— *मोनिता कुमारी*
*जिला महासचिव, कांग्रेस पार्टी* झारखंड निकाय चुनाव के बाबत भाजपा की नीतियों और प्रदर्शन आदि को लेकर बेवाक कहतीं हैं कि—
चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव को लेकर साफ़ और अंतिम निर्णय ले लिया है कि मतदान बैलेट पेपर से होगा। इसके बावजूद भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा मशीन से चुनाव कराने की मांग करना यह साबित करता है कि भाजपा लोकतंत्र से नहीं, जनता से डरती है।
यह वही भाजपा है जो देशभर में EVM पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्रविरोधी बताती रही है, और आज जब बैलेट पेपर की बारी आई तो खुद घबराकर मशीन की रट लगाने लगी। इससे बड़ा दोहरापन और क्या हो सकता है?
सच यह है कि बैलेट पेपर में धांधली की गुंजाइश कम होती है, इसलिए भाजपा बेचैन है। उन्हें मालूम है कि जनता अब जाग चुकी है और निकाय चुनाव में भाजपा की सच्चाई सामने आने वाली है।
मैं साफ़ शब्दों में कहना चाहती हूँ—
चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाना, दरअसल संविधान और लोकतंत्र पर सवाल उठाना है।
भाजपा अगर खुद को इतनी ही मजबूत समझती है तो बैलेट पेपर से चुनाव से क्यों डर रही है?
जनता सब समझ रही है, और इस बार जवाब मतपेटी से देगी।