एक कहावत हैं “मैं बागी रहूंगा हमेशा उन महफिलों का,जहां शोहरत तलवे चाटने से मिलती हो।यह वाक्य पाकुड़ नगर परिषद की निर्वाचित अध्यक्ष शबरी पाल पर सटीक बैठती हैं.शबरी को भाजपा ने दुत्कारा और शहर की जनता ने अपनाया.शबरी ने बागी तेवर के साथ खड़े होकर जीत की विजय गाथा लिख डाली.इस विजय गाथा को मंजिल तक पहुँचाने के लिए उनके पति सहित चार युवा सिपहसालार के रूप में परिणाम आने तक छाँव की तरह डटे और खड़े रहे.
नगर परिषद चुनाव में पाकुड़ के शबरी पाल की जीत के पीछे उनके पति ने स्वाभाविक रूप से काफ़ी मेहनत की।कोई भी चुनाव में सेवा समर्पण की भावना के साथ रणनैतिक चुनौती को साधने वाले एक टीम की ज़रुरत होती है।शबरी जी के पति के पवन की चंचलता की वेग,अभी की ततपरता,इमरान सिंह गुजराल की निश्छल मुस्कान के साथ निरन्तरता ने लगातार जमीन पर मेहनत की। इनके साथ जीत खबर एक प्राची (सुबह ) शबरी की आँचल में इठलाता हुआ कदम रखता है,जैसे उस शबरी के चिर प्रतीक्षित आँगन में राम ने अपने आगमन का प्रसाद दिया था।पाकुड़ में भी प्रतिष्ठित बड़ी पार्टियों और दिग्गजों की रणनीति के बीच प्रतिस्पर्धा में अपने पति के साथ पवन भगत,प्राची चौधरी, इमरान सिंह गुजराल और अभी दास के साथ शबरी जी किसी वीरांगना की तरह मैदान में डटी रहीं। नगर निकाय चुनाव में शबरी पाल के जीत की कहानी में इन पाँचों व्यक्ति ने जो अपने समर्पण का योगदान दिया है उसे किसी भी कीमत पर मुश्किल सा है,क्योंकि सामने मैदान में जो भी प्रतिस्पर्धी खड़े थे,वे सभी अनुभवी थे साथ ही उनके पीछे एक बड़ा नाम तथा बैनर था.ऐसे में इन लोगों ने शबरी के साथ पूरे चुनाव में एक छाँव की तरह साथ दिया। कुछ नाम ऐसे भी हैं जो जीत की चादर बुनने में अपनी अपनी जगह से शबरी पॉल के साथ थे। लेकिन जमीन पर थी पवन की तेज,अभी का दासत्व भावपूर्ण समर्पण,गुजराल जी की सौम्यता और प्राची चौधरी का मतदाताओं के साथ मिलने खासकर महिलाओं से वोट याचना की निश्वार्थ भाव। और शबरी जी के पती तो उनके साथ थे ही।एक कभी न भूलने वाली कहानी लिख गया ये चुनाव और जीत बुनने वाले रणनीतिकार इन चेहरों की मौन कहानी कह गई जीत की कथा।
मौन किरदार कह गए शबरी के जीत की कथा
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