आलोक मित्तल जी से साभार :-
बुजुर्गों के कथन और विज्ञान।
प्रकृति दे रहा पानी के प्रति जागरूक होने का संकेत।
कैसे और क्यूँ ?
पढ़ें आलोक मित्तल को-
*इस साल जामुन की बंपर बहार*-
इस साल जितने जामुन बाजार में दिख रहे हैं, उतने मैंने पिछले तीन दशक में कभी नहीं देखे।
जामुन के पेड़ों के नीचे सच में जामुन के ढेर लगे हैं। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से लदे हुए हैं।
आखिर ये हो क्या रहा है?
*हमारे बुजुर्ग कहते थे: “जिस गर्मी में जामुन ऐसे ढेरों गिरते हैं, उस साल सूखा पड़ता है*।”
बुजुर्गों का ये पारंपरिक ज्ञान वनस्पति शास्त्र के हिसाब से बिल्कुल सटीक है। विज्ञान में इस प्रक्रिया को “Masting” या “Stress Fruiting” कहते हैं।
पेड़ों के खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को “Suicide Fruiting” या “Bumper Crop” भी कहा जाता है।
विज्ञान क्या कहता है:
Survival Instinct यानी अस्तित्व की लड़ाई
जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होती है, तब पेड़ “Defense Mode” में चला जाता है। अपनी प्रजाति को जिंदा रखने के लिए पेड़ अपनी सारी ताकत फल बनाने में लगा देता है।
नए पत्ते-टहनियों पर रोक
ऐसे साल में पेड़ नई कोंपल निकालना बंद कर देता है। ऊर्जा बचाकर सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाता है। इसीलिए पिछले साल कम फल वाले पेड़ भी इस बार लदे हैं।
बुजुर्गों की भविष्यवाणी और सूखे से रिश्ता
# पेड़ मौसम के बदलाव को पहले पहचान लेते हैं।
#जामुन की जड़ ‘Taproot’ बहुत गहराई तक जाती है। जब भूजल स्तर बहुत नीचे जाता है, तभी जड़ों को तनाव महसूस होता है। ये तनाव ही आने वाले सूखे का संकेत है।
#सीधी बात:
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि खुद का बलिदान देकर अगली पीढ़ी को जन्म दे रहा है। #पीढ़ियों का अनुभव और विज्ञान यहां एकदम मिलते हैं।
इस साल जामुन का स्वाद लें, पर प्रकृति के इस ‘सूखे’ के संकेत को गंभीरता से देखें। *पानी संभलकर इस्तेमाल करें*।