दीवाली कब है ? हर बार की तरह इस बार भी जिनसे मुलाकात होती है, यही सवाल मोटे तौर पर सुनने को मिलता है।
तो उत्तर है कि दीवाली 8 नवम्बर को है। इसी दिन देशभर में दीवाली मनाई जाएगी।
हाँलाकि धनतेरस 6 नवम्बर से भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ ही दीवाली के पर्व की शुरुआत हो जाएगी।
चुँकि कालांतर में मान्यताएं बदलती गईं और धनतेरस के दिन लोग सेहत ( हेल्थ ) के लिए पूजा छोड़ कर धन (वेल्थ) के लिए खरीददारी करने लगे।
शास्त्रीय कथा है कि तेरस के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान हाथ में अमृत कलश लिए अवतरित हुए थे, जिससे देवताओं को अमरत्व की प्राप्ति हुई इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर स्वास्थ्य का वरदान लेना चाहिए, लेकिन लोगों ने धन की पूजा शुरू कर दी । हाँलाकि पहले सोने की दुकान नहीं हुई करती थी, तो मनुष्य वैद्यों के यहाँ से अपने स्वास्थ्य जीवन के लिए स्वर्ण भष्म और रजत भष्म खरीदकर भगवान धन्वंतरि को भोग अर्पित कर उसे दवाई के लिए सालभर लेते थे। अब सोने और चाँदी के जेवर अलमारी में सजाने के लिए खरीदी होती है।
खैर 6 नवम्बर को धनतेरस है।छोटी दीवाली नरक चतुर्दशी 7 नवम्बर को मनाई जाएगी तथा दिवाली और लक्ष्मी पूजा भी 8 नवम्बर को मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजा के लिए 8 नवम्बर को प्रदोष काल में मोटे तौर पर 5 बजे संध्या से 7.30 तक का समय है। लेकिन बिभिन्न स्थानों पर पंडित पुरोहितों के कथनानुसार लोग लक्ष्मी पूजन करेंगे ।
लक्ष्मी पूजन के बाद निशा रात्रि यानी मध्य रात्रि में शाक्त , तांत्रिक एवं माँ काली के उपासक काली उपासना करेंगे। ऐसे उपासकों के लिए यह अमावस्या की रात काफ़ी अनुकूल और महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसके बाद 9 नवम्बर को भी दिनभर इसी पूजन में लोग व्यस्त रहेंगे। 10 नवम्बर को गोवर्धन पूजा और 11 नवम्बर को भाई दूज के बाद दीवाली के पाँच दिवसीय त्यौहार का समापन होगा।
तो मूल प्रश्न दीवाली कब है का जवाब है कि दीवाली 8 नवम्बर को है। इस अमावस की रात दिया जलाकर रौशन करें और दीवाली मनाएं। साथ ही अपने अपने पुरोहितों के कथन का अनुसरण भी करें।
दीवाली , लक्ष्मी और काली पूजा 8 नवम्बर को है 5 दिवसीय 6 नवम्बर धनतेरस से 11 नवम्बर भाई दूज तक चलेगा।
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