स्थानीय विद्यालय डी ए वी पब्लिक स्कूल, पाकुड़ के प्रांगण में महात्मा हंसराज की जयंती को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ समर्पण दिवस के रुप में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपरानुसार हवन एवं भजन से किया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया जिसमें विद्यालय के प्राचार्य डॉ विश्वदीप चक्रवर्ती द्वारा हंसराज जी के तस्वीर पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया गया। इस दौरान विद्यालय परिसर में विशेष प्रार्थना सभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रेरणादाई भाषणों का आयोजन किया गया। विद्यालय के बच्चों द्वारा महात्मा हंसराज के जीवन पर आधारित चित्र नाटिका का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने महात्मा हंसराज के आदर्शों, सेवा, समर्पण और शिक्षा के प्रति निष्ठा को याद करते हुए उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। प्राचार्य डॉ चक्रवर्ती अपने संबोधन में बताया कि महात्मा हंसराज शिक्षा के क्षेत्र में समाज को नई दिशा दी और डी ए वी संस्थानों की स्थापना कर शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने आगे बताया कि 19 अप्रैल 1864 में जन्मे हंसराज जी ने डी ए वी स्कूल की बुनियाद 1886 में अविभाजित भारत के लाहौर में महज दो कमरों में रखी थी। आज यह विश्व की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्थान है। उन्होंने बताया कि डी ए वी में बच्चों को महात्मा हंसराज द्वारा स्थापित आदर्शों के आधार पर शिक्षा दी जाती है। उन्होंने बच्चों को सन्देश दिया कि वे महात्मा हंसराज के जीवन से सीख लें एवं शिक्षा ग्रहण कर जीवन में आगे बढ़ें।