Thursday, February 5, 2026
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चुनावी रंग ढंग में बदल चुका है पत्रकारिता की चुनौती

आज कल चुनाव ने ऐसा रंग-ढंग अपना लिया है , जो वर्षों पहले नहीं हुआ करता था। चुनाव एक लोकतांत्रिक त्यौहार के तौर पर हुआ करता था। सभी पार्टियों के लोग एक दूसरे से जब मिलते थे , तो लगता ही नहीं था, कि वे चुनावी मैदान में एक अपर के प्रतिद्वंद्वी हैं।
तीन दशकों की पत्रकारिता और उम्र के पाँच दशकों को गुजार चुकने के बाद आज एक पत्रकार के तौर पर चुनावी समीक्षा या समाचार लिखने में स्वयं को असहज पाता हूँ।
जमीनी हकीकत को लिख पाना असहज करता है।
अब तो पार्टियाँ भी अनेक हैं, और बागी तथा निर्दलीयों की तो बाढ़ सी है। सभी अपने ही समाज और जान पहचान वाले। सच लिखो तो अप्रिय बनने की स्थिति उत्पन्न होती है। जीतने वाले जीत कर राजधानी चले जायेंगे।
हम सच लिखने वाले यहीं पीसने के लिये रह जाएंगे।
जात पात-सम्प्रदाय पर चलने वाली आज की राजनीति खूनी संघर्ष की उपज मंडी बन गई है , जबकि पहले ऐसा नहीं था। हारने वाले जितने वाले को बधाई देता था। चुनाव के बाद समकुछ सामान्य हो जाता था।
पर आज ऐसा नहीं है।
समाज में चुनाव के बाद सभी एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते थे।
जो भी हो आज के दौर में सबसे पीड़ित चुनाव के बाद पत्रकारों को ही होना पड़ता है। आम जनता के सवालों का भी सामना पत्रकारों को ही करना पड़ता है , और असम्मानजनक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है।
मतदाताओं के लिए वादे और रेवड़ियाँ सभी प्रत्याशी बाँटते हैं , लेकिन पत्रकार यहाँ भी फाँके में रह जाते हैं। जो ठेकेदार नहीं बन सके , वैसे पत्रकारों के पास सामान्य इलाज तक कराने की औकात नहीं होती , लेकिन सरकार और नेताओं को उनकी सुध तक लेने की ज़हमत नहीं होतीं।
पत्रकारों को भी चाहिए कि वे नेताओं की नहीं , आम जनता की बात लिखें कहें , लेकिन…..

न्यूज पॉकेट से सुनी चर्चा पर समीक्षा । कुछ लोगों की उपस्थिति भी असर डाल जाती है परिणामों पर।

ऐसे पत्रकारिता के तीन दशक क्रॉस कर गये हैं।
समाचार और खासकर समीक्षा के लिए कुछ स्थान पॉकेट होते हैं , इनमें एक हेयरकट दुकान भी है।
राजनीति और क्राइम की खबरों के लिए मैं चुराता सूचनाएँ अपने श्रवण से , और कोशिश करता हूँ रोचक प्रस्तूतन का।
खेर पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं और न्यूज़ पॉकेट्स पर विस्तार से फिर कभी।
फ़िलवक्त ये प्रस्तुति —

जीत या हर वक़्त की गर्भ में है , लेकिन बाबुधन और नवनीत की उपस्थिति ही तय करेगा परिणाम।

रविवार को सेलून में सेभींग करवा रहा था। थोड़ी ही देर में एक पार्टी के दो महत्वपूर्ण कार्यकर्ता आये और अपनी बारी के इंतजार में बैठ गए। उनकी बातों को ध्यान से सुनने लगा। चुनावी दौर है, स्वाभाविक रूप से चर्चा भी उसी पर थी। चुनावी सभा तो थी नहीं , मंच भी नहीं था , इसलिए उन दोनों की चर्चा में ईमानदारी झलक रही थी।
भाजपा पाकुड़ सीट वर्तमान स्थिति में कभी जीत नहीं सकती , उनमें से एक ने कहा , दूसरे ने हामी भरते हुए कहा यार यहाँ डेमोग्राफी पूर्णतः चेंज हो गया है , लेकिन इससे पहले की स्थिति भी भाजपा के लिए पाकुड़ सीट कभी जितने लायक नहीं रही है।
चर्चा पाकुड़ पर आपसी सहमति के बाद लिट्टीपाड़ा सीट पर गई तो भाजपा के घोषित उम्मीदवार बाबुधन मुर्मू की प्रशंसा , जिला परिषद अध्यक्ष रहते उनके कार्यों, उसके बाद भी लगातार लिट्टीपाड़ा में हर परिस्थितियों में उनकी सकारात्मक सक्रियता आदि पर खूब चर्चा हुई। एक अच्छे उम्मीदवार के रूप में बाबुधन को उतारने पर पार्टी की तारीफ़ों के पूल बाँधे गये। झामुमो के उम्मीदवार जो अभी घोषित नहीं हुआ है पर चर्चा चलते हुए , लिट्टीपाड़ा के आदिवासी मतदाताओं का तीरधनुष चुनाव चिन्ह के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव की बातों तक पहुँची। कुल मिलाकर बाबुधन की तीरधनुष से टक्कर की बातों से होते हुए। महेशपुर के भाजपा प्रत्याशी पूर्व डीएसपी नवनीत हेम्ब्रम तक पहुँची। डीएसपी रहने के दौर में उनकी मिलनसार प्रकृति , ईमानदारी और निष्पक्ष कार्यशैली पर खूब उदाहरणों के साथ उनकी बातों को मैंनें भी चटकारे ले कर सुना। नवनीत जी एक अच्छे इंसान तो हैं ही , लेकिन क्या राजनीति और मतदाता उन्हें आत्मसात कर पायेगा और ख़ुद नवनीत जी जैसे सीधे सादे इंसान क्या राजनीति के रास्तों को आत्मसात कर पाएँगे ?
कुल मिलाकर इतनी ईमानदार चर्चा को सुनने के दौरान मैंनें फरमाइशें कर अपना बिल तो बढ़ा लिया , लेकिन पाकुड़ सहित लिट्टीपाड़ा महेशपुर सीटों पर बागियों की उनदोनों की आशंकाओं ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि राजनीति में भी अच्छे इंसानों पर कहीं कहीं ईमानदार चर्चा तो होती है।
खैर लिट्टीपाड़ा और महेशपुर सीट पर बाबुधन मुर्मू और नवनीत हेम्ब्रम अपनी छाप तो ज़रूर छोड़ेंगे। ये जीतें या हारें यह वक़्त बताएगा , लेकिन इनकी उपस्थिति परिणाम पर असर जरूर डालेगा।

मुद्दे गर्म कर गठबंधन के नाम पर सीट छोड़ना कार्यकर्ताओं को मंजूर नहीं , रंग को भंग कर सकते हैं पिंकू शुक्ला और समर्थक।

चुनावी घोषणा के बाद , विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की भी टिकटार्थी और उम्मीदवारों की भी पुष्ट अपुष्ट घोषणाएं आ और चुनावी चर्चे की हवा में गुम भी हो रही हैं।
राजनेताओं का जन्मसिद्ध अधिकार भी परम चरम पर है। पाले बैनर बदले जा रहे हैं, और बदलने की उम्मीद भी है।
इतनी बातें-नबातें-कुबातेँ और भीन्न बातें हैं कि लिखने में न चाहते हुए भी कई कई बार ” भी ” शब्द आ ही जा रहा है।
बंगलादेशी , भ्र्ष्टाचार आदि को मुद्दे बनाकर मैदान में जो पार्टी ताल ठोक रही थीं , उसमें गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे पर ज़्यादा असन्तोष नज़र आ रहा है। उधर एक तथाकथित अफ़वाह पर दुमका में एक ही पार्टी के दो गुटों के समर्थक आपस में भिड़ गए।
इधर पाकुड़ में डेमोग्राफी बदलने और घुसपैठ की बातों पर ताल ठोक गये राष्ट्रीय और बड़ी पार्टी के बड़े नेताओं ने पाकुड़ सीट आजसू को दे दिया की चर्चे पर ही लम्बे समय से भाजपा में असंतोष की बू सोसल मीडिया पर आ रही है।
बू नहीं महक कह लें , तो गठबंधन की इस सीट पर ये असन्तोष की महक कब बू बन जाय कहना मुश्किल है। भाजपा कार्यकर्ता ये गले नहीं उतार पा रहे कि इस सीट को बिना लड़े आजसू की झोली में डाल दी जाय।
चर्चा है कि पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष मुकेश शुक्ला उर्फ पिंकू शुक्ला निर्दलीय उम्मीदवार बन आजसू को उफ़ बोलवा दें। ऐसे जिलापरिषद उपाध्यक्ष के तौर पर किये गए उनके कार्यों को भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ता अनदेखा नहीं कर सकते। इसलिए अगर शुक्ला जी बगावत कर गये , तो कमल के मतदाताओं के भी बगावत की उम्मीद सोसल मीडिया पर दिखती है। हाँलाकि ये सभी आशंकाए हैं, लेकिन ऐसी आशंकाए ही तो चुनावी मौसम मनोरंजन की माध्यम होतीं हैं।
ऐसे बागियों की संख्या कम होगी ऐसा नहीं है। पूरे जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्र में कई पार्टियों को बागियों से निपटना होगा।
लेकिन बंगलादेशी घुसपैठ के मुद्दे को गर्म कर अगर भाजपा पाकुड़ सीट पर ही चुनाव न लड़े , तो सोसल मीडिया पर आ रही महक गठबंधन के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं दे रहा।
अभी चर्चा ये है कि पार्टी के अंदर सब सुलझा लिया जाएगा , लेकिन अगर बागियों ने नहीं माना तो गठबंधन का बना बनाया खेल बिगड़ सकता है।

मासिक अपराध गोष्ठी का हुआ आयोजन , पुलिस कप्तान ने दिए बिंदुवार निर्देश ।

अवैध कार्यों मे संलिप्त व्यक्तियों पर विधि समत आवश्यक कारवाई करने का निर्देश

पुलिस अधीक्षक, पाकुड़ की अध्यक्षता में आज दिनांक-08.10.2024 को मासिक अपराध गोष्ठी समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमे सितम्बर माह में किये गए कार्यो की समीक्षा के उपरांत सभी थाना/ओपी प्रभारी/संबंधित शाखा प्रभारी को निम्नांकित आवश्यक दिशा- निर्देश दिया गया
1. दिनांक 10.09.2024 को पाकुड़ जिला में आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम के दौरान कुल 86 आवेदन प्राप्त हुवा था, जिसमे से प्राथमिकता के आधार पर कुल 83 आवेदनों का त्वरित निष्पादन किया गया है। शेष 03 आवेदनों की जांच की जा रही है।
2. माह सितम्बर 2024 में प्रतिवेदित सभी कांडो का विस्तृत समीक्षोप्रांत लंबित कांडो का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।
3. सभी पुलिस उपाधीक्षक/ पुलिस निरीक्षक प्रभाग को लंबित सभी पर्यवेक्षण प्रतिवेदन एक सप्ताह के अंदर समर्पित करने का निर्देश दिया गया।
4. अवैध कोयला/ बालु/पत्थर के उत्खनन/परिवहन/भंडारण पर पूर्णतः रोक लगाने हेतु जिला खनन पदाधिकारी/अंचलाधिकारी से समन्वय स्थापित कर नियमित रूप से छापामारी अभियान चलाने एवं उक्त अवैध कार्यों मे संलिप्त व्यक्तियों पर विधि समत आवश्यक कारवाई करने का निर्देश दिया गया।
5. शहर में यातायात की व्यवस्था बनाए रखने एवं आए दिन हो रहे जाम की समस्या को दूर करने हेतु आवश्यक कारवाई करने का निर्देश थाना प्रभारी नगर एवं यातायात प्रभारी को दिया गया।
6. दुर्गा पूजा/झारखंड विधान चुनाव 2024 के मद्देनजर थाना क्षेत्र के उपद्रवियों/आदतन शरारती तत्वों/सक्रिय अपराधियों के विरूद्ध निरोधात्मक कारवाई करने का निर्देश दिया गया।
7. लूट/डकैती/चोरी/छिनतई जैसे घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु नियमित रूप से anti crime checking करने एवं बैंक/एटीएम/ज्वैलरी शॉप जैसे स्थानों के आस पास पेट्रोलिंग पार्टी को मुस्तैदी के साथ भ्रमणशील रहने हेतु निर्देशित किया गया।
8. सभी थाना प्रभारी को अपने स्तर से विशेष अभियान चलाकर लंबित वारंट/कुर्की का निष्पादन करने का आदेश दिया गया।
9. दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडाल एवं जुलूस मार्ग के सभी संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के साथ सतर्कता बरतने एवं सभी सुरक्षात्मक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया।
10. पूजा पंडाल में चोरी/छेड़खानी जैसे घटनाओं पर निगरानी रखने हेतू पपर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया गया।
11. आगामी झारखंड विधान सभा चुनाव के मद्देनजर मतदान केंद्रों/बलों के आवासन हेतु चिन्हित स्थानों पर पानी/शौचालय/बिजली इत्यादि की व्यवस्था एवं अन्य तैयारियों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।
12. अंतरराज्य/अंतरजिला चेकपोस्ट पर सघन वाहन जांच चलाने का निर्देश दिया गया।
13. थाना में आने वाले शिकायतकर्ता को बिना परेशान किए उनकी समस्या को प्रथमिकता के आधार पर सुनने एवं जांचोपरांत त्वरित निराकरण करने का आदेश दिया गया।

एक सेल्यूट तो बनता है न , अपने जांबाज पहरेदारों के नाम ?

शहर , नगर , गाँव , रास्ते , दुकान या कहीं और कोई अपराध हो जाता है तो आम आदमी सबसे पहले पुलिस को कोसता है। लेकिन जब यही पुलिस किसी असम्भव से लगने वाले अपराध का उद्भेदन करती है , तो बहुत कम लोग पुलिस की सराहना करते हैं।
पुलिस के पास कोई आम आदमी से ज़्यादा कुछ होता है तो सरकारी पावर और वर्दी।
हाँ ये वर्दी जो है , उसका ख़ौफ अपराधियों में ऐसा होता है, कि अगर किसी चौराहे पर एक वर्दी पहने चौकीदार भी खड़ा हो तो सौ अपराधी भी अपना रास्ता बदल लेते हैं।
पाकुड़ में पिछले दिनों चेन और कंगन उड़ाने के ऐसे अपराध हुए , कि आम लोगों की चैन और नींद गायब हो गई।
पाकुड़ पुलिस ने उन अंतर्राज्यीय अपराधियों को ट्रेस कर दूसरे राज्य से धर दबोचा। फिर मुख्य सड़क से और थाने से फलाँग भर की दूरी से दो स्कार्पियो गाड़ी लेकर अपराधी चलते बने। सी सी टी भी में अपराध के वीडियो देख आम लोगों को ऐसा लगा कि पाकुड़ में ये क्या हो रहा है !

अपराधियों ने अपराध कर हमारे जांबाज पहरेदारों को चुनौती दी , जवाब भी अपराधियों को जोरदार मिला , वो भी चंद दिनों में—-
पुलिस की टीम ने इन्हें भी चोरी गये गाड़ियों के साथ बिहार से धर दबोचा। पूरी टीम इसके लिए सराहना के पात्र हैं।
कई घटनाएं इन दिनों पाकुड़ में ऐसी हुईं , जिनपर पुलिस की त्वरित कार्यवाही सराहनीय रही। लेकिन सराहना करने में लोगों ने थोड़ी कंजूसी दिखाई , जबकि किसी अप्रिय घटना की जवाबदेही तय करने में जल्दबाजी दिखती है।
हाँ कुछ बातें हैं जो पुलिस पर सवाल उठाते हैं, लेकिन सफल करवाई पर एक आध लोगों को छोड़ पुलिस की सराहना में कंजूसी ही दिखाते हैं।

ये जो वर्दी के अंदर हाड़ माँस का एक पुतला नुमा आपको दिखता है न , ये हमारे समाज का एक ऐसा तपस्वी होता है, जो चाह कर भी त्यौहारों में अपने बच्चों और परिवार से दूर हमारी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। वे अपनी खुशियाँ भी अपनों से नहीं बाँट पाते।
अगर हम-आप त्योहारों में मिलकर खुशियाँ मनाएं , तो ये वर्दी वाला भी अपने परिवार के साथ साथ खुशियाँ मनाए।
लेकिन हम तो इंसान बाद में हैं , पहले जात पात में फिर सम्प्रदाय में बंटे हैं।
खैर तारीख़ें जो हमें नहीं समझा न सकीं , उसपर लिखना ही बेकार है। छोड़िए इन बातों को। है न ?
लेकिन पुलिस जो हमारे घर और समाज का ही एक इंसान है , और कानून का हाथ है , उनकी सफलता पर खुलकर सराहना कीजिए। जैसे अख़बार में पुलिस की सफलता की ये ख़बर लहराई है , वैसे ही लहराकर तारीफ़ पाकुड़ पुलिस टीम की होनी चाहिए।
मैं वसुलदारों की नहीं , इन अपराधियों को अपनी औकात और सही ठिकाने पर में लाने वाले पहरेदारों की टीम को एक सेल्यूट देने की बात कह रहा हूँ।
जय हिंद❤️

राजनीति में गठबंधन हो अच्छा है , लेकिन जमीन पर काम करनेवाले संगठन के कार्यकर्ता को भी मिले मौका। नहीं मिला टिकट तो निर्दलीय लडूँगा चुनाव : रसका हेम्ब्रम

*झामुमो के वर्तमान विधायक आजतक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दिया: रसका हेम्ब्रम*

*अगर लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी घोषित नहीं करती है तो मैं निर्दलीय लडूंगा चुनाव: रसका हेंब्रम*

*वर्तमान विधायक ने नही किया कोई काम जिस जाति समाज का वोट लिया उसे ही अपमान करने का काम किया है विधायक रसका हेंब्रम*

लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र को *कांग्रेस संथाल परगना आदिवासी प्रकोष्ठ के कोऑर्डिनेटर रसका हेम्ब्रम* ने कहा कि पिछले 5 वर्षो से मैने यहां के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कांग्रेस संगठन को जोड़ने का कार्य किया हूं अब समय चुनाव का है मैने अपनी दावेदारी कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष पेस कर दिया हूं चूंकि ये लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र मेरा घर भी है और जब मैं आर्मी में था तब यहां के आदिवासी मुस्लिमो की स्थिति को देखकर मुझे बड़ा अजीब लगा तब जाकर मैंने इस क्षेत्र की सेवा के लिए मैंने 2019 में अपने नौकरी को त्याग कर दिया था। *कांग्रेस कोऑर्डिनेटर रसका हेम्ब्रम* ने कहा कि 1977 से यहां जेएमएम और एक ही परिवार का राज चल रहा और सबसे दुखद बात है की इस क्षेत्र के आदिवासी और मुस्लिमो को 100 प्रतिश्त वोट मिलता रहा है लेकिन विधायक ने इस समाज के लिए कोई काम नही किया और न ही सम्मान दिया उल्टे जिस समाज का वोट नही मिलता है उसी समाज को मालिक बना दिया जो सीधे सीधे लिट्टीपाड़ा के मुसलमानो के साथ धोखा है मुस्लिम समाज को अपमानित करने का काम किया है यहां न रोजगार का कोई व्यवस्था किया गया है न तो कोई कॉलेज, अस्पताल, सड़क है लिट्टीपाड़ा की जनता पानी पानी को तरस रहा है लेकिन विधायक जी के 4 सलाहकार जो केवल इस क्षेत्र को दुहने में लगे हुए है आज खदान लीज ग्राम सभा के नाम पर विधायक जी का बिना आदेश नही होता है यहां के खदानों में बाहरी लोग नौकरी करते है कभी इस दिशा में विधायक जी का पहल नही रहा है इस क्षेत्र में मुस्लिमो आदिवासियों की संख्या काफी तादाद में है लेकिन विधायक जी उसे खुश रख रहे है जिसका वोट न कल मिला था न आज मिलेगा इन सब बातो को मैंने अपने आलाकमान के समक्ष रख दिया है पार्टी ने अगर उचित समझा तो मुझे टिकट देगी अन्यथा मैं अपने कार्यकर्ता समर्थको से बात कर निर्दलीय चुनाव लडूंगा

हम तुम्हें जीने सीखा देंगे , तुम आओ तो सही : अजहर

*रविवार को दूसरे दिन भी आजसू पार्टी के कार्यकर्ताओं ने निकाला पदयात्रा विभिन्न पंचायत का किया दौरा*

पाकुड़ आज दूसरे दिन भी आजसू पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकाला यह पदयात्रा आजसू युवा नेता अजहर इस्लाम की अध्यक्षता में पाकुड़ सदर प्रखंड के गंधाईपुर से निकाली गई गंधाईपुर होते हुए नवदा पंचायत में इसका समापन किया गया इस पदयात्रा में हजारों आजसू कार्यकर्ता शामिल हुए। वही आजसू युवा नेता सह समाजसेवी अजहर इस्लाम और आजसू पार्टी के समर्थक नवादा गांव में घर-घर घूम कर लोगों की समस्याओं से अवगत हुए वही आजसू पार्टी के पदयात्रा अभियान में लोगों की भीड़ देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की पाकुड़ विधानसभा की जनता इस बार परिवर्तन करने के मूड में है आजसू युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष मोहसिन अली ने कहा आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो के नीतियों से प्रभावित होकर युवाओं आजसू पार्टी से जुड़ते जा रहे हैं इस बार पाकुड़ विधानसभा की जनता परिवर्तन का मूड बन चुकी है यह भीड़ देखकर आपको अंदाजा हो जाएगा यह देखकर अन्य सम्भावित उम्मीदवार सोचने पर विवस हो गई है, अब देखना यह है की जनता अपना बहुमूल्य वोट किसे देती है और विधानसभा भेजने का काम करती है मौके आजसू युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष मोहसिन अली समाजसेवी मजहर इस्लाम चाचकी पंचायत के मुखिया मुख्तार शेख उप मुखिया हाजीकुल शेख सहित हजारों आजसू कार्यकर्ता उपस्थित थे।
पदयात्रा हो या जनसभा , सभी जगह जुटती भीड़ मतदान में कितना परिवर्तित होगा यह तो उसे वक़्त बताएगा , लेकिन अजहर का एक समाजसेवी के रूप में समाज से मिलने का तरीका जरूर आकर्षक और दिल को छूने वाला है।

सेफ जोन बना हुआ है , हिरणपुर-कोटालपोखर रूट बिना चलान के ओभरलोड पत्थर गाड़ियों के लिए।

रूप के ईश में वी (विशेष) भाई पीन लगाकर ऐसा पठन पाठन लगा रहे हैं , कि हिरणपुर से कोटालपोखर तक के सभी अलग अलग तरह क्षेत्र के बड़का बाबूओं को मिलाकर बड़े बड़े खेल कर रहे हैं। पांडे बाबा के आसन पर खबरनबीस भी दुर्गापूजा और इससे पहले भी माता लक्ष्मी के प्रसाद ग्रहण करने से पीछे नहीं है। मामला बस वही है ओभरलोड पत्थर लदे गाड़ियों को सुविधाशुल्क के एवज में बिना चलान के चेकपोस्ट से भवसागर पार लगाना। ऐसे में माता लक्ष्मी सबपे मेहरबान है। अब ये मेहरबानी कितने ऊपर तक पहुँचती है , यह तो किसी पूजा सिंघल के फिर गिरप्त में आने के बाद ही पता चलेगा।
ऐसे पाकुड़ और साहेबगंज जिला में यह कोई नई बात नहीं है। पूजा सिंघल मामले को कोई अभी तक भूल पाया होगा , यह सम्भव नहीं , लेकिन अपार धन की चाहत ने #ED @CBI सब के भय को नकार दिया है।
पाकुड़ साहेबगंज के दर्जनों रास्तों पर सरकारी राजस्व को चपत लगाने की परम्परा बदस्तूर जारी है। हिरणपुर – कोटालपोखर के रास्ते ये युद्ध स्तर पर चल रहा है। कभी कभी एक आध कारवाई कर आईवास भी किया जाता है , लेकिन …..
कुछ रिकॉडिंग और सबूत कुछ लोगों के पास उपलब्ध है, जो इस गोरखधंधे की पोल खोलता नज़र आता है।

पचुवाड़ा सेंट्रल कोल ब्लॉक की पीएसपीसीएल एवं एमडीओ डीबीएल ने निकाली स्वच्छता रैली

पाकुड़: स्वच्छता ही सेवा के तहत संपूर्ण भारत को स्वच्छ बनाना है कार्यक्रम के तहत पचुवाड़ा सेंट्रल कोल ब्लॉक की आवंटी पीएसपीसीएल एवं एमडीओ कोल कंपनी डीबीएल ने मंगलवार को अमड़ापाड़ा प्रखंड के अमीरजोला स्थित प्रशासनिक कार्यालय के पास से सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा मंदिर तक स्वच्छता रैली निकाली गई। इस दौरान स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया गया, और इस अभियान से जोड़ने का आग्रह किया गया। इसके पूर्व भी डीबीएल एवं पीएसपीसीएल द्वारा अपने कोयला उत्खनन क्षेत्र आलूबेड़ा स्थित कार्यालय एवं आसपास स्वच्छता अभियान चलाया गया वहीं पौधारोपण कार्यक्रम भी किया गया। इस स्वच्छता रैली का नेतृत्व पीएसपीसीएल के एजेंट राकेश कुमार सिंह ने किया। पीएसपीसीएल के एजेंट राकेश कुमार सिंह ने बताया की इस दौरान उपस्थित कोल कंपनी के कर्मियों के द्वारा गांधी जी के सपनों का भारत बनाएंगे चारों तरफ स्वच्छता फैलाएंगे, चलाओ जोरो से स्वच्छता अभियान तभी तो बनेगा हमारा भारत महान, हम सबका यही सपना स्वच्छ भारत हो अपना आदि के नारे लगाए गए। इस दौरान पीएसपीएसीएल के एजेंट राकेश सिंह ने बताया कि स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के तहत पीएसपीसीएल एवं डीबीएल संयुक्त तत्वाधान में स्वच्छता के प्रति पैदल मार्च कर जनसंपर्क अभियान चलाया गया। अभियान के माध्यम से लोगों में जन सूचना देना है कि स्वच्छता ही सरवोपरि है। उक्त रैली में पीएसपीसीएल के मैनेजर केके सिंह, डीबीएल के मैनेजर राजकुमार डोंडा, भावेश दिवाकर, संजय दास, निपेंद्र कुमार सिंह, अमन कुमार, राजू महतो, अनूप सानडा, आर के मुखर्जी एवं इस स्वच्छता अभियान से जुड़े कमेटी के सभी सदस्य मौजूद थे। उक्त रैली आमीरजोला स्थित डीबीएल कार्यालय से निकलकर मुख्य मार्ग होते हुए दुर्गा मंदिर तक गई। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया.
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समाजसेवी लुत्फ़ल हक को वर्ष का सबसे प्रेरणादायक अवार्ड से नावाजा गया

:–यु ए ई और भारत के मिनिस्टर ने अपने हाथों से किया सम्मान

:–बॉलीवुड के मशहूर सिंगर कुमार सानू ने लुत्फ़ल हक के नाम के कसीदे पढ़े

पाकुड़-पाकुड़ के मशहूर समाज सेवी लुत्फ़ल हक को दुबई के पांच सितारा होटल में वर्ष का सबसे प्रेरणादायक सामाजिक कार्यकर्ता का अवार्ड से नावाजा गया है.श्री हक को बतौर चीफ गेस्ट यूनाइटेड अरब एमीरेट्स के पूर्व मंत्री डॉक्टर मोहम्मद सईद अल किंदी,भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु,बिहार के केबिनेट मंत्री अशोक चौधरी,दुबई के अध्यक्ष एवं सी ई ओ चेम्बर मोहम्मद अली रशीद लूटाह एवं बॉलीवुड के मशहूर सिंगर कुमार सानू ने अपने हाथों से सम्मानित किया है.अतिथियों ने मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर उज्जवल भविष्य की कामना की.अतिथियों ने अपने सम्बोधन में कहा की भारत के सबसे एक छोर में बसा झारखंड के पाकुड़ शहर के लुत्फ़ल हक ने जिस तरह गरीबों,जरूरतमंदो एवं जाति मजहब से उठकर जो काम कर रहें है वह वाकई काबिल ए तारीफ है.बिना कोई भेदभाव और निःस्वार्थ से काम करना अपने आप में मिशाल क़ायम करने का काम कर रहे है. उल्लेखनीय है की दुबई के पांच सितारा होटल में इंडो अरब लीडर्स समिट एंड अवार्ड 2024 का कार्यक्रम आयोजित किया गया था.जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के पचास लोगों को सम्मानित किया गया. जिसमे भारत के मशहूर मशहूर डॉक्टर,व्यवसाई,शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता,साइंटिस्ट, इंजीनियर आदि को सम्मानित किया गया.इधर अवार्ड मिलने के बाद समाजसेवी लुत्फ़ल हक़ ने मीडिया को बताया की प्रतिदिन दर्जनों फरियादी आते है उन्हें कभी भी खाली हाथ नहीं लौटाता हूँ.कभी कभी मेरे पॉकेट में रूपये नहीं होने के बाद भी दूसरे से मदद लेकर गरीबों को बाँट देता हूँ.क्यूंकि गरीबों को मदद करने से कुछ भी कमी नहीं आएगी. उन्होंने कहा इसी का प्रतिफल है की आज मुझे देश के साथ साथ विदेश में भी सम्मान मिल रहा है.

कौन है लुत्फ़ल हक़…..

लुत्फ़ल हक़ पश्चिम बंगाल और झारखंड के सीमा पर बसा ओदित्य नगर के एक गरीब परिवार में जन्म लिया.गरीबी इतनी की अगर दोपहर का भोजन किया तो शाम में चूल्हा जलाने के लिए सोंचना पड़ता था की रात में क्या खाना खाऊंगा. जिसे लेकर लुत्फ़ल ने बंगाल छोड़कर झारखंड के पाकुड़ पहुँच गए. इसके बाद परिवार चलाने के लिए एक छोटी सी किताब की दुकान कर लिए. जबकि लुत्फ़ल हक पढ़े लिखें नहीं होने के बाद भी किताब बिक्री कर रहे थे.जब उससे भी परिवार को चलाने में दिक्क़त हो रही थी पत्थर खदान और क्रेशर में मजदूरी करने लगे और धीरे धीरे अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर पाकुड़ सबसे बड़े पत्थर व्यवसाई के रूप में जाने जाते है. सबसे अधिक झारखंड सरकार को टैक्स भी देते है. पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार रेलवे स्टेशन पर गरीब और जरूरतमंदो को निःशुल्क भोजन कराते है. कोरोना काल में सबसे अधिक राशन बाँटने, ऑक्सीजन सिलिंडर देने,गरीबों और जरूरतमंदो को ठण्ड के मौसम में कंबल बाँटने का,पर्व त्यौहार में हमेशा बढ़चढ कर सहयोग करते है.