*पाकुड़ में DMFT फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने उठाई जांच की मांग
* पाकुड़ के हर बुद्धिजीवी इस आरोप पर एकमत।
* कुछ हो पायेगा ? शायद नहीं।
झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों को आवंटित की गई योजनाओं में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रबल संभावना बनी हुई है।
कागज पर सिमटी योजनाएं, RTI से भी नहीं मिल रही जानकारी
सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष रूप से विशेष प्रमंडल कार्यालय (Special Division) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“DMFT फंड का दुरुपयोग कर कई योजनाओं को केवल कागज और कलम तक सीमित रखा गया है। धरातल पर काम दिखाए बिना ही राशि की निकासी कर ली गई है। जब इन योजनाओं के संबंध में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग द्वारा सूचना देने में आनाकानी की गई, जो दाल में कुछ काला होने का स्पष्ट संकेत है।”
वेबसाइट पर डेटा गायब, ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता का अभाव
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2020 के बाद से कोई ऑडिट रिपोर्ट या जनहित से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की गई है। वर्ष 2020 के बाद से कई अधिकारी अध्यक्ष पद पर आए और गए, लेकिन खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं करना संदेह पैदा करता है।
बोकारो की तर्ज पर पाकुड़ में भी बड़े घोटाले का अंदेशा
हाल ही में बोकारो जिले में DMFT फंड में सामने आए कथित घोटाले का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 631 करोड़ रुपये की निकासी और कुल 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं। पाकुड़ जिले में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट की आशंका है।
क्या है DMFT फंड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि DMFT (District Mineral Foundation Trust) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
• फंडिंग: खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10% से 30% हिस्सा इस फंड में जमा करती हैं।
• उद्देश्य: इस राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए होना चाहिए।
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर पिछले 5 वर्षों के DMFT फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता की कमाई के पैसे का हिसाब मिल सके।