*भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय महीना है मलमास, इस महीने मंत्र जप और अध्यात्म का है खास महत्व*
*आज का पंचांग 👇*
*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
18.05.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ सौम्यायन सौम्यगोल: ग्रीष्मऋतु। श्रीसूर्य: उत्तरायण।
हिन्दी माह : अधिक ज्येष्ठ
पक्ष : शुक्ल
तिथि : द्वितीया
दिन : सोमवार
नक्षत्र : रोहिणी
योग : सुकर्मा
करण : बालव/कौलव
सूर्योदय : सुबह 05:22 बजे।
सूर्यास्त : शाम 06:38 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेंगे।
आज का सूर्य : वृष राशि में।
आज का चंद्रमा : वृष राशि में।
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*आज का दिशा शूल :* पूर्व।
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*आज का राहुकाल :*
प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक।
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*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज अधिकज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। चंद्र दर्शन, आज रात्रि 1:00 पर चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
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*आज का खास:*
*शुरू हुआ मलमास, एक महीने तक शादी-मुंडन समेत सभी मांगलिक कार्यों पर रहेगा रोक*
*भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय महीना है मलमास, इस महीने मंत्र जप और अध्यात्म का है खास महत्व*
रविवार 17 मई से मलमास (पुरुषोत्तम) मास शुरू हो गया है। यह आगामी 15 जून तक चलेगा। मलमास में जातकर्म, नामकरण, अन्नप्राशन, गृहारंभ, गृहप्रवेश, चौलमुण्डन, उपनयन, नई यात्रा, छेवका, तीलक, शगाई, विवाह, वर-कन्या वरण, जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। यह माह भगवान विष्णु की आराधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित है, जिसमें दान-पुण्य का विशेष महत्व है। पुरुषोत्तम मास को मलमास अथवा अधिक मास भी कहा जाता है। मलमास हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण समय है। यह वह अतिरिक्त महीना है जो हर तीसरे वर्ष चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जुड़ता है जो ऋतुओं को बिगड़ने से बचाता है। यह महीना
धार्मिक दृष्टिकोण से भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की आराधना के लिए समर्पित है। मलमास होने का मुख्य कारण सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के समय का अंतर है। भारतीय पंचांग इन दोनों गणनाओं के संतुलन पर आधारित है। ज्ञात हो कि सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच हर साल लगभग 11 दिन का अंतर आ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि इस 11 दिन के अंतर को ठीक न किया जाए, तो कुछ ही सालों में हमारे त्यौहार और ऋतुओं का तालमेल पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इस समय के अंतर को पाटने के लिए, हर तीसरे साल चंद्र कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को पुरुषोत्तम मास, मलमास या अधिक मास कहते हैं। हिंदू पंचांग में जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांति कहा जाता है।जिस चंद्रमा के महीने में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती यानी सूर्य राशि नहीं बदलते हैं, उसे ही अधिक मास या मलमास कहते हैं। इस व्यवस्था के कारण ही हमारे त्योहार जैसे दीपावली, दशहरा, मकर संक्रांति हमेशा अपनी निश्चित ऋतुओं में ही आते हैं।
*15 जून तक चलेगा मलमास, बेहद फलदयी होंगे ये तीन काम*
श्रीहरि को समर्पित पुरुषोत्तम मास रविवार से शुरू हो गया है। यह आगामी 15 जून तक चलेगा। मलमास में भगवान पुरुषोत्तम अर्थात नारायण की पूजा उपासना का विशेष महत्व है। मलमास में इन्हें मालपुआ का भोग लगाने का खास महत्व रहा है। मलमास के दरमियान तीर्थदर्शन, गंगास्नान, और मंत्र जप विशेष लाभप्रद होते हैं ।
*क्यों कहा जाता है इसे पुरुषोत्तम मास? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर महीने के लिए एक स्वामी देवता निर्धारित हैं। लेकिन इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी नहीं थे, इसलिए इसे मलमास (अशुद्ध मास) कहा गया। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और इसे अपना प्रिय महीना बनाया। ताकि इस समय में की गई आध्यात्मिक उन्नति का फल अनंत हो सके। इसीलिए इस महीने में की गई भक्ति का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है।
*मलमास के दौरान पालन किए जाने वाले मुख्य नियम*
मलमास में प्रतिदिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या पुरुषोत्तम सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस महीने में दीपदान, वस्त्र दान और अन्न दान का विशेष महत्व है। इस महीने विशेष रूप से मिठाई, मालपुए का दान करना शुभ माना जाता है। इस समय भागवत पुराण या रामायण का पाठ करना या सुनना बहुत उत्तम माना गया है। इस मास में संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यकारी होता है।
*मलमास में क्या नहीं करें*
मलमास में नामकरण, अन्नप्राशन, गृहारंभ, गृहप्रवेश , उपनयन, मुंडन तीलक, शगाई, विवाह वर-कन्या वरण समेत अन्य मांगलिक व शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। मालामश के दरमियान नई यात्रा और नए कारोबार का भी शुभारंभ नहीं करना चाहिए। मलमास में नई गाड़ी, नया मकान या जमीन खरीदने से बचना चाहिए। नए व्यापार की शुरुआत या बड़ा निवेश न करें। मलमास में तामसिक भोजन और अशुद्ध आचरण से दूर रहना चाहिए।
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आलेख…
*पं. चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुण्डली, वास्तु व कर्मकांड परामर्श*
*संपर्क : 9905507766*
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