उनके वंशज कैसे चुप रह सकते हैं?

जमींदारों के हु-ब-हु नक़ली हस्ताक्षरों से पूरे पाकुड़ में कई खेल खेले गए हैं। करोड़ों नहीं अरबों की जमीन पाकुड़ में साज़िश के शिकार हुए हैं। मान लिया जाय कि ये एक मनगढ़ंत आरोप हो, लेकिन सरकारी हाट लगने वाली जमीन का अचानक व्यक्तिगत हो जाना जाँच का विषय तो है ही। है कि नहीं………..

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