*कल मनाया जाएगा स्नान-दान की चैती पूर्णिमा, बनेंगे खास योग*
*आज का पंचांग 👇*
*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
01.04.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ सौम्यायन याम्यगोल: बसंत ऋतु। श्रीसूर्य: उत्तरायण।
हिन्दी माह : चैत्र
पक्ष : शुक्ल
तिथि : चतुर्दशी
दिन : बुधवार
नक्षत्र : उत्तरा फाल्गुनी
योग : वृद्धि
करण : वणिज/विष्टि
सूर्योदय : सुबह 05:52 बजे।
सूर्यास्त : शाम 06:08 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेगा।
आज का सूर्य : मीन राशि में।
आज का चंद्रमा : कन्या राशि में।
*आज का शिववास भोजन स्थल पर होगा। फल पीड़ा दायक अर्थात् अशुभ है।*
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*आज का दिशा शूल :* उत्तर।
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*आज का राहुकाल :*
मध्याह्न 12:00 बजे से 1:30 बजे तक।
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*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज प्रातः 6:16 बजे से शाम 6:22 बजे तक भद्रा रहेगा। भद्रा का वास पाताल में रहेगा। आज प्रातः 6:17 बजे पूर्णिमा तिथि प्रवेश कर रहा है। पूर्णिमा तिथि कल दिनांक 2 अप्रैल दिन गुरुवार को प्रातः 6:28 बजे तक भोग करेगा। प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि आज ही भोग करने के कारण व्रत पूर्णिमा का मान आज ही होगा। जबकि स्नान-दान की चैती पूर्णिमा कल दिनांक 2 अप्रैल दिन गुरुवार को होगा।
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*आज का खास:*
*आध्यात्मिक, धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है चैत्र का महीना*
चैत्र महीना आध्यात्मिक, धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है, क्योंकि मान्यता अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी माह में सृष्टि की रचना की थी। इस महीने में वासंतिक नवरात्रि, चैती छठ, रामनवमी और हनुमान जयंती जैसे प्रमुख पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं।
*चैत्र माह का महत्व और विशेषताएं*
भारतीय नववर्ष: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) का आरंभ होता है।
*पौराणिक महत्व:*
मान्यता है कि इसी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और इसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी।
*देवी और राम उपासना:*
चैत्र माह में नौ दिनों तक शक्ति की उपासना (वासंतिक नवरात्रि) की जाती है। चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्म उत्सव (रामनवमी) हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
*प्रकृति में बदलाव:*
यह महीना बसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत का समय है, जब प्रकृति में नया जीवन आता है।
*स्वास्थ्य के लिए नियम:*
आयुर्वेद के अनुसार, इस महीने में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसमें बासी भोजन न करने, हल्का भोजन करने और सूर्योदय से पहले उठकर योग-ध्यान करने की सलाह दी जाती है।
*दान और पुण्य:*
इस पवित्र मास में जप, तप, दान और स्नान-ध्यान का विशेष महत्व है, जिससे मानसिक शांति और पुण्य फल मिलता है।
*श्री हनुमान जयंती:*
चैत्र पूर्णिमा को श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जो इस महीने के अंत में ऊर्जा और भक्ति का संचार करता है।
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आलेख…
*पं. चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुण्डली, वास्तु व कर्मकांड परामर्श*
*संपर्क : 9905507766*
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