*नवरात्र में होती है मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, अलग-अलग स्वरूपों के हैं अलग-अलग महत्व*
*आज का पंचांग 👇*
*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
13.10.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ याम्यायन सौम्यगोल: शरद् ऋतु श्रीसूर्य: दक्षिणायन।
हिन्दी माह : आश्विन
पक्ष : शुक्ल
तिथि : तृतीया
दिन : मंगलवार
नक्षत्र : विशाखा
योग : प्रीति
करण : तैतुल/गर
सूर्योदय : सुबह 06:14 बजे।
सूर्यास्त : शाम 05:46 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेंगे।
आज का सूर्य : कन्या राशि में।
आज का चंद्रमा : तुला राशि में।
*———————–*
*आज का दिशा शूल :* उत्तर।
*————————*
*आज का राहुकाल :*
दिन में 3:00 से 4:30 बजे तक।
*———————–*
*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। अभी शारदीय नवरात्र चल रहे हैं। आज माता दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाएगी। आज रात्रि 12:18 पर शुक्र का पश्चिम दिशा में अस्त होगा।
*———————-*
*आज का खास :*
*आज होगी मां चंद्रघंटा की पूजा, मिलेगा साहस और निर्भयता का आशीर्वाद*
*नवरात्र में होती है मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, अलग-अलग स्वरूपों के हैं अलग-अलग महत्व*
शक्ति की आराधना का महापर्व नवरात्र में अलग-अलग दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की अलग-अलग पूजा होती है। सभी स्वरूप और दिवस के अलग-अलग महत्व हैं। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। माता चंद्रघंटा शांति, साहस और शक्ति की देवी हैं। मंगलवार को शारदीय नवरात्र का तीसरा दिन है। शक्ति की उपासना का महापर्व के तीसरे दिन माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाएगी। मां चंद्रघंटा देवी की पूजा से साधक को बौद्धिक क्षमता और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और सभी पापों से भी मुक्ति मिलती है।
*मां चंद्रघंटा की पूजा विधि*
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े विशेषकर लाल रंग के कपड़े पहनें। पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां चंद्रघंटा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। माता को अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप, और उनके प्रिय फूल चमेली या कनेर अर्पित करें। माता को दूध से बनी मिठाइयां, खीर या शहद का भोग अर्पित करें। अंत में परिवार सहित मां चंद्रघंटा की आरती करें और प्रसाद बांटें।
इस दिन फलाहार करें तो उत्तम होगा। ऋण से मुक्ति पाने के लिए मां चंद्रघंटा की नवरात्रि के दरमियान उन्हें गुड़हल (उड़हुल) के 108 फूलों से बनी माला अर्पित करनी चाहिए।
*कैसा है मां चंद्रघंटा का स्वरूप*
मां चंद्रघंटा का रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए देवी को ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। माता का वर्ण स्वर्ण (सुनहरा) के समान चमकीला है। माता सिंह पर सवार हैं और उन्होंने अपनी दस भुजाओं में त्रिशूल, गदा, तलवार, बाण, कमंडल, माला और अन्य अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए हैं।
*मां चंद्रघंटा के मंत्र*
1. मूल मंत्र –
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
2. बीज मंत्र –
ऐं श्रीं शक्तयै नम:
3. स्तुति मंत्र –
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
4. ध्यान मंत्र –
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥
*———————-*
आलेख…
*पं.चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुंडली, वास्तु व कर्मकाण्ड परामर्श*
*संपर्क:9905507766*
*———————*