Saturday, June 15, 2024
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सत्य और असत्य का रहस्य

सभार डॉ योगेश भारद्वाज

*सत्य और असत्य का फल*

सत्य ओर असत्य नाम के दो भाई थे। सत्य स्वच्छ और सुन्दर, असत्य मलिन और देखने से ही अप्रिय लग रहा था। जहाँ जाता असत्य ठुकराया जाता और दुत्कारा ही जाता, इसलिए उसने बदला लेने का निश्चय कर लिया।

कलियुग आया तो दोनों तीर्थ-यात्रा पर निकले तो शुरू में वही स्थिति रही। सत्य का तो सम्मान होता क्योंकि वह सुन्दर लगता था और असत्य का अनादर क्योंकि न उसके वस्त्र साफ थे, न आकृति।

स्नान के लिये दोनों एक सरोवर में उतरे। सत्य मन-लगाकर स्नान करने में लगा रहा।

इस बीच असत्य चुपचाप उसके कपड़े पहनकर चला गया। बाहर निकलने पर सत्य को विवश होकर असत्य के कपड़े पहनने पड़े।

तब से दानों अलग अलग चल रहे हैं और हर व्यक्ति के पास अलग अलग जाते हैं और अपना अपना लाभ बताते हैं। अधिकतर लोग असत्य की ओर आकृष्ट हो जाते हैं। फलस्वरूप असत्य का परिवार बहुत बड़ा हो गया है और पाप धन खूब आ रहा है, जिसके कारण लोग भोग विलास में डूबे हुए हैं और परिवार आपस में ही लड़ मर रहे हैं। सभी अंदर से अशांत हैं। न नींद आती है न व्यंजन खा पाते हैं।

सत्य का परिवार बहुत छोटा है। सत्य की कमाई है, परिवार में सुमति है और परिवार के साथ आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।

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