Tuesday, February 10, 2026
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पत्थर के धूल बने आफ़त , बीमारियों की आशंका से लोग हलकान

*दिनरात अवैध पत्थर खनन और धूल उगलती क्रशरों की भारी कीमत चुका रहे हैं स्थानीय निवासी*

– पातालफोड़ खुदाई से स्थानीय लोगों में है दहशत

पाकुड़ (महेशपुर) : महेशपुर प्रखंड के शहरग्राम के अमलागाछी व नारायणटोला गांव के लोग दिनरात पत्थर खनन और धूल उगलती क्रशरों की भारी कीमत चुका रहे हैं। पत्थर उद्योग ने क्षेत्र के पर्यावरण और जन स्वास्थ्य पर ऐसी चोट की है, जिसकी भरपाई आसान नहीं है। इन खदानों से अवैध खनन लगातार जारी है, स्थानीय भाषा में इतनी गहरी खुदाई को पातालफोड़ खुदाई कहते हैं। इस तरह की खुदाई खान अधिनियम 1952 का खुला उल्लंघन है। अधिनियम कहता है कि खनन उच्चतम बिंदु से निम्नतम बिंदु के छह मीटर की गहराई तक ही हो सकता है। अधिनियम में खदान में 18 वर्ष से कम उम्र के मजदूर से काम कराना प्रतिबंधित है। साथ ही मजदूरों को काम के निश्चित घंटे, चेहरे को ढंकने के लिए मास्क, चिकित्सा सुविधा, समान मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने को कहा गया है। लेकिन पत्थर खदानों में इन प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है।
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*सड़क किनारे स्थित क्रशरों के धूलकण से लोग लगातार हो रहे हैं प्रभावित*
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पत्थर व्यवसायियों पर खनन विभाग मेहरबान है। क्षेत्र में अवैध खनन का धंधा भी फल-फूल रहा है। सड़क किनारे स्थित क्रशरों के धूलकण से लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। क्रशर के मालिकों एवं कर्मियों के द्वारा नियम को ताक पर रखकर क्रशर संचालित किया जा रहा है। धूलकण के कारण मुख्य सड़क पर दिन में ही चारों ओर अंधेरा छा जाता है, जिस कारण राहगीर एवं स्थानीय लोग परेशान रहते हैं। धूलकण के कारण आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती है।
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*इस गोरख धंधा पर अंकुश लगाने में विभाग पूरी तरह से विफल*
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खनन विभाग की मिली भगत के चलते पत्थर खदान संचालकों की मनमानी अपने चरम पर है। सूत्रों की मानें तो खदान की आड़ में पत्थर के अवैध कारोबार बिना माइनिंग चालान एवं एक ही चलान पर कई बार ढुलाई कर हो रहा है। इस कारण सरकार को प्रतिमाह करोड़ों का चूना लग रहा है। लेकिन इस गोरख धंधे से जुड़े लोग रातों रात लखपति बन रहे हैं। विभाग इस गोरख धंधा पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल रही है।
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*विभाग के संरक्षण में चल रहा है अवैध कारोबार – सूत्र*
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सूत्रों की माने तो अवैध कारोबार में विभाग को एक मोटी रकम पहुंचाई जाती है, जिस कारण नियमों को ताक पर रखकर क्रशर संचालन किए जा रहे हैं।

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