Saturday, January 17, 2026
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पटरी पर लोहा रख ट्रेन हादसे को अंजाम देने के प्रयास मामले में एक्शन में रेलवे पुलिस , तीन हिरासत में।

 

दैनिक प्रतिष्ठित अख़बार  “प्रभात मंत्र “के पाकुड़ ब्यूरो चीफ अबुल काशिम जी की कलम से-

पटरी पर भारी भरकम लोहा रखकर रेल हादसे को अंजाम देने के प्रयास मामले में रेलवे पुलिस पूरे एक्शन में है। घटना के बाद से ही रेलवे पुलिस इस मामले में संलिप्त असामाजिक तत्वों की पहचान में जुट गई है। रेलवे पुलिस गुप्तचर और तकनीकी सहारा लेकर असामाजिक तत्वों तक पहुंचने की हर संभव कोशिश कर रही है। पुलिस ने अब तक कई लोगों को हिरासत में भी लिया है और पूछताछ कर रही है। अभी तक पुलिस तिलभिठा स्टेशन के आसपास के गांवों में नजर रख रही है। इस मामले में शामिल लोगों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है। यह अलग बात है कि पुलिस को अभी तक खास सफलता हाथ नहीं लगी है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही घटना का खुलासा हो जाएगा। पुलिस ने अभी तक जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनसे पूछताछ तो जारी है ही, सच्चाई सामने लाने के लिए उनके मोबाइल के डिटेल्स भी खंगाल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक रेलवे पुलिस पूर्व में रेलवे से जुड़ी अपराधिक घटनाओं की फाइलें भी खोल रही है। इन फाइलों में से पुराने अपराधियों के नाम निकाल रही है। ताकि उन पूर्व अपराधियों से भी पूछताछ की जा सके। फिलहाल रेलवे पुलिस की तिलभिठा स्टेशन के आसपास के गांव पर ज्यादा नजर है। इनमें तिलभिठा, संग्रामपुर, कुमारपुर, रानीपुर, सेलिमपुर गांव शामिल है। सूत्रों के दावों के मुताबिक इन गांवों के अलावा ईलामी, तारानगर, पाली, दादपुर, कालिदासपुर आदि गांव पर भी नजर हैं। सूत्रों के मुताबिक इन गांवों में रेलवे पुलिस पैनी नजर रखी हुई है। असामाजिक तत्व या अपराधी किस्म के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस मामले में रेलवे पुलिस मुफस्सिल थाना की पुलिस की भी मदद ले रही है। यह भी चर्चा है कि रेलवे ने इस मामले को चुनौती के तौर पर लिया है और हर हाल में इसमें शामिल लोगों तक पहुंचना चाहती है। हालांकि रेलवे सूत्रों का कहना है कि पुलिस किसी बेगुनाह को फंसाना नहीं चाहती है। भले सौ अपराधी बच जाए, पर एक निर्दोष नहीं फंसे…. के कहावत पर काम कर रही है। इधर मंगलवार को पाकुड़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ऑफिस में काफी हलचलें देखी गई। आरपीएफ में पुलिस अधिकारी मामले को लेकर काफी गंभीर दिखे। आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर प्रकाश चौधरी एवं अन्य अधिकारी मामले पर गंभीर चिंतन करते नजर आए। उन्होंने मामले को लेकर ज्यादा कुछ तो नहीं बताया, लेकिन उनका कहना था कि अभी तक तो किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, बस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। लेकिन बहुत जल्द मामले का खुलासा होने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ नाम सामने आए हैं। इन लोगों तक पहुंचने की हर कोशिश की जा रही है।

वनांचल एक्सप्रेस थी निशाने पर

जिस तरीके से और जिस समय घटना को अंजाम देने की कोशिश की गई, उससे संभावना जताई जा रही है कि असामाजिक तत्वों के निशाने पर वनांचल एक्सप्रेस थी। लोगों में चर्चा है कि अपराधी किस्म के लोगों ने वनांचल एक्सप्रेस का हादसा कराकर लूटपाट के इरादे से पटरी पर लोहा रखा होगा। लोगों में हो रही इस चर्चे को बल इसलिए भी मिलता है, क्योंकि जिस वक्त पटरी पर लोहा रखे जाने की भनक लगी, उससे ठीक पहले रात करीब 10:00 बजे गया-हावड़ा एक्सप्रेस इसी रेल पटरी से होकर गुजरी थी। तब तक पटरी पर ऐसा कुछ भी नहीं था। इसके ठीक बाद वनांचल एक्सप्रेस आने का समय हो रहा था। पाकुड़ रेलवे स्टेशन में वनांचल एक्सप्रेस के आगमन का रात 10:30 बजे समय तय है। आधे घंटे के दौरान गया-हावड़ा एक्सप्रेस का पटरी से सही सलामत गुजर जाना और वनांचल एक्सप्रेस के गुजरने से पहले उसी पटरी पर लोहा रख देना, कहीं ना कहीं वनांचल एक्सप्रेस में हादसा कराकर लूटपाट के मंसूबे को बल जरूर मिलता है।

क्या है मामला

शनिवार की देर रात रेलवे अधिकारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रात करीब 10:15 बजे के आसपास पाकुड़-बरहरवा रेलखंड पर कुमारपुर फाटक से थोड़ी दूर पोल संख्या 156/12 के पास पटरी पर भारी भरकम लोहे का टुकड़ा मिला। इसी पटरी से निर्धारित समय पर वनांचल एक्सप्रेस गुजरने वाली थी। इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की खुशकिस्मती कहें या एक मालगाड़ी के लोको पायलट की सूझबूझ कहें, एक बड़ा रेल हादसा टल गया। पाकुड़ स्टेशन पर निर्धारित समय 10:23 बजे पहुंचने वाली वनांचल एक्सप्रेस से ठीक पहले एक मालगाड़ी गुजर रही थी। इसी मालगाड़ी के लोको पायलट को पटरी पर भारी भरकम लोहा रखे होने की भनक लग गई। इसके बाद लोको पायलट ने रेलवे के अधिकारियों को जानकारी दी। अधिकारियों को जानकारी मिलते ही रेलवे में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के निर्देश पर गुमानी रेलवे स्टेशन से उस समय खुल रही वनांचल एक्सप्रेस को बीच में ही रोक दिया गया। देर रात को ही रामपुरहाट एसी और रामपुरहाट एईएम की टीम स्थल पर पहुंच गई। अधिकारियों की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। पटरी से लोहे को हटाया गया और सबकुछ क्लियर होने के बाद ही वनांचल एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई गई। बताया जाता है कि इस मामले की वजह से वनांचल एक्सप्रेस तकरीबन डेढ़ घंटे तक रुकी रही। अगले दिन सुबह वर्धमान से डॉग स्क्वॉड की टीम भी बुलाई गई। सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर रघुवीर चोक्का भी पाकुड़ पहुंचे थे। इस मामले में पीडब्ल्यूआई उज्जवल कुमार के आवेदन पर रेलवे पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।

क्या आसन्न गर्मी में पाकुड़वासियों की हलक सुखी रह जायेगी ! गंगाजल के नाम पर कब तक ठगी जाएगी जनता?:मोनिता

15 साल से सिर्फ वादे, पाकुड़ अब तक गंगा जल से वंचित — जनता के धैर्य की परीक्षा कब तक?
पाकुड़ शहर की शहरी जलापूर्ति योजना पिछले पंद्रह वर्षों से फाइलों में कैद है। इस दौरान न जाने कितने जनप्रतिनिधि आए और चले गए, मगर पाकुड़ की जनता को आज तक गंगा का पानी नसीब नहीं हुआ। हर चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन हकीकत में शहरवासी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए जूझने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी आते ही पेयजल संकट विकराल रूप ले लेता है, पर प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक अधर में लटकी हुई है। सवाल यह है कि पाकुड़ की जनता को आखिर कब तक ठगा जाता रहेगा?
इसी जनआक्रोश के बीच जिला कांग्रेस कमिटी पाकुड़ की महासचिव श्रीमती मोनिता कुमारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई का समय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को स्वयं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के समक्ष उठाएंगी और पाकुड़ की जनता की पीड़ा से उन्हें अवगत कराएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राजमहल लोकसभा सांसद श्री विजय कुमार हांसदा एवं पाकुड़ विधायक श्रीमती निशात आलम को इस योजना की वास्तविक स्थिति से अवगत कराकर उन पर भी जनदबाव बनाया जाएगा, ताकि वर्षों से लटकी इस योजना को तत्काल गति मिल सके।
श्रीमती मोनिता कुमारी ने साफ शब्दों में कहा—
“अब बहुत हो चुका। पाकुड़ की जनता को सिर्फ वादे नहीं, गंगा जल चाहिए। हर हाल में शहर में गंगा जल पहुंचाने के लिए हम निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।”
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन जनता की इस जायज़ मांग पर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं, या फिर पाकुड़ को उसका हक़ मिलेगा।

घुसपैठ के पीछे की अनकही कहानी। भाग – 2

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क्रमांक 1 से आगे
भाग –2

बंगलादेशी घुसपैठ के द्वारा भारत के टुकड़े करने तथा आंतरिक रूप से असुरक्षित करने की मंशा में सी आई ए और आई एस आई क्यूँ ?
यह एक स्वाभाविक सवाल है। विभाजन के बाद कुछ हद तक आपसी बहुत सारे विषयों पर असहमति रहने के बाद भी भारत में सभी समुदायों ने आपस में मिलजुल कर रहना शुरू किया। सभी ने मिलकर देश को आगे ले जाने में अपनी सहयोगिता देना शुरू किया और रखा, तथा देश आगे की ओर तेजी से चल पड़ा।
लेकिन आसपास के देशों में भारत की साम्प्रदायिक एक जुटता के साथ आगे बढ़ना कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रहा था । उधर पश्चिमी देशों को भी भारत के अंदर की शांति और आगे बढ़ना रास नहीं आ रहा था। भारत की आंतरिक शांति तथा आगे बढ़ने से उपजे असन्तोष के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने दूरगामी स्वार्थ थे। लेकिन उस स्वार्थ को साधने के लिए कोई दूरगामी योजना लाज़मी थे। उसकी योजना ब्रिटिश शासन काल से ही अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने शुरू कर दी थी , जो आहिस्ते आहिस्ते भारत की आज़ादी के समय ही राजनैतिक बुद्धिजीवियों और विद्वानों को समझ में आने लगा था। बंगलादेश बनने के बाद योजना ने जोर और रंग पकड़ना शुरू किया।
देश में घुसपैठ कराकर कट्टरपंथियों ने हमें अस्थिर करने की योजना पर जोरदार काम शुरू किया।
इन दिनों आप देख रहे होंगे कि एक के बाद एक कई ऐसी पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं, जिसमें उस विशेष जगह के लोग शामिल नहीं थे , बल्कि अफवाहों के सहारे दूसरे स्थान की भीड़ बाहर से पुलिस पर पत्थरबाजी करने आये थे। इनके प्रायोजित होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। देश की अखंडता एवं सौहार्द में जीने की बोखलाहट और असहजता बृहत तौर पर देखी जा रही है, देश से सात समंदर पार भी और देश के अंदर भी।
अंतरराष्ट्रीय साज़िश के अलिखित इतिहास कहते हैं , कि आज़ादी के बाद लगातार आगे बढ़ रहे भारत को रोकने के लिए बाहर से नहीं बल्कि अंदर से अस्थिर किये जाने की मंशा काम कर रही है। मूल भारत के हिन्दू और मुसलमान अलग अलग पंथ के रहने के बाद भी सांस्कृतिक रूप से मिलजुलकर रहते हैं। इसलिए दहाई दशकों से घुसपैठ कराकर उन्हें देश के हाईवे और रेलवे लाईनों के किनारे ऐसी जगहों पर घने रूप से तंग गलियों का निर्माण कर बसाया गया।
अंतरराष्ट्रीय साज़िशों की सोच ऐसी रही कि जब कभी हिंदुस्तान बाहरी या पड़ोसी देशों से युद्ध में उलझे तो ब्यापक रूप से आंतरिक अशांति फैलाकर हाईवे और रेल लाइनों को ऐसे बाधित कर दिया जाय कि सेना के मुभमेन्ट को रोका या प्रभावित किया जा सके। लेकिन हवाई मार्गों , उच्च स्तरीय टनल , रेलवे लाईनों की आंशिक रूप से घेराबंदी के साथ नए सुरक्षा मानकों पर काम ने एक और चिढ़न पैदा की।
इसी घुसपैठ के द्वारा अलगाववाद की सोच को भी देश में व्यापक रूप से पहुँचाना तथा यहाँ शांति से रह रहे लोगों को एक दूसरे के प्रति अस्वाभाविक विद्वेष प्रत्यारोपित करने की मंशा को साकार रूप देना ही उद्देश्य है और था।
इसके पीछे का प्रारंभिक उद्देश्य था कि महाराष्ट्र के नागपुर से नागालेंड तक के अधिसूचित कॉरिडोर को धर्मांतरण के द्वारा इनका एक अलग पहचान बनाकर भारत को दो और विभाजन का डँस दिया जा सके।
बंगलादेश से लगी सीमांत भारत के जिलों को जो अधिसूचित क्षेत्र में न पड़ते हों या आंशिक तौर पर पड़ते हों , उन्हें बृहत बंगलादेश के छुपी योजना के तहत बंगलादेश में मिला देना , तथा अधिसूचित कॉरिडोर को एक अलग पहचान के साथ अलग देश बनाने की अंतरराष्ट्रीय साज़िश पर काम चल रहा था। ताकि दुनियाँ के इस इलाके में भी सैनिक बेस बनाकर दुनियाँ के इस इलाके के देशों पर भी नज़र रखी जा सके। इस बात को नागालेंड , असम आदि राज्यों में उग्रवाद , आतंकी घटनाओं एवं सशस्त्र आन्दोलनों ने सावित किया, हँलांकि सात बहने राज्यों के विकास को दिल्ली ने भी अनदेखा किया , इसमें दो मत नहीं है। पर यहाँ बंगलादेशी और रोहंगिया घुसपैठ पश्चिम के अलग पहचान के देश की मंशा को मौन रूप से चोटिल करना शुरू किया , इसलिए पश्चिमी देशों ने भी शरणार्थियों एवं घुसपैठ के साथ आतंकवाद पर टर्राना शुरु किया।

ऐसा क्यूँ , तो जवाब है कि प्राकृतिक संसाधनों की कमी तथा अपने स्वार्थ जनित कारणों से घुसपैठ ने अपने पैर पूरे देश में पसारने शुरू किया , जिसके कारण अलग पहचान के लेंड की मंशा पर पानी फिरने की स्थिति दिखने लगी। झारखंड के संथालपरगना पर ख़ुफ़िया विभाग ने सरकार को रिपोर्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण आदिवासियों की जमीन पर बड़े पैमाने पर कई तरीकों से घुसपैठियों द्वारा कब्जा किया गया है। स्वाभाविक है कि इस तरह के रिपोर्ट सीआईए एवं अन्य सक्षम एजेंसियों को भी रही होगी। इधर जब तक सिर्फ भारत में आतंकवादी घटनाएं होती थी तो पश्चिम चुप था, लेकिन आतंकवाद ने पश्चिमी देशों को भी अपने आगोश में लेना शुरू किया तो आतंकवाद के विरोध में पश्चिमी बयानों की बयार भी चलने लगे।
जो भी हो 1990 के दशकों के आसपास अन्तर्राष्ट्रीय अलगाववादी सोचों ने बंगलादेश में 86 ऐसे ट्रेनिंग सेंटर भी चला रखे थे , जो घुसपैठ का सहयोग विभिन्न ढंग से करते थे, और उनमें अलगाववादी सोच तथा साम्प्रदायिक हिंसा की ज़हर के साथ गजबा ए हिंद की सोच भी आरोपित करते थे।
1996 में तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कोलकाता में एक प्रेसकन्फ्रेन्स में ऐसे ही ट्रेनिंग केन्द्रों की चर्चा की थी। कुलमिलाकर अंतर्राष्ट्रीय साज़िशों के परिदृश्य के परिणाम आज देखने को विभिन्न स्तरों पर दिख रही है।
अफवाहों से देश के माहौल को हमेशा बिगाड़ने के प्रयास बरबस दिख जा रहे हैं।
आज जब घुसपैठियों को बाहर करने की बात या कार्रवाइयाँ होतीं हैं तो एक विशेष क्लास के लोगों में बेचैनी और छटपटाहट के साथ अनाप शनाप बयान देखने सुनने को मिलते हैं , जो स्वाभाविक है , क्योंकि इस अंतरराष्ट्रीय साज़िश के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगाध पैसे लुटाये गये हैं , और तत्कालीन रूप से फ़ायदे के कारण देश के राजनीतिक और धार्मिक तारणहार जमकर बिके हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं का तो खैर कहना ही क्या।
इन साज़िशों को मैने किताबों में नहीं जमीन पर पढ़ा है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक रहा बल्कि मजदूरी ,लोरियों के सहचालक(खलासी) बनकर दूर सुदूर यात्राएं कर 1990 की दशक में देखा और व्यवहारिक रूप से पढ़ा है।
क्रमशः

आख़िर क्या थी मंशा , रेलवे को जानना है ज़रूरी।

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पाकुड़ रेलवे ट्रैक पर साजिश, वनांचल एक्सप्रेस थी निशाने पर, मालगाड़ी से टला बड़ा हादसा।

पाकुड़ जिले के तिलभीटा और कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के बीच शनिवार देर रात रेलवे ट्रैक पर रखे गए भारी लोहे के टुकड़े ने एक बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। घटनाक्रम पर गौर करें तो साफ होता है कि असामाजिक तत्वों का असली निशाना डाउन लाइन से गुजरने वाली वनांचल एक्सप्रेस थी, लेकिन संयोगवश उससे पहले मालगाड़ी गुजर जाने से बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, गया–हावड़ा एक्सप्रेस रात करीब 10 बजे पाकुड़ स्टेशन से सुरक्षित गुजर गई थी। इसके बाद ही अपराधियों ने डाउन लाइन पर करीब डेढ़ मीटर लंबा भारी लोहे का टुकड़ा रख दिया। इसी दौरान लगभग 10.15 बजे एक मालगाड़ी उस ट्रैक से गुजरी। लोहे का टुकड़ा इंजन और डिब्बों की चपेट में आ गया और घिसटते हुए करीब दो तीन सो मीटर तक आगे बढ़ गया। इस दौरान खंभा संख्या 156/04 के आगे तक कई स्लीपर और पटरी क्षतिग्रस्त हो गए। तेज रगड़ की आवाज सुनते ही मालगाड़ी के चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को रोका। तुरंत स्टेशन मास्टर को सूचना दी गई, जिसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचीं। ट्रैक की बारीकी से जांच और मरम्मत के बाद ही वनांचल एक्सप्रेस को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। घटना के कारण वनांचल एक्सप्रेस तिलभीटा या कोटालपोखर के बीच करीब एक से डेढ़ घंटे तक खड़ी रही और देर रात लगभग 12 बजे पाकुड़ स्टेशन पहुंच सकी।
जांच में यह भी सामने आया कि वनांचल एक्सप्रेस का पाकुड़ आगमन रात 10.23 बजे निर्धारित था और यह ट्रेन साहिबगंज जिले के बड़हरवा से रात 9.57 बजे रवाना होकर 10.15 बजे गुमानी स्टेशन पहुंची थी। इसी समय के आसपास ट्रैक पर लोहा रखे जाने से आशंका और गहरी हो गई है कि अपराधियों की मंशा इसी ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की थी।
रविवार को घटनास्थल पर आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह, सीआईबी और जीआरपी के अधिकारी पहुंचे। वरीय अधिकारियों को सूचना मिलने के बाद रामपुरहाट से एसई राजकुमार साव और एईएम की टीम ने देर रात निरीक्षण किया। रविवार सुबह वर्द्धमान से डॉग स्क्वायड की टीम भी जांच के लिए पहुंची, हालांकि कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। बाद में सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर रघुवीर चोक्का ने पाकुड़ पहुंचकर मामले की समीक्षा की।
रेलवे ट्रैक पर जानबूझकर लोहा रखने के मामले में पीडब्लूआई उज्जल कुमार के आवेदन पर रेलवे पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ कांड संख्या 18/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीर साजिश मानते हुए हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं।

सन बिहाइंड त वेष्ट , घुसपैठ की अनकहीकहानी।

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घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1

बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः

सन बिहाइंड त वेष्ट , घुसपैठ की अनकहीकहानी।

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घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1

बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः

जिला आजसू को मिला नया नेतृत्व , इतिहास के पन्नों में पार्टी ने झाँका।

आलोक जॉय पॉल बने जिला कार्यकारी अध्यक्ष
आजसू पार्टी पाकुड़ जिला समिति को मिला नया नेतृत्व

पाकुड़-आजसू पार्टी के संगठन को मज़बूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पार्टी के मांडू विधायक तिवारी महतो, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर तथा केंद्रीय उपाध्यक्ष जोनाथन टुडू द्वारा आलोक जॉय पॉल को आजसू पार्टी, पाकुड़ जिला समिति का जिला कार्यकारी अध्यक्ष एवं मोफ़िज अलम को जिला सचिव तथा महेशपुर प्रभारी मनोनीत किया है। इस नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखा गया।
नियुक्ति की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस निर्णय का स्वागत किया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि आलोक जॉय पॉल के नेतृत्व में आजसू पार्टी जिले में और अधिक सशक्त होकर उभरेगी।
अपने विचार व्यक्त करते हुए आलोक जॉय पॉल ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य है की समाज में दबे-कुचले व्यक्ति तथा उनके अधिकारों का हनन किसी भी व्यक्ति या संस्थान के द्वारा न हो सके उसके लिए तत्पर होकर कार्य करेंगे। पाकुड़ जिले में पार्टी को मज़बूत करना, अधिक से अधिक युवाओं और आम जनता को पार्टी से जोड़ना तथा संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देना है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे।
मौके पर आजसू पार्टी के पूर्व नेता अख़्तर आलम की घर वापसी भी करायी गई।
इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आलोक जॉय पॉल एवं मोफ़िज अंसारी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में आजसू पार्टी पाकुड़ जिले में नई ऊंचाइयों को छुएगी।
मौके पर दिग्विजय कुमार, पूर्व नगर अध्यक्ष संजीव कुमार पासवान, पूर्व आई० टी० सेल प्रभारी सात्विक भगत, सनी तिवारी, कार्तिक हाज़रा, सोनू अंसारी, वहाब शेख, बापी हाज़रा, बिनोद कुमार, मोनू कुमार, तूफ़ान शेख, सुनील, सूरज राय, गौतम, रवि सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

फर्जी एडवाइस से 12 करोड़ से अधिक की निकासी मामले पर पाकुड़ पहुंची CID, शुरू की जांच

पाकुड़ जिला कल्याण कार्यालय के बैंक खाते से फर्जी एडवाइस के जरिए 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार 600 रुपये की अवैध निकासी के मामले की जांच के लिए सीआईडी की टीम पाकुड़ पहुंची। सीआईडी के डीएसपी रविंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का सहित नाजिर व अन्य कर्मियों से घंटों पूछताछ की। इस दौरान टीम ने मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों का भी गहन अवलोकन किया।बताया गया कि इस अवैध निकासी के संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का की लिखित शिकायत पर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।प्राथमिकी में कार्यालय अधीक्षक, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित करीब डेढ़ दर्जन लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मामले का खुलासा 8 दिसंबर 2025 को हुआ था, जब भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, पाकुड़ के मुख्य प्रबंधक ने आईटीडीए निदेशक सह जिला कल्याण पदाधिकारी को पत्र भेजकर फर्जी निकासी की जानकारी दी थी। इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को नगर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी.शुरुआत में मामले की जांच नगर थाना पुलिस कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता और बड़ी राशि को देखते हुए जांच सीआईडी को सौंप दी गई।इस संबंध में एसपी निधि द्विवेदी ने बताया कि सीआईडी की टीम मामले की जांच के लिए पाकुड़ पहुंच चुकी है और अब पूरी जांच सीआईडी द्वारा ही की जाएगी।

पहाड़िया बच्चों में छिपी है रचनात्मक प्रतिभा: एसडीओ

बोन पोखरिया के आंगन में चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन

छोटे-छोटे बच्चों ने दिखलाई जबरदस्त चित्रकला की झलक

आदम पहाड़िया जनजाति बच्चों में जबरदस्त प्रतिभा छिपी हुई है। इसकी झलक पाकुड़ जिले के सुदूर इलाके में स्थित बोन पोखरिया गांव के कार्यक्रम में देखने को मिली जब छोटे-छोटे पहाड़िया बच्चों ने कलम और कूची से आर्ट पेपर पर सुंदर-सुंदर चित्र उकेरे। प्रकृति और पर्यावरण विषय पर आधारित चित्र प्रतियोगिता में करीब 100 बच्चे शामिल हुए जिन्होंने जल-जंगल, पशु, पक्षी समेत अन्या कई चित्र बनाए। बच्चों ने अंग्रेजी में कई गीत भी गाए। कार्यक्रम का आयोजन पशुपतिनाथ सनातन- संस्कृति सेवा संस्थान, कौशल्या ज्योति, माधव- आशा सेवा संस्थान और केएन मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने मिलकर किया था। कार्यक्रम का विषय था बोन पोखरिया के आंगन में चित्रांकन व शिक्षण सामग्री तथा कंबल वितरण समारोह। आयोजन का उद्देश्य था आदिम पहाड़िया जनजाति के बच्चों का सर्वांगीण विकास और प्रतिभा को उभारना।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पाकुड़ के अनुमंडल अधिकारी साइमन मरांडी ने चित्र बनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की तारीफ की और कहा कि पहाड़िया बच्चों में रचनात्मक प्रतिभा छिपी हुई है। जरूरत है उन्हें उभारने की। इसके लिए बच्चों को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। जिसके लिए सरकार के साथ-साथ समाज के लोगों को भी मिलजुल कर प्रयास करना होगा। सामाजिक संस्थाओं को भी मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि परहित सरसी धर्म नहीं भाई। एसडीओ ने कहा कि झारखंड की सरकार और पाकुड़ जिला प्रशासन कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए तत्परता से काम कर रहा है।
फादर सोलेमान, प्रणव जी, दीपक जी, सिस्टर एंटोनी, सिस्टर सिल्वा रानी ने भी बच्चों को संबोधित किया। बच्चों को संस्थाओं की ओर से कंबल, जैकेट, कपड़े, कॉपी कलम आदि सामान दिए गए। इस मौके पर सोलेमान ने बच्चों की पढ़ाई से संबंधित कुछ समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।

हत्या मामले में दोषी करार के बाद अदालत परिसर से फरार हुए दो अपराधी

पाकुड़: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत में हत्या के एक मामले में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद चकमा देकर दो सजा-याप्ता दोषी न्यायालय परिसर से फरार हो गए। फरार आरोपियों की पहचान शिवधन मोहाली एवं नरेन मोहली के रूप में हुई है। दोनों की धरपकड़ को लेकर पुलिस ने संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। न्यायालय परिसर से दो सजा-याप्ता दोषी के फरार होने की पुष्टि एसपी निधि द्विवेदी ने की है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या चूक हुई है या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि फरार सजा-याप्ता नरेन मोहली और शिवधन मोहली के खिलाफ जमीन विवाद को लेकर भोलानाथ मोहली की हत्या किए जाने का मामला दर्ज है। इस संबंध में मृतक की पत्नी श्रीफूल मोहली ने 12 जनवरी 2019 को अमड़ापाड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अमड़ापाड़ा थाना कांड संख्या 04/2019 में नरेन मोहली, शिवधन मोहली सहित कुल पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने जैसे ही सभी आरोपियों को दोषी करार देने का फैसला सुनाया, सजा-याप्ता को न्यायाधीश के कटघरे से बाहर लाया गया। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात जवान द्वारा बाहर लाते समय नरेन और शिवधन न्यायालय परिसर से फरार हो गए।