Sunday, February 22, 2026
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नालसा के योजनाओं के तहत न्याय हर घर तक न्याय सबके लिए पर कुमारपुर पंचायत भवन में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में आज पाकुड़ प्रखंड के कुमारपुर पंचायत भवन में जागृति,संवाद, डॉन योजना एवं आशा योजना पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो नुकुमुद्दीन शेख, एलएडीसीएस के सहायक अज़फर हुसैन विश्वास, जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर पीसीआई यूनिसेफ मो अनीस,पैरा लीगल वॉलिंटियर्स मो सायेम अली याकूब अली ने उपस्थित ग्रामीणों को जागरूक की। जिसमें लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के डिप्टी चीफ मो नुकुमुद्दीन शेख ने जागृति योजना के तहत बताया कि कमजोर और वंचित वर्ग को निशुल्क कानूनी सहायता जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ द्वारा उपलब्ध कराई जाती है समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की किरण पहुंचे उसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है लोगों को अपने अधिकार को समझने और न्याय पाने में सक्षम बनाने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। वहीं सहायकअज़फर हुसैन विश्वास ने बताया कि संवाद योजना के तहत हास्य पर पड़े कमजोर आदिवासी और विमुक्त घुमंतू जनजातियों को मजबूती करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है साथ ही नशा मुक्त भारत के लिए चलाए जा रहे हैं विशेष डॉन योजना पर कई महत्वपूर्ण जानकारी ग्रामीणों को दी गई।मंच का संचालन इंडियन नेशनल एसोसिएशन के अध्यक्ष जेड एच विश्वास ने किया। इस दौरान कार्यक्रम में पीसीआई यूनिसेफ की ओर से जिला कार्यक्रम समन्वयक मोहम्मद अनिश ने ग्रामीणों को बाल विवाह की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि National Family Health Survey (NFHS-5) के अनुसार झारखंड में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक है। सर्वे के मुताबिक पाकुड़ जिला राज्य में पांचवें स्थान पर है, जहां लगभग 44 प्रतिशत बाल विवाह के मामले पाए गए हैं।
कार्यक्रम में बाल विवाह के प्रमुख कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक दबाव, दादी-नानी की इच्छा, “बेटे के साथ बेटी की भी शादी कर देना”, कम उम्र में पढ़ाई छोड़ देना, मोबाइल के दुरुपयोग का डर, तथा समाज में बदनामी का भय शामिल हैं। बताया गया कि अक्सर बच्चियां आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं, जिससे बाल विवाह की संभावना बढ़ जाती है।
ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी गई। सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत आठवीं कक्षा से लेकर 18-19 वर्ष की आयु तक बालिकाओं के बैंक खाते में कुल 70,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद विवाह करने पर सरकार की कन्यादान योजना के तहत भी लाभ प्रदान किया जाता है।कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों से अपील की गई कि वे बाल विवाह रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं, बेटियों की शिक्षा पर ध्यान दें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।आज के इस कार्यक्रम में मदरसा सिराजुल उलूम की छात्रा नफीसा खातून सुरैया खातून ने बाल विवाह के नुकसान पर विचार व्यक्त की। उक्त कार्यक्रम में मौलाना बदरे आलम प्रधानाध्यापक सेना शेख, कुमारपुर पंचायत के सचिव सुनील कुमार, एनजीओ कार्यकर्ता फजर शेख, स्वपन प्रमाणिक समेत ग्रामीण आलमगीर आलम, नरगिस बीवी,रोशनी खातून, जहना परवीन, सुशांत कुमार,नेश मोहम्मद ,वार्ड सदस्य समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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