Wednesday, August 5, 2026
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*मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों के बीच अंतर-विद्यालय प्रतियोगिता संपन्न, विज्ञान प्रदर्शनी और रंगोली में राज स्कूल के छात्रों ने दिखाया दम*


​समग्र शिक्षा, पाकुड़ के तत्वावधान में आज दिनांक 30.04.2026 को डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (राज स्कूल), पाकुड़ में एक भव्य अंतर-विद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय (CM SOE) के कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राओं का बौद्धिक एवं मानसिक विकास करना है।
​पूर्वाह्न 09:00 बजे से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में जिले के तीनों उत्कृष्ट विद्यालयों (District CM SOE, CM SOE Girls, और CM SOE KGBV) के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी सुश्री अनिता पूर्ति की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। उनके साथ एडीपीओ (ADPO) श्री पीयूष कुमार और एपीओ (APO) श्री रघुवर तिवारी ने भी उपस्थित रहकर प्रतिभागी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनके प्रयासों की सराहना की।
​प्रतियोगिता के मुख्य आकर्षण
जिला शिक्षा पदाधिकारी – सह – जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा जारी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज के आयोजन में विज्ञान प्रदर्शनी, रंगोली, क्विज, निबंध और ऐंकरिंग (मंच संचालन) जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
​कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण यह रहा कि मंच संचालन (ऐंकरिंग) का कार्य भी स्वयं विद्यालय के बच्चों द्वारा ही किया गया, जिसने सभी अतिथियों का मन मोह लिया।
​साइंस एक्सपो (विज्ञान प्रदर्शनी) और रंगोली प्रतियोगिता में राज स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
​शिक्षकों का योगदान
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में डिस्ट्रिक्ट सीएम एसओई के प्रिंसिपल श्री राजू नन्दन साहा के नेतृत्व में विद्यालय के शिक्षकों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम शिक्षक सुप्रिय दत्ता, निर्मल ओझा, मृणाल कांति सरकार, राजदीप मिश्रा, अजीमुद्दीन शेख, रंजीत भगत, शिउली कुमारी, और मीना हेम्ब्रम आदि के सक्रिय सहयोग से तीनों विद्यालयों के बीच यह प्रतियोगिता अत्यंत पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्राओं एवं शिक्षकों के लिए जलपान की उत्तम व्यवस्था आयोजक विद्यालय द्वारा की गई थी।

प्रतियोगिता के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया, जिससे उनका मनोबल काफी ऊँचा हुआ।
​ज्ञात हो कि यह आयोजन एक व्यापक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। अगला आयोजन 8 मई और 15 मई 2026 को क्रमशः सीएम एसओई गर्ल्स और सीएम एसओई केजीबीवी में प्रस्तावित है।

*90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर से निकाली गई प्रभात फेरी*

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे की अध्यक्षता में नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर से भगतपाड़ा, हाटपाड़ा, बिरसा मुंडा चौक होते हुए डॉ भीम राव अंबेडकर चौक होते हुए वापस पाकुड़ व्यवहार न्यायालय तक प्रभात फेरी निकाली गई। उक्त प्रभात फेरी में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, प्रभारी न्यायधीश विजय कुमार दास स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, जिला बार एसोसिएशन के सचिव दीपक ओझा, डीएसपी जितेंद्र कुमार, सिविल सर्जन डॉ सुरेन्द्र कुमार मिश्रा,प्रशानिक अधिकारी,डीसीपीयू व्यास ठाकुर, एसडीपीओ दयानंद आजाद, लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के चीफ़ सुबोध कुमार दफादार डिप्टी चीफ़ मो नुकुमुद्दीन शेख संजीव कुमार मंडल एलएडीसीएस के सहायक अज़फर हुसैन विश्वास, गंगाराम टुडू पैनल अधिवक्ता, मिडियटर अधिवक्ता न्यायालय कर्मी स्थाई लोक अदालत के सदस्य, डिस्ट्रिक प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर पीसीआई मो अनीश पैरा लीगल वॉलिंटियर्स भाग लिए। उक्त कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत कानून से वंचित एवं योग्य व्यक्ति तक पहुंच कर आगामी 90 दिनों तक नुक्कड़ नाटक एवं शिविरआयोजित कर कानून की जानकारी दी जाएगी। जिसमें पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के कर्मी, पुलिस अधिकारी पैरा लीगल वॉलिंटियर्स द्वारा समाज के वंचित लोगों को तक पहुंच कर समाज के मुख्य धारा से जोड़ने,कानूनी एवं सरकार के योजनाओं से जोड़ा जाएगा।90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता अभियान के तहत प्रभात फेरी निकाल कर बाल श्रम ,बाल विवाह, दहेज जैसी कुप्रथा रोकने को लेकर घर-घर तक योग्य व्यक्ति को न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जागरूक की गई। सचिव रूपा बंदना किरो ने बताया कि आगामी 90 दिनों तक नुक्कड़ नाटक शिविर के माध्यम से जिले के सभी प्रखंड एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता के साथ-साथ समाज में हो रहे कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजन के साथ बच्चों के खिलाफ कई प्रकार के अपराध जैसे पोक्सो एक्ट पर घर-घर तक पहुंच कर जागरूकता अभियान चलाई जाएगी।

तंत्र से कई सौ करोड़ की अवैध निकासी के षड्यंत्र की जमीन बन गया है पाकुड़ , उपायुक्त महोदया ज़रा संभल कर रहिएगा 🙏 दूसरे के पाप का घड़ा कहीं आपके सर पर न फोड़ दे षड्यंत्रकारी।

पाकुड़ तंत्र साधना की जमीन रही है , लेकिन सरकारी स्तर पर यह षड्यंत्र की अब जमीन बन गई है। एक निरीह देखने में असमर्थ आईएएस को जैसे झारखंड में एक षडयंत्र करनेवाले अधिकारी सहयोगी ने फँसा दिया , और उन्हें अशक्त अधिकारी को जाँच एजेंसियों का सामना करना पड़ रहा है , उसी सहयोगी अधिकारी ने पाकुड़ में एक तीन लिपिकों के साथ ऐसा तिकड़ी बना रखा है कि घोटाले पर घोटाला नजर आ रहा है। इसकी परतें जब खुलेगी तब जाँच एजेंसियों की बाढ़ सी पाकुड़ में नजर आएगी।
ऐसे तो 12 करोड़ का एक घपला सामने आया है , जो वास्तव में 16 करोड़ का है। मामला सामने आने के बाद इसकी जाँच उस कार्यालय उन दो लिपिकों से कराई गई, जो स्वयं इस जाँच के घेरे में थे।
इससे आप जाँच की मौलिकता को समझ सकते हैं।
इसी तरह का घपला ITDA के अलावे DMFT में है।
DMFT में लगभग चार सौ करोड़ से भी ज्यादा , जी महोदय हाँ आपने सही पढ़ा 400 करोड़ से भी ज्यादा की निकासी हुई है। ये स्वयं एक केंद्रीय एजेंसियों के जाँच की माँग कर रहा है। इसमें एक अधिकारी और तीन लिपिक संदेह के घेरे में है। हँलांकि सबके तथाकथित सरदार सरकारी कागजों पर यहाँ से स्थानांतरित हो गये हैं, लेकिन अभी भी हर मामले और निर्देशों में उनका असर बना हुआ है।
इसका प्रमाण है आरोपी से ही आरोपों का जाँच कराना और झारखंड के मुख्यसचिव के पत्रांक 252 दिनांक28/4/26 तथा सरकार के वित्त विभाग के सचिव का पत्रांक 1300 दिनांक 8/4/26 के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए पूर्व उपायुक्त द्वारा 27 लिपिकों का स्थानांतरण की जगह अतिरिक्त प्रतिनियुक्ति करना साथ ही उन लिपिकों को इससे भी अक्षुण्ण रखना जो ऐसे घपलों के प्रणेता हैं। इसमें एक आश्चर्य तो यह भी है कि ITDA , DMFT तथा जिला नजारत के लिपिक को (जो एक ही व्यक्ति है) इस प्रतिनियुक्ति के आदेश में छूना तक नहीं।
जबकि सरकार के मुख्य सचिव और वित्त सचिव के आदेश लिपिकों के स्थानांतरण का स्पष्ट था, तो कारवाई प्रतिनियुक्ति तक क्यूँ सिमटी रही , और जहाँ से ऑल रेडी अवैध निकासी की बात सामने आ चुकी है , वहाँ लेखापाल और लिपिकों को छुवा तक न जाना क्या संदेश देता है !
वर्तमान नवपदस्थापित उपायुक्त महोदया अगर इन बातों पर ध्यान न दें तो एक अँधे आई ए एस को फँसा देने वाले पदाधिकारी आपको भी कहीं ग़फ़लत में रखकर …….
जाँच एजेंसियों के सामने तो विलम्ब का जवाब तो आप को ही देना पड़ेगा , क्योंकि कोई उस समय आपके साथ खड़ा शायद ही रहे।
माननीय महोदया ये जमीन मन्त्र और तंत्र की विशेष तो है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे षड्यंत्र विशेष भी बना दिया है।
ये षड्यंत्रकारी जूठन के टुकड़े इतने जगह डालते हैं कि सब आपसे गोपनीय रखा जाता है।
लेकिन हम तो बीचवाले हैं , ये तालियाँ बजा बजा कर आपको सचेत करने हेतु आय-हाय तो करेंगे ही , मेरा स्वभाव जो ठहरा।
और हाँ एक निमंत्रण की ढोल भी पीटते हैं, अरे ओ भाई जाँच एजेंसी आप कोषागार में फिलवक्त घोटाले की जाँच कर रहे हैं, बहुत जल्द आपको शायद पाकुड़ भी आना पड़े , तो आप भी तैयार रहें। जाँच के निर्देश मिलने से पहले मेरा आमंत्रण है यहाँ की जनता की तरफ़ से।

*जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, पाकुड़ में ग्यारहवीं कक्षा की प्रवेश परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त संपन्न*

​जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (District CM SoE), पाकुड़ में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के लिए ग्यारहवीं कक्षा (कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय) की प्रवेश परीक्षा आज दिनांक 28 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक और पूर्णतः शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
​विद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक ‘खैरियत प्रतिवेदन’ के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा में कुल 368 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 233 परीक्षार्थियों ने उपस्थित होकर परीक्षा दी, जबकि विभिन्न कारणों से 135 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।
​परीक्षा को पूर्ण रूप से पारदर्शी, सुव्यवस्थित और कदाचार मुक्त बनाने के लिए विद्यालय प्रबंधन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरी परीक्षा प्रक्रिया विद्यालय के प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक श्री राजू नन्दन साहा के कुशल नेतृत्व एवं कड़े दिशा-निर्देशन में आयोजित की गई।
​परीक्षा के सफल एवं सुचारू संचालन में सहायक केंद्राधीक्षक श्री सुशील कुमार झा की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। इसके अतिरिक्त, परीक्षा कक्षों में अनुशासन बनाए रखने और कदाचार रोकने के लिए प्रतिनियुक्त वीक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाई।
​इस अवसर पर वीक्षक के रूप में मुख्य रूप से:
​नसीम दफादार
​श्री आशुतोष कुमार
​श्रीमती शिउली घोष
​श्रीमती अग्नेस मराण्डी
​मो. मुकुल हुसैन
​श्रीमती सुमिता हेम्ब्रम
​श्री मृणाल कांति सरकार
​सहित अन्य सभी शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। इन सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही यह सुनिश्चित हो सका कि पूरी परीक्षा बिना किसी व्यवधान के, शांतिपूर्ण और पूर्णतः कदाचार मुक्त माहौल में संपन्न हो।
​अंत में, प्राचार्य सह केंद्राधीक्षक श्री साहा ने परीक्षा के सफल और शांतिपूर्ण समापन पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया।

उपायुक्त मेघा भारद्वाज से मिलीं जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल, सुरक्षा व्यवस्था और किसानों के हित में सौंपा ज्ञापन

पाकुड़: पाकुड़ में उपायुक्त मेघा भारद्वाज के आगमन पर जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल ने गुलदस्ता भेंट कर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र की जनसमस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था और किसानों के हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
पिंकी मंडल ने गोपीनाथपुर क्षेत्र में अस्थाई पुलिस कैंप स्थापित करने की मांग उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस कैंप बनने से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना पर रोक लग सकेगी। ग्रामीण लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने गोपीनाथपुर स्थित बासलोई नदी में मिलने वाले लगभग 1200 मीटर लंबे प्राकृतिक नाले को पक्का कराने की मांग भी रखी। उन्होंने बताया कि नाला जाम रहने के कारण बरसात के दिनों में पानी खेतों में भर जाता है, जिससे हजारों एकड़ फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
पिंकी मंडल ने कहा कि यदि नाले का पक्कीकरण कराया जाता है तो जल निकासी व्यवस्था सुचारू होगी, किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी और क्षेत्र के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक निरीक्षण कर जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

उपायुक्त के आदेशों की भी कर्मचारी उड़ाते हैं धज्जियाँ , DMFT फंड का तो छोड़िये , अपना वर्दीभत्ता तक निगल जाते हैं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी। पाकुड़ में अंधेर है नई उपायुक्त महोदया। सुधारिये न पाकुड़ को । निवेदन है जनता की🙏

स्थानीय लोगों को ही DMFT सहित सभी Vacancy में प्राथमिकता मिलनी चाहिए क्योंकि पाकुड़ जिला झारखण्ड का अनुसूचित जिला है।
पाकुड़ जिला में DMFT मद से कितने कर्मी कार्यरत हैं। उनकी मासिक परिलब्धि (मानदेय) कितनी है। कर्मी कितने दिनों से कार्यरत हैं और इनका चयन का आधार क्या है। योजना चयन या निरीक्षण में इनकी भूमिका क्या है?
हाथकाठी हिरणपुर में बिना आवादी वाले जगह पर चार जलमीनार बन गये ,अब वहीं आसपास आदिवासियों की नन सेलेबल जमीन पर अवैध आवादी बसाई जा रही है। क्या इस पर सवाल नहीं उठाये जा सकते हैं।
इन सबका निरीक्षण और जाँच होगा भैया !
इन्हीं सब बातों पर बिना प्रभावित हुए ध्यान दिया जाय तो कारवाई के पर्याप्त प्रमाण मिल जाएंगे।
लेकिन क्या ऐसा हो पायेगा ?
यही ज्वलन्त सवाल है।
अगर इस सवाल का जवाब ढूँढने कोई निकले तो उसे कोई जवाब नहीं मिलेगा। इस DMFT फंड पर पूर्व उपायुक्त के समय मे न जाने कितने सवाल उठे ,लेकिन सवाल निरुत्तर और ऐसे में कारवाई विहीन रह गए।
पटना से आयातित कर्मी इसमें काम करेंगे लाख रुपये से ऊपर के वे वेतनभोगी होंगे , और स्थानीय युवा सड़क पर बेरोजगार भटकेंगे तो अषन्तोष तो स्वाभाविक रूप से उपजेगा। यहाँ हर विभाग में हर अनहोनी करनी चलता रहेगा , कोई कुछ कहे तो फिर वे प्रताड़ित किये जायेंगे।
उपयोगी , जानकर और सक्षम अधिकारी तथा कर्मचारियों को सेंटिंग पोष्ट पर उनकी उपयोगिता को बर्बाद करेंगे और बिहार में पाँच सितारा होटल के भगीदार कर्मचारी अच्छी जगह पर अनुपयोगी होकर मौज करेंगे।
ऐसे ही अनुपयोगी चमचों के चँगुल और कॉकस में घिर कर हमारे लोकप्रिय व्यवहारिक मिलनसार और सभी के लिए सुलभ पूर्व विधायक और मंत्री आज जेल में हैं। ऐसे ही लोगों से घिरे रहने की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री कोड़ा साहब का राजनैतिक केरियर बर्बाद हुआ , लेकिन किसी स्तर पर कोई सीख नहीं लेते , और अच्छे लोग अपनी नादानी की वजह से भुगतते हैं।
आश्चर्य और विडंबना यह है , कि उपायुक्त तक के लिखित आदेश की अवहेलना करने का दुस्साहस वाले बन बैठे हैं।

राजनेताओं के हाथों का खिलोना बनने वाले सरकारी लोगों को आज पश्चिम बंगाल में झाँकना चाहिए ,लेकिन…
.
पूर्व डीसी के द्वारा लिपिक, सहायक का स्थानांतरण आदेश जारी करने के बाद भी स्थानांतरित लिपिक, सहायक अधिकतर अपने पूर्व जगह पर जमे रहना ऐसे में क्या समझा जाए, कई तो एक ही जगह पांच से दस साल से जमे है। क्या इनपर करवाई नहीं बनती है , या नहीं।

उस चिट्ठी का क्या हुआ। चतुर्थवर्गीय कमर्चारियों को सालाना वर्दीभत्ता मिलता है, क्या उसपर अमल होता है। स्वयं जिला मुखिया के कार्यालय कक्ष में इस आदेश का उल्लंघन होता दिखा है। हजारों चित्रों और वीडियो में इसका प्रमाण दिख जाएगा।
सब आदेश की अवहेलना होती है।
आख़िर किस मजबूरी में ?
क्यूँ ऐसा अंधेर मचा हुआ है ?
कुछ करें साहबाना , बचायें सरकारी और प्रशासनिक सम्मान को , निवेदन है।
और यहाँ के हम बीचवाले कब तक ताली बजाते हुए वाह वाह करेंगे ? लोग हम पर भी सवाल उठाते हैं झांकिये अपने भी गिरहवाँ में।
पल दो पल के शायर आएँगे और जाएँगे , लेकिन हम तो चले ही गये हैं।
हे भगवान ! ये शहर आपका है और आप ही यहाँ रह जाएंगे। विरासत में क्या दे जाएँगे अपनी पीढ़ी को !
सोचिये जरा , अब भी समय है।😥

घोटालों की जमीन बन चुके पाकुड़ में एक और नये घोटाले की आ रही बू , DMFT फंड में मची लूट की हो जांच : सुरेश

*पाकुड़ में DMFT फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने उठाई जांच की मांग

* पाकुड़ के हर बुद्धिजीवी इस आरोप पर एकमत।

* कुछ हो पायेगा ? शायद नहीं।

झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों को आवंटित की गई योजनाओं में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रबल संभावना बनी हुई है।
कागज पर सिमटी योजनाएं, RTI से भी नहीं मिल रही जानकारी
सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष रूप से विशेष प्रमंडल कार्यालय (Special Division) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“DMFT फंड का दुरुपयोग कर कई योजनाओं को केवल कागज और कलम तक सीमित रखा गया है। धरातल पर काम दिखाए बिना ही राशि की निकासी कर ली गई है। जब इन योजनाओं के संबंध में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग द्वारा सूचना देने में आनाकानी की गई, जो दाल में कुछ काला होने का स्पष्ट संकेत है।”
वेबसाइट पर डेटा गायब, ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता का अभाव
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2020 के बाद से कोई ऑडिट रिपोर्ट या जनहित से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की गई है। वर्ष 2020 के बाद से कई अधिकारी अध्यक्ष पद पर आए और गए, लेकिन खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं करना संदेह पैदा करता है।
बोकारो की तर्ज पर पाकुड़ में भी बड़े घोटाले का अंदेशा
हाल ही में बोकारो जिले में DMFT फंड में सामने आए कथित घोटाले का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 631 करोड़ रुपये की निकासी और कुल 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं। पाकुड़ जिले में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट की आशंका है।
क्या है DMFT फंड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि DMFT (District Mineral Foundation Trust) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
• फंडिंग: खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10% से 30% हिस्सा इस फंड में जमा करती हैं।
• उद्देश्य: इस राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए होना चाहिए।
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर पिछले 5 वर्षों के DMFT फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता की कमाई के पैसे का हिसाब मिल सके।

घोटालों की जमीन बन चुके पाकुड़ में एक और नये घोटाले की आ रही बू , DMFT फंड में मची लूट की हो जांच : सुरेश

*पाकुड़ में DMFT फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने उठाई जांच की मांग

* पाकुड़ के हर बुद्धिजीवी इस आरोप पर एकमत।

* कुछ हो पायेगा ? शायद नहीं।

झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों को आवंटित की गई योजनाओं में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रबल संभावना बनी हुई है।
कागज पर सिमटी योजनाएं, RTI से भी नहीं मिल रही जानकारी
सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष रूप से विशेष प्रमंडल कार्यालय (Special Division) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“DMFT फंड का दुरुपयोग कर कई योजनाओं को केवल कागज और कलम तक सीमित रखा गया है। धरातल पर काम दिखाए बिना ही राशि की निकासी कर ली गई है। जब इन योजनाओं के संबंध में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग द्वारा सूचना देने में आनाकानी की गई, जो दाल में कुछ काला होने का स्पष्ट संकेत है।”
वेबसाइट पर डेटा गायब, ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता का अभाव
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2020 के बाद से कोई ऑडिट रिपोर्ट या जनहित से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की गई है। वर्ष 2020 के बाद से कई अधिकारी अध्यक्ष पद पर आए और गए, लेकिन खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं करना संदेह पैदा करता है।
बोकारो की तर्ज पर पाकुड़ में भी बड़े घोटाले का अंदेशा
हाल ही में बोकारो जिले में DMFT फंड में सामने आए कथित घोटाले का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 631 करोड़ रुपये की निकासी और कुल 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं। पाकुड़ जिले में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट की आशंका है।
क्या है DMFT फंड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि DMFT (District Mineral Foundation Trust) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
• फंडिंग: खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10% से 30% हिस्सा इस फंड में जमा करती हैं।
• उद्देश्य: इस राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए होना चाहिए।
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर पिछले 5 वर्षों के DMFT फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता की कमाई के पैसे का हिसाब मिल सके।

बंगाल चुनाव में सरकार पोषित केरम क्लब और चुनाव आयोग के बीच बिछी है विसात। उपद्रवियों का भय ख़त्म , संगीनों के छाँव में मुखर हुए मतदाता।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान ने ये तो स्पष्ट शंदेश दे दिया कि मतों का ध्रुवीकरण हुआ है। हमेशा की तरह मतदान का प्रतिशत काफी संतोषजनक रहा , बल्कि अपेक्षाकृत बढ़े प्रतिशतता ने बंगाल के मतदाताओं की जागरूकता का भी परिचय दिया।
लेकिन इनसब बातों के बाद , जो सबसे बड़ी बात यह रही कि इसबार वो मतदाता भी मतदान केंद्र पर पहुँच कर मतदान करने में सफल रहे, जिन्हें या तो घर पर ही रोक दिया जाता था , या फिर उन्हें मतदान केंद्र से इसलिए बेरंग लौटना पड़ता था कि उनका मत पहले ही कोई और दे जाता था। लम्बी लाइनों ने गवाही दी कि लोग बिना भय के मतदान करने गये।
ऐसे ही एक परिवार से मुलाकात में यह पता चला कि उन्हें कई बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा था , लेकिन इसबार वे बेफिक्र मतदान कर पाए हैं।
बढ़े मतदान के प्रतिशत से दोनों मुख्य पार्टियाँ अपनी अपनी जीत के दावे कर रही हैं , पर मजहबी तौर पर ध्रुवीकरण स्पष्ट नज़र आई।
इसके कई कारण हैं। पहला तो यह है कि सभी पार्टियों के नेताओं के बयानों ने मतदाताओं को प्रभावित किया , दूसरा कारण सोशल मीडिया ने डाला। खाशकर हुमायु कबीर के स्टिंग ने उनकी नई नवेली पार्टी को काफी नुकसान पहुँचाया , और ओबैसी साहब से गठबंधन टूटने पर भी मतदाताओं के विश्वास को हिलाकर रख दिया। अल्पसंख्यक समुदाय को तृणमूल के अलावे कोई विकल्प नज़र नहीं आ रहा था। भाजपा को रोकने के लिए ममता से असंतुष्ट लोगों को भी तृणमूल पर ही अपना विश्वास दिखाना पड़ा। कोंग्रेस के समर्थक मतदाता भी राहुल गांधी के एक वाइरल बयान पर अंतिम समय में तृणमूल का रुख कर गये। जबकि सन्देशखाली की घटना ने बहुसंख्यक समुदाय को भाजपा का रुख करने को मजबूर किया। ममता बनर्जी के समर्थक रहे बहुसंख्यक भी मुर्शिदाबाद दंगे की ख़ौफ़नाक यादों और ममता सरकार की करवाई करने में उदासीन बेरुखी को भुलाये नहीं भूल पा रहे थे। मालदा के कालियाचक की घटना रहीसही कसर पूरी कर दी। धुलियान , बहरमपुर , मालदा , दुर्गापुर हर जगह मतदाताओं का मुख्य रूप से दो ही पार्टियों के प्रति ध्रुवीकरण अहसासा गया।
पिछले हर स्तर के कई चुनावों को जमीनी स्तर पर देखने से यह बात मंथन के बाद निकल कर आती है कि ध्रुवीकरण तृणमूल और भाजपा के पक्ष में गया है। बाबरी मस्जिद की नींव या हैदराबाद के चारमीनार का कोई प्रभाव मतदाताओं की बातों से नही दिखी।
इस पहले चरण में एक ओर तृणमूल और दूसरी ओर भाजपा के बीच ध्रुवीकरण सिमट कर रह गया।
आश्चर्य इस बात की है कि मुसलमान हित की बात करनेवाले बंगाल के ओबैसी की उपाधि पानेवाले हुमायु कबीर और स्वयं ओबैसी साहब मतदाताओं के मन से मतदान के समय उतरे-बिसरे दिखे। यहाँ तक कि हुमायु साहब को अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में भी उग्र विरोध का सामना करना पड़ा।
जो भी हो भाजपा इस बार एक और ऊँची छलाँग लगाने को आतुर है , भाजपा के विकल्प के रूप में दीदी में ही दम मतदान में दिखा, हँलांकि आगामी 4 तारीख़ को ही सब पता चलेगा कि ऊँट किस करवट बैठेगा , लेकिन बंगाल के ओबैसी हुमायु कबीर और ओबैसी साहब का मंचीय रुतवा मतगणना के दिन जमानत बचाने की जद्दोजहद में शायद दिखे।
चुनावी हिंसा के लिए बदनाम हो गये बंगाल में इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति के बाद भी , छिटपुट ही सही , लेकिन हिंसा ने बता दिया कि अतीत में चुनावी हिंसा का साम्राज्य कैसा रहा होगा। एक भी जान की हानि न होना और चुनाव के दौरान हत्याओं की अतीत की कहानी बहुत कुछ कहती सी है।
अब राज्य के जिस इलाकों में मतदान होना है , वो ममता के तृणमूल का गढ़ है। भाजपा के लिए यहीं सबसे बड़ी परीक्षा है। क्योंकि अतीत बताता है कि इन इलाकों में तृणमूल के मतदाताओं के अलावा कोई और मतदान केंद्र तक पहुँच ही नहीं पाता है। क्लब और केरम क्लबों की तकरीबन 3250 कमिटियाँ यहाँ तृणमूल के पक्ष में संगठित होकर कर उग्र और नीतिगत तरीके से काम करती है। वे पहले से ही रैलियों में जाने वाले परिवारों पर नज़र रखते हैं। मतदान के दिन भाजपा या किसी दूसरी पार्टी की रैली में जानेवाले परिवारों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने नहीं देते और उनका मत भी डाल दिया जाता रहा है। इसबार तीन लाख से अधिक केंद्रीय बलों की उपस्थिति इनको कहाँ तक क्या कर लेने देंगे ये वक़्त बताएगा।
लेकिन चुनाव के बाद जैसे तृणमूल विरोधियों से निपटने की परंपरा रही है , ठीक उसी तरह इसबार केंद्रीय बल चुनाव शांतिपूर्ण कराने, तथा विना किसी चुनावी हिंसा और हत्या न हो का ध्यान रखते हुए , मतदान के बाद उनसे चुनचुन कर निपट रहे हैं। केरम कमिटियों के जासूसों की तरह सेना के जासूस भी इस पर नजर रखे हुए हैं। दूसरी तरफ मतदाता इस बार केंद्रीय बलों की सुरक्षा की छाँव में मुखर हो गये हैं।
चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव को बिना हिंसा के शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष करने की जैसे कसम खा रखी है। वहाँ मतदाताओं को डराने धमकाने के सभी तकनिकों के गहन अध्ययन के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी वैसी ही विसात बिछा रखी है कि उपद्रवियों से चुनाव के पहले , चुनाव के दिन और मतदान के बाद कैसे निपटने हैं , इसकी पूरी तैयारी कर रखी है।
बाँकी पार्टियों की असली परीक्षा दूसरे दौर के मतदान के दौरान ही होना है। चार मई को सब खुलासा हो जाएगा। सम्मपूर्ण भारत बंगाल चुनाव और उसके नतीजे की ओर व्यग्रता से देख रहा है।

नोट:– मैंने किसी का नाम या स्थान और मुहल्ला चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए नहीं लिखा , और बातचीत करने वाले परिवारों-लोगों से ये वादा भी था।

25 अप्रैल को मासिक लोक अदालत के साथ एनआई एक्ट(चेक बाउंस) से संबंधित विशेष लोक अदालत का हुआ सफल आयोजन

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रभारी सचिव विशाल मांझी के देख रेख में मासिक लोक अदालत के साथ एनआई एक्ट (चेक बाउंस) से संबंधित विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में किया गया। उक्त मासिक लोक अदालत में कुल आठ बैंचो का गठन किया जिसमें 108(एक सौ आठ) वादों का निष्पादन किया गया एवं 11 लाख 50 हजार 7 सौ, रुपए का समझौता कराया गया जिसमें एनआई एक्ट (चेक बाउंस)से संबंधित 8 वाद का निष्पादन किया गया एवं 8 लाख 95 हजार का समझौता कराया गया। मौके पर न्यायिक पदाधिकारी समेत इंश्योरेंस कंपनियों के अधिवक्तागण, पदाधिकारीगण , विभिन्न बैंकों के अधिकारियों, वादी प्रतिवादी के अधिवक्तागण समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।