*आज का पंचांग 👇*
*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
29.09.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ याम्यायन सौम्यगोल: शरद् ऋतु श्रीसूर्य: दक्षिणायन।
हिन्दी माह : आश्विन
पक्ष : कृष्ण
तिथि : तृतीया
दिन : मंगलवार
नक्षत्र : अश्विनी
योग : व्याघात
करण : वणिज/विष्टि
सूर्योदय : सुबह 06:04 बजे।
सूर्यास्त : शाम 05:56 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेंगे।
आज का सूर्य : कन्या राशि में।
आज का चंद्रमा : मेष राशि में।
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*आज का दिशा शूल :* उत्तर।
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*आज का राहुकाल :*
दिन में 3:00 से 4:30 बजे तक।
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*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज आश्विन महीने के पितृपक्ष अर्थात् कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज तृतीया तिथि का श्राद्ध और तर्पण किए जाएंगे। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत भी है। आज चंद्रमा का उदय रात्रि 7:22 पर होगा।
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*आज का खास :*
*पितर रूष्ट नहीं हो इस लिए करते हैं श्राद्ध*
अगर पितर रूष्ट तो हो जाए तो मनुष्य को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितरों की अशांति के कारण धन हानि और संतान पक्ष को समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। संतान हीनता के मामलों में ज्योतिषी पितृ दोष को अवश्य देखते हैं। ऐसे लोगों को पितृपक्ष के दौरान अनिवार्य रूप से श्राद्ध करना चाहिए।
*श्राद्ध में है तील और जव का विशेष महत्व*
श्राद्ध में तील, चावल, जव आदि को अधिक महत्व दिया गया है। साथ ही पुराणों में इस बात का भी जिक्र है कि श्राद्ध का अधिकार योग्य ब्राह्मणों को है। श्राद्ध में तील, और कुश का सर्वाधिक महत्व होता है। पितरों को अर्पित किए जाने वाले भोज्य पदार्थों को पिंडी रूप में अर्पित करना चाहिए। श्राद्ध का अधिकार पुत्र, भाई, प्रपौत्र समेत महिलाओं को भी होता है।
*श्राद्ध में कौए को जरूर दें भोजन*
कौए पितरों का रूप माने जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूरवज कौए का रूप धारण कर पृथ्वी पर आते हैं। वे नियत तिथि और समय पर अपने संतान व परिजनों के यहां पहुंचते हैं। और श्राद्ध की आशा रखते हैं। अगर उन्हें श्राद्ध नहीं मिलता तो वह रुष्ट हो जाते हैं। इस कारण श्राद्ध का प्रथम अंश कौए को दिए जाने की प्रथा भी है। ब्रह्मपुराण के अनुसार जो भी वस्तु उचित काल या स्थान पर पितरों के नाम उचित विधि द्वारा ब्राह्मणों को श्रद्धा पूर्वक दिया जाए वह श्राद्ध कहलाता है। श्राद्ध के माध्यम से पितरों को तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है। पिंड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का यह हिस्सा होता है।
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आलेख…
*पं. चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुण्डली, वास्तु व कर्मकांड परामर्श*
*संपर्क : 9905507766*
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