Thursday, March 12, 2026
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बहुत हो गया , अब विस्थापितों ने स्वयं उठाये झंडे और हक़ की आवाज़ , देखना होगा परिणाम का आगाज़ !

हँलांकि विस्थापितों की कहानी पूरे देश में लगभग मिलती जुलती है। झखण्ड में ज्यादा दर्द में हैं विस्थापित , और पाकुड़ में यही दर्द पराकाष्ठा पर है।
कारण है , नेताओं ने समय समय पर इन विस्थापितों को हक़ दिलाने के वादे पर आंदोलन तो किये लेकिन समझदार समझ जायेंगे कि पीड़ित के दर्द तो यथावत रहे और आंदोलन करने वाले ….
खैर अपने ही बीच के दलाल भी बन गए और विस्थापित ठगे रहे।
विस्थापितों ने अब स्वयं झंडा उठा लिया है। नेताओं और बीचवालों से किनारा कर अपनी आवाज़ स्वयं उठा रहे हैं।
पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा पचुवाड़ा नॉर्थ कोल परियोजना क्षेत्र के विस्थापित-ग्रामीण अथवा रैयतों के संवैधानिक अधिकारों का दमन हो रहा है। उनके आधारभूत नागरिक सुविधाओं को कुचला जा रहा है। विस्थापित शोषित हैं। पीड़ित हैं। उनकी आवाज अनसुनी कर दी जा रही है। जिन्हें अपना कीमती मत देकर वो सदन और संसद तक पहुंचा रहे हैं, जिन्हें अपना रहनुमा चुन रहे हैं, जिन्हें ये अपनी आशा और उम्मीद समझ रहे हैं ; वो भी इनकी अंतहीन समस्याओं के प्रति उदासीन हैं। विवश होकर ये अपनी मांगों को लेकर गत 9 मार्च से यानि लगातार तीन दिन से धरने पर बैठे हुए हैं। माइंस में खनन, परिवहन सहित तमाम गतिविधियां बुद्धवार को भी पूर्णतः ठप रहीं। परियोजना क्षेत्र के विस्थापित महिला,पुरुष, बच्चे सभी सार प्रॉजेक्ट गेट के समक्ष अपनी मांगों को पूरा करवाने को ले अड़े हुए हैं। बेहतर औपचारिक व तकनीकि शिक्षा , स्पेसल चिकित्सा सुविधा बहाली, योग्यता के अनुरूप नौकरी और पगार में वृद्धि,कोयला निकाले जा चुके जमीन का समतलीकरण अन्यान्य इनकी प्रमुख मांगें हैं। अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक-बिशनपुर के नेतृत्व में ग्रामीण अपने मौलिक मांगों पर डंटे हुए हैं। विभिन्न गांवों के नाराज व असंतुष्ट विस्थापित ग्रामीणों ने कहा कि डब्लूबीपीडीसीएल और बीजीआर पिछले सात वर्षों से कोयले का खनन और परिवहन लगातार कर रही है। प्रति दिन करोड़ों-अरबों का व्यवसाय हो रहा है। हमारी मांगें बैठकों,आश्वासनों और भरोसों की आड़ में टाल दी जा रही हैं। आजतक न स्कूल मिला, न एक सुविधायुक्त हॉस्पिटल। डब्लूबीपीडीसीएल व बीजीआर सिर्फ आदिवासियों का शोषण कर रही है। पिछले तीन दिनों से प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की बैठकों का सिलसिला यहां जारी है किंतु, समस्याओं का कोई निदान नहीं निकला है। प्रशासन या संबंधित एलॉटी व एमडीओ कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। हमलोग वर्षों से छले जा रहे हैं। अब झूठे वादों पर भरोसा नहीं। प्रबुद्ध विस्थापितों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि नॉर्थ कोल ब्लॉक के एलॉटी डब्लूबीपीडीसीएल और एमडीओ बीजीआर एमओयू अथवा इकरारनामे का आंशिक अनुपालन भी नहीं कर रहा है। हमलोग मनमानीपूर्ण रवैये से परेशान हैं। इस दफ़ा कोई न कोई ठोस निदान निकालना ही होगा अन्यथा चक्का जाम रहेगा और अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।

*डब्लूबीपीडीसीएल के जीएम ने कहा :* इस परिप्रेक्ष्य में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेसन लिमिटेड के महा प्रबंधक रामाशीष चटर्जी ने कहा कि मोबाइल मेडिकल यूनिट की सुविधा ग्रामीणों को दी जा रही है। स्वास्थ्य सेवा के विस्तार और बेहतरी के लिए प्लानिंग की जा रही है। माइनिंग चल रहे अथवा माइनिंग हो चुके गांवों के बच्चों को स्कॉलरशिप दी जा रही है। माइनिंग प्लान के तहत माइनिंग क्लोजर भी होगा। प्लान के तहत लैंड लेवलिंग किए जाएंगे। विस्थापितों को अनस्किल्ड मजदूरी दी जा रही है। स्किल डेवलपमेंट केंद्रों को भी विस्तारित किया जा रहा है। 376 परियोजना प्रभावितों को अनस्किल्ड सैलरी दी जा रही है। विस्थापितों की तमाम समस्याओं पर विमर्श किया जा रहा है। प्लानिंग्स हो रही हैं। निदान के ठोस प्रयास जारी हैं।

*धरना स्थल पर ये थे मौजूद :* बानेश्वर टुडू, वकील बेसरा, अन्द्रियास मूर्मू,मुंशी टुडू, मानवेल हांसदा, सोम हेम्ब्रम, शिवधन हेम्ब्रम, मालती हेम्ब्रम,मुखी किस्कू,ताला मूर्मू, मालोती टुडू, मंझली सोरेन,लालमुनी सोरेन, चिते बासकी, नाचोन मूर्मू, बीटी हांसदा, चुमके बेसरा, देकुड़ी टुडू, बाले सोरेन, फूलमुनी हेम्ब्रम आदि महिला-पुरुष अपने छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर डंटे हुए थे।

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