Thursday, March 26, 2026
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MHADEV एप की तर्ज पर पाकुड़ में भी चलता है सट्टा बाजार। ED और CBI को पाकुड़ के माफ़िया दे रहे मौन आमंत्रण।

अचानक अमीर बनने और सट्टा लगाने वालों की बर्बादी हैं इसके सपूत । नेताओं के साथ विशेष विषय पर चर्चा की सेल्फी डालनेवाले भी हैं भागीदार।

Mhadew एप से सट्टा और जुआ खेलने खेलाने का मामला इनदिनों चर्चा में है। पूरा देश इस एप के कारनामों से दाँतों तले अंगुलियाँ दबा रहा है।

इसी पैटर्न पर पाकुड़ में भी एप के जरिए जुआ-सट्टा का एक बाज़ार बहुत पहले आकार ले चुका है। हँलांकि फिलवक्त ये बाज़ार जानकारों के अनुसार एक वेब पेज के जरिये चल रहा है। एक पूरा संगठित ग्रुप इस धंधे में शामिल है।
देसी बुकी के नाम पर लगाई-खाई के कोड वर्ड पर पूरा खेल मोबाइल पर और डिजिटली चलता है।

जो भी इस खेल के खिलाड़ी हैं, उन्हें सब कुछ उपलब्ध कराया जाता है।फिर डिजिटल प्लेटफार्म पर अपने मोबाइल से पहुँच अपनी जमा पूँजी के अनुसार कोएन्स लगाया जाता है। फिर लोग आउट हो जाते हैं । रविवार और सोमवार को इसका हिसाब साप्ताहिक होता है। यहाँ के मास्टर सट्टेबाज किंग्स के ग्रुप का बंगाल के हुंडी (हवाला) वालों के द्वारा मेट्रो सिटीज के सट्टेबाजों से सम्पर्क और लेनदेन है। युवा पीढ़ी इस चंगुल में बर्बाद और किंग्स मालामाल हो रहे हैं।

पाकुड़ के सट्टा किंग्स के मालामाल होने की बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि बात-बात में महज़ कुछ लाख की जमीन दोगुने दाम पर ख़रीद लिया जाता है। एक मामूली से दुकान पर पूरे कई भाइयों के परिवार का गुजारा चलने वाले किसी एक भाई के पास अगर इतने बड़े पैमाने पर नगद पैसे दिखे तो, ये मामला एक चिंतन के लिए काफ़ी है।जबकि उसका नाम ऑन लाइन सट्टे और जुए के ग्रुप से जुड़ा हो। इन किंग्स में एक आदमी तो ऐसा है कि जितनी उसकी उम्र नही उससे दो गुना ज्यादा बार वो थायलैंड जा चुका है।

कहते हैं उसने वहाँ अपना दिल भी किसी की झोली में डाल रखा है। हँलांकि पत्नी के शक ने थायलैंड टूर पर थोड़ा खेप को कम कर रखा है। लेकिन कोलकाता के नाम पर थायलैंड जाना आना लगा रहता है। करे भी तो क्या ? दिल है कि मानता नहीँ , और जब पैसे की भरमार हो तो पैरों का लड़खड़ाना और दिल का बहकना लाज़मी है। बिल्डिंग पर बिल्डिंग अनायास देखते देखते ठोक देना इस ग्रुप के सदस्यों के लिए तो मानों आम बात है।

इनलोगों को ऐसे लोगों का संरक्षण भी प्राप्त है। जो राजनैतिक पार्टियों के नेताओं का संग और पार्टियों गेस्ट कार्यकता के रूप में सेल्फी और फ़ोटो खींचकर-खिंचवाकर सोसल मीडिया पर आत्मश्लाघ्या का प्रदर्शन करते हैं।

एटीएम लॉटरी (ऐसा स्थानीय जाली लॉटरी) जिसपर कोई टेक्स नहीं देना पड़ता। इस पर भी जोरों का संरक्षण राजनैतिक छिछोरे विनिमय पर दे रहे हैं।

अब तो दिवाली पर कितने ही दीवाली मनाएंगे, और इसमें कितनों का दिवाला निकलेगा , धूलियांन (पश्चिम बंगाल) एटीएम लॉटरी की प्रिटिंग और पाकुड़ में होने वाले प्रिंटिंग से ध्यान भटकना आदि की कहानी बाँकी है। चलिए अगली बार।
मेरे लिखने और आपके पढ़ने में भी तो समय लगता है न साहब इसलिए।

स्थानीय नागरिकों की सलाह नेशनल हाईवे को और बना सकता था उपयोगी: ग्रामीण

क्या थी आशंकाये:-

  • अन्य विकल्पों पर चर्चा अपेक्षाकृत कम लागत पर ज्यादा लोगों को पहुँचाता फायदा
  • विकल्प हरियाली और फसलों के लिए भी होता अनुकूल

पाकुड़ बायपास रोड की अगर बात करें, तो यहाँ के निवासियों के मस्तिष्क में सहरकोल से प्यादापुर तक बनने वाली प्रस्तावित सड़क की बात आएगी। पाकुड़ विधायक और हेमंत सोरेन सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने अभी कुछ दिनों पहले ही इस बायपास सड़क का निरीक्षण कर शिलान्यास भी किया था। ये सड़क शायद ऐसे में राज्य सरकार के मद से बनना है।

लेकिन पाकुड़ बायपास के नाम से एक नेशनल हाईवे पर भी सर्वे के बाद कागज़ी करवाई देवघर कार्यालय में चल रही है। लेकिन इस हायवे पर जो सर्वे हुआ है वह पहली नजर में देवपुर के ग्रामीणों को त्रुटिपूर्ण लग रही है।

विश्वस्त सूत्र बताते हैं, कि हिरणपुर के रानीपुर मोड़ से ये नेशनल हाइवे हिरणपुर-पाकुड़ सड़क पर चमड़ा गोदाम के पास तारापुर गाँव के पास मिलेगा, फिर यहाँ से उसी सड़क पर आगे बढ़ते हुए देवपुर मोड़ पर हनुमान मंदिर के पास से धानी जमीन को रौंदते हुए तोड़ाय नदी और देवपुर नदी के बीच से होते हुए कालीदासपुर जाएगा।

प्रभावित धानी जमीन
प्रभावित धानी जमीन

जबकि ये नेशनल हाइवे अगर हिरणपुर तारापुर से ही एक सड़क पहले से कालीदासपुर के लिए है, जिसमें किसी धानी जमीन की हरियाली बिना प्रभावित हुए ये सड़क निकल सकती है। ये बताना भी लाज़मी होगा कि बरसात के दिनों में तोड़ाई नदी और देवपुर नदी में कुछ घण्टों के लिए ऐसा पानी आता है कि पूरा इलाका जलामय हो बाढ़ का रूप ले लेता है, और अगर ये हायवे देवपुर हो कर जाता है तो एक बाँध के रूप में बरसाती नदियों के पानी को कई दिनों तक रोके रखेगा, जिससे जमीन और फसलों की बर्बादी तय है।

नदी के जल से प्रभावित भूमि
नदी के जल से प्रभावित भूमि
ऐसा भी तीन बेहतर विकल्प मौजूद है, जिससे अपेक्षाकृत कम लागत, कम जमीन के अधिग्रहण एवं कम मुआवजे के भुगतान पर इस सड़क का निर्माण हो जाय, लेकिन सर्वे में इन विकल्पों को अनदेखा किया गया। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे के दौरान उनकी राय नहीं ली गई।

विकल्प नम्बर एक कि तारापुर के चमड़ा गोदाम के पास से ही मौजूदा हिरणपुर पाकुड़ पथ की दूसरी ओर से एक ग्रामीण सड़क कई गाँव होते हुए कालीदासपुर जाती है, जिसमें धानी जमीन की हरियाली भी बच जाएगी, क्योंकि ये सड़क पथरीली और बंजर जमीन से होते हुए गुजरी है।

दूसरा विकल्प ये है कि देवपुर से आगे बढ़ कर सोनाजोड़ी से समसेरा होते हुए ये सड़क निकली जाय।

तीसरा विकल्प या फिर आगे बढ़कर सहरकोल से निकलने वाली विचाराधीन बायपास से ही इसे जोड़ दिया जाय।

google map
google map

लेकिन कम लागत पर ज्यादा फ़ायदे, अपेक्षाकृत ज्यादा गाँव और लोगों तक पहुँचने के साथ धानी जमीनों को बचाने के विकल्पों को अनदेखा करना समझ से परे की बात लग रही है। अगर सर्वे के अनुसार एन एच 133A के नाम से जाने जाने वाले इस सड़क का निर्माण देवपुर होकर होता है, तो पाकुड़ में एकबार फिर वही गलती दोहराई जाएगी जो फरक्का बैरेज, फरक्का एन टी पी सी और फरक्का ललमटिया कोयला ढोने वाली रेलवे लाइन बनाकर हुई थी।

इन तीनों निर्माणों की अदूरदर्शिता ने पाकुड़ को बाढ़ की वार्षिक विभीषिका से रु ब रु कराया है। देवपुर के किसान और इलाके के लोगों का मानना है कि ठीक यही स्थिति इस इलाके के लिए इस सड़क से होगी। समाजसेवी किसान सर्वजीत सिंह और अन्य इलाके के किसानों का कहना है कि हम अपनी जमीन सरकार के किसी भी विकास कार्य के लिए देने को तैयार हैं, लेकिन हमारी हितों का भी खयाल रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि हम लोग जो अनाज उपजाते हैं, वो हमारे अलावे देशवासियों के भी काम आता है। केंद्र सरकार से और खाशकर नितिन गडकरी से ग्रामीणों की विनती है कि एक बार इस पर पुनर्विचार किया जाय और सर्वे का पुनर्निरीक्षण कराने की कृपा की जाय।

उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक

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बैठक में सड़क दुर्घटना, सर्पदंश व वज्रपात से हुए मृत 17 व्यक्तियों के आश्रितों के बीच डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि भुगतान करने का लिया निर्णय लिया

पाकुड़। समाहरणालय सभागार में शुक्रवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक प्राधिकार के अध्यक्ष सह उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरणवाल की अध्यक्षता में हुई।

बैठक में उपायुक्त के अलावा अपर समाहर्त्ता मंजू रानी स्वांसी, अनुमंडल पदाधिकारी हरिवंश पंडित, सिविल सर्जन डॉ. मंटू कुमार टेकरिवाल, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राहूल कुमार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. चंदन उपस्थित हुए।

प्राधिकार की बैठक में सड़क दुर्घटना, सर्पदंश व वज्रपात से हुए मृत 17 व्यक्तियों के आश्रितों के बीच डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि भुगतान करने का निर्णय लिया गया। बैठक में बताया गया कि जिले में सड़क दुर्घटना में मृत हुए 12 लोगों के आश्रितों के बीच एक-एक लाख की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।

वहीं सर्पदंश व वज्रपता से मृत हुए दो लोगों के आश्रित के बीच चार-चार लाख रूपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।

27 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर 1 घंटे का विशेष अभियान #ProudOfMyBLO

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रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन एवं अन्य संबंधित विषयों को लेकर राज्य के सभी जिलों के उप निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की तथा सभी अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।

गुरुवार को धुर्वा स्थित विभागीय सभागार में आहूत इस बैठक में उन्होंने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2024 से जुड़े विषयों को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया।

घर-घर मतदाता सर्वेक्षण अभियान का दूसरा चरण 27 से
मतदाताओं के यहां घर-घर सर्वेक्षण को लेकर बीते जुलाई-अगस्त में 1 महीने का सघन अभियान चलाया गया था। उसी क्रम में अब दूसरे चरण का अभियान 27 अक्टूबर से 9 दिसंबर तक चलाया जाना है। इस अभियान के दौरान सभी बूथों के बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे लोगों को चिन्हित कर ढूंढ निकालने का काम करेंगे जो पात्र होने के बावजूद भी किसी कारण से अब तक मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो पाए हैं। इस अभियान के दौरान मृत या स्थाई रूप से अन्यत्र शिफ्ट हो चुके मतदाताओं का नियमानुसार नाम हटाने, ब्लैक एंड व्हाइट फोटो युक्त या कटे-फटे पुराने पहचान पत्रों को बदलने के लिए भी काम किया जायेगा।

फेसबुक, ट्विटर आदि पर 1 घंटे का हैश टैग अभियान 27 को सुबह 11:00 से 12:00 बजे के बीच
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि पूरी निर्वाचन प्रणाली में हमारे बीएलओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके कार्य को समुचित सम्मान देने व उनका उत्साहवर्धन करने के लिए आगामी 27 अक्टूबर को पूर्वान्ह 11:00 बजे से 12:00 बजे के बीच 1 घंटे तक सोशल मीडिया पर हैश टैग अभियान #ProudOfMyBLO चलाया जाना है।

बताया कि 27 अक्टूबर को सभी बूथों के बीएलओ अपने-अपने बूथ पर मौजूद रहेंगे ऐसे में राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों, मतदाताओं, विभिन्न वर्गों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, छात्र-छात्राओं से अपील की जा रही है कि वे अपने बूथ पर मौजूद अपने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ सेल्फी लेकर सुबह 11 से 12 बजे के बीच अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उपरोक्त हैशटैग के साथ पोस्ट करें। उन्होंने कहा कि उक्त अभियान न केवल मतदाता जागरूकता के लिए सहयोगी साबित होगा बल्कि पूरे निष्ठा से कार्य कर रहे सभी बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के मनोबल को बढ़ाने वाला भी होगा।

मौजूद थे
बैठक के दौरान सभी जिलों के उप निर्वाचन अधिकारियों के अलावा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के ओएसडी गीता चौबे, अवर सचिव देवदास दत्ता, उप-निर्वाचन पदाधिकारी (मुख्यालय) संजय कुमार, सिस्टम एनालिस्ट एस एन जमील सहित विभागीय पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।

सिद्धू कान्हू मुर्मू पार्क के समीप हॉकी संघ पाकुड़ ने किया एशियन ट्राफी का अनावरण

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पाकुड़। झारखंड महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी रांची 2023 के ट्राफी टूर का स्वागत एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

उक्त कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट उप विकास आयुक्त शाहिद अख्तर एवं जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष श्याम यादव मौजूद थे। अनावरण कार्यक्रम सिद्धू कान्हू मुर्मू पार्क के समीप भव्य तरीके से किया गया।

स्वागत भाषण हॉकी संघ के अध्यक्ष रामरंजन कुमार सिंह ने किया। उल्लेखनीय है कि झारखंड महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी रांची 2023 का आयोजन आगामी 27 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक रांची में निर्धारित है। उक्त एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 के ट्राफी का जोरदार तरीके से अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

डीडीसी शाहिद अख्तर ने कहा कि रांची में शानदार हॉकी खेल का आयोजन आगामी 27 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक आयोजित किया जा रहा है। जिसका अनावरण पाकुड़ की धरती में किया गया है। इसका अनावरण का मुख्य उद्देश्य हॉकी खेल के प्रति लोगों के अंदर जागरूक पैदा करना है।

उन्होंने कहा पाकुड़ की धरती पर भी काफी होना हर खिलाड़ी है उन्हें भी पाकुड़ के साथ-साथ राज्य और देश का नाम रोशन करना है उन्हें कड़ी से कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है।

वहीं जिला 20 सूत्री के उपाध्यक्ष श्याम यादव ने कहा कि हॉकी संघ के पदाधिकारीयों सहित सभी खेल संघ के पदाधिकारीयों एवं खिलाड़ियों का इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की सराहना की एवं सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा किए जा रहे हैं कार्यों की भी जमकर तारीफ।

इस कार्यक्रम के मौके पर खेल पदाधिकारी राहुल कुमार, नगर परिषद के प्रशासक राजकमल मिश्रा, हॉकी संघ के अध्यक्ष रामरंजन सिंह, हॉकी संघ के पाकुड़ सचिव प्रकाश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, उमर फारूख, संयुक्त सचिव जवाहर सिंह, ओलिम्पिक संघ के सचिव रणवीर सिंह उपस्थित रहे।

पाकुड़ जिले में जमीन के घपलों की है अजब गजब कहानी

पाकुड़। जिले के महेशपुर अंचल के जनसूचना पदाधिकारी – सह अंचल अधिकारी ने अपने ज्ञापंक 317/राo/20/11/21 के द्वारा एक सूचनाधिकार आवेदन का जवाब देते हुए कहा कि राजस्व उपनिरीक्षक एवं अंचल निरीक्षक द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर मौजा देवीनगर, दाग संख्या 409 , रकवा 03 बीघा 01 कट्टा 16 धूर जमीन सर्वे खतियान में अनाबादी खतान्तर्गत दर्ज है। फिर इसी ज्ञापंक में कहा गया कि उक्त जमीन हेमंत कुमार सिंह, उज्वल कुमार सिंह और विजय कुमार सिंह सभी के पिता अश्विनी कुमार सिंह, सकिम देवीनगर के नाम से प्रतिव्यक्ति 1 बीघा करके राजस्व पंजी 2 में जमाबंदी क़ायम है। ये भी कहा कि भूमि का हस्तांतरण अंचल कार्यालय के माध्यम से नहीं होता है।

इसी ज्ञापंक में कण्डिकावार सूचना उपलब्ध कराते हुए कहा गया कि उक्त स्थान पर हाट लगता है, शेड निर्मित है, शेड का निर्माण अंचल ने नहीं करवाया, हाट का बंदोबस्ती स्थगित है (मतलब पहले बंदोबस्ती होती थी)।

उक्त ज्ञापंक से स्पष्ट है कि उक्त जमीन अनाबादी है, वहाँ हाट लगती है, हाट के लिए शेड भी बना हुआ है, बंदोबस्ती होती थी जो फिलवक्त स्थगित है तथा रजिस्टर 2 में उपर्युक्त दिये नामधारियों के नाम दर्ज है।

सवाल बहुत सारे उठते हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ़ इतना कि जब शेड बन रहा था और बंदोबस्ती का डाक होता था, तो जमीन के तथाकथित मलिकों ने आपत्ति दर्ज क्यूँ नहीं कराई? एक सूचना अनुसार उस जमीन को कट्टा स्तर पर बेचा जा रहा है, तो खतियान में दर्ज अनाबादी जमीन के आधार पर अंचल आपत्ति दर्ज क्यूँ नहीं कर रहा?

बाँकी कहानी और है, जो आश्चर्य जनक है

चलिए उस ओर भी चलें —

रजिस्टर 2 में जिस हेमंत कुमार सिंह, उज्वल कुमार सिंह एवं बिजय कुमार सिंह के नाम हैं, उनका कहना है कि स्वर्गीय इंद्रजीत सिंह के नाम तत्कालीन राजा ने उक्त जमीन बंदोबस्त की थीं। (जमींदारी उन्मूलन कानून आने से पहले राजा यानी जमींदार ही जमीन बंदोबस्ती देते थे)। इंद्रजीत सिंह के पुत्र स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह की मृत्यु तकरीबन 70 वर्ष पूर्व हुई थी। उनका नाम सरकारी कागज़ातों में नहीं है। हटिया उनके समय से ही लग रहा है। स्वाभाविक रूप से उन्होंने अपने जीवनकाल में हटिया का कभी विरोध नही किया होगा, इसलिए हाट लगता रहा।

स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह को पाँच पुत्र है। अश्विनी कुमार सिंह, मनोरंजन सिंह, सत्यनारायण सिंह, सत्यवान सिंह एवं नोनिगोपाल सिंह। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सिर्फ़ अश्विनी कुमार सिंह के ही तीन पुत्रों के नाम से ही रजिस्टर 2 में दाख़िल ख़ारिज दिखाया गया है।

जबकि जब तक अश्विनी कुमार सिंह जीवित थे, उक्त जमीन सरकारी हाट ही रहा था। तो फिर अचानक ये बदलाव कैसे आया? ये एक यक्ष प्रश्न है।

जानकार बताते हैं कि 2018 से 2021 के बीच ये गड़बड़-झाला हुआ है, और इस गड़बड़-झाले के लिए बुद्धि और व्यवस्था अंचल कार्यालय के कर्मी द्वारा ही किया गया है। कहते हैं कि महेशपुर के एक गाँव में तत्कालीन राजा के हस्ताक्षर की हु-ब-हु नकल करनेवाले की सहायता से नक़ली पर्ची तैयार की गई है, जिसमें बंदोबस्ती दिखाई गई है।

बात कुछ भी हो लेकिन मामला जाँच का बनता है। क्योंकि जब इंच भर जमीन हत्याओं और षडयंत्रों का कारण बनता है, वहाँ स्वर्गीय ज्योतिष चन्द्र सिंह के अन्य चार पुत्र एवं उनके वंशज कैसे चुप रह सकते हैं?

जमींदारों के हु-ब-हु नक़ली हस्ताक्षरों से पूरे पाकुड़ में कई खेल खेले गए हैं। करोड़ों नहीं अरबों की जमीन पाकुड़ में साज़िश के शिकार हुए हैं। मान लिया जाय कि ये एक मनगढ़ंत आरोप हो, लेकिन सरकारी हाट लगने वाली जमीन का अचानक व्यक्तिगत हो जाना जाँच का विषय तो है ही। है कि नहीं………..

विस्फोटक फिर बरामद , लेकिन तस्कर फिर फरार…

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एक बार फिर से नियो जेल विस्फोटक माल पहाड़ी थाना पुलिस ने जप्त किया है। 730 पीस की संख्या में ये जप्ती कोई पहली बार नहीं है। इसबार भी गुप्त सूचना और मोटरसाइकिल पर विस्फोटक लाने वाला तस्कर मोटरसाइकिल छोड़ कर भाग गया का मामला पूर्व की तरह कॉमन रहा। बिना नम्बर का मोटरसाइकिल और 730 पीस नियो जेल विस्फोटक जी पुलिस के हाथ लगा।

आश्चर्य ये है कि कान्हूपुर के रास्ते बंगाल से इस तस्कर के आने की सूचना मिलते ही पुलिस ने छापेमारी टीम बनाई, और फिर एक तस्कर बोरे में लदा विस्फोटक छोड़ भागने में सफल रहा। एक अनट्रेंड भगोड़ा, ट्रेंड पुलिस की टीम को चकमा दे गया, ये कहानी ही एक चकमा है?

ये सवाल इसलिए कि हरबार ऐसा ही होता है। हाँ एक बात और कि विस्फोटक पकड़े जाने का कोई अनुसंधान अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच सकी अब तक।

ये विस्फोटक कहाँ से आ रहा था? रटारटाया जवाब बंगाल से। बंगाल में कहाँ से? कहाँ जा रहा था? सबका जवाब सन्नाटा।
अरे भैया कभी तो तकनीकी ढंग से अनुसंधान हो, लेकिन ऐसे मामलों में अनुसंधान, अनुसन्धित हो कर ढाक के तीन पात रह जाता है।

अगर ये विस्फोटक पत्थर खदानों के लिए है, तो अवैध खनन हो रहा है, अगर नहीं तो नक्सलियों जैसे गलत हाथों में इसका कितना गलत इस्तेमाल हो सकता है, इसका अंदाजा ही रूह कँपा देता है।

खैर जो भी हो इन विस्फोटकों के धंधे के चेहरे से पर्दा हटाना पुलिस के लिए एक चुनोती तो है ही।

अनुशासन जब अंकुश बन जाये, तो समाज, परिवार और जमीन पर आता है विध्वंस

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डूबते पाकुड़ को देख कर हर बार सोचता हूँ, आख़िर क्यों होता है ऐसा? खुद से सवाल करता हूँ, क्या ऐसा होता आया है?

जवाब मिलता है, ऐसा हमेशा से नही है।

दो किनारों के अनुसाशन में जब तक गंगा नदी अनवरत बहती थी, और संथालपरगना की पाकुड़ इलाके से बह कर गंगा में मिलने वाली पहाड़ी बरसाती नदियों को जब तक छेड़ा नही गया था, तब तक गाँव के गाँव डूबते नही थे। बरसात में नदियाँ जब उफनतीं थीं तो शायद घण्टे दो घण्टों के लिए नदी किनारे बसे गाँवों में परेशानी होती थी, लेकिन इतनी ही देर में बरसाती नदियों का उफान बंद हो जाता था, और निर्बाध बहती नदियों से पानी गंगा के रास्ते निकल जाता था।

लेकिन बिना पूरे क्षेत्र का अध्ययन किये दोनों किनारों के अनुशासन के बीच बहती गंगा पर जब फरक्का बैरेज बना कर अंकुश लगा दिया गया, संथालपरगना की नदियों को भी विभिन्न तरह से प्रभावित किया गया, तब से पाकुड़ थोड़ा सा अतिवृष्टि होते ही डूबने लगा।

फरक्का बैरेज ने गंगा के निर्बाध बहाव को रोककर गंगा में गाद जमा होने में भी बड़ी भूमिका निभाई। नतीजन गंगा किनारे के शहरों में बाढ़ ने विभीषिका दिखानी शुरू कर दिया। स्वच्छ गंगा की बात तो होती है, लेकिन उसमें जमे गाद की सफाई पर कोई प्रयास नही होती।

अगर हम बरसाती पानी को निर्बाध बहने के रास्ते के साथ खिलवाड़ नही करते, फरक्का बैरेज, फरक्का एनटीपीसी और फरक्का ललमटिया रेलवे लाइन को बरसाती पानी के निर्बाध बहने का जगह देकर बनाते तो पाकुड़ और बड़हरवा सहित आसपास के इलाके लंबे समय के लिए जलमग्न नही होते, और गंगा में गाद भी इस कदर नही जमता साथ ही गंगा किनारे के शहरों में लंबे समय तक पानी नही ठहरता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया संकल्प सप्ताह का शुभारंभ, प्रखंड कर्मियों को दिया मेहनत से काम करने का मंत्र

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पाकुड़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आकांक्षी ब्लॉकों के लिए सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम ‘संकल्प सप्ताह‘ (Sankalp Saptaah) का शुभारंभ किया। संकल्प सप्ताह का लक्ष्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ब्लॉक स्तर पर शासन में सुधार करना है।

भारत मंडपम में ‘संकल्प सप्ताह’ के शुभारंभ के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें देश भर से लगभग तीन हजार पंचायत और ब्लॉक-स्तरीय जन प्रतिनिधि और पदाधिकारियों ने भाग लिया। इसके अलावा, प्रखंड और पंचायत स्तर के पदाधिकारी और किसान समेत करीब दो लाख लोग कार्यक्रम से वर्चुअल मोड से जुड़े।

संकल्प सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर पाकुड़ जिले के पदाधिकारी एवं लिट्टीपाड़ा प्रखंड के 17 ग्राम पंचायतों के कर्मी वर्चुअल मोड से जुड़कर माननीय प्रधानमंत्री जी के भाषण को सुना

दिनांक 30 सितंबर 2023 ( शनिवार) को नीति आयोग के आकांक्षी प्रखण्ड कार्यक्रम (Aspirational Block Programme) के तहत “संकल्प सप्ताह” का आयोजन में भारत मण्डपम, आईटीपीओ, नई दिल्ली से उद्घाटन समारोह का लिंक के द्वारा प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के लाइव कार्यक्रम को पाकुड़ जिले एवं लिट्टीपाड़ा प्रखंड कार्यालय, लिट्टीपाड़ा के ग्राम पंचायत वर्चुअल मोड से जुड़कर इस कार्यक्रम को सुना। वहीं जिले से उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरणवाल, लिट़्टीपाड़ा प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं जन प्रतिनिधिगण सशरीर उपस्थित होकर ध्यानपूर्वक इस कार्यक्रम को सुना।

साथ ही दिनांक 03.102023 से 09.102023 तक तिथिवार ग्राम पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर सभी विभागीय कार्यक्रम के तहत आयोजित होने वाले संकल्प सप्ताह कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एक संकल्प (Health), सुपोषित परिवार पोषण मेला (Nutrition), स्वच्छता एक संकल्प (Cleanliness), कृषि महोत्सव (Agriculture), शिक्षा एक संकल्प (Education), समृद्धि दिवस (Livelechood) एवं संकल्प सप्ताह जब समावेश समारोह (Warp up) का सफल अयोजन कर लिट्टीपाड़ा प्रखंड को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अपनी-अपनी सह भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।

इसे भी पढ़े- संकल्प सप्ताह आयोजन को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने किया बैठक

मंडल रेल प्रबंधक हावड़ा संजीव कुमार ने पाकुड़ रेलवे का किया निरिक्षण

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पाकुड़। नव पदस्थापित मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने अपने प्रथम निरीक्षण के क्रम में स्पेशल ट्रेन से पाकुड़ आए और पाकुड़ कोल साइडिंग पत्थर लोडिंग स्लाइडिंग का निरीक्षण किया एवं तय सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिया।

इस क्रम में उनके साथ वरिष्ठ वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक राजीव रंजन, वरिष्ठ मंडलीय अभियंता राजीव कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सुजीत कुमार सिन्हा, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता एस चंद्रा, यातायात निरीक्षक ज्योतिर्मयी साहा, स्टेशन प्रबंधक लखीराम हेम्ब्रम सहित कनिय पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

इस क्रम में पाकुड़ यार्ड एवं सिख लाइन शेड का निरीक्षण करते हुए सभी कर्मचारियों से भी मिले एवं उनकी समस्याओं को सुना इसके बाद क्रु लॉबी का निरीक्षण किया। जिसमें सभी प्रकार की जांच करते हुए मुख्य लोको पर्यवेक्षक को सुरक्षा के साथ परिचालन के लिए सख्त निर्देश दिए।

इसके उपरांत मंडल रेल प्रबंधक हावड़ा ने विशिष्ट अतिथि कक्ष में पत्थर व्यवसाययों, कोल कंपनी के पदाधिकारी के साथ मुलाकात कर बैठक किया एवं उनकी समस्याओं को गंभीरता के साथ सुना और समाधान का भरोसा दिया।

इसके उपरांत ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हिसाबी राय एवं सचिव राणा शुक्ला ने शिष्टाचार मुलाकात की एवं यात्री सुविधाओं के संबंध में चर्चा किया। मंडल रेल प्रबंधक हावड़ा ने हावड़ा आने का आग्रह किया ताकि पूर्व में सौपें गए मांगों पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया जा सके।

मंडल रेल प्रबंधक हावड़ा ने पत्रकार वार्ता के क्रम में पत्रकारों के प्रश्न के उत्तर देते हुए कहा कि आपके द्वारा उठाए गए प्रश्नों में से जो कुछ भी मेरे अधिकार क्षेत्र में है उसे पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के अध्यक्ष अखिलेश कुमार चौबे एवं सचिव संजय कुमार ओझा एवं ईस्टर्न रेलवे मेंस कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने मिलकर रेल कर्मियों की समस्याओं को भी रखा जिस पर उन्होंने समाधान का भरोसा दिया।