Wednesday, October 14, 2026
Homeसमाचारप्रेस विज्ञप्ति -- चुनाव आयोग का नया कारनामा—अब 6 से ज्यादा बच्चे...

प्रेस विज्ञप्ति — चुनाव आयोग का नया कारनामा—अब 6 से ज्यादा बच्चे होना भी गुनाह?

09 पूर्व जिला परिषद उम्मीदवार और सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता हक साहब का कहना है कि
चुनाव आयोग ने SIR के नाम पर झारखंड में जो नोटिस भेजना शुरू किया है, उसने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नोटिस में लिखा है—
«”आपको एक ऐसे व्यक्ति से संतान के रूप में लिंक किया गया है, जिसे छह अन्य लोग भी अपना पिता बता रहे हैं…”»
इसका सीधा मतलब क्या यह है कि अगर किसी पिता के 6 से ज्यादा बच्चे (बेटे-बेटियां) हैं, तो सिस्टम उन्हें उनकी संतान के रूप में मानने से इनकार कर देगा?
सवाल यह है कि चुनाव आयोग ने यह नियम पहले क्यों नहीं बताया?
जब फॉर्म भरवाए जा रहे थे, तब कहीं यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि यदि किसी परिवार में 6 से ज्यादा भाई-बहन हैं, तो उनके संबंध को साबित करने के लिए अलग से दस्तावेज या प्रमाण देना होगा।
अब, जब लाखों परिवार अपने फॉर्म जमा कर चुके हैं, तो उन्हें BLO कार्यालय जाने और अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जा रहा है।
गांव-देहात में आज भी 6, 7 या 8 बच्चों वाले परिवार मिलते हैं। ऐसे में इस तरह की प्रक्रिया से लोगों के बीच भ्रम और परेशानी पैदा होना स्वाभाविक है।
बेटा और बेटी दोनों संतान हैं, तो फिर 6 का यह आंकड़ा आखिर कहां से आया?
और अगर वास्तव में यही नियम या सिस्टम की प्रक्रिया है, तो सवाल यह भी उठता है कि इसकी शुरुआत सबसे ऊपर से क्यों न हो?
देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी स्वयं 6 भाई-बहनों वाले परिवार से आते हैं।
दामोदरदास मोदी जी की कुल 6 संतानें (5 बेटे + 1 बेटी) थींl
1. सोमाभाई मोदी
2. अमृतभाई मोदी
3. नरेंद्र मोदी
4. प्रह्लाद मोदी
5. पंकज मोदी
6. वसंतीबेन

अगर 6 से ज्यादा संतान होने की स्थिति में पिता से मैपिंग पर सवाल उठता है, तो क्या इसी लॉजिक से प्रधानमंत्री जी का परिवार भी संदेह के दायरे में आएगा?
नियम गरीब के लिए अलग और बड़े लोगों के लिए अलग नहीं हो सकता।
चुनाव आयोग से सीधे सवाल:
1. क्या भारत में ज्यादा बच्चे होना अब वोटर लिस्ट से नाम कटने की वजह बनेगा?
2. क्या 6 बच्चों वाले परिवार को ही फर्जी मान लिया जाएगा?
3. अतिरिक्त प्रमाण के तौर पर कौन-सा दस्तावेज स्वीकार किया जाएगा और इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई?
लोगों को परेशान करने के बजाय चुनाव आयोग को इस पूरी प्रक्रिया पर स्पष्ट और पारदर्शी गाइडलाइन जारी करनी चाहिए।
अगर आपके पास भी ऐसा नोटिस आया है, तो कमेंट में जरूर बताइए।

आप लोगों का शुभचिंतक
09 पूर्व जिला परिषद उम्मीदवार और सामाजिक कार्यकर्ता
अधिवक्ता हक साहेब
सिविल कोर्ट पाकुड़, झारखंड

Comment box में अपनी राय अवश्य दे....

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments