Tuesday, June 25, 2024
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क्या झामुमो राजमहल में विवाद घर में ही निपटा कर नहीं लड़ सकते चुनाव ?

झारखंड में 14 लोकसभा सीटें हैं। इनमें संथालपरगना में तीन सीटों में एक मात्र सीट पर इंडी गठबंधन के झामुमो के युवा सांसद बिजय हांसदा लगातार दो बार से सांसद हैं। इसबार भी विजय हांसदा को उम्मीदवार बनाया गया है।
विजय हांसदा कोंग्रेस के स्वर्गीय दिग्गज थॉमस हांसदा के पुत्र हैं।
विजय हांसदा का पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनैतिक रहा है। थॉमस हांसदा की बीमारी के कारण असामयिक मृत्यु ने जहाँ क्षेत्र में एक राजनैतिक शून्यता पैदा कर दी , वहीं विजय हांसदा कम उम्र में पिता का साया सर से उठ जाने के कारण राजनैतिक दाव सीखने से बाँकी रह गये।
स्वाभाविक है विजय हांसदा के अंदर कुछ कमियाँ रह गई हो। लेकिन 2014 के मोदी लहर में कोंग्रेस से झामुमो में आ कर , झारखंड में एकमात्र राजमहल सीट को झामुमो की झोली में डालना कोई नकारने लायक छोटी उपलब्धि नहीं है, और फिर 2019 में उसे बरकरार रखना भी सराहनीय है।
और फिर संथालपरगना में झामुमो के दिग्गजों के रहते अगर विजय हांसदा में कोई राजनैतिक समझ की कमी रह गई हो , तो इसमें क्या सिर्फ विजय हांसदा दोषी हैं, क्या झामुमो के दिग्गजों का कोई दोष नहीं बनता ?
विजय हांसदा के उम्मीदवार घोषित होने से पहले से ही विरोध के स्वर फूटने लगे थे , तो क्या पार्टी प्लेटफार्म पर घर में ही बैठ कर इसे सुलझाया नहीं जा सकता था ?
अब जब विरोध सार्वजनिक रूप से मैदान में हो ही गया है , तो दोनों ओर से अनर्गल बयानबाज़ी ने मतदाताओं के बीच एक ऊहापोह की स्थिति बना रखी है।
दुमका में जैसे सीता सोरेन और नलिन सोरेन के बीच एक स्वस्थ और आदर सूचक बयानों से विरोध हो रहा है , उससे राजनैतिक और सामाजिक मर्यादा बनी हुई है। जबकि वहाँ तो दोनों अलग अलग पार्टी से हैं। ऐसे भी संथाल और आदिवासी समाज में छोटे बड़े का और बड़े छोटे का जिस तरह सम्मान करते हैं वो देश के हर समाज उसकी सराहना करते हैं।
यहाँ भी अगर वोटकटवा आदि जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं होता तो एक स्वस्थ मतभेद का माहौल भर रहता।
इधर लोबिन साहब कहते हैं, कि मैं निर्दलीय जीत कर झामुमो को सुधारने का काम करूँगा , तो फिर विजय तो आपके बच्चे जैसा है , उसे अपना आशीर्वाद दे कर सुधारिये , अगर वे गलत हैं तो। अपने घर के अंदर बच्चे को डांट डपट कर सुधारा जा सकता है, इसके लिए घर की दीवार तोड़ना तर्कसंगत नहीं।
प्रजातंत्र की खूबसूरती को दोनों बचाये रखें तो ……
मैं किसी पार्टी की बात नहीं कह रहा , सिर्फ़ विरोध के भी स्वस्थ बनाने की बात कह रहा। आदिवासी समाज की मान मर्यादा बहुत खूबसूरत है , इसे बनाये रखने की बात कह रहा।

विजय भैया लोबिन चाचा से मिल कर एक बार आप आशीर्वाद जरूर लीजिए, वे वैद्य भी हैं , कड़वी दवाई उन्होंने बहुत दे दिया , शायद अब मीठा आशीर्वाद भी दे ही देंगे।

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