घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1
बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः
In one word “Splendid”