Thursday, November 5, 2026
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*मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से डॉक्टरों की कमी एवं उर्दू विद्यालयों को पुन:चालू करने की मांग रखा:झामुमो पूर्व केंद्रीय सदस्य शाहिद इक़बाल*

*उर्दू विद्यालयों सहित विलय किये गये विद्यालयों के मुख्यमंत्री से स्वतंत्र करने की मांग शाहिद इकबाल ने किया*

पाकुड़: माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से झारखंड विधानसभा के मुख्यमंत्री कक्ष में भेंट के दौरान पाकुड़ जिले के जनसमस्याओं से संबंधित झामुमो के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य शाहिद इक़बाल ने एक आवेदन दिया। झामुमो के पूर्व केंद्रीय समिति सदस्य शाहिद इक़बाल ने कहा कि मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी का ध्यान आकृष्ट करते हुए पाकुड़ सदर अस्पताल में डॉक्टर, नर्स की काफी कमी है। ANM 153 पद है जिसमें केवल 30 कार्यरत है। महिला, बच्चा एवं हड्डी रोग विशेषज्ञ के डॉक्टर नहीं है। पाकुड़ जिले में 103 डॉक्टरों का पद है जिसमें पाकुड़ जिले में सदर अस्पताल एवं पीएचसी में 26 डॉक्टर ही कार्यरत है। जिसमें अध्ययन अवकाश में 9 डॉक्टर, 3 इस्तीफा और 3 डॉक्टर अनाधिकृत रूप से गायब है। कुल मिलाकर के पाकुड़ सदर अस्पताल पीएचसी की स्थिति चिंताजनक है।
शाहिद इक़बाल माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को आवेदन देकर ध्यान दिलाया कि 2016-17 में रधुवर सरकार के कार्यकाल में झारखंड के 4096 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय का अन्य विद्यालययों में विलय कर दिया गया था। जिसमें पाकुड़ जिले के छः उर्दू विद्यालय भी शामिल थे। विशेष सूत्रों से पता चला है कि इस इस विषय पर
हेमंत सरकार विलय किया गया विद्यालय की पुनर्वापसी के लिए कार्य कर रही है। ज्वलंत समस्याओं की ओर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी का ध्यान आकृष्ट करने के बाद पाकुड़ जिले के इन समस्याओं के समाधान में तत्परता के साथ कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

हार या जीत अपनी जगह है , समाज के लिए काम करना है कर्तब्य : अज़हर इस्लाम

शुक्रवार को पूर्व एनडीए प्रत्याशी अजहर इस्लाम जी ने अपने निजी आवास पर एनडीए के सभी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरे चुनाव में अपनी मेहनत और समर्पण से उनका साथ दिया।
अजहर इस्लाम जी ने कहा, “चुनाव में हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन यह हमें अपने क्षेत्र के विकास और जनता की सेवा के प्रति हमारी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा सकता।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के साथ लगातार जुड़े रहें, उनकी समस्याओं को समझें और उनके समाधान में जुटे रहें।
बैठक में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकुड़ विधानसभा के हर नागरिक का जीवन स्तर सुधारना और क्षेत्र में विकास की नई लहर लाना उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा, “यह हार एक नई शुरुआत है। आपका समर्थन और विश्वास ही हमारी असली ताकत है। हम सब मिलकर पाकुड़ को बेहतर बनाएंगे।

*माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 06 दिसम्बर 2024 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न हुई।*

*मुख्यमंत्री सचिवालय रांची*
*विज्ञप्ति संख्या – 309/2024*
*06 दिसम्बर 2024*
*झारखंड मंत्रालय, रांची*
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*माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 06 दिसम्बर 2024 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक सम्पन्न हुई।*
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*अन्यान्य :-*
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*माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार के सभी माननीय मंत्रीगणों को अपने-अपने विभागीय कार्यों के सम्पादन हेतु निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर परामर्श दिया गया। सभी माननीय मंत्रीगण सरकार के इस कार्यकाल में वर्णित इन तथ्यों का विशेष ध्यान रखेंगे..*

*1. मंत्रिपरिषद् में भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर स्वयं संतुष्ट हो लें। वित्त विभाग/विधि विभाग/कार्मिक विभाग से भी सम्पर्क करें ताकि, ससमय मंत्रिपरिषद् की बैठक में प्रस्ताव आ सके।*

*2. सभी मंत्रीगण अपने-अपने विभाग के सभी जिला के क्षेत्रीय कार्यालय में जा कर विभागीय कार्यकलाप की समीक्षा करें तथा विभागीय योजना के लाभुकों से मुलाकात कर feedback लें।*

*3. विभागीय कार्यकलाप का समीक्षा करें। सभी योजनाओं को समझ कर उसके गुण-दोष का अध्ययन करें।*

*4. वैसी योजनाएँ जो बहुत दिनों से लम्बित हैं, उसके लम्बित रहने के कारण की समीक्षा करें और उसको पूरा कराने के लिए कार्रवाई करें।*

*5. कई योजनाएँ ऐसी हैं, जिसमें आज की पृष्ठभूमि में बदलाव अपेक्षित है या फिर कुछ प्रावधान के कारण क्रियान्वयन में कठिनाई होती है उसके निराकरण का प्रस्ताव प्राप्त कर कार्रवाई करें।*

*6. राज्य में आपके विभाग के योजना से अगर कोई क्षेत्र छूटा हुआ है, खासकर दूर-दराज के क्षेत्र, SC/ST क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्र उसके लिए योजना के प्रस्ताव पर विचार करें।*

*7. वैसे विभाग जिनमें राजस्व प्राप्ति की बेहतर संभावनाएँ हैं, वे राजस्व स्रोत की समीक्षा कर राजस्व प्राप्ति की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव तैयार करें।*

*8. भवन जैसे Infrastructure वाली योजना की विशेष समीक्षा करें ताकि, बना हुआ भवन का वास्तविक इस्तेमाल हो सके। अनावश्यक भवन आदि की योजना न लिया जाय।*

*9. वर्ष 2025-26 में ली जाने वाली योजनाओं की रूप-रेखा तैयार करें।*

*10. अधिनस्थ अधिकारी, कर्मचारी के प्रोन्नति की स्थिति की समीक्षा करें और प्रोन्नति प्रदान करें।*

*11. पदस्थापना की समीक्षा करें और आवश्यकता या कम जरूरी के आधार पर adjustment करें।*

*12. आप्त सचिव तथा निजी Staff रखते समय उसकी पृष्ठभूमि जरूर देख लें ताकि विवादित कर्मी मंत्री कार्यालय में स्थान नहीं पायें।*

*13. कोर्ट केस मामले की भी समीक्षा करें ताकि सरकार केस कम से कम हारे।*

*14. अपने विधान-सभा क्षेत्र से बाहर भी हर जिला में भ्रमण करें और लोगों से मिलकर वहाँ की समस्या (खासकर अपने विभाग से संबंधित) के निपटारा के लिए प्रयास करें।*

*15. क्षेत्रीय पदाधिकारियों के बारे में क्षेत्र भ्रमण के क्रम में feedback प्राप्त करें और माननीय मुख्यमंत्री को समय-समय पर अवगत कराएँ।*

*16. स्थानीय जन प्रतिनिधियों से मिलने के लिए तिथि का निर्धारण कर दें, ताकि सभी को सहुलियत हो।*

*17. सभी मंत्रीगण समय-समय पर अपने विभाग की उपलब्धियों के विषय में प्रेस के प्रतिनिधियों को Press Conference कर जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे।*
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*TeamPRD(CMO)*

लाज़मी सवाल – **पाकुड जनसंपर्क कार्यालय के वाट्सएप ग्रुप में सभी पत्रकारों को शामिल न करने पर वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए सवाल**

पाकुड, झारखंड: वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के झारखंड इकाई के प्रदेश अध्यक्ष अनंत तिवारी ने पाकुड जनसंपर्क कार्यालय द्वारा संचालित वाट्सएप ग्रुप ‘पाकुड सूचना भवन’ में सभी पत्रकारों को शामिल न करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

एक आधिकारिक पत्र में, तिवारी ने जिला जन संपर्क पदाधिकारी से आग्रह किया है कि उन्हें स्पष्ट जानकारी दी जाए कि क्यों सभी पत्रकार इस ग्रुप का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समूह का मुख्य उद्देश्य सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना और उनका प्रचार-प्रसार करना है, जिसमें पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

तिवारी ने इस मुद्दे पर स्पष्टता मांगी और पूछा कि क्या पत्रकारों को जोड़ने के लिए कोई विशेष मानदंड निर्धारित किया गया है। उन्होंने नियमावली को सार्वजनिक करने की अपील भी की। इसके साथ ही, चेतावनी दी कि यदि उनके पास कोई उचित कारण नहीं है और सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार में बाधा उत्पन्न की जा रही है, तो वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया इस मुद्दे पर लिखित शिकायत दर्ज कराएगी।

अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्होंने धरना प्रदर्शन करने की भी बात कही, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

समाज के विभिन्न हिस्सों से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आई है, जिसमें पत्रकारों का मानना है कि उनके बिना इस ग्रुप का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। अब देखना यह है कि जिला जन संपर्क कार्यालय इस विषय पर क्या कदम उठाता है और पत्रकारों की चिंताओं का समाधान कैसे किया जाता है।

भाजपा ने मनाया संविधान दिवस , बाबा साहब अम्बेडकर के आदमकद प्रतिमा पर किया माल्यार्पण।

संविधान दिवस के ७५ वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी पाकुड़ के द्वारा जिला अध्यक्ष अमृत पाण्डेय के नेतृत्व में पाकुड़ नगर में स्थापित संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नमन किया।
मौके पर भाजपा नगर अध्यक्ष सोहन मंडल,भाजपा नेता हिसाबी राय जिला उपाध्यक्ष धर्मेंद्र त्रिवेदी महामंत्री रूपेश भगत अनामिका कुमारी अनिकेत गोस्वामी पवन भगत आदि मौजूद थे।
माल्यार्पण के उपरांत जिलाध्यक्ष अमृत पाण्डेय ने कहा कि आज का दिन काफी खास है,आज ही के दिन हमारे देश ने संविधान को अपनाया था। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में हमारा संविधान बना जिसके बाद आज तक इस सर्वोपरि माना जाता है।आगे भाजपा नेता हिसाबी राय ने कहा कि संविधान दिवस सिर्फ एक दिन नहीं है बल्कि हमारे देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज यानी सविधान को याद करने का दिन है।इस दस्तावेज को बनाने में बाबा साहब डॉ• भीमराव अंबेडकर जैसे महान लोगों का बड़ा योगदान था। उन्होंने ही हमारे देश में पहले कानून मंत्री के रूप में काम किया था।हमारे देश ने संविधान को 26 जनवरी 1949 को स्वीकार किया और लागू हुआ।जिसके कारण 26 जनवरी को हम सभी भारतवासी गणतंत्र दिवस के रूप में इस दिन को मनाते हैं।इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य देश को लोगों को संविधान और संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देना है।

चुनावी रंग ढंग में बदल चुका है पत्रकारिता की चुनौती

आज कल चुनाव ने ऐसा रंग-ढंग अपना लिया है , जो वर्षों पहले नहीं हुआ करता था। चुनाव एक लोकतांत्रिक त्यौहार के तौर पर हुआ करता था। सभी पार्टियों के लोग एक दूसरे से जब मिलते थे , तो लगता ही नहीं था, कि वे चुनावी मैदान में एक अपर के प्रतिद्वंद्वी हैं।
तीन दशकों की पत्रकारिता और उम्र के पाँच दशकों को गुजार चुकने के बाद आज एक पत्रकार के तौर पर चुनावी समीक्षा या समाचार लिखने में स्वयं को असहज पाता हूँ।
जमीनी हकीकत को लिख पाना असहज करता है।
अब तो पार्टियाँ भी अनेक हैं, और बागी तथा निर्दलीयों की तो बाढ़ सी है। सभी अपने ही समाज और जान पहचान वाले। सच लिखो तो अप्रिय बनने की स्थिति उत्पन्न होती है। जीतने वाले जीत कर राजधानी चले जायेंगे।
हम सच लिखने वाले यहीं पीसने के लिये रह जाएंगे।
जात पात-सम्प्रदाय पर चलने वाली आज की राजनीति खूनी संघर्ष की उपज मंडी बन गई है , जबकि पहले ऐसा नहीं था। हारने वाले जितने वाले को बधाई देता था। चुनाव के बाद समकुछ सामान्य हो जाता था।
पर आज ऐसा नहीं है।
समाज में चुनाव के बाद सभी एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते थे।
जो भी हो आज के दौर में सबसे पीड़ित चुनाव के बाद पत्रकारों को ही होना पड़ता है। आम जनता के सवालों का भी सामना पत्रकारों को ही करना पड़ता है , और असम्मानजनक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है।
मतदाताओं के लिए वादे और रेवड़ियाँ सभी प्रत्याशी बाँटते हैं , लेकिन पत्रकार यहाँ भी फाँके में रह जाते हैं। जो ठेकेदार नहीं बन सके , वैसे पत्रकारों के पास सामान्य इलाज तक कराने की औकात नहीं होती , लेकिन सरकार और नेताओं को उनकी सुध तक लेने की ज़हमत नहीं होतीं।
पत्रकारों को भी चाहिए कि वे नेताओं की नहीं , आम जनता की बात लिखें कहें , लेकिन…..

न्यूज पॉकेट से सुनी चर्चा पर समीक्षा । कुछ लोगों की उपस्थिति भी असर डाल जाती है परिणामों पर।

ऐसे पत्रकारिता के तीन दशक क्रॉस कर गये हैं।
समाचार और खासकर समीक्षा के लिए कुछ स्थान पॉकेट होते हैं , इनमें एक हेयरकट दुकान भी है।
राजनीति और क्राइम की खबरों के लिए मैं चुराता सूचनाएँ अपने श्रवण से , और कोशिश करता हूँ रोचक प्रस्तूतन का।
खेर पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं और न्यूज़ पॉकेट्स पर विस्तार से फिर कभी।
फ़िलवक्त ये प्रस्तुति —

जीत या हर वक़्त की गर्भ में है , लेकिन बाबुधन और नवनीत की उपस्थिति ही तय करेगा परिणाम।

रविवार को सेलून में सेभींग करवा रहा था। थोड़ी ही देर में एक पार्टी के दो महत्वपूर्ण कार्यकर्ता आये और अपनी बारी के इंतजार में बैठ गए। उनकी बातों को ध्यान से सुनने लगा। चुनावी दौर है, स्वाभाविक रूप से चर्चा भी उसी पर थी। चुनावी सभा तो थी नहीं , मंच भी नहीं था , इसलिए उन दोनों की चर्चा में ईमानदारी झलक रही थी।
भाजपा पाकुड़ सीट वर्तमान स्थिति में कभी जीत नहीं सकती , उनमें से एक ने कहा , दूसरे ने हामी भरते हुए कहा यार यहाँ डेमोग्राफी पूर्णतः चेंज हो गया है , लेकिन इससे पहले की स्थिति भी भाजपा के लिए पाकुड़ सीट कभी जितने लायक नहीं रही है।
चर्चा पाकुड़ पर आपसी सहमति के बाद लिट्टीपाड़ा सीट पर गई तो भाजपा के घोषित उम्मीदवार बाबुधन मुर्मू की प्रशंसा , जिला परिषद अध्यक्ष रहते उनके कार्यों, उसके बाद भी लगातार लिट्टीपाड़ा में हर परिस्थितियों में उनकी सकारात्मक सक्रियता आदि पर खूब चर्चा हुई। एक अच्छे उम्मीदवार के रूप में बाबुधन को उतारने पर पार्टी की तारीफ़ों के पूल बाँधे गये। झामुमो के उम्मीदवार जो अभी घोषित नहीं हुआ है पर चर्चा चलते हुए , लिट्टीपाड़ा के आदिवासी मतदाताओं का तीरधनुष चुनाव चिन्ह के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव की बातों तक पहुँची। कुल मिलाकर बाबुधन की तीरधनुष से टक्कर की बातों से होते हुए। महेशपुर के भाजपा प्रत्याशी पूर्व डीएसपी नवनीत हेम्ब्रम तक पहुँची। डीएसपी रहने के दौर में उनकी मिलनसार प्रकृति , ईमानदारी और निष्पक्ष कार्यशैली पर खूब उदाहरणों के साथ उनकी बातों को मैंनें भी चटकारे ले कर सुना। नवनीत जी एक अच्छे इंसान तो हैं ही , लेकिन क्या राजनीति और मतदाता उन्हें आत्मसात कर पायेगा और ख़ुद नवनीत जी जैसे सीधे सादे इंसान क्या राजनीति के रास्तों को आत्मसात कर पाएँगे ?
कुल मिलाकर इतनी ईमानदार चर्चा को सुनने के दौरान मैंनें फरमाइशें कर अपना बिल तो बढ़ा लिया , लेकिन पाकुड़ सहित लिट्टीपाड़ा महेशपुर सीटों पर बागियों की उनदोनों की आशंकाओं ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि राजनीति में भी अच्छे इंसानों पर कहीं कहीं ईमानदार चर्चा तो होती है।
खैर लिट्टीपाड़ा और महेशपुर सीट पर बाबुधन मुर्मू और नवनीत हेम्ब्रम अपनी छाप तो ज़रूर छोड़ेंगे। ये जीतें या हारें यह वक़्त बताएगा , लेकिन इनकी उपस्थिति परिणाम पर असर जरूर डालेगा।

मुद्दे गर्म कर गठबंधन के नाम पर सीट छोड़ना कार्यकर्ताओं को मंजूर नहीं , रंग को भंग कर सकते हैं पिंकू शुक्ला और समर्थक।

चुनावी घोषणा के बाद , विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की भी टिकटार्थी और उम्मीदवारों की भी पुष्ट अपुष्ट घोषणाएं आ और चुनावी चर्चे की हवा में गुम भी हो रही हैं।
राजनेताओं का जन्मसिद्ध अधिकार भी परम चरम पर है। पाले बैनर बदले जा रहे हैं, और बदलने की उम्मीद भी है।
इतनी बातें-नबातें-कुबातेँ और भीन्न बातें हैं कि लिखने में न चाहते हुए भी कई कई बार ” भी ” शब्द आ ही जा रहा है।
बंगलादेशी , भ्र्ष्टाचार आदि को मुद्दे बनाकर मैदान में जो पार्टी ताल ठोक रही थीं , उसमें गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे पर ज़्यादा असन्तोष नज़र आ रहा है। उधर एक तथाकथित अफ़वाह पर दुमका में एक ही पार्टी के दो गुटों के समर्थक आपस में भिड़ गए।
इधर पाकुड़ में डेमोग्राफी बदलने और घुसपैठ की बातों पर ताल ठोक गये राष्ट्रीय और बड़ी पार्टी के बड़े नेताओं ने पाकुड़ सीट आजसू को दे दिया की चर्चे पर ही लम्बे समय से भाजपा में असंतोष की बू सोसल मीडिया पर आ रही है।
बू नहीं महक कह लें , तो गठबंधन की इस सीट पर ये असन्तोष की महक कब बू बन जाय कहना मुश्किल है। भाजपा कार्यकर्ता ये गले नहीं उतार पा रहे कि इस सीट को बिना लड़े आजसू की झोली में डाल दी जाय।
चर्चा है कि पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष मुकेश शुक्ला उर्फ पिंकू शुक्ला निर्दलीय उम्मीदवार बन आजसू को उफ़ बोलवा दें। ऐसे जिलापरिषद उपाध्यक्ष के तौर पर किये गए उनके कार्यों को भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ता अनदेखा नहीं कर सकते। इसलिए अगर शुक्ला जी बगावत कर गये , तो कमल के मतदाताओं के भी बगावत की उम्मीद सोसल मीडिया पर दिखती है। हाँलाकि ये सभी आशंकाए हैं, लेकिन ऐसी आशंकाए ही तो चुनावी मौसम मनोरंजन की माध्यम होतीं हैं।
ऐसे बागियों की संख्या कम होगी ऐसा नहीं है। पूरे जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्र में कई पार्टियों को बागियों से निपटना होगा।
लेकिन बंगलादेशी घुसपैठ के मुद्दे को गर्म कर अगर भाजपा पाकुड़ सीट पर ही चुनाव न लड़े , तो सोसल मीडिया पर आ रही महक गठबंधन के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं दे रहा।
अभी चर्चा ये है कि पार्टी के अंदर सब सुलझा लिया जाएगा , लेकिन अगर बागियों ने नहीं माना तो गठबंधन का बना बनाया खेल बिगड़ सकता है।

मासिक अपराध गोष्ठी का हुआ आयोजन , पुलिस कप्तान ने दिए बिंदुवार निर्देश ।

अवैध कार्यों मे संलिप्त व्यक्तियों पर विधि समत आवश्यक कारवाई करने का निर्देश

पुलिस अधीक्षक, पाकुड़ की अध्यक्षता में आज दिनांक-08.10.2024 को मासिक अपराध गोष्ठी समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमे सितम्बर माह में किये गए कार्यो की समीक्षा के उपरांत सभी थाना/ओपी प्रभारी/संबंधित शाखा प्रभारी को निम्नांकित आवश्यक दिशा- निर्देश दिया गया
1. दिनांक 10.09.2024 को पाकुड़ जिला में आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम के दौरान कुल 86 आवेदन प्राप्त हुवा था, जिसमे से प्राथमिकता के आधार पर कुल 83 आवेदनों का त्वरित निष्पादन किया गया है। शेष 03 आवेदनों की जांच की जा रही है।
2. माह सितम्बर 2024 में प्रतिवेदित सभी कांडो का विस्तृत समीक्षोप्रांत लंबित कांडो का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।
3. सभी पुलिस उपाधीक्षक/ पुलिस निरीक्षक प्रभाग को लंबित सभी पर्यवेक्षण प्रतिवेदन एक सप्ताह के अंदर समर्पित करने का निर्देश दिया गया।
4. अवैध कोयला/ बालु/पत्थर के उत्खनन/परिवहन/भंडारण पर पूर्णतः रोक लगाने हेतु जिला खनन पदाधिकारी/अंचलाधिकारी से समन्वय स्थापित कर नियमित रूप से छापामारी अभियान चलाने एवं उक्त अवैध कार्यों मे संलिप्त व्यक्तियों पर विधि समत आवश्यक कारवाई करने का निर्देश दिया गया।
5. शहर में यातायात की व्यवस्था बनाए रखने एवं आए दिन हो रहे जाम की समस्या को दूर करने हेतु आवश्यक कारवाई करने का निर्देश थाना प्रभारी नगर एवं यातायात प्रभारी को दिया गया।
6. दुर्गा पूजा/झारखंड विधान चुनाव 2024 के मद्देनजर थाना क्षेत्र के उपद्रवियों/आदतन शरारती तत्वों/सक्रिय अपराधियों के विरूद्ध निरोधात्मक कारवाई करने का निर्देश दिया गया।
7. लूट/डकैती/चोरी/छिनतई जैसे घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु नियमित रूप से anti crime checking करने एवं बैंक/एटीएम/ज्वैलरी शॉप जैसे स्थानों के आस पास पेट्रोलिंग पार्टी को मुस्तैदी के साथ भ्रमणशील रहने हेतु निर्देशित किया गया।
8. सभी थाना प्रभारी को अपने स्तर से विशेष अभियान चलाकर लंबित वारंट/कुर्की का निष्पादन करने का आदेश दिया गया।
9. दुर्गा पूजा के दौरान पूजा पंडाल एवं जुलूस मार्ग के सभी संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी के साथ सतर्कता बरतने एवं सभी सुरक्षात्मक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया।
10. पूजा पंडाल में चोरी/छेड़खानी जैसे घटनाओं पर निगरानी रखने हेतू पपर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया गया।
11. आगामी झारखंड विधान सभा चुनाव के मद्देनजर मतदान केंद्रों/बलों के आवासन हेतु चिन्हित स्थानों पर पानी/शौचालय/बिजली इत्यादि की व्यवस्था एवं अन्य तैयारियों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।
12. अंतरराज्य/अंतरजिला चेकपोस्ट पर सघन वाहन जांच चलाने का निर्देश दिया गया।
13. थाना में आने वाले शिकायतकर्ता को बिना परेशान किए उनकी समस्या को प्रथमिकता के आधार पर सुनने एवं जांचोपरांत त्वरित निराकरण करने का आदेश दिया गया।

एक सेल्यूट तो बनता है न , अपने जांबाज पहरेदारों के नाम ?

शहर , नगर , गाँव , रास्ते , दुकान या कहीं और कोई अपराध हो जाता है तो आम आदमी सबसे पहले पुलिस को कोसता है। लेकिन जब यही पुलिस किसी असम्भव से लगने वाले अपराध का उद्भेदन करती है , तो बहुत कम लोग पुलिस की सराहना करते हैं।
पुलिस के पास कोई आम आदमी से ज़्यादा कुछ होता है तो सरकारी पावर और वर्दी।
हाँ ये वर्दी जो है , उसका ख़ौफ अपराधियों में ऐसा होता है, कि अगर किसी चौराहे पर एक वर्दी पहने चौकीदार भी खड़ा हो तो सौ अपराधी भी अपना रास्ता बदल लेते हैं।
पाकुड़ में पिछले दिनों चेन और कंगन उड़ाने के ऐसे अपराध हुए , कि आम लोगों की चैन और नींद गायब हो गई।
पाकुड़ पुलिस ने उन अंतर्राज्यीय अपराधियों को ट्रेस कर दूसरे राज्य से धर दबोचा। फिर मुख्य सड़क से और थाने से फलाँग भर की दूरी से दो स्कार्पियो गाड़ी लेकर अपराधी चलते बने। सी सी टी भी में अपराध के वीडियो देख आम लोगों को ऐसा लगा कि पाकुड़ में ये क्या हो रहा है !

अपराधियों ने अपराध कर हमारे जांबाज पहरेदारों को चुनौती दी , जवाब भी अपराधियों को जोरदार मिला , वो भी चंद दिनों में—-
पुलिस की टीम ने इन्हें भी चोरी गये गाड़ियों के साथ बिहार से धर दबोचा। पूरी टीम इसके लिए सराहना के पात्र हैं।
कई घटनाएं इन दिनों पाकुड़ में ऐसी हुईं , जिनपर पुलिस की त्वरित कार्यवाही सराहनीय रही। लेकिन सराहना करने में लोगों ने थोड़ी कंजूसी दिखाई , जबकि किसी अप्रिय घटना की जवाबदेही तय करने में जल्दबाजी दिखती है।
हाँ कुछ बातें हैं जो पुलिस पर सवाल उठाते हैं, लेकिन सफल करवाई पर एक आध लोगों को छोड़ पुलिस की सराहना में कंजूसी ही दिखाते हैं।

ये जो वर्दी के अंदर हाड़ माँस का एक पुतला नुमा आपको दिखता है न , ये हमारे समाज का एक ऐसा तपस्वी होता है, जो चाह कर भी त्यौहारों में अपने बच्चों और परिवार से दूर हमारी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। वे अपनी खुशियाँ भी अपनों से नहीं बाँट पाते।
अगर हम-आप त्योहारों में मिलकर खुशियाँ मनाएं , तो ये वर्दी वाला भी अपने परिवार के साथ साथ खुशियाँ मनाए।
लेकिन हम तो इंसान बाद में हैं , पहले जात पात में फिर सम्प्रदाय में बंटे हैं।
खैर तारीख़ें जो हमें नहीं समझा न सकीं , उसपर लिखना ही बेकार है। छोड़िए इन बातों को। है न ?
लेकिन पुलिस जो हमारे घर और समाज का ही एक इंसान है , और कानून का हाथ है , उनकी सफलता पर खुलकर सराहना कीजिए। जैसे अख़बार में पुलिस की सफलता की ये ख़बर लहराई है , वैसे ही लहराकर तारीफ़ पाकुड़ पुलिस टीम की होनी चाहिए।
मैं वसुलदारों की नहीं , इन अपराधियों को अपनी औकात और सही ठिकाने पर में लाने वाले पहरेदारों की टीम को एक सेल्यूट देने की बात कह रहा हूँ।
जय हिंद❤️