Saturday, June 15, 2024
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राजनीति के खेल में हमेशा पिस जाती है आम जनता, तथाकथित पालनहार चट कर जाते रेवड़ियाँ

ऐसे राजनीति आम जनता , राज्य और देश के लिए एक किये जाने का दावा हर राजनेता और पार्टी करती है। अगर ईमानदारी से ये देखा या सोचा जाय ,तो ऐसा ही होना चाहिये , लेकिन राजनीति में ये सारे चीज काफ़ी पीछे छूट गया है।

राजनेता आज राजनीति सिर्फ़ स्वयं की सेवा या परिवार सेवा को ही ध्यान में रख तात्कालिक फ़ायदे को ध्यान में रख कर रहे हैं, इसके लिए कुछ भी करने के लिए वे तैयार दिखते हैं।
जनता , समाज ,राज्य और देश जाए …… बस अपना स्वार्थ सिद्ध होना चाहिए।
अभी स्थानीय समस्याओं को दरकिनार कर, अगर हम बिजली आपूर्ति पर ही सोचें तो , देखते हैं कि अगर उपभोक्ता मतलब सिर्फ़ आम जनता उपभोक्ता ही नही, बल्कि सरकारी संस्थानों जैसे उपभोक्ता अगर समय पर वितरण निगमों को सही समय पर भुगतान कर दे तो , वे बिजली उत्पादन करनेवाले संस्थाओं को भी समय पर भुगतान कर दे, ऐसे में कोल आपूर्ति कम्पनियों को भी समय पर भुगतान मिल जाएगा, तथा आपूर्ति सामान्य रहेगी।
लेकिन ऐसा होता ही नहीं, मतलब साफ़ है कि इन सारी समस्याओं का एकमात्र कारण स्वयं सरकारें ही हैं। अब जब मैंनें सरकार का यहाँ बहुवचन में प्रयोग किया तो समझदार , समझ ही सकते हैं कि मेरा इशारा कहाँ तक है।
राजनीति केंद्र को दोषी ठहराने में व्यस्त है , भुगतान कैसे सुनिश्चित हो इसपर मौन रहकर आम जनता को भरमाने में लगी है।
खैर इधर झारखंड सरकार पर सत्ताधारी पार्टी और उसके मुखिया के अनुभवहीन मूर्ख सलाहकारों ने स्वयं मुख्यमंत्री को ही एक तरफ से कानूनी दाव पेंच में फंसा दिया है , लोभ पालने तथा और थोड़ा और की मंशा पालने वाले सरकारी सर्वेसर्वा बुरी तरह फँसा नज़र आ रहा है। ऐसे में गठबंधन के दूसरे भागीदार कहीं पूरे राज्य में अगले चुनाव में काबिज़ न हो जाय , इसकी जुगत में गठबंधन के सभी पार्टियां अपनी अपनी तरह से रोटियाँ सेंकने में लगी हैं, उधर विपक्ष भी सकारात्मक न दिखकर अगली सरकार अपनी बने की जुगत में राजनीति कर रही है।
नतीजा आम जनता पिस रही है।
आम जनता भी न सुधरने की कसमें खाकर मज़हब , जाती , नमाज़ और हनुमान चालीसा की राजनैतिक साज़िशों में फँसी है।
कुल मिलाकर आम जनता अपने जनतांत्रिक मूल्यों को न समझने की ज़िद पर नेताओं के लिए चारागाह बन गया है। उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा कि यहाँ हर नारे और बयानों पर वे छले जा रहे हैं, और रेवड़ियाँ उनके तथाकथित पालनहार चट किये जा रहे हैं।

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