राँची के एक प्रतिष्ठित अखबार में ये ख़बर प्रकाशित हुई थी। पूरी ख़बर को पढ़िये , कोई भी जाँच एजेंसी इसे दिनों में उघेड़ सकती है। स्थानीय नगर थाने में मामला भी दर्ज है, लेकिन जाँच CID और ACB को भी सौंप दिया गया।
उसके बाद क्या हुआ !
सब ढाक के तीन पात । जाँच एजेंसियों की फाइलों में धूल खा रही है जाँच , और घपले करने वाले मलाई।
साथ में फ़ोटो में अद्यतन ख़बर भी पढ़िये, बात समझ में आ जायेगी कि कैसे जाँच के नाम पर उलझा कर जनता के पैसे की बन्दरबाँट होती है और जनता को बेवकूफ़ बनाया जाता है।
कुछ होगा इस पर संदेह है, और इसमें संदेह नहीं कि कुछ लोग पैसे गटक कर पैसे वाले बन गए।
खैर पढ़िये और जानिए सरकारी तकनीक घोटाले , और फ़िर गटकने तथा कुछ न होने के।😊
“*कर्मियों की मिलीभगत से कल्याण विभाग में करोड़ों का हुआ घोटाला, पुलिस कर रही है जाँच*
– आरोपी प्रताप रविदास की भूमिका बहुत ही अहम – सूत्र
पाकुड़ : प्रगतिशील पाकुड़ के कल्याण विभाग में करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ है। कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार इक्का ने नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि विभाग के ही कुछ कर्मियों ने मिली भगत कर एसबीआई बैंक खाता संख्या 11440445629 से 12 करोड़ 38 लाख 66000 रुपए की अवैध निकासी की है। आठ दिसंबर को एसबीआई बाजार शाखा, पाकुड़ के प्रबंधक अभिनव कुमार ने कल्याण पदाधिकारी को फोन कर बताया था कि उनके द्वारा भेजे गए एडवाइस में किया गया हस्ताक्षर बैंक में संग्रहित हस्ताक्षर से नहीं मिल रहा है। प्रबंधक ने बताया था कि एडवाइस लेकर बैंक पहुंचा कर्मचारी अक्षय रविदास भी संदिग्ध लग रहा था। हस्ताक्षर संदिग्ध पाए जाने के तुरंत बाद विभाग का कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट और कल्याण अधीक्षक मानवेंद्र झा बैंक पहुंचे। अधीक्षक एडवाइस को अपने साथ ले गए और दूसरा एडवाइस लाने की बात कह कर निकल गए। शाखा प्रबंधक लगातार कल्याण पदाधिकारी से संपर्क में थे। जबकि झा ने बैंक कर्मियों से कहा कि पदाधिकारी आवास चले गए हैं। इससे बैंक प्रबंधक का शक और बढ़ गया। कल्याण पदाधिकारी ने जब इस मामले में कर्मियों से सख्ती से पूछताछ की तो लगभग 15 घंटे बाद कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार ने कबूल किया कि संदिग्ध एडवाइस को फाड़ कर नष्ट कर दिया गया है। इसके बाद बैंक से एक फरवरी 2025 से अब तक के खाते का पूरा विवरण मंगाया गया। इसकी जांच विभाग के कर्मचारी राकेश रंजन सोरेन, मोहम्मद तहसीन और मोहम्मद ईरतीका द्वारा की गई। जांच में पाया गया कि कई एडवाइसों में दर्ज पत्र संख्या तिथि और निर्गत पंजी आपस में मिल नहीं खा रहे हैं। इसी आधार पर करोड़ों रु के गबन की पुष्टि हुई। एफआईआर में यह भी दर्ज है कि एक फरवरी से पहले तत्कालीन कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल में भी इसी तरह की फर्जी निकासी के संकेत मिले हैं। बैंक द्वारा भेजे गए 74 एडवाइज में से सात एडवाइस ऐसे हैं जिनकी तिथि और पंजी नहीं मिलते हैं।
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*विरमित होने के बाद भी विभाग में ही डटा रहा कर्मी*
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उधर अनुसेवक अक्षय रविदास को चार दिसंबर को ही अनुसूचित जनजाति विद्यालय, डूमरचीर में विरमित कर दिया गया था। फिर भी वह आठ दिसंबर को एडवाइस लेकर बैंक पहुंचा, जिससे इस बड़े घोटाले की पुष्टि होती है। कल्याण पदाधिकारी ने कहा कि इसमें बैंक अधिकारियों की मिली भगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
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*कईयों के ऊपर मामला दर्ज, पुलिस कर रही छानबीन*
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सोची समझी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपए निकालने के आरोप में कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट, अनुसेवक अक्षय रविदास अन्य खातेदार, लाभुक, फार्म सहित मुकेश कुमार, मिठू कुमार झा, मिंटू कुमार मिश्रा, शिव इंटरप्राइजेज, बिपलव शाह, बीना देवी, निरंजन कुमार मिश्रा, पूर्णिमा कुमारी, पूजा कुमारी, प्रीतम कुमार झा, प्रदीप कुमार झा, प्रताप रविदास, मनीषा मुर्मू, ज्ञानी देवी, राजेश कुमार दास, संगीता कुमारी, साहा इंटरप्राइजेज, चंदा देवी, अरुण कुमार गुप्ता, अमित कुमार अमर, आदित्य कुमार कश्यप, गौरव कुमार और लालू भास्कर के ऊपर कांड संख्या 319 /25 बीएनएस की धारा 316 (4),316(5), 318 (4),336 (3),338,61 (2),3 (5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।
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*आरोपी प्रताप की भूमिका सबसे अहम, इनके भाई ने कोलकाता में खोला है तीन बीयर बार – सूत्र*
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सूत्रों के अनुसार आरोपी प्रताप रविदास की भूमिका बहुत ही अहम बताई जा रही है। बताते चलें कि प्रताप कुल चार भाई है, जिसमें सबसे बड़ा भाई धनंजय सरकारी शिक्षक हैं। प्रताप का एक भाई धर्मनाथ कल्याण विभाग के कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र झा का काफी करीबी बताया जाता है और वो हमेशा कल्याण विभाग कार्यालय में मंडराता रहता है। आरोपी प्रताप के पिता बर्धन रविदास एक मजदूर थे। दबी जुबान से कुछ लोगों का कहना है कि इस सबका मास्टर माइंड प्रताप का बड़ा भाई धनंजय है, जो कि पूर्व में साइबर क्राइम का आरोपी भी रह चुका है। इनका पाकुड़ के खदान पाड़ा के पास और मोहनपुर के देवापाड़ा में करोड़ों की तीन मंजिला मकान है। ये पाँच छह कीमती गाड़ियों और करोड़ों की संपत्ति के मालिक भी बताए जाते हैं। पुख्ता सूत्रों के अनुसार अभी हाल ही में नवंबर महीने में इन्होंने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तीन बीयर बार भी खोले हैं, जिसके उद्घाटन के मौके पर इनके भाई धर्मनाथ के अलावे हिरणपुर के कई गणमान्य और कथित बुद्धिजीवी लोग भी शामिल हुए थे। उनमें से कुछ बुद्धिजीवियों की उसमें पार्टनरशिप भी बताई जा रही है, जो कि अब जांच का विषय हो सकता है।
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*बीयर बार के उद्घाटन में गए कथित बुद्धिजीवियों ने किया अपने सोशल मीडिया एकाउंट से फोटो डिलीट*
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वहीं सूत्रों का दावा है कि कोलकाता में बीयर बार के उद्घाटन में गए हिरणपुर के कथित बुद्धिजीवियों ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट से वहाँ के सारे फोटोज को शुक्रवार रातभर के अंदर डिलीट कर दिया है और कइयों ने तो अपना एकाउंट तक बंद कर दिया है। खैर अब तो जांच के बाद ही इन सारे तथ्यों का खुलासा होगा।”
खुलासा क्या अब ख़ाक होगा , सब तो खुलासा ही है। अब तो कब्जियत होगा , बीच बीच में कुछ निकाल कर सबको सन्तुष्ट कर हज़म होगा।🤣