Tuesday, June 25, 2024
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ओरो का दर्द देखा, तो मैं अपना दर्द भूल गया : अमन

हाँ यही मौन सम्वेदना अमन को सचमुच अमन बनाता है। एक दुर्घटना में बचपन में ही अपने पिता से बिछड़ जानेवाले इस लड़के का मौन दर्द उसे औरों से अलग बनाता है। एक सामान्य सा लड़का ( अमन कुमार ठाकुर )अमन आर्य बहुत ही असामान्य सा काम करता है। जहाँ आज लोग अपने पड़ोसी तक के दर्द और समस्याओं से अनभिज्ञ रहते हैं, वहीं अमन दूर बहुत दूर से किसी बेजुबान की कराह भी सुन लेता है। अगर कहीं कोई बेजुबान कराह रहा होता है, तो अमन के दिल में एक हूक सी उठती है, उसे ऐसा लगता है, जैसे कोई बहुत आर्त आवाज़ से मदद के लिए पुकार रहा हो, और अमन अकेले या अपने साथ पागल दीवानों की टीम के साथ वहाँ पहुँच जाता है।

मैं पागल, दीवाना या असामान्य शब्दों का प्रयोग अमन जैसे खूबसूरत नाम के लिए इसलिए कर रहा हूँ, क्योंकि एक सामान्य आदमी को अगर रास्ते पर चलते कोई जानवर या आवारा घायल बीमार स्ट्रीट डॉग दिख जाय तो मेरे जैसा सामान्य आदमी एक दूरी बनाते हुए नाक पर रुमाल रख निकल जाता है।सम्वेदना का एक भाव तो छोड़ दें , बल्कि कोई अपशब्द बुदबुदाते वहाँ से दूर निकल जाते हैं। लेकिन यहीं उस जानवर की मौन कराह और कष्ट की चीत्कार अमन के कानों में शोर मचा देता है, उसके कोमल हृदय पर मानो कोई छचार सी लगती हो, और फिर अमन उसके इलाज में अपने से स्वयं के पास उपलब्ध दवाइयों और ड्रेसिंग के समान के साथ लग जाता है। जिसके दर्द की तरफ़ हमारी संवेदनहीनता देखने तक से रोकती है, वहाँ अमन उस बेजुबान कुत्ते की इलाज के साथ साथ सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करता है। जब तक मरीज ठीक न हो जाय लगातार उसका इलाज और सभी व्यवस्था करता है।

अब तो अमन के असामान्य व्यवहार ने बहुत सारे लोगों में कुछ सम्वेदना कुरेद कर भरी है, लेकिन घायल जानवरों की ख़बर अमन तक पहुँचाने की।

खैर अमन के इस संवेदनशीलता ने उन्हें हम जैसों से अलग एक पहचान दी है, लेकिन हम इसे भी अनदेखा करते हैं, लेकिन अमन कभी घायल जानवरों को अनदेखा नहीं करता, और यही अमन को हमसे अलग करता है, तथा असामान्य बनाता है।

जुबान वालों के आशीर्वाद और दुआओं में भी कभी कभी दिखावा और स्वार्थ होता है, लेकिन बेजुबानों और परित्यक्तों की निर्दोष और निस्वार्थ मौन दुआएं “अमन” जी भरकर कमा रहा है, अगर एक पन्ति में कहे तो एक इंसान अपनी इंसानियत को जी रहा है, जिसे पाकुड़ वाले “अमन” पुकारते हैं। एक बात और कि इन बेजुबानों को वोट देने का भी अधिकार नहीं, इसलिए “अमन” भी बिना वेबजह के आरोपों के झंझट से दूर निश्चिंत होकर अपने सेवा कार्य में व्यस्त है।

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