झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के उपस्थिति में पाकुड़ के पाकुड़ पॉलिटेक्निक में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम में सचिव रूपा बंदना किरो ने 12 अगस्त का मनाने जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा वर्गों को युवा सशक्तिकरण से न्याय पूर्ण समाज की ओर बढ़ाने को लेकर कानूनी रूप से जागरूक किया गया। इस दौरान सचिव ने निशुल्क कानूनी परामर्श,लोक अदालत के महत्व, डालसा द्वारा निशुल्क अधिवक्ता मुहैया कराने, महिला और युवा सुरक्षा को लेकर कई बिंदु पर जागरूक किया गया। सचिव ने कहा कि युवा अपने मेहनत और प्रतिभा से समाज और देश में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।डीएसपी मुख्यालय उज्जवल कुमार साहा ने युवाओं अवस्थाओं के महत्व पर प्रकाश डाला युवा देश के भविष्य होते हैं उनमें नई ऊर्जा विचार ,उत्साह और रचनात्मकता होती है। इस दौरान युवाओं के भूमिका पर अपने विचारों को रखा। इस दौरान युवाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव पर जागरूक किया गया।लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के सहायक गंगाराम टुडू एवं अज़फर हुसैन विश्वास ने संयुक्त रूप से कई कानूनी एक्ट पर विस्तृत जानकारी दी साथ ही महिला सुरक्षा एवं बाल सुरक्षा पर जागरूक किया गया। पॉक्सो एक्ट से संबंधित कानूनी जानकारी साझा की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर अपने विचारों को रखा। ये दिन युवाओं के भूमिका, शिक्षा,स्वास्थ्य और बेहतर अवसर देने के महत्व पर याद दिलाने एवं युवा वर्गों को कानूनी तौर पर सशक्तिकरण करने के उद्देश्य पर जागरूक किया गया।मंच का संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड एच विश्वास ने किया।पाकुड़ पॉलिटेक्निक के प्रिंसिपल डॉ सुषमा यादव ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए इस कार्यक्रम के महत्वों पर अपने विचारों को रखा। एवं युवा वर्गों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का पालन करने एवं कड़ी मेहनत ,नई ऊर्जा के साथ सशक्त समाज एवं सशक्त देश का निर्माण में छात्र छात्राओ के भूमिका पर अपने बातों को रखा।पीसीआई-यूनिसेफ के जिला कार्यक्रम समन्वयक मो. अनीश अंसारी ने दो गुब्बारों की सीख: पेरेंटिंग सेशन में सकारात्मक सोच का संदेश के तहत्
कार्यक्रम के पेरेंटिंग सेशन के दौरान माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक समझ एवं संवाद को बढ़ावा देने के लिए दो गुब्बारों का उदाहरण दिया गया। समझाया गया कि एक बच्चे के मन और मस्तिष्क में यदि नकारात्मक बातें, गलत व्यवहार और बुरे अनुभव भरे जाएं, तो उसका प्रभाव उसके व्यक्तित्व और व्यवहार में दिखाई दे सकता है। वहीं, यदि बच्चे के भीतर प्यार, अच्छे संस्कार, सकारात्मक सोच, शिक्षा, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना भरी जाए, तो उसका प्रभाव भी सकारात्मक रूप में सामने आता है।
इसी क्रम में बताया गया कि दो गुब्बारे अलग-अलग स्थानों पर फूटे। एक स्थान पर गंदगी और दुर्गंध के कारण लोग नाक बंद करके वहां से गुजरने लगे और बुरा-भला कहकर आगे बढ़ गए। वहीं दूसरे स्थान पर गुब्बारा फूटने पर खुशबू और अच्छी चीजें लोगों तक पहुंचीं, जिससे लोग वहां रुककर सकारात्मक बातें करने लगे।
इस उदाहरण के माध्यम से माता-पिता और बच्चों के बीच सकारात्मक संवाद, विश्वास और बेहतर समझ पर विशेष जोर दिया गया। माता-पिता को प्रेरित किया गया कि वे बच्चों की बात ध्यान से सुनें, उन्हें डांटने के बजाय समझने का प्रयास करें और उनके भीतर अच्छे विचार एवं आत्मविश्वास विकसित करें।
सत्र में संदेश दिया गया कि “हम बच्चों के मन में जो भरेंगे, वही उनके व्यवहार और व्यक्तित्व के रूप में बाहर आएगा।” इसलिए परिवार में सकारात्मक माहौल और पीढ़ियों के बीच संवाद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मौके पर पाकुड़ पॉलिटेक्निक के शिक्षक शिक्षिकाएं ,सोशल वर्कर नासीरूद्दीन शेख, फजर शेख आलियारा खातून, बीवीजान, हाजरा बीवी, विद्यार्थी नेहा कुमारी पायल कुमारी, आयेशा खातून रेशमा खातून ,नूरजहां खातून, पारा लीगल वॉलिंटियर्स नीरज कुमार राउत समेत छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
*पाकुड़ पॉलिटेक्निक में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन*
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