*शरद पूर्णिमा पर खीर बना कर खुले आसमान के नीचे रखने की है शादियों पुरानी परंपरा*
*आज रात पृथ्वी से सबसे निकट होगा चंद्रमा, दुधिया रौशनी से जगमग होगी आज की रात*
*आज का पंचांग 👇*
*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
25.10.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ याम्यायन सौम्यगोल: शरद् ऋतु श्रीसूर्य: दक्षिणायन।
हिन्दी माह : आश्विन
पक्ष : शुक्ल
तिथि : चतुर्दशी
दिन : रविवार
नक्षत्र : रेवती
योग : हर्षण
करण : वणिज/विष्टि
सूर्योदय : सुबह 06:23 बजे।
सूर्यास्त : शाम 05:37 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेंगे।
आज का सूर्य : तुला राशि में।
आज का चंद्रमा : मीन राशि में।
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*आज का दिशा शूल :* पश्चिम।
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*आज का राहुकाल :*
शाम 4:30 से 6:00 बजे तक।
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*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज दिन में 11:05 बजे तक चतुर्दशी रहेगा। उसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रवेश करेगा। पूर्णिमा तिथि कल 26 अक्टूबर दिन सोमवार को दिन में 9:57 तक भोक करेगा। पूर्णिमा तिथि निशा काल में अर्थात् रात्रि बेला में आज ही भोग करेगा। ऐसे शरद पूर्णिमा आज ही मनाया जाएगा। जबकि स्नान-दान की पूर्णिमा कल 26 अक्टूबर दिन सोमवार को होगा। कार्तिक महीने की गिनती 27 अक्टूबर दिन मंगलवार से होगा।
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*पंचक:* आज रात्रि 7:54 बजे चंद्रमा मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा के मेष राशि में प्रवेश करते ही पिछले 5 दिनों से चला आ रहा पंचक समाप्त हो जाएगा।
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*आज का खास :*
*शरद पूर्णिमा विशेष…..*
*शरद पूर्णिमा आज, बनेंगे दुर्लभ संयोग, आसमान से होगी अमृत की वर्षा*
*शरद पूर्णिमा पर खीर बना कर खुले आसमान के नीचे रखने की है शादियों पुरानी परंपरा*
*आज रात पृथ्वी से सबसे निकट होगा चंद्रमा, दुधिया रौशनी से जगमग होगी आज की रात*
भगवान् श्रीकृष्ण की रासलीला का पावन दिवस और माता लक्ष्मी की आराधना का पर्व पर रविवार को आसमान से अमृत की वर्षा होगी। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला शरद पूर्णिमा रविवार को मनाया जाएगा। इस बार शरद पर वर्षों बाद कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। पूर्णिमा तिथि, रेवती नक्षत्र के संयोग विशेष फलदायी होंगे। शरद पूर्णिमा अपने साथ कई शुभ संयोग के साथ-साथ शरद ऋतु का सौगात लेकर प्रकट होगा। शरद पूर्णिमा उत्सव के साथ ही दीपों का महापर्व दीपावली और छठ पूजा की तैयारियां प्रारंभ हो जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होती है। द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की रात ही भगवान श्री कृष्ण गोकुल में 1008 गोपियों के साथ रासलीला किया था। तब भगवान की रासलीला को देखने देवी देवताओं के साथ चंद्रमा भी पृथ्वी के निकट पहुंचा था और अपने अमृत वर्षा से जन जन को तृप्त किया था। लोग शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर अपने छतों पर खुले आसमान में रखते हैं। खीर का महाप्रसाद रात भर खुले आसमान में रहने के बाद अगले सुबह उसका सेवन किया जाता है। मान्यता है कि रात भर खीर खुले आसमान में रहने से इस रात हुए अमृत की वर्षा से खीर में कई औषधीय गुण बरसते हैं जो पीत रोग से छुटकारा दिलाता है और स्वस्थ जीवन का निर्माण करता है। शरद पूर्णिमा के साथ दिवाली की धूम मच जाएगी। शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की भी पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि में विचरण करती है और भक्तों पर धन-धान्य से पूर्ण करती है। इस दिन रात भर जाग कर मां लक्ष्मी के भजन करने चाहिए। कहते हैं मां लक्ष्मी इस दिन रात में जगने और मां लक्ष्मी के अराधना करने वालों को धन और वैभव का आशीर्वाद देती हैं। इस लिए इसे कोजागिरी पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा पर कुंडली में कमजोर चंद्रमा वाले जातक उपाय करते हैं। चंद्रमा बलवान होने से इस दिन छोटा सा उपाय कमजोर चंद्रमा मजबूत किया जा सकता है। घी के दीपक जलाकर मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को चंद्रमा पृथ्वी के अधिक निकट होने से बलवान होगा। चंद्रमा की किरणों की छटा धरती को दूधिया रोशनी से नहलाएगी। इस छटा के बीच पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाएगा।
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आलेख…
*पं.चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुंडली, वास्तु व कर्मकाण्ड परामर्श*
*संपर्क:9905507766*
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