Thursday, February 19, 2026
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सीपीआई (एम) झारखंड राज्य कमिटी के प्रकाश विप्लव ने नगर निकाय चुनाव को लेकर आम मतदाताओं से नफऱत से ऊपर उठकर मतदान की अपील की है।

झारखंड के नगर निकाय चुनाव में नफरत फैलाने वाले प्रत्याशियों की पराजय सुनिश्चित कर सद्भाव और एकता के पक्षधर उम्मीदवारों को विजयी बनायें
*शहरी मतदाताओं से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की अपील*
मतदाता बहनों एवं भाइयों,
झारखंड में स्थानीय निकायों के लिए होने वाले चुनाव का प्रचार अब जोर पकड़ रहा है. 23 फरवरी को कुल 48 निकायों जिनमें 9 नगर निगम 20 नगर पर्षद 19 नगर पंचायत के 1087 वार्डों मे मेयर /अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के लिए वोट डाले जायेंगें और 27 फरवरी को चुनाव के नतीजे मिल जायेंगें. जिसके बाद निर्वाचित वार्ड पार्षदों द्वारा निकायों के उप महापौर /उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा और नगर निकाय के बोर्ड का गठन होगा. घोषित रुप से निकाय चुनाव गैर दलीय आधार पर हो रहे हैं लेकिन राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने दल आधारित प्रत्याशियों का चयन कर पीछे से उनका समर्थन किया जा रहा है. एक ही पार्टी के कई प्रत्याशियों के चुनाव मैदान मे डटे रहने के कारण इन पार्टियों के लिए समस्याएँ भी पैदा हो रही है. अंदरूनी तौर पर इन पार्टियों द्वारा एक ही अधिकृत उम्मीदवार के चयन का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन पार्टियों के बागी उम्मीदवारों ने चुनाव मैदान से हटने से इंकार कर इन दलों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी है.
नगर निकायों के चुनाव में बेहतर होता की कई अन्य राज्यों की तरह यह चुनाव भी राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह पर होता ताकि उम्मीदवारों की विश्वसनीयता भी बनी रहती. लेकिन वामदलों को छोड़ कर झारखंड की मुख्य राजनीतिक पार्टियां निकाय चुनाव को अपने तरीके से संचालित करना चाहती हैं क्योंकि चुनाव राजनीतिक दल आधारित होते तब उनके चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल होता और एक ही अधिकृत प्रत्याशी होता. अब ” जो जीता वही सिकंदर” सबके लिए दरवाजे खुले रखे जायेंगें यह एक प्रकार का राजनीतिक अवसरवाद ही है.
इस पृष्ठभूमि में माकपा शहरी निकायों के मतदाताओं से अपील करती है की वे नगर निकाय चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को पराजित कर धर्मनिरपेक्ष प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करें. ताकि शहरी क्षेत्र में बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडा को आगे बढाने के मंसूबों को ठप्प किया जा सके. माकपा की समझ है की नगर निकाय चुनाव एक महत्वपूर्ण चुनाव है जो निर्वाचित निगम, पर्षद और नगर पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा शहरों/कस्बों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं , सफाई, शुद्ध पेयजल कीं आपूर्ति, शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा आवागमन के लिए परिवहन, संडकों का निर्माण और एक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त शहर के विकास के लिए जिम्मेवार है. आज एक ओर राज्य के शहरी निकायों की स्थिति बद से बदतर है. हर जगह कूड़े का अंबार,
बजबजाती गंदी नालियां और मच्छरों के भयानक प्रकोप से नागरिक परेशान है.दूसरी ओर नगर निकायों में वर्षों से काम कर रहे अस्थाई सफाईकर्मी जिन्हें आउटसोर्सिंग कंपनियों के हवाले कर दिया गया है जहां उनका निर्मम शोषण जारी है. लेकिन निकाय चुनाव में भाजपा इन मुद्दों के बजाए सांप्रदायिक धुव्रीकरण के एजेंडे को ही आगे बढा रही है.
इसलिए एक जिम्मेवार शहरी नागरिक होने के नाते आपका कर्त्तव्य है की घृणा और विभाजन फैलाने वाले प्रत्याशी के हार की गारंटी कर सद्भाव और एकता के हिमायती प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करें.

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