*अधिकारी की कही बात को समाचार के रूप में प्रकाशित करना अपराध नहीं: झारखंड हाई कोर्ट*
🔴झारखण्ड हाई कोर्ट के इस निर्णय को राजद (RJD) के अल्पसंख्यक जिला सचिव
अधिवक्ता हक साहब ने बताया पत्रकारों का ऐतिहासिक जीत।
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पत्रकारों की स्वतंत्रता और आधिकारिक बयानों की रिपोर्टिंग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि कोई पत्रकार किसी पुलिस अधिकारी के आधिकारिक बयान के आधार पर समाचार प्रकाशित करता है, तो केवल उस रिपोर्टिंग के आधार पर उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।यह मामला देवघर जिले के वरिष्ठ पत्रकार विमलेन्दु नारायण की अपील से जुड़ा था। जस्टिस रंगोंन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पत्रकार को राहत दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित समाचार अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) के बयान पर आधारित था। रिपोर्टर ने अपनी ओर से कोई भ्रामक या मनगढ़ंत तथ्य नहीं जोड़ा, बल्कि अधिकारी की कही बात को ही समाचार के रूप में प्रकाशित किया।खंडपीठ ने कहा कि किसी जिम्मेदार अधिकारी के आधिकारिक बयान को रिपोर्ट करना पत्रकार के काम का हिस्सा है। ऐसे बयान की निष्पक्ष रिपोर्टिंग को अपने आप में आपराधिक दायित्व का आधार नहीं बनाया जा सकता।कोर्ट के इस फैसले से देवघर समेत झारखंड में पत्रकारों के लिए आधिकारिक बयानों की रिपोर्टिंग को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। अदालत ने विमलेन्दु नारायण की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी ह। झारखण्ड हाई कोर्ट के इस निर्णय का ( RJD ) राजद के अल्पसंख्यक जिला सचिव अधिवक्ता हक साहब ने इस निर्णय को पत्रकारों एवं न्याय के लिए ऐतिहासिक जीत की बधाई दी ।
आप लोगों का शुभचिंतक
09 पूर्व जिला परिषद कैंडिडेट और सामाजिक कार्यकर्ता
*अधिवक्ता हक साहेब, पाकुड़ कोर्ट*🙏🏻