पत्रकारिता और पत्रकार की मौलिकता और महत्व स्वतंत्रता आंदोलन के समय से स्थापित रही है । उत्तरोत्तर में पत्रकारों का स्थान समाज में ऐसी होती चली गई,कि किसी भी तरह के,किसी भी स्तर पर पीड़ितों के लिए अंतिम आशा के रूप में पत्रकारिता और पत्रकार नजर आने लगे।शासन प्रशासन और आम जनमानस के बीच की धुरी बन पत्रकारिता ने समाज में संतुलन का कार्य किया।निरंकुशता, अपराध,अनियमितता, सामाजिक कुरीतियों और हर तरह की अतिवादिता पर वाचडॉग की तरह पत्रकारिता ने अपनी उपयोगिता सावित की.ऐसे में पत्रकारिता में भी किसी न किसी स्तर कुछ व्यक्ति विशेषों के कारण कमियाँ दिखीं।लेकिन आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जमाने में जब सोशल मीडिया के पहियों पर सवार पत्रकारिता ने कस्बों,गाँव और गलियारों तक का सफ़र तय किया तो,इस पर कुछ अवांक्षित तत्वों ने भी सवारी कर ली। इसमें संदेह नहीं कि सोशल मीडिया ने सूचना क्रांति लाई और निरंकुशता पर अंकुश लगाया,लेकिन दूसरी ओर यह भयादोहन का जरिया भी बन गया।
पाकुड़ में भी ऐसे उदाहरण देखने को फिलवक्त दिख रहा है। जिले के अँचल कार्यालयों से पत्थर व्यवसायियों को एक नोटिस भेजा गया है कि वे निश्चित समय तक ये बताएं कि उनसे नोटिस में नामित व्यक्तियों ने भयादोहन का प्रयास किया है कि नहीं।चर्चा में है कि कुछ नामित व्यक्तियों द्वारा अखबार और पत्रकारिता के नाम पर पत्थर व्यवसायियों से भयादोहन का लिखित आरोप जिला प्रशासन को मिला है,और जिला प्रशासन अपने जिलेभर के विभिन्न अमलों द्वारा इस आरोप की जाँच करा रहा है।ये जाँच भी ज़रूरी है,चाहे आरोप सही हो या गलत।अगर कोई स्वयं को पत्रकारिता से पीड़ित होने का लिखित आरोप लगाए तो जाँच लाज़मी है।लेकिन आम पत्रकारों के मन में एक सवाल है कि अगर सही समाचार के प्रकाशन से आहत कोई नाहक आरोप लगा कर एक परम्परा बना ले तो पत्रकारिता और समाज की इस अंतिम आशा का क्या होगा ?
हाँलाकि इसे नकारा नहीं जा सकता कि सोशल मीडिया और इस डिजिटल युग में बहुत अनुपयोगी अयोग्य व्यक्तियों ने पत्रकारिता में घुसपैठ बना रखी है, जिससे पत्रकार और पत्रकारिता को बदनामी का दाग धब्बों का सामना करना पड़ रहा है।यह बहुत ही दुखद है।
अयोग्य व्यक्तियों के घुसपैठ और करतूतों से पत्रकारिता पर लग रहा दाग।
पाकुड़: एसडीपीआई के कार्यालय में ईडी का छापा, मचा हड़कंप । मिला क्या नहीं बताया ED ने।
ईडी की टीम गुरुवार को पाकुड़ पहुंचकर मौलाना चौक से आगे बल्लभपुर स्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यालय में छापेमारी की। दो इनोवा कार (जेएच 01 बीडब्ल्यू 5976 और जेएच 01 डीएम 4471) से आई ईडी की टीम एसडीपीआई पार्टी कार्यालय में सुबह करीब 10:45 बजे पहुंची थी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीम अहले सुबह ही पाकुड़ पहुंच चुकी थी। ईडी की टीम में कम-से-कम आधे दर्जन अधिकारी शामिल थे। वहीं टीम के साथ आधे दर्जन से ज्यादा सुरक्षा जवान मौजूद थे। यहां स्थित पेट्रोल पंप परिसर में ईडी का इनोवा पहुंची और टीम के अधिकारी कार उतरकर पंप के ठीक सामने स्थित एसडीपीआई पार्टी कार्यालय पहुंचे। पार्टी कार्यालय का शटर बंद था, तब तक ईडी कार्यालय के बाहर और आसपास के दुकानों में बैठे रहे। इस दौरान टीम के साथ पहुंचे जवानों ने अपना पोजीशन लेकर सुरक्षा में खड़े हो गए। इस दौरान रोड किनारे और एसडीपीआई कार्यालय तथा आसपास के दुकानों में खड़े जवानों पर आम लोगों की नजर पड़ी तो शुरू शुरू में लोग अचंभित रह गए। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यहां जवानों को क्यों तैनात किया गया है। बाद में धीरे-धीरे लोगों को एसडीपीआई के कार्यालय में ईडी रेड की जानकारी मिली। ईडी की छापामारी से हड़कंप मच गया। ईडी के पहुंचने के करीब आधे घंटे बाद एसडीपीआई कार्यालय का शटर खोला गया। इसके बाद ईडी के अधिकारी कार्यालय के अंदर गए और कार्यालय में रखें दस्तावेजों को खंगालने लगे। दोपहर 1:00 बजे तक जब खबर लिखी जा रही थी, तब तक ईडी की कार्रवाई जारी थी। इस दौरान सुरक्षा जवानों ने मीडिया कर्मियों को सहयोग की अपील करते हुए भीड़ इकट्ठा नहीं करने का अनुरोध किया। मीडिया कर्मियों को बताया गया कि शाम 5:00 बजे तक कार्रवाई चलने की संभावना है। इसलिए मीडिया अपना काम आराम से करें और ईडी के अधिकारियों को कार्रवाई करने में सहयोग करें। इधर खबर लिखे जाने तक ईडी के अधिकारी कार्यालय के अंदर रखे कागजातों को खंगाल रहे थे। हालांकि एसडीपीआई पार्टी के कोई भी स्थानीय नेता ईडी की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी के मामले में ईडी ने पाकुड़ में छापा मारा है। एसडीपीआई के कार्यकर्ताओं ने फैजी के गिरफ्तारी का बुधवार को पाकुड़ में विरोध भी किया था। गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था।उल्लेखनीय है कि ईडी ने मनी लांड्रिंग के आरोप में एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी को गत मंगलवार को ही गिरफ्तार किया था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ईडी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को कोच्ची (केरल) से दिल्ली पहुंचने पर पूछताछ के बाद इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। मीडिया में आई खबरों से यह भी जानकारी मिली है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पिछले साल जनवरी 2024 में राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी का बयान दर्ज किया था। इसके बाद मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक 12 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी को ईडी ने तलब किया। लेकिन वे ईडी के सामने पेश नहीं हुए। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक एजेंसी का कहना है कि एसडीपीआई प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का एक राजनीतिक मोर्चा है। एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी साल 2009 तक पीएफआई के सदस्य रहे।
25 फरवरी को प्रदेश कार्यकारिणी का हुआ था गठन
गत 25 फरवरी 2025 को ही एसडीपीआई के प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हुआ था। पाकुड़ शहर के एक होटल में बैठक हुई थी। जिसमें एसडीपीआई के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने शिरकत किया था। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो. शफी साहब (राजस्थान), पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इलियास मोहम्मद तुंबे, एनडब्लूसी मेंबर सह बिहार के प्रभारी डॉ महबूब आवाद शरीफ (बैंगलोर, कर्नाटका) एवं झारखंड प्रभारी अब्दुल सलाम (केरला) मुख्य रूप से मौजूद थे। बैठक में हंजिला शेख को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। जबकि हबिबुर रहमान उपाध्यक्ष बनाए गए थे। नई प्रदेश समिति में महासचिव एडमिन तहमीदुर रहमान, महासचिव संगठन शमीम अख्तर, सचिव वाजिदा खातून, अर्जुन टुडू व अमीर हमजा तथा कोषाध्यक्ष अवैदूर रहमान का चयन किया गया। वहीं समिति के सदस्य के रूप में शमीम अंसारी, उमर फारूख, अधिवक्ता अब्दुल हन्नान, हाजेरा खातून एवं गुलाम रसूल को रखा गया।
शहरी जलापूर्ति योजना को चालू कराने की कवायद तेज,टीम ने किया निरीक्षण
उपायुक्त मनीष कुमार के पहल पर शहरी जलापूर्ति योजना को चालू कराने की कवायत तेज हो गई है।इसी सिलसिले में रविवार को तांतीपाड़ा में बनी इंटरमीडिएट सम्प में बिजली आपूर्ति और अन्य समस्याओं के निराकरण को लेकर एक विशेष टीम के द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। जिसमें नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी,विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के सहायक अभियंता गिरधारी सिंह मुंडा,पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के सहायक अभियंता अभिजीत किशोर शामिल थे।इस दौरान महिला सामाजिक कार्यकर्ता मीरा प्रवीण सिंह,नगर परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष सम्पा साह एवं सामाजिक कार्यकर्ता हिसाबी राय भी विशेष रूप से मौजूद थे।इस दौरान सम्प में बिजली आपूर्ति को लेकर कई समस्याएं नजर आई। इसी दौरान दलदली भूमि और नालियों में आकर जमा हो रही गंदा पानी तथा इसी जमीन पर बीचों-बीच स्थित बिजली का ट्रांसफार्मर मुख्य समस्या के रूप में सामने उभर कर आई। निरीक्षण टीम ने दलदली भूमि को जल से मुक्त करने,नालियों में जमा हो रहे गंदे पानी के प्रवेश को रोकने और बिजली ट्रांसफार्मर को वहां से हटाकर पास में ही लगाने पर विचार विमर्श किया गया।इसी दौरान पास से ही ओवरहेड इलेक्ट्रिक केबल सम्प तक लगाने का निर्णय लिया गया।इस पर विशेष रूप से मीरा प्रवीण सिंह ने अपनी सहमति जताई और स्थान भी चिन्हित किया।इस दौरान कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि शहरी जलापूर्ति योजना का पूर्ण ट्रायल करते हुए शहर के लोगों को गंगा का पीने का स्वच्छ पानी घर-घर उपलब्ध कराना है। इसलिए उपायुक्त के आदेश पर आज यहां निरीक्षण किया गया।इस दौरान जो भी समस्याएं सामने आई,उसे दूर करने का निर्णय लिया गया।उन्होंने बताया कि जल्द ही शहर के लोगों को पीने का पानी मिलना शुरू हो जाएगा।इस दौरान नगर परिषद के प्रधान सहायक देवाशीष जय बर्मन, विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कनीय अभियंता आशीष कुमार पटेल,नगर परिषद के सहायक अभियंता, कनीय अभियंता,सामाजिक कार्यकर्ता सुशील साह आदि मौजूद थे।
पाकुड़ जिले के बरमसिया गांव में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। भूविज्ञानी डॉ रणजीत कुमार सिंह एवं रेंजर रामचंद्र पासवान के संयुक्त प्रयास ने खोज निकाला जीवाश्म।
पाकुड़ जिले के बरमसिया गांव में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। भूविज्ञानी डॉ. रणजीत कुमार सिंह और वन रेंजर रामचंद्र पासवान ने संयुक्त रूप से यहां पर एक जीवाश्मकृत (पेट्रिफाइड) जीवाश्म की खोज की है, जो क्षेत्र के भूवैज्ञानिक और जैविक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस खोज के दौरान, टीम ने एक विशाल वृक्ष के जीवाश्मकृत अवशेषों को पहचाना, जो लाखों वर्ष पूर्व के हो सकते हैं। यह खोज न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र की प्राचीन प्राकृतिक विरासत को उजागर करता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में और भी अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि जीवाश्म की सटीक आयु और उसके पर्यावरणीय संदर्भ को समझा जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस क्षेत्र को संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी इस महत्वपूर्ण विरासत का अध्ययन और सराहना कर सकें।
वन रेंजर रामचंद्र पासवान ने स्थानीय समुदाय से अपील की है कि वे इस क्षेत्र की सुरक्षा में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि से बचें जो इस महत्वपूर्ण स्थल को नुकसान पहुँचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस खोज से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
इस खोज के बाद, राज्य के पुरातत्व और वन विभाग ने संयुक्त रूप से इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण करने की योजना बनाई है ताकि और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्रित की जा सकें और क्षेत्र की जैव विविधता और भूवैज्ञानिक इतिहास को संरक्षित किया जा सके।
पाकुड़ जिले के बरमसिया गांव में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। भूविज्ञानी डॉ. रंजीत कुमार सिंह और वन रेंजर रामचंद्र पासवान ने संयुक्त रूप से यहां पर एक जीवाश्मकृत (पेट्रिफाइड) जीवाश्म की खोज की है, जो क्षेत्र के भूवैज्ञानिक और जैविक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस खोज के दौरान, टीम ने एक विशाल वृक्ष के जीवाश्मकृत अवशेषों को पहचाना, जो (10 से 14 . 5 करोड़) 100 से 145 मिलियन वर्ष पूर्व के हो सकते हैं। यह खोज न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र की प्राचीन प्राकृतिक विरासत को उजागर करता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में और भी अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि जीवाश्म की सटीक आयु और उसके पर्यावरणीय संदर्भ को समझा जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस क्षेत्र को संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी इस महत्वपूर्ण विरासत का अध्ययन और सराहना कर सकें।
वन रेंजर रामचंद्र पासवान ने स्थानीय समुदाय से अपील की है कि वे इस क्षेत्र की सुरक्षा में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि से बचें जो इस महत्वपूर्ण स्थल को नुकसान पहुँचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस खोज से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
इस खोज के बाद, भू वैज्ञानिक वैज्ञानिक व प्रकृति पर्यावरण के शोधार्थी व अन्य इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण अध्ययन करने की योजना बनाई है ताकि और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्रित की जा सकें और क्षेत्र की भू वैज्ञानिक हलचल घटना पर्यावरण संरक्षण
जैव विविधता और भूवैज्ञानिक इतिहास को संरक्षित किया जा सके।
डॉ रणजीत कुमार सिंह, मॉडल कॉलेज राजमहल साहिबगंज झारखंड के साथ पाकुड़ के और आसपास के महत्वपूर्ण संरक्षित जीवाश्म स्थलों का दौरा किया। उन्हें आसपास के क्षेत्र में मौजूद लकड़ी के जीवाश्मों के संरक्षण और परिरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से। कई दशकों से स्थानीय ग्रामीण यह सोचकर जीवाश्म लकड़ी की पूजा करते हैं कि यह आसपास की चट्टानों से अलग है, लेकिन अब पिछली एक सदी में भारत के भूविज्ञानी विशेष रूप से डॉ रणजीत कुमार सिंह भू वैज्ञानिक और दुनिया भर के गोंडवाना पौधे जीवाश्म शोधकर्ताओं ने गोंडवाना वनस्पतियों और जीवाश्म लकड़ी की व्यवस्थित रूप से पहचान की और उन्हें वर्गीकृत नहीं, झारखंड की इन अनूठी जीवाश्म लकड़ी को अगली पीढ़ी, भूविज्ञानी शोधकर्ताओं और इस क्षेत्र के विज्ञान और वैज्ञानिक समझ में रुचि रखने वाले आम लोगों के लिए संरक्षित और संरक्षित करने की सख्त जरूरत है। इसे देखते हुए, सीपीजीजी के बैनर तले बीएसआईपी ने आम लोगों, राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयास से अनूठी जीवाश्म लकड़ी के संरक्षण के संबंध में झारखंड वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी श्री मनीष तिवारी के साथ भू-विरासत विकास योजना का प्रस्ताव रखा। डॉ रणजीत कुमार सिंह
स्थानीय ग्रामीणों, प्रशासकों, वन विभाग, झारखंड राज्य के इकोटूरिज्म के साथ बातचीत की और इस क्षेत्र में एक अलग जियोपार्क कैसे विकसित किया जा सकता है, इस पर चर्चा हो , जिसमें इस क्षेत्र में पैलियोबोटैनिकल अनुसंधान की अपार संभावनाओं को देखते हुए भू-स्थलों के व्यवस्थित विकास के लिए अपने अनुभव और ज्ञान को साझा किया ऐसे जीवाश्म वनों का विरासत मूल्य अद्वितीय है और उन्हें उनकी प्राकृतिक स्थितियों में संरक्षित करने की आवश्यकता है, इसलिए यूनेस्को द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकृत मानदंडों को ध्यान में रखते हुए एक बड़े भू-पार्क का प्रस्ताव किया जाएगा।
*स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी से मिलकर रखी मांग , पत्रकारों को आयुष्मान भारत का कार्ड बनवाने का दिया जाए आदेश: शाहिद इक़बाल*
पाकुड़: स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी से राँची सरकारी आवास पर मिलकर झामुमो के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य शाहिद इक़बाल ने आवेदन देकर कहा कि झारखंड के विकास में न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका की बेहतर भूमिका के साथ-साथ पत्रकारिता की भूमिका भी सराहणीय योग्य है. देश की आजादी से लेकर अलग झारखंड राज्य बनाने के आंदोलन में राज्य के पत्रकारों की सराहनीय भूमिका रही है. राज्य के पत्रकार काफी कम संसाधनों में अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों की पूर्ति के साथ-साथ राज्य और देश के विकास में राजनेता और जनता के बीच, प्रशासन और जनता के बीच और न्यायपालिका और जनता के बीच बेहतर संवाद का माध्यम बनते हैं. शाहिद इक़बाल ने कहा कि शहरी पत्रकारों के साथ-साथ ग्रामीण पत्रकारों की भूमिका भी काफी उल्लेखनीय है. ज्यादातर ग्रामीण पत्रकार गैरवैतनिक हैं. उन्हें ना तो उनके संस्थान की ओर से ना ही अन्य किसी माध्यम से आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे वे अपने परिवार का गुजारा कर सके. बावजूद इसके ग्रामीण पत्रकार गांव-समाज की समस्याओं, राजनेताओं की सकारात्मक भूमिका से लेकर प्रशासन के कार्यों को जनता के बीच और गरीब जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने के कार्य में लगातार संघर्षशील है. कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के लिए अपनी महती भूमिका निभाई है और झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी ने झारखंड अलग राज्य के निर्माण के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाली पार्टी रही है. ऐसे में पत्रकारों के संघर्ष को ध्यान में रखते हुए उन्हें न्यूनतम सुविधाएं पहुंचाना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.
महोदय आपसे अनुरोध है कि राज्य के पत्रकारों को स्वास्थय विभाग की ओर से आयुष्मान भारत का कार्ड बनवाने का आदेश दिया जाए. जिससे वे आयुष्मान भारत कार्ड का इस्तेमाल अपने व अपने परिजनों के इलाज के लिए कर सकें. इससे एक ओर जहां सभी पत्रकार आपके प्रति आभारी रहेंगे. साथ ही साथ आपके इस ऐतिहासिक कदम को पत्रकार जीवनपर्यंत याद रखेंगे. माननीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द कार्रवाई की जाएगी।
*संस्था ने रेस्क्यू कर बचाया छोटे नंदी की जान*
पाकुड़ : सत्य सनातन संस्था के कोषाध्यक्ष एवं गौ सेवक दल के प्रमुख अमर ठाकुर ने सोमवार को पाकुड़ रेलवे फाटक के समीप एक छोटे नंदी जिसको किसी अनजान वाहन या किसी व्यक्ति द्वारा गंभीर चोट पहुंचा दिया था,को दोपहर 12 बजे देखा और उनकी व्यथा देख वो रह नहीं पाए उन्होंने तुरत संस्था के अध्यक्ष रंजित कुमार चौबे से संपर्क किया, श्री चौबे ने बात को गंभीरता से लेते हुए तुरत जिला अध्यक्ष हर्ष भगत के साथ उक्त स्थान पहुंचे तो देखा कि नंदी को काफी गंभीर चोट लगा है, एवं वो लहूलुहान है, उसका रेस्क्यू करने के लिए अध्यक्ष रंजित चौबे ने 1962 पर सूचना प्राप्त के 15 मिनट के अंदर ही 1962 के टिम मौके पर पहुंचे और संस्था के सदस्यों के सहयोग से उक्त छोटे गंभीर रूप से घायल नंदी का रेस्क्यू किया गया, मौके पर संस्था के दीपक राज गुप्ता, धीरज राज गुप्ता ,अरुण सिंह सहित अन्य मौजूद थे।
झारखंड के लेखक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ रवींद्र नाथ तिवारी ने राष्ट्रपति और झारखंड के राज्यपाल से मिलकर अपनी लिखी पुस्तक की भेंट।
डॉ रविंद्र नाथ तिवारी ने झारखंड के राज्यपाल से मुलाकात की, “संथाल हूल, 1855” नामक किताब भेंट की बिहार -झारखंड के वरिष्ठ लेखक और पत्रकार डॉ. रवीन्द्र नाथ तिवारी (Dr. Ravindra Nath Tiwari) ने झारखंड के राज्यपाल से संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। डॉ. तिवारी ने बताया कि- रांची स्थित राजभवन में महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार जी से मुलाकात के दौरान झारखंड की उच्च शिक्षा पर सार्थक चर्चा हुई। मैंने उन्हें अपनी किताब “संथाल हूल (30 जून 1855-56): भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” और अपने संपादन में छपने वाली राष्ट्रीय मासिक पत्रिका “भारत वार्ता” भेंट की। उन्होंने “हूल’ शब्द पर भी हमसे बात की। ‘हूल’ संथाली शब्द है जिसका मतलब होता है क्रांति अथवा विद्रोह। “संथाल हूल”की पहली प्रति देश की ‘प्रथम नागरिक’ महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को भेंट की गई थी। आजादी के अमृत काल के मौके पर मैंने यह किताब लिखी है जिसमें भारतीय आजादी की लड़ाई में झारखंड खासतौर से साहिबगंज जिले की अन्यतम भूमिका को रेखांकित किया गया है। यही नहीं इसमें यह प्रमाणित किया गया है कि 1857 का सिपाही विद्रोह नहीं बल्कि 1855 का संथाल विद्रोह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। मैंने राज्यपाल को बताया कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संथाल क्रांति हमारे गृह जिला साहिबगंज के भोगनाडीह गांव से 30 जून 1855 को शुरू हुई थी। इस विद्रोह का शंखनाद भोगनाडीह के रहने वाले सिदो-कान्हू नामक दो भाइयों ने अपने दो सहोदर भाइयों -दो बहनों और 30 हजार संथालों के साथ किया था। इस विद्रोह से निपटने के लिए बड़ी संख्या में इंग्लैंड से अंग्रेज अफसर और सैनिकों को मंगाना पड़ा था। अंग्रेज अफसरों ने लिखा कि ऐसा भयानक युद्ध उन्होंने पहले कभी नहीं देखा जैसा तीर- धनुष से लैश संथाल विद्रोहियों ने लड़ा। मेजर जार्विस ने लिखा-“पूरी लड़ाई के दौरान न कभी संथाल क्रांतिकारी न पीछे हटे और न कभी पीठ दिखाया।”
इस क्रांति की आग संथाल परगना प्रमंडल से धधककर झारखंड के बड़े हिस्से से होते बिहार में भागलपुर, मुंगेर, बाढ़ -मोकामा, पूर्णिया और पश्चिम बंगाल के बड़े हिस्से में फैल गई थी। विद्रोह को दबाने के लिए इतिहास में पहली बार अंग्रेजों ने सैनिकों को ढोने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल किया था। इस विद्रोह की विस्तृत चर्चा उस समय के अंग्रेजी अखबारों, पत्रिकाओं, किताबें और रिपोर्टो में मिलती है।
महामहिम ने कहा कि पुस्तक को पढ़कर अपना विचार आपको भेजेंगे।
उत्तर प्रदेश के बरेली लोकसभा सीट से आठ बार चुनाव जीतकर अटल व नरेंद्र मोदी सरकार में कई टर्म मंत्री रहे संतोष कुमार गंगवार देश के कुछ अनुभवी, संवेदनशील, विकासवादी सोच और जनसरोकार वाले नेताओं में से हैं। वे 78 साल के हैं। फिजिक्स के छात्र रहे हैं और उन्होंने कानून की भी पढ़ाई की है।
मुझे अच्छा नहीं लगता कोई हमनाम तेरा , कोई तुझ सा हो तो नाम भी रखे तुझसा। चीन प्रांत के मकाऊ शहर में आयोजित समारोह में फिर से हुए सम्मानित लुत्फुल जी।
आईकॉन ऑफ हिंदुस्तान अवार्ड से नवाजे गए समाजसेवी लुत्फल हक
–हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपने हाथों दिया अवार्ड
पाकुड़। पाकुड़ के चर्चित और नामचीन समाजसेवियों में शुमार लुत्फल हक ने एक बार फिर जिले वासियों को गर्वित किया है। लुत्फल हक को समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए चीन प्रांत के मकाऊ में आईकॉन ऑफ हिंदुस्तान अवार्ड से सम्मानित किया गया है। देश के मशहूर पत्रकार और हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर ने अपने हाथों लुत्फल हक को अवार्ड प्रदान किया है। आयोजित सम्मान समारोह में भारत देश के अलग-अलग हिस्सों से तीन दर्जन जानी-मानी हस्तियां शामिल हुए थे। इनमें लुत्फल हक का नाम भी खास तौर पर शामिल किया गया था। देश-विदेशों में दर्जनों बार सम्मानित किए जा चुके लुत्फल हक गरीबों की मदद के लिए जाने जाते हैं। असहाय और जरुरतमंद लोगों को मदद पहुंचाना उनकी पहचान बन चुकी है। पाकुड़ जैसे पिछड़े और छोटे से जिले से निकलकर चीन प्रांत के मकाऊ में सम्मान हासिल करने वाले समाजसेवी लुत्फल हक ने जिले का नाम रोशन किया है। अवार्ड प्रदान के दौरान भरे समारोह में लुत्फल हक की दरियादिली से खुश हिंदुस्तान अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने लुत्फल हक की तारीफों के पुल बांध दिए। प्रधान संपादक शशि शेखर ने लुत्फल हक के सामाजिक कार्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गरीबों की मसीहा बनकर जो काम सालों से करते आ रहे हैं, वह वाकई में प्रेरणादायक और प्रशंसनीय भी है। कहा कि जिस वक्त कोरोना वायरस के कहर से पूरा देश खौफ में था, लोग सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए ही सोचने पर मजबूर हो गए। लुत्फल हक ने लोगों की मदद के लिए अपने दोनों हाथ खोल दिए। जिनके घर के चूल्हे रोजाना मेहनत मजदूरी से जलते थे, उन गरीब मजदूरों के परिवारों के सामने संकट आन पड़ी थी। उस दौरान लुत्फल हक जैसे समाजसेवी ने गरीबों के घर राशन पहुंचाया। लोगों की जान बचाने के लिए इन्होंने अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर, सैनिटाइजर और मास्क मुहैया कराया। पाकुड़ रेलवे स्टेशन में रोजाना लगभग 300 गरीबों को हर दिन भोजन कराया जा रहा है। आर्थिक रूप से मदद पहुंचा कर गरीब बेटियों की शादी में सहयोग कर उनका घर बसा रहे हैं। लुत्फल हक गरीबों की उम्मीद बन गए हैं। निश्चित रूप से लुत्फल हक समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। इधर लुत्फल हक ने दूरभाष पर कहा कि शशि शेखर जी का मैं शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे इस मंच पर सम्मानित किया। यह सम्मान मैं उन बेबस भाई बहनों और माताओं को समर्पित करना चाहूंगा, जिनकी दुआओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया। मेरी उन भाई-बहनों और माताओं के आशीर्वाद से ही मुझे यह सम्मान नसीब हुआ है। निश्चित रूप से समाजसेवा में मुझे इससे हौंसला मिलेगा। लुत्फल हक ने कहा कि मैं खुदा से बस यही दुआ मांगता हूं कि इसी तरह गरीबों की सेवा का अवसर मिलता रहे।
*सत्य सनातन संस्था का बैठक हुआ संपन्न ,लिए गए कई निर्णय*
– बैठक में कार्यकारणी अध्यक्ष, सागर चौधरी, जिला अध्यक्ष – राहुल सिंह, और प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रीतम सिंह यादव का इस्तीफा को किया गया स्वीकार….
पाकुड़ : रविवार को सुबह सत्य सनातन संस्था का बैठक नगर के रानी ज्योतिर्मय स्टेडियम में अध्यक्ष रंजित कुमार चौबे के अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि संस्था हर स्थिति परिस्थिति में अपने अधिकारी सदस्यों के साथ तन ,मन ,धन से खड़ा था और खड़ा रहेगा। प्रत्येक वर्ष की भाँति संस्था इस वर्ष भी महाशिवरात्रि में पुराना अस्पताल स्थित हनुमान मंदिर में शिव बारातियों का स्वागत भव्य रूप से किया जाएगा, जिसका सारा खर्च संस्था के सचिव चंदन प्रकाश करेंगे, वही संस्था में सर्व सहमति से निर्णय लिया गया कि संस्था इस बार भी सभी सतानियों के बीच होली मिलन समारोह मनाएगी, वही संस्था इस बार भी दिनांक 13 मार्च को नगर थाना के सामने रथ मेला मैदान में संध्या 05 बजे से 7 बजे तक पूरी भव्यता के साथ होलिका दहन का कार्यक्रम करेगा, साथ ही सर्वसम्मति के साथ यह भी निर्णय लिया गया कि *बैठक में कार्यकारिणी अध्यक्ष, सागर चौधरी, जिला अध्यक्ष – राहुल सिंह, और प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रीतम सिंह यादव का इस्तीफा को किया गया स्वीकार । परन्तु संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजित कुमार चौबे का इस्तीफा को अस्वीकार किया किया गया ।* मौके उपाध्यक्ष गौतम कुमार, संयुक्त सचिव अजय भगत, जिला अध्यक्ष हर्ष भगत ,मिंटू गिरी, हेमंत कुमार प्रीतम, साजन घोष,विशाल भगत, सत्यम भगत, रवि भगत, संदीप त्रिवेदी, सानू रजक,मुन्ना शर्मा, एवं आगंतु अतिथि , जनार्दन मालाकार, व सत्यम कृष्णा, उपस्थित रहे।
सरकारी अव्यवहारिक निर्णय कभी कभी बन जाते हैं नये नये अपराध पनपने के कारण।
तीन दशकों की मेरी पत्रकारिता में मुझे याद है, विभिन्न राजनैतिक पार्टियाँ हर विभाग में “इंसपेक्टर राज” ख़त्म करो के नारे लगाते थे।
आज देश में प्रधानमंत्री मोदी कानून की पेंचीदगियों को समाप्त कर इसे सरल बनाने के सफलतम प्रयास में लगे हैं।
निवेशकों और उद्योगों को वन विंडो सुविधा उपलब्ध कराने की बात की जाती है , ताकि उद्योग और व्यापार सुलभ हो सके।
इधर लगभग प्रतिदिन अवैध रूप से लॉटरी पर खबरें प्रकाशित होती जा रही है।
इसके लिए प्रशासन और पुलिस को दोष देने की परम्परा भी बदस्तूर जारी है।
एक समय लॉटरी झारखंड में बिकते थे , और वो अवैध नहीं था।
अचानक किसी राजनैतिक रूप से सत्ता पर काबिज़ किसी पार्टी के अव्यवहारिक सोच ने दम्भ भरी अंगड़ाई ली , और रातो रात झारखंड में लॉटरी बिकना अवैध हो गया।
यानि हर तरह के संरक्षण को एक मौका मिल गया , तथा वैध को अवैध के विशेषण के साथ चलने का रास्ता मिल गया।
जिस गरीब शोषण के नाम पर लॉटरी पर रोक लगाई गई, उन्हीं गरीबों के शोषण का उसी लॉटरी के द्वारा अवैध का रास्ता एक अव्यवहारिक निर्णय ने खोल दिया।
खैर जहाँ लॉटरी अवैध है, वहीं हर तरह के शराब को वेध बनाकर रखा गया है। नये नये और निर्णयों को अव्यवहारिक रास्तों पर खींच ले जाने की चर्चा चल रही है।
हमारे देश में सरकारें ऐसे निर्णय के लिए मशहूर हैं, जहाँ चूहों को भी थानों के मालखाने में शराब परोसने की कहानी बन सकती है।
सरकारी अव्यवहारिक निर्णनयों से अवैध के रास्ते खुलते रहे हैं , और गिनेचुने लोगों को सामान्य से माफिया बनकर अवैध रूप से अगाध बनाने और कमाने का मौका दिया गया है।
अब झारखंड में जाली लॉटरी छपकर बिक रहे हैं। बंगाल सहित अन्य प्रदेशों के सरकारी लॉटरी दशकों पहले यहाँ बिकते थे , लेकिन प्रतिबंध के बाद जाली भी छपने और बिकने लगे।
अगर अन्य राज्यों की तरह सरकार ही लॉटरी पर अपनी पकड़ बना लेती , तो राजस्व के साथ रोजगार भी सृजन होता , और एक और अपराध पनपने से रह जाता। हजारों काम तथा अपराध पर काबू पाने के कार्य में लगे प्रशासन के पास भी वक़्त बचता।
लॉटरी अगर गरीब विरोधी है, तो शराब गरीब विरोधी नहीं है क्या ?
गोवा सहित अन्य राज्यों की तरह स्थानीय शराब बेचने की बात होतीं हैं , लेकिन अन्य राज्यों की नक़ल सरकारी लॉटरी पर न कर क्या इसे व्यवहारिक कहा जा सकता है? यह चिंतन , मंथन और ….जाँच तक के विषय है।
सवाल बहुत तरह के उठते हैं , जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।
हर बात पर पुलिस और प्रशासन को दोष देना न्याय संगत दिखता ? अब पुलिस वाले क्या क्या करे !
राजनीति और पोषित गुर्गे अव्यवहारिक निर्णय लेते रहें , तो प्रशासन क्या क्या देखें ?
बिहार में शराब बंदी ने शराब के कारोबार को अवैध बना दिया , लेकिन क्या ये बंद हो गया ?
बिहार में शराबबंदी ने करोबार के रूपरेखा को एक नई दिशा दे दी।
माफिया नये नये पैदा लिए , और बंदी की निगरानी रखने वाले जिम्मेदारों को एक और नया रास्ता पैसे बनाने का मिल गया। पेरविकारो और दलालों को नया कारोबार मिल गया। बिहार के किस कोने में शराब चाहिए , आपके घर तक पहुँच जाएगा , आपको कहीं इसकी उपलब्धता के लिए जाना नहीं है।
झारखंड में अवैध होते ही लॉटरी जाली भी हो गये , और नये नये करोड़पतियों की गली गलियारों में उतपत्ति हो गई।
अब हम लक्ज़रियस गाड़ियों पर बकरी चुराएं , थैलों में लॉटरी पहुँचायें , आँचल की छावों में ड्रग्स की पुड़िया बाजारों में उपलब्ध कराएं।
मतलब अवैध कमाने की हम हमारी मानसिकता को विभिन्न अवैध धंधों से पोषित करें , लेकिन ” जोतो दोष – नन्दो घोष” की तर्ज़ पर दोषी प्रशासन को ठहराएं।
मुट्ठीभर स्वार्थ के लिए हम आपस में भिड़ मरें , लेकिन हर तरफ़ बिखरे अवैध के लिए ,सिर्फ प्रशासन दोषी !
हम कभी अपने बच्चों से यह पूछने की ज़हमत नहीं उठाते कि जब तुम्हारे पास कोई स्पष्ट रोजगार दिखता नहीं , तो विभिन्न सुविधाओं के रुप में दिखता इतने पैसे कहाँ से लाये !
प्रशासन को दोष देने की परम्परा छोड़ हम अपने गिरेबान में भी झाँके – टटोले तो कुछ बात बने।
ख़ुद से सवाल करें कि , क्या हमारी मानसिकता और दुर्व्यसनों के लिए प्रशासन दोषी है?