प्राकृतिक चिकित्सा के अंग पुरोधा श्री जेता सिंह की कलम से—
तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जिसकी कल्पना राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने वर्षों पूर्व की थी।
जब इस प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के निर्माण एवं विकास हेतु सरकार की ओर से अनुदान और संस्थागत् सहयोग प्रदान किया जा रहा था, उसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी ने व्यक्तिगत रूप से यह भावना व्यक्त की थी कि उन्हें अत्यंत पीड़ा होती है जब बिहार के लोग उपचार के लिए राज्य से बाहर जाने को विवश होते हैं।
उनकी स्पष्ट और प्रबल इच्छा थी कि ऐसा वातावरण निर्मित हो, जहां देश के प्रत्येक राज्य से लोग बिहार आकर प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ उठाएँ।
मुख्यमंत्री जी की एक और महत्वपूर्ण कामना थी कि भविष्य में विदेशों से भी सैलानी एवं रोगी भागलपुर आएँ और यहां की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से लाभान्वित हों।
उनका मानना था कि यदि नेचुरोपैथी को वैश्विक पहचान मिले और विदेशी नागरिक यहां उपचार एवं अध्ययन के लिए आने लगें, तो इससे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि बिहार में विदेशी पर्यटकों का आगमन भी बढ़ेगा।
आज यह स्वप्न साकार होता प्रतीत हो रहा है। नीदरलैंड्स के युवा शोधकर्ता श्री फ्लोरिस डी राउटर ने तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र में प्रवास कर प्राकृतिक उपचार एवं जीवनशैली का अध्ययन आरंभ किया है। वे यहां की चिकित्सा पद्धति, प्राकृतिक आहार, मिट्टी एवं जल चिकित्सा तथा समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण से अत्यंत प्रभावित हुए।
श्री फ्लोरिस डी राउटर ने स्पष्ट कहा है कि वे अपने देश लौटकर यहां के अनुभवों को साझा करेंगे तथा अनेक रोगियों को भागलपुर आकर प्राकृतिक उपचार लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी बहन और एक मित्र को भी अगले महीने यहां आने के लिए आमंत्रित कर दिया है, ताकि वे स्वयं इस जीवनशैली और उपचार पद्धति का अनुभव कर सकें।
किसी विदेशी मूल के व्यक्ति का पहली बार इस केन्द्र में दीर्घ प्रवास कर प्राकृतिक चिकित्सा का अध्ययन करना तपोवर्धन केन्द्र के लिए गौरव का विषय है।
श्री फ्लोरिस डी राउटर का यहां आगमन, माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की उस दूरदर्शी सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें उन्होंने बिहार को प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की कल्पना की थी।
अब यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि वह पुरानी इच्छा क्रमशः वास्तविकता का रूप लेने लगी है और भागलपुर का यह केन्द्र अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।