Friday, April 4, 2025
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सोमवार मनी ईद , शाम ढलते ही खुशियों की चाँदनी बाँटने निकला पाकुड़ का चाँद।

सोमवार को हिंदुस्तान सहित पड़ोसी मुल्कों में ईद मनाई गई। खुशियों के इस त्योहार की मिठास से पूरा वातावरण मानो महक उठा , अभी ईद की मिठास की ख़ुमारी कई दिनों तक रहेगी।

ये अलग बात है कि देश के कुछ जगहों पर ईद भी राजनीति का अखाड़ा बना। दुखद बात रही कि कुछ इस्लामिक पड़ोसी मुल्क मंहगाई की मार से इस क़दर त्रस्त दिखा, कि गरीबों के दामन और आँगन ईद की खुशियों से अछूता रह गया।

हिंदुस्तान में कुछ गरीबों के आंगन तक राजनीति की चाशनी में लिपटी ईद की खुशियाँ पहुँची , लेकिन पाकुड़ में राजनीति और कूटनीति से बिलकुल इतर एक शख़्स अंदर से व्यग्र था कि ईद की खुशियाँ कैसे उन जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाय , जहाँ कोई कूटनीति की महक न पहुँचे।
एक आँखें ईद की खुशियों को बाँटना चाहता था, गरीबी के भावशून्य आँखों में भी मिठास का संतोष देखना चाहता था।

365 दिन पाकुड़ स्टेशन पर गरीबों को भोजन कराने वाले पत्थर व्यवसायी लुत्फुल हक़ ने सन्ध्या होते ही उन्हीं गरीबों की थाली में ईद की मिठास परोस दी।

खाने के साथ अपनी थाली में सेवइयों के साथ साथ मिठाई की परोसन देख गरीबों के गले के साथ आँखें भी भर आईं। और खाने के साथ ईद की मिठास परोसने वाले हाथ स्वयं उस लुत्फुल हक़ के रहे , जो पवित्र एक महीने तक रोज़े के बाद ख़ुदा की ईबादत को उठते रहे। एक ग़ज़ब का सन्तोष लुत्फुल के चेहरे पर दिख रही थी। कुछ पत्रकारों ने सवाल भी किये , उन्होंने कहा कि ये तो रोज की बात है , इसमें कहना क्या।

लेकिन मैं दूर खड़ा सेवइयां और मिठाइयाँ बाँटते उनके चेहरे और आँखों को पढ़ रहा था , मानो वो कह रहा हो , कि ईद ख़ुशियाँ मनाने का त्योहार सिर्फ़ नहीं , एक महीने के रोज़े के बाद ईद ख़ुशियाँ बाँटने पर ही मुक़म्मल होता है।

सचमुच ख़ुशियाँ बाँटना ही तो ईद है , जैसे चाँद चाँद चाँदनी बाँटने निकलता है! है न ?

ख़ुशियाँ बाँटने वाले इस शख़्स की इसी महक ने देश-विदेश में उन्हें सम्मानित कराया है।
एक सेल्यूट मेरा फिर से लूट ही जाती है ज़नाब लुत्फुल की सादगी और सोच❤️

जिला प्रशासन के द्वारा शहर के विभिन्न होटल व रेस्तरां में जांच अभियान चलाया गया

सुदीप त्रिवेदी की कलम से—-

आसन्न दिनों में विभिन्न पर्व के मद्देनजर शहर में किसी भी तरह की संभावित असंवैधानिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने क लिए उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

इसी क्रम में बीती रात को अनुमंडल पदाधिकारी साइमन मरांडी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी दयानंद आजाद एवं खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी धनेश्वर हेम्ब्रम की संयुक्त टीम के द्वारा शहर के विभिन्न होटल व रेस्तरां में सघन जांच अभियान चलाया गया। हालांकि इस जांच अभियान में किसी तरह की कोई आपत्तिजनक चीजें व गतिविधियां नहीं मिली लेकिन लेकिन एक सवाल के जबाब में अनुमंडल पदाधिकारी व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने सीधे तौर पर कहा कि प्रशासनिक पदाधिकारियों की रेकी करने वाले लोगों की सूचना प्रशासन को है और जल्द ही वो सलाखों के पीछे होंगे।

सवाल यह भी उठता है, कि रेकी करनेवालों को सलाखें तो मिलेंगी, लेकिन इन्हें एकदम सटीक जानकारी मिलतीं कैसे हैं, कि वे रेकी करने सही समय पर उपलब्ध रहते हैं। इसके लिए सरसों में छुपे भूत को भी खंगालना होगा।

धमक की चमक से हम चौन्धियानेवाले नहीं , हम पत्रकार हैं , चाटुकार नहीं।

नॉट—-  चित्र में दिये ख़बर कितना सच है , ये तो पता नहीं। मैं इस ख़बर की पुष्टि भी नहीं करता ,लेकिन सोसल मीडिया पर ख़बर दिखा तो दृष्टांत याद आ गया।लिख डाला जो दिल में था।

कहते हैं कि पद , प्रतिष्ठा , पैसा , शराब और हथियार सभी हजम नहीं कर पाते। ये चीजें गड़बड़ हाजमे वालों के व्यवहार और बातों से दुर्गंध के रूप में निकल ही आते हैं।
संयोग से पाकुड़ भी इससे अछूता नहीं है।

महज़ व्हाट्सएप में एडमिन से हटाए जाने पर एक पत्रकार को सबक सिखाने की बात कहने से भी नहीं हिचकते। ऐसे में कोई सफल राजनेता होने की बात भी कैसे सोच सकता है।

पैसे के बल पर कुछ गरीबों की मदद कर , और राजनेताओं के साथ फ़ोटो पोष्ट कर आम जनता के दिल तक उतरना सम्भव नहीं है। किसी शायर ने कहा है —

“जिश्म की बात नहीं है , उसके दिल तक जाना था,
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है।”

पाकुड़ के पड़ोस में एक जिला है , वहाँ दशकों पहले एक समर्थ प्रत्याशी ने मतदाताओं को उस समय सायकिल दिया था, जब सायकिल मोटरसाइकिल की हैसियत रखता था। लेकिन वो चुनाव हार गए थे।

आम जनता सिर्फ़ आपके भौतिक सहयोग से आपका मूल्यांकन नहीं करते बल्कि आपके आचार विचार और व्यवहार को भी बारीकी से देखते हैं।

बूथ लूट का जमाना पीछे बहुत दूर छूट गया , अब आप अपने व्यवहार और बातों से दिल लूटने की सोचिये , तो बात बनेगी।

खैर पत्रकारों को धमकाने वाले ये समझ लें कि पत्रकार जिस दिन पत्रकारिता करने की सोचते हैं , अपनी जान हथेली पर रख लेते हैं , लेकिन चुनाव लड़ने की सोचने वाले पहले अंगरक्षकों की बहाली करते हैं , तब जनता के बीच पहुँचते हैं।

धमक के सहारे राजनीति नहीं होती यार , व्यवहार से व्यक्तित्व चमकाओ , राजनीति में चमकता व्यक्तितव ही जनता को भाता है।

लिखना कहना और उदाहरण बहुत देना चाहता था लेकिन पाठक अन्यथा न ले ले इसलिए फ़िलवक्त इतना ही।

चाटुकारों से बचो , शहद ख़त्म होते ही ये किसी और डाल पर नज़र आएंगे।

बाँकी जो है , सो तो हेईये है 😊

शेखर बॉस जन्मजयंती को बॉलीबॉल दिवस के रूप में मनाने का हुआ निर्णय।

पाकुड़ जिला वालीबॉल संघ की बैठक संघ के सचिव हिसाबी राय के अध्यक्षता में रेलवे मैदान पाकुड़ में आयोजित किया गया।बैठक में मुख्य रूप से संघ के मार्गदर्शक संजय कुमार ओझा,अनिकेत गोस्वामी, प्रशिक्षक उजय राय,मुन्ना रविदास, संजय कुमार राय, निर्भय कुमार सिंह रतुल दे सहित सभी खिलाड़ियों ने भाग लिया।
बैठक में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी वॉलीबॉल के भीष्म पितामह एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक शेखर बोस के जन्म जयंती को वॉलीबॉल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इस बाबत जिला वालीबॉल संघ के द्वारा 3 अप्रैल 2025 बृहस्पतिवार को रेलवे मैदान पाकुड़ में विभिन्न आयु वर्ग के वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा जिसमें कुल दस टीमें हिस्सा लेंगी साथ ही वरिष्ठ एवं वॉलीबॉल युवा खिलाड़ियों के बीच प्रेरणादायी वॉलीबॉल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें पाकुड़ जिला के वरिष्ठ खिलाड़ीगण अपने कनिष्ठ खिलाड़ियों के साथ एक मैच खेलेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर परिषद निवर्तमान अध्यक्ष सम्पा साहा विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला खेल एवं पर्यटन पदाधिकारी राहुल कौशिक,स्टेशन प्रबंधक,पाकुड़ लखीराम हेम्ब्रम,अखिलेश कुमार चौबे,ओलंपिक संघ के सचिव रणवीर सिंह संयुक्त रूप से शेखर बोस जी के जन्म जयंती का केक काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
आज के बैठक में आशीष कुमार, कृष्ण घोष,कबीर सरकार,अमन कुमार,रोशन भगत,आर्यन कुमार,शुभम पंडित,कपिल रजक,अंजनी मिश्रा,कृष्णा सूरज पंडित,इंद्रजीत कर्मकार,रोशन सरदार,प्रतुल दे,कन्हैया भगत,आकाश सहाना,राजवीर भगत,प्रीतम कुमार,रोहित घोष,जीत सरदार,अभिनव ओझा,सोमू भास्कर,राजनाथ गुप्ता,सुरोजित सरदार,ईश्वर चंद्र राय मौजूद थे

*रामनवमी की तैयारी को लेकर अखाड़ा समिति की हुई बैठक*

पाकुड़ में प्रत्येक वर्ष रामनवमी की शोभा यात्रा बड़े धूमधाम और गर्मजोशी के साथ निकाला जाता है जिसमें की हजारों लोगों का जनशाला उमड़ता है। पाकुड़ में रामनवमी रेलवे कॉलोनी से निकलकर कलिकापुर,गांधी चौक हिरण चौक पाकुड़ मुख्य सड़क होते हुए नगर थाना तक पहुंचती है।इस वर्ष रामनवमी महोत्सव अप्रैल माह के 6 तारीख को है जिसको लेकर रामनवमी अखाड़ा समिति की बैठक रेलवे कॉलोनी दुर्गा मंदिर में आयोजित की गई। बैठक में मुख्य रूप से पाकुड़ हिंदू समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख विभिन्न मोहल्ले के प्रमुख एवं समाज के महानुभव एवं बुद्धिजीवियों के साथ अखाड़ा समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
*अखाड़ा समिति के सक्रिय सदस्य अमित साहा* ने बताया कि आज अखाड़ा समिति के साथ विभिन्न संगठनों एवं समाज के प्रमुख लोगों की बैठक हुई बैठक में मुख्य रूप से इस वर्ष अखाड़ा को और भी अधिक भव्य तरीके से निकालने एवं इसका सफल आयोजन को लेकर चर्चा की गई। हमारा यह पारंपरिक अखाड़ा वर्षों से इसी प्रकार रामनवमी के दिन रेलवे कॉलोनी से निकलकर शहर का भ्रमण करते हुए नगर थाने तक पहुंचती है इस अखाड़े की स्थापना वर्ष 1961 में की गई थी तब से लेकर अब तक प्रत्येक वर्ष पारंपरिक रूप से यह अखाड़ा निकलते आ रहा है।
*अखाड़ा समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद साहा* ने बताया कि वर्षों से रेलवे कॉलोनी के इस अखाड़ा परिसर में युवाओं को अखाड़े में अस्त्र-शस्त्र चलाने का अभ्यास कराया जाता आ रहा है। पाकुड़ के समस्त सनातनियों से मेरा आग्रह है कि रामनवमी में सभी अखाड़ा में भाग अवश्य ले और जिन्हें भी शस्त्र चलाने का अभ्यास करना है वह प्रत्येक शाम हमारे अखाड़े में आकर शस्त्र चलाने का अभ्यास कर सकते हैं।
बैठक में अखाड़ा समिति से सोहन मंडल,रूपेश राम,मुरारी मंडल,सुशील साहा,टोनी मंडल के साथ सत्य सनातन संस्था से रंजीत चौबे,विश्व हिंदू परिषद से अशोक वर्मा,भाजपा नेता हिसाबी राय,अनिकेत गोस्वामी, सानू रजक,महावीर भगत,के साथ अन्य दर्जनों राम भक्त उपस्थित थे।

छात्रों का शिक्षा के प्रति बढ़ाया गया उत्साह, और बेहतर करने को किया गया पुरस्कृत।

तौफ़ीक़ राज

गुरुवार को पाकुड़ सदर प्रखंड के मनिरामपुर में स्थित पीस मिशन स्कूल परिसर में स्कूल का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया। वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित के बाद गुरुवार को वार्षिक उत्सव मनाया गया। विद्यार्थी को अंक पत्र का वितरण किया गया। उत्कृष्ट छात्र छात्राओं को ट्रॉफी से नवाजा गया। स्कूल संचालक रियाजुल हक ने कहा बच्चों को अच्छा नागरिक बनाने में माता-पिता के बाद शिक्षण संस्थानों का अहम योगदान होता है। शिक्षकों को बच्चों को संस्कार बनाने के लिए गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा देनी चाहिए। जिस तरह स्कूल के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।ऐसे में लगता है कि शिक्षक और छात्र काफी मेहनत करते हैं और उन्होंने सभी का उत्साहवर्धन भी किया। छात्र छात्रों को अपने जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित जरूर करना चाहिए और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मेहनत अति आवश्यक है।
इस वार्षिक उत्सव में मो.साईफ, शाहनवाज, सुलेमान हसन,राजू आदि उपस्थित थे।

अंगिका समाज ने होली मिलन सह सम्मान सभा का किया आयोजन।

अंगिका समाज अंग, पाकुड़ के तत्वावधान में अंगिका मिलन सह सम्मान समारोह – 2025 का महेन्द्र मिश्र, डाॅ. बिन्दुभूषण, राहुल कुमार, रमेश चन्द्र सिंह, सिताबी राय, भागीरथ तिवारी, डाॅ. मनोहर कुमार, कैलाश झा, संजय कुमार शुक्ला जी के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया ।
स्वागत भाषण प्रदेश उपाध्यक्ष भागीरथ तिवारी जी ने अपने सम्बोधन में समस्त आगन्तुकों का हार्दिक अभिनन्दन व स्वागत कर अंगिका समाज के अतीत व वर्त्तमान पर विशेष चर्चा किये
। सचिव संजय कुमार शुक्ला ने अंगिका समाज में सत्र 2024-25 में अब तक के किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से बोले कि अंगिका समाज के द्वारा नारायण सेवा, गरीब पांच कन्या की शादी मे सहयोग, अनाथालय में भोजन का सहयोग, स्वास्थ्य सहायता, योग कक्षाएं ,आदि कार्य किए गए । सेवानिवृत प्रधानाध्यापक महेन्द्र मिश्र ने सम्बोधन मे कहे कि अंग क्षेत्र का इतिहास अति प्राचीन है, बाल्मीकि रामायण में वर्णित है कि त्रेता युग में अंग देश के राजा रोमपाद थे, जो राजा दशरथ के मित्र थे।
द्वापर में कृष्ण अवतार लिए, इस काल में दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को अंग देश का राजा बनवाया था, अंग देश की राजधानी भागलपुर था ।भागलपुर का कर्ण गढ़ इसका प्रमाण है। सुपौल के समदा में भी कर्णगढ़ है।
डाॅ. बिन्दुभूषण ने सम्बोधन में कहे कि
7 वीं सदी में वामन जयादित्य द्वारा रचित ग्रन्थ “कोशिका वृत्ति” में उल्लेख है कि प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में एक अंग महाजनपद था और इसकी प्रचलित भाषा “आंगी” थी ।जो आगे जाकर अंगिका में परिणत हो गया , आज भी हमलोग अंगिका में ही बोलते हैं ।

रमेश चन्द्र सिंह, सेवानिवृत सिविल अभियन्ता ने अपने सम्बोधन में कहे
कि -बौद्ध ग्रन्थ “ललित विस्तार” में 64 लिपियों की सूची में अंग लिपियों की सूची में अंग लिपि चतुर्थ स्थान पर अंकित हैं । 16 महाजनपदों के मानचित्र में भी अंग देश अंकित हैं ।
राहुल कुमार जी ने कहा कि भाषा के आधार पर 1912 ईo में बंगाल से बिहार एवं उड़ीसा राज्य अलग हुआ। तत्कालीन गवर्नर जेनरल वारेन हेस्टिंग्स ने बिहार को चार जिलों में बांटा, जिसमें एक जिला भागलपुर था , जिसके अन्तर्गत अंग जनपद था । अंग क्षेत्र का इतिहास बड़ा ही गौरवशाली रहा है।
उक्त अवसर पर भाजपा नेता हिसाबी राय ने कहा कि अंगिका क्षेत्र 1790 ई. में इस जिला के एक भाग का नाम जंगलतरी जो आज हमलोग संतालपरगना के नाम से जानते हैं, यहां मिदनापुर, बांकुड़ा, वीरभूम, एवं सिंहभूम से जनजातियों को लाकर बसाया गया, 1829 में भाषाई आधार पर चार प्रमंडल बनाए गए तो भागलपुर प्रमंडल के अन्तर्गत जंगली के इस भाग को संतालपरगना जिला बनाया गया । वर्तमान में अब यह स्वंय प्रमंडल है, इसके अन्तर्गत छ: जिले हैं ।आज पाकुड की पथरीली धरती पर अंगिका समाज का एकत्रीकरण मील का पत्थर साबित होगा ।
भाजपा नेता दुर्गा मराण्डी ने कहा कि अंग प्रदेश और अंगिका भाषा अत्यन्त प्राचीन है, वर्त्तमान में अंग क्षेत्र बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के विभिन्न प्रमंडल में फैला हुआ है ।
सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड सिताबी राय ने कहा कि आइए अंगिका समाज को आगे बढ़ाने में पूरे मनोयोग से हमसब मिलकर काम करने का संकल्प लें, अंगिका समाज का सदस्य बनें , और अंगिका क्षेत्र की गौरवशाली सभ्यता, संस्कृति, भाषा-परम्परा को समृद्ध-जीवंत बनाए रखने का सार्थक प्रयास करें ।
झारखंड प्रदेश अंगिका समाज ,रांची
अंगिका समाज अंग, जिला इकाई, पाकुड़ की जिला कार्यकारिणी समिति के निर्णय एवं सम्मान हेतु गठित चयन समिति द्वारा प्रस्तावित निम्नांकित सम्मान से अलंकरण हेतु उनसे सम्बन्धित महानुभावों के नामों का चयन किया गया था। जिन्हें आज भव्य अंगिका समाज “होली मिलन सह सम्मान समारोह के शुभावसर पर निम्न रुप से सम्मानित किया गया,

अंग गौरव रत्न सम्मान-2025
1. डाॅ. बिन्दूभूषण
2. श्री राहुल कुमार

अंग साहित्य सेवा भूषण सम्मान-2025
3. श्री महेन्द्र मिश्र- सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, श्यामनगर, पाकुड़
अंगिका सेवा रत्न सम्मान-2025
4. श्री रमेश चन्द्र सिंह- सेवानिवृत्त सिविल अभियन्ता, दुर्गा काॅलोनी,पाकुड़
5. श्री सिताबी राय- सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड, रेलवे काॅलोनी,पाकुड़
6. श्रीमती रंजू ठाकुर सामाजिक, छोटी अलिगंज,पाकुड़
अंगिका कला रत्न सम्मान-2025

7. श्रीमती रुमा सिंह- कला के क्षेत्र में-,सिंहवाहिनी,राजा पाड़ा,पाकुड़

उपर्युक्त महानुभावों को शाॅल, मोमेंटो एवं सम्मान- पत्र देकर सम्मानित किया गया ।
अध्यक्ष डाॅ. मनोहर कुमार जी ने धन्यवाद ज्ञापन कर सम्मान समारोह के समापन कर होली मिलन समारोह के लिए कोषाध्यक्ष कैलाश झा को आमंत्रित किया,
कैलाश झा ने होली मिलन समारोह में गायन व वादन के लिए श्याम झा, अजय झा, राजीव झा, रमेश चन्द्र सिंह, संजय शुक्ला, मिथिलेश सिन्हा, नन्द किशोर सिन्हा, आदि उपस्थित महानुभावों ने होली गीत व वाद्य वादन एवं ढोलक की आवाज से होली मिलन समारोह को मनोरम बना दिया ।
कलाकृति केन्द्र, पाकुड की निदेशिका श्री मती रुमा सिंह के शिष्य तान्या सिंह के द्वारा अंग प्रदेश की गाथा पर नृत्य , अनु के द्वारा शिव ( होली नृत्य) गीत के बोल मशाने में होली, एवं नम्रता पाण्डेय के द्वारा होली गीत सिया चलली अवध की ओर पर नृत्य कर उपस्थित सबों का मन मोह लिया ।
सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया । कार्यक्रम के पश्चात सबों के लिए शुद्ध शाकाहारी होली से सम्बन्धित भोजन तैयार किया गया था, जिसे सबों ने बड़े चाव से खाया।
उपर्युक्त कार्यक्रम में अंगिका समाज सहित सभी समाज के दर्जनों गण्य-माण्य उपस्थित थे।

हमें पैसों की भूख मिटाने भर तो दौगे , प्यास मिटाने के लिए पानी कहाँ से लाओगे ? पूछते हैं तालाब।

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के के एम कॉलेज के रास्ते मे पड़ने वाले पुष्करणी तालाब (अखाड़ी पोखर) को भरने के आरोप पर उक्त महल्ले के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। हाँलाकि ये तालाब एक संयुक्त सम्पत्ति है। किसी एक पक्ष द्वारा अपने तर्कों के साथ जमीन माफियाओं की छाँव में , अपनी जमीन के समतलीकरण के नाम पर पहली ही नज़र में तालाब भरने जैसी करवाई की पृष्ठभूमि पर बहुत पहले से खिचड़ी पकाई जा रही थी। पिछले दिनों जमीनी करवाई भी होने लगी। महल्ले वालों ने तालाब भरे जाने की जनसुविधा के मद्देनजर विरोध शुरू किया है।

इससे पहले आई आर एस स्तर के एक पक्षकार ने इसका विरोध करते हुए एक लिखित शिकायत स्थानीय सक्षम प्रशासन के अधिकारियों से की थी। उसमें एक व्यक्ति के नाम का उल्लेख भी है।
उसी लिखित शिकायत के आधार पर एक कलमकार ने समाचार भी बनाया था। चूँकि कलमकार ने शिकायत में उल्लिखित व्यक्ति के नाम का उल्लेख कर दिया था तो उन्हें मानहानि के मुकदमे की धमकी से डराया भी गया। ऐसे भी गरीब पत्रकार दबंगो के लिए एक आसान टारगेट होता है।

खैर उक्त समाचार के बाद दूसरे पक्ष ने भी अपनी बात रखी।
उक्त दोनों ही पक्षों के अध्ययन से फ़िलवक्त जो बात समझ में आती है , वो हिन्दू पारिवारिक सम्पत्ति विवाद एवं समाधान का मामला है। उसके अध्ययन और प्रशासन के विवेचना के अंतर्गत आता है।
लेकिन शिकायत के बाद भी त्वरित कार्यवाही न होना और पहली ही नज़र में तालाब भरे जाने की आशंका उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना तो दिखता है।

ऐसे भी तालाबों के शहर पाकुड़ में तालाब भरे जाने का यह कोई पहला मौका नहीं है। सैकड़ों अट्टालिकाएं तालाब की कब्र पर खड़ी मौन ठहाके लगाते यहाँ नज़र आ जाएँगी।

पत्रकारों के लिए इस शहर में बस अब इतना कहा जा सकता है कि “इस शहर के लोग भी हैं बड़े हुनर वाले, रोज हम अपनी जान हथेली पर लिए निकलते हैं।

जमीनों के नेचर को बदल खेल करने की कयावद यहाँ पुराना है , जो अनवरत जारी है।

सूखती नदियाँ , भरते तालाब जमीं हलक में दूर भागती रूठे भूगर्भीय जल स्तर शहर की अट्टालिकाओं से बरबस पूछती सी लगती है, कि अपनी अट्टालिकाओं में सभी सुविधाएं तो जुटा लोगे , लेकिन सुहागन की बिंदी की तरह ज़रूरी जल कहाँ से लाओगे।

एक सवाल उठता है , कि जाति धर्म के नाम पर लड़ने वाले इंसान तुम पूजा और ईबादत के लिए भी जल क्या ज़लील होकर भी जुटा पाओगे? भगवान को कैसे नहलाओगे , कैसे वज़ु करोगे ?

उक्त जमीन की समतलीकरण के चित्र को देखकर पाठक बताएं कि क्या तालाब भरे जाने का अहसास मस्तिष्क को दस्तख़ नहीं देता !

दस्तावेजों को पढ़ा जा रहा है , कहने को बहुत कुछ है। आपने शब्दों से किस्तों में कहेंगे भी , लेकिन जमीन जिनका भी हो ,आपका ही रहेगा , आप मछली पलिये , कमाइए । आपका अधिकार है ,पर तालाब पर प्रकृति और जीवों का अधिकार है , ये न भूलियेगा ।

कहीं ऐसा न हो कि प्रकृति और जीवों का अभिशाप , जलस्रोतों को मिटाने वालों को मौत तो किसी 5 स्टार अस्पताल के लक्ज़री कमरे में दे और अंत समय में पानी का एक बूँद हलक को नहीं मिले।

समुद्री यात्रा में जहाज़ पर पानी ख़त्म हो जाने के बाद शेक्सपियर ने अथाह सागर को देखकर कहा था – “वाटर वाटर एभरीव्हेयर , बट नथिंग ए ड्रॉप टू ड्रिंक”

ठीक उसी तरह जमीं के सौदागरों के पास पैसे तो बहुत हों ,लेकिन अंत समय वातानुकूलित कमरे के गद्दे पर हलक को पानी की एक बूँद नसीब न हो😥

अयोग्य व्यक्तियों के घुसपैठ और करतूतों से पत्रकारिता पर लग रहा दाग।

पत्रकारिता और पत्रकार की मौलिकता और महत्व स्वतंत्रता आंदोलन के समय से स्थापित रही है । उत्तरोत्तर में पत्रकारों का स्थान समाज में ऐसी होती चली गई,कि किसी भी तरह के,किसी भी स्तर पर पीड़ितों के लिए अंतिम आशा के रूप में पत्रकारिता और पत्रकार नजर आने लगे।शासन प्रशासन और आम जनमानस के बीच की धुरी बन पत्रकारिता ने समाज में संतुलन का कार्य किया।निरंकुशता, अपराध,अनियमितता, सामाजिक कुरीतियों और हर तरह की अतिवादिता पर वाचडॉग की तरह पत्रकारिता ने अपनी उपयोगिता सावित की.ऐसे में पत्रकारिता में भी किसी न किसी स्तर कुछ व्यक्ति विशेषों के कारण कमियाँ दिखीं।लेकिन आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जमाने में जब सोशल मीडिया के पहियों पर सवार पत्रकारिता ने कस्बों,गाँव और गलियारों तक का सफ़र तय किया तो,इस पर कुछ अवांक्षित तत्वों ने भी सवारी कर ली। इसमें संदेह नहीं कि सोशल मीडिया ने सूचना क्रांति लाई और निरंकुशता पर अंकुश लगाया,लेकिन दूसरी ओर यह भयादोहन का जरिया भी बन गया।
पाकुड़ में भी ऐसे उदाहरण देखने को फिलवक्त दिख रहा है। जिले के अँचल कार्यालयों से पत्थर व्यवसायियों को एक नोटिस भेजा गया है कि वे निश्चित समय तक ये बताएं कि उनसे नोटिस में नामित व्यक्तियों ने भयादोहन का प्रयास किया है कि नहीं।चर्चा में है कि कुछ नामित व्यक्तियों द्वारा अखबार और पत्रकारिता के नाम पर पत्थर व्यवसायियों से भयादोहन का लिखित आरोप जिला प्रशासन को मिला है,और जिला प्रशासन अपने जिलेभर के विभिन्न अमलों द्वारा इस आरोप की जाँच करा रहा है।ये जाँच भी ज़रूरी है,चाहे आरोप सही हो या गलत।अगर कोई स्वयं को पत्रकारिता से पीड़ित होने का लिखित आरोप लगाए तो जाँच लाज़मी है।लेकिन आम पत्रकारों के मन में एक सवाल है कि अगर सही समाचार के प्रकाशन से आहत कोई नाहक आरोप लगा कर एक परम्परा बना ले तो पत्रकारिता और समाज की इस अंतिम आशा का क्या होगा ?
हाँलाकि इसे नकारा नहीं जा सकता कि सोशल मीडिया और इस डिजिटल युग में बहुत अनुपयोगी अयोग्य व्यक्तियों ने पत्रकारिता में घुसपैठ बना रखी है, जिससे पत्रकार और पत्रकारिता को बदनामी का दाग धब्बों का सामना करना पड़ रहा है।यह बहुत ही दुखद है।

पाकुड़: एसडीपीआई के कार्यालय में ईडी का छापा, मचा हड़कंप । मिला क्या नहीं बताया ED ने।

ईडी की टीम गुरुवार को पाकुड़ पहुंचकर मौलाना चौक से आगे बल्लभपुर स्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के कार्यालय में छापेमारी की। दो इनोवा कार (जेएच 01 बीडब्ल्यू 5976 और जेएच 01 डीएम 4471) से आई ईडी की टीम एसडीपीआई पार्टी कार्यालय में सुबह करीब 10:45 बजे पहुंची थी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीम अहले सुबह ही पाकुड़ पहुंच चुकी थी। ईडी की टीम में कम-से-कम आधे दर्जन अधिकारी शामिल थे। वहीं टीम के साथ आधे दर्जन से ज्यादा सुरक्षा जवान मौजूद थे। यहां स्थित पेट्रोल पंप परिसर में ईडी का इनोवा पहुंची और टीम के अधिकारी कार उतरकर पंप के ठीक सामने स्थित एसडीपीआई पार्टी कार्यालय पहुंचे। पार्टी कार्यालय का शटर बंद था, तब तक ईडी कार्यालय के बाहर और आसपास के दुकानों में बैठे रहे। इस दौरान टीम के साथ पहुंचे जवानों ने अपना पोजीशन लेकर सुरक्षा में खड़े हो गए। इस दौरान रोड किनारे और एसडीपीआई कार्यालय तथा आसपास के दुकानों में खड़े जवानों पर आम लोगों की नजर पड़ी तो शुरू शुरू में लोग अचंभित रह गए। लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यहां जवानों को क्यों तैनात किया गया है। बाद में धीरे-धीरे लोगों को एसडीपीआई के कार्यालय में ईडी रेड की जानकारी मिली। ईडी की छापामारी से हड़कंप मच गया। ईडी के पहुंचने के करीब आधे घंटे बाद एसडीपीआई कार्यालय का शटर खोला गया। इसके बाद ईडी के अधिकारी कार्यालय के अंदर गए और कार्यालय में रखें दस्तावेजों को खंगालने लगे। दोपहर 1:00 बजे तक जब खबर लिखी जा रही थी, तब तक ईडी की कार्रवाई जारी थी। इस दौरान सुरक्षा जवानों ने मीडिया कर्मियों को सहयोग की अपील करते हुए भीड़ इकट्ठा नहीं करने का अनुरोध किया। मीडिया कर्मियों को बताया गया कि शाम 5:00 बजे तक कार्रवाई चलने की संभावना है। इसलिए मीडिया अपना काम आराम से करें और ईडी के अधिकारियों को कार्रवाई करने में सहयोग करें। इधर खबर लिखे जाने तक ईडी के अधिकारी कार्यालय के अंदर रखे कागजातों को खंगाल रहे थे। हालांकि एसडीपीआई पार्टी के कोई भी स्थानीय नेता ईडी की कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी के मामले में ईडी ने पाकुड़ में छापा मारा है। एसडीपीआई के कार्यकर्ताओं ने फैजी के गिरफ्तारी का बुधवार को पाकुड़ में विरोध भी किया था। गिरफ्तारी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था।उल्लेखनीय है कि ईडी ने मनी लांड्रिंग के आरोप में एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी को गत मंगलवार को ही गिरफ्तार किया था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ईडी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को कोच्ची (केरल) से दिल्ली पहुंचने पर पूछताछ के बाद इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। मीडिया में आई खबरों से यह भी जानकारी मिली है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पिछले साल जनवरी 2024 में राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी का बयान दर्ज किया था। इसके बाद मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक 12 बार राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी को ईडी ने तलब किया। लेकिन वे ईडी के सामने पेश नहीं हुए। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक एजेंसी का कहना है कि एसडीपीआई प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का एक राजनीतिक मोर्चा है। एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी साल 2009 तक पीएफआई के सदस्य रहे।

25 फरवरी को प्रदेश कार्यकारिणी का हुआ था गठन

गत 25 फरवरी 2025 को ही एसडीपीआई के प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हुआ था। पाकुड़ शहर के एक होटल में बैठक हुई थी। जिसमें एसडीपीआई के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने शिरकत किया था। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो. शफी साहब (राजस्थान), पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव इलियास मोहम्मद तुंबे, एनडब्लूसी मेंबर सह बिहार के प्रभारी डॉ महबूब आवाद शरीफ (बैंगलोर, कर्नाटका) एवं झारखंड प्रभारी अब्दुल सलाम (केरला) मुख्य रूप से मौजूद थे। बैठक में हंजिला शेख को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। जबकि हबिबुर रहमान उपाध्यक्ष बनाए गए थे। नई प्रदेश समिति में महासचिव एडमिन तहमीदुर रहमान, महासचिव संगठन शमीम अख्तर, सचिव वाजिदा खातून, अर्जुन टुडू व अमीर हमजा तथा कोषाध्यक्ष अवैदूर रहमान का चयन किया गया। वहीं समिति के सदस्य के रूप में शमीम अंसारी, उमर फारूख, अधिवक्ता अब्दुल हन्नान, हाजेरा खातून एवं गुलाम रसूल को रखा गया।