Friday, June 14, 2024
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Parshuram Jayanti : 2022 परशुराम जयंती की कथा, परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

3 मई को परशुराम जयंती (parshuram jayanti) है। अक्षय तृतीया वैसाख मास के शुक्ल पक्ष को परशुराम की जयंती मनाई जाती है। महावीर हनुमानजी की तरह परशुराम भी चिरंजीवी हैं। हनुमान जहाँ शिवांश रूद्रावतार हैं, वहीं परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं।

समय समय पर अवतारों ने अवतरित हो कर मानव जीवन को सकारात्मक रूप से जीने का संदेश दिया है। भगवान राम की तरह परशुराम ने भी शास्त्र और शस्त्र की आवश्यकता के अनुसार उपयोग का संदेश दिया है। लेकिन राम जहाँ शांति के प्रतीक के तौर पर माने जाते हैं, वहीं परशुराम उग्रता के प्रतीक हैं। पर परशुराम की उग्रता मानक मूल्यों का अतिरेक कतई नहीं है।

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परशुराम की जयंती अक्षय तृतीया को इसका भी प्रतीक है, कि ये अक्षय ज्ञान वाले ब्राह्मणों पूज्य हैं। इस दिन किये गए अच्छे कर्म, दान, जप ,पूजा और स्वर्ण की खरीदारी अक्षय होता है। अक्षय तृतीया पर पशुराम की पूजा कर अक्षय पुण्य और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त की जाने की परंपरा रही है। यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेतायुग की प्रारम्भ तिथि है।

श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था। इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है। जैसे – विवाह, गृह – प्रवेश या वस्त्र -आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है।
अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया।
उद्दिश्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यै:।
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।। “–
मदनरत्न

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अर्थ : भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठरसे कहते हैं, हे राजन इस तिथि पर किए गए दान व हवन का क्षय नहीं होता है; इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहा है। इस तिथि पर भगवान की कृपादृष्टि पाने एवं पितरों की गति के लिए की गई विधियां अक्षय-अविनाशी होती हैं। परशुराम जयंती के दिन प्रातः स्नान करना चाहिए। स्नान गंगा, समुद्र या किसी पवित्र नदी में उत्तम माना गया है। आज के नगरीय अपार्टमेंट के जीवन मे आप स्नान के जल में गंगा जल मिलाकर अपने आराध्य की आराधना कर सकते हैं।
एक बात का स्मरण रहे कि दान सुपात्र को ही करें।

परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

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