Saturday, June 15, 2024
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कोयला ले जा रहे हो, तो हमें भी बिजली के उजाले दो भई! पड़ोसी और दोस्ती का दस्तूर तो यही कहता है

जब कभी कोई उद्योग कहीं लगाया जाता है जहाँ अधिक मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है तो उस उद्योग कम्पनी द्वारा अपने उपयोग, तथा कम्पनी के कारण विस्थापित लोगों के उपयोग के लिए स्थानीय स्तर पर विजली उत्पादन का स्रोत बनाया जाता है। अपने उपयोग के बाद शेष बिजली स्थानीय ग्रिड को दे दिया जाता है। जिससे उस क्षेत्र के लोगों को बिजली की कमी कम से कम उस उद्योग के कारण न हो।

जब कोई खनन किसी और प्रदेश या देश के लिए बिजली उत्पादन हेतु किया जाता हो तो खनन क्षेत्र में ऐसा और आवश्यक और उचित हो जाता है, क्योंकि खनन करने या करवानेवाली कम्पनी को बिजली उत्पादन का अनुभव होता है , तथा उन्हें एवं उनके विस्थापितों के लिए बिजली आवश्यक होता है।

पाकुड़ में पश्चिम बंगाल के सरकारी बिजली कम्पनी को कोयला ब्लॉक खनन के लिए मिला है। बीजीआर कम्पनी को बंगाल विद्युत विभाग ने खनन, परिवहन एवं लोडिंग की जिम्मेदारी दी है।

पश्चिम बंगाल विद्युत विभाग ने खनन पर नज़र रखने के लिए अपना कार्यालय भी खोल रखा है, लेकिन ये सिर्फ़ दलालों के भरोसे है। जिस खनन क्षेत्र को बंगाल बिजली बोर्ड ने बीजीआर को दे रखा है, उसका देखभाल के उद्देश्य के लिए यह भी ध्यान रखना है कि खनन क्षेत्र में चोरी सहित किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हो रही, या फिर विस्थापितों को सभी देय सुविधायें समुचित मिल रही या नही। क्योंकि सरकार ने कोल ब्लॉक बंगाल बिजली विभाग को दिया है, इसलिए वे कैसे और किससे खनन करा रहे ये उनका मामला है।

अगर केप्टिव पावर प्लांट लगाकर वे अपना एवं विस्थापितों के उपयोग की बिजली नहीं बना सकते और वो हमारे पाकुड़ के ही ग्रिड से लेंगे, तो वे हमारे पड़ोसी राज्य के हैं, अपने यहाँ से हमारे स्थानीय ग्रिड में उतनी बिजली मंगा लें कि पाकुड़ के लोगों को बिजली की कमी न हो।

ये कैसा न्याय है, कि हमारे आँगन से कोयला खोदकर आप ले जाएं, बिजली भी उत्पादन करें, और हमें हमारी उजाले से अलग रखें। हमारे हिस्से की बिजली हमारे ग्रिड से तो लें, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़े रखें।

आश्चर्य इस बात का है, कि हमारे रहनुमाई करने वाले नेतृत्व भी रहबरी पर उतर कर इधर उधर की बातों में उलझाए रखते हैं।

आप इधर उधर की बात न करें, ले जाएँ कोयला, लेकिन उजालों से कहें पाकुड़ के आँगन में भी बिजली की कमी न हो। हमारे हक़ पर यूँ डाका न डाले। प्रकाश और विकास की हमें भी जरुरत है, अपनी और उनकी विकास काफ़ी नहीं है हजूर।

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