Thursday, March 26, 2026
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समाहरणालय में उपायुक्त ने स्तनपान कक्ष का किया उद्घाटन

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पाकुड़ समाहरणालय में स्तनपान कक्ष बना। इसका उद्घाटन उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरणवाल ने फीता काटकर किया।

उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बरणवाल ने कहा कि सरकारी कार्यालय में महिलाओं को स्तनपान कराने के लिए अलग से व्यवस्था जिला प्रशासन के द्वारा उपलब्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि 06 माह तक के शिशु के लिए सिर्फ और सिर्फ मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार है। जबकि सातवें माह से बच्चे को अतिरिक्त आहार दी जाती है, तो अतिरिक्त आहार के साथ-साथ स्तनपान भी कराया जाना आवश्यक है, ताकि बच्चों का मानसिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास सही तरीके से हो सके।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी प्रखंड कार्यालय में इस तरह की सुविधा बहाल की जाएगी, ताकि कामकाजी महिलाएं काम के अतिरिक्त अपने बच्चों के प्रति दायित्वों का अच्छे से निर्वाह कर सकें।

मौके पर उप विकास आयुक्त शाहिद अख्तर, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अंजु कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ चंदन, पाकुड़ सीडीपीओ सविता कुमारी, एसएमपीओ पवन कुमार सहित महिला पर्यवेक्षिकाएं समेत अन्य कर्मी उपस्थित थे।

महिलाओं के सशक्तिकरण का महत्व: समाज में उनके अधिकारों की रक्षा

पाकुड़। झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ बाल कृष्ण तिवारी के निर्देश पर डालसा सचिव शिल्पा मुर्मू के मार्गदर्शन में रहसपुर पंचायत से प्रभात फेरी निकल गई, जो नवादा पंचायत में समाप्त की गई।

साथ ही इसी दौरान पंचायत रहसपुर, मनिरामपुर, नवादा, गांधाईपुर समेत अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान सह आउटरीच कार्यक्रम आयोजित की गई। उक्त कार्यक्रम के तहत लगभग 12 सौ लोगों को मानव तस्करी, बाल श्रम, पीड़ित मुआवजा, समेत अन्य कानूनी जानकारी से लोगों को जागरूक की गई। साथ ही महिला सशक्तिकरण पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

महिलाओं के अधिकार का महत्व:

महिलाओं के अधिकार को लेकर बात करते हुए पीएलवी कमला राय गांगुली ने कहा कि महिला को सशक्त होना बहुत जरूरी है। महिलाओं को सामाजिक और राजनीतिक अधिकार, वित्तीय सुरक्षा, न्यायिक शक्ति, और वे सारे अधिकार जो पुरुषों को प्राप्त हैं वह मिलना चाहिए। ताकि समाज और देश के विकास में अपनी भागीदारी दे सके।

शिक्षा का महत्व:

मैनुल शेख ने कहा कि कानून द्वारा दी गई अधिकार पाने के लिए महिला को सशक्त बनने के लिए शिक्षित होना जरूरी है। शिक्षा उन्हें चुनौतियों का सामना करने, अपनी पारंपरिक भूमिका का सामना करने और अपने जीवन को सुधारने में सक्षम बनाती है।

समाज में महिलाओं की भूमिका:

पीएलवी पिंकी मंडल ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा समाज में उनकी स्थिति बदलने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। पीएलवी सायेम अली और उत्पल मंडल ने बारी बारी से कहा कि यदि महिला सशक्त रहेगी तो समाज में किसी प्रकार के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने, अपने पर हो रहे अत्याचार से बचने, औरों को भी बचा कर एक मजबूत परिवार समाज बनाने में अपनी भूमिका निभा सकती है। ऐसे महिलाओं के हित में कई महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

प्रभात फेरी से समाज को जागरूक करने का आयोजन

पीएलवी याकूब अली एवं नीरज कुमार राउत ने बताया कि झालसा रांची के निर्देशानुसार इस सौ दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रभात फेरी प्रत्येक मगंलवार को निकली जायेगी। इसी के तहत आज मंगलवार को न्याय के प्रति जागरूक करने हेतु प्रभात फेरी निकाली गई है ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की किरण मिल सके और अपने वाद विवाद को सुलझा सके।

प्रभात फेरी के दौरान कमला राय गांगुली, पिंकी मंडल, सायेम अली, मैनुल शेख, याकूब अली,उत्पल मंडल, नीरज कुमार राउत समेत पंचायत के लोग मौजुद रहे।

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उपायुक्त के निर्देश के आलोक में जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण को लेकर लगातार छापेमारी की जा रही है

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  • अवैध खनन, भंडारण एवं परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों एवं वाहनों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा:-डीसी
  • ट्रैक्टरों के ट्रोली में अतिरिक्त एंगल एवं पटरा लागने के विरुद्ध ट्रैक्टर मालिक के ऊपर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी:-डीटीओ
  • अवैध खनन, परिवहन,भण्डारण की रोकथाम हेतु लगातार औचक निरीक्षण जारी रहेगा:-डीएमओ

पाकुड़। जिले में अवैध खनन, अवैध परिवहन एवं भंडारण पर पूरी तरह से रोक लगाने एवं दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के उद्देश्य से उपायुक्त श्री मृत्युंजय कुमार बरणवाल के द्वारा अधिकारियों को योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का निर्देश प्राप्त है। इसी के आलोक में अनुमण्डल पदाधिकारी श्री हरिवंश पंडित के नेतृत्व में छापेमारी अभियान चलाया गया। मौके पर अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, ज़िला खनन पदाधिकारी जिला परिवहन पदाधिकारी, खान निरीक्षक, थाना प्रभारी मुफस्सिल एवं जिला पुलिस के सशस्त्र बल के साथ नरोतमपुर एवं वनविक्रमपुर गांव में स्टोन चिप्स लदे होने की सूचना पर जिला खनन टास्क फोर्स की टीम ने कारवाई की। कारवाई के क्रम में ग्रामीणों द्वारा भीड़ जमा कर कार्रवाई का विरोध किया गया। परंतु खनिज से संबंधित वाहनों में परिवहन चालान नहीं दिखाया गया। फलस्वरूप वाहनों को जब्त करने के कार्रवाई के क्रम में फिर से अनेकों के संख्या में ग्रामीणों के द्वारा वाहन ले जाने का विरोध किया गया। तदुपरांत अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के द्वारा अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया जिसके उपरांत कुल 04 ट्रेक्टर को जब्त किया गया जिनका नंबर इस प्रकार है:-
1 ट्रेक्टर संख्या – WB 93-2681
2 ट्रेक्टर संख्या-JH17W-3877
3 ट्रेक्टर संख्या-WB57E- 6894
4 ट्रेक्टर इंजन संख्या- E3592015 उपरोक्त सभी ट्रैक्टरों के ट्रोली में अतिरिक्त एंगल एवं पटरा लगाकर क्षमता से अधिक लगभग 250 घनफुट पत्थर चिप्स खनिज सहित वाहन को जप्त कर पुलिस लाइन पाकुड़ में सुरक्षित रखा गया है। वाहन मालिक, चालक एवं संबंधित खनिज विक्रेता की पहचान करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने की करवाई जारी है।

जिला खनन पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि उपायुक्त महोदय के द्वारा जारी निर्देश एवं उनके मार्गदर्शन से खनन विभाग एवं जिला खनन टास्क फोर्स के सदस्यों के द्वारा कड़े रूप से अवैधकर्ता पर नजर रखा जा रहा है। जिला अन्तर्गत अवैध खनन, परिवहन, भण्डारण पर रोक लगाने हेतु लगातार औचक निरीक्षण / छापामारी की जा रही है।

कुश्ती प्रतियोगिता में पाकुड़ जिले के बच्चों ने 4 स्वर्ण, 16 रजत एवं 6 कांस्य पदक जीतकर जिला का नाम किया रोशन

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पाकुड़। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड के द्वारा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद रांची के तत्वाधान में राज्य स्तरीय खेलो झारखंड प्रतियोगिता 2023 का शुभारंभ रांची के गणपत राय इंडोर स्टेडियम, खेलगांव में कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन झारखंड सरकार, शिक्षा विभाग के सचिव श्री के रवि कुमार के द्वारा किया गया। इस खेल में पाकुड़ जिलें से कुल 35 बालक एवं बालिका खिलाड़ी ने भाग लिया। इस खेल में 02 स्वर्ण 08 रजत 03 कास्य पदक खिलाड़ियों ने प्राप्त किया। अंडर -14 बालक वर्ग ने 02 स्वर्ण एवं 02 कास्य पदक टीम उप विजेता रहा। वही अंडर-17 बालिका वर्ग मे 05 रजत पदक के साथ उप विजेता रही। वही अंडर 19 बालिका वर्ग मे 03 रजत 01 कास्य पदक के साथ टीम उप विजेता रही।

पदक जीत के वापस लौटने पर समग्र शिक्षा पाकुड़ एवं पाकुड़ जिला कुश्ती संघ के द्वारा संयुक्त रूप से सभी खिलाड़ियों को फुल माला एवं बैंड बाजा से भव्य स्वागत किया गया।

सभी विजेता खिलाड़ियों को माननीय सांसद, राजमहल लोकसभा श्री विजय कुमार हांसदा, उपायुक्त श्री मृत्युंजय कुमार बरणवाल व पुलिस अधीक्षक श्री एच.पी.जनार्दनन, उप विकास आयुक्त मो० शाहिद अख्तर, अनुमंडल पदाधिकारी श्री हरिवंश पंडित, जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष श्री अम्लान कुसुम सिन्हा, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्रीमती रजनी देवी, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री मुकुल राज, जिला खेल पदाधिकारी श्री राहुल कुमार, जिला कुश्ती संघ के सचिव प्रकाश कुमार सिंह,एपीओ जयेंद्र मिश्रा, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी इप्सिता तिर्की, जिला जेंडर समन्वयक सबनम ताप्सम, जिला कुश्ती संघ से उमर फारूक, विवेक मण्डल, प्रमोद नांगलिया, महबूब आलम, खेल शिक्षक आलमगीर आलम, पाकुड़ कस्तूरबा की वार्डन कुसुम गुप्ता, शिवानी मरांडी एवं सभी खेल प्रेमी ने खिलाड़ियों को बधाई दिया।

मौके पर पाकुड़ स्पोर्ट्स एकेडमी (क्रिकेट) के सह प्रशिक्षक पिंकू मंडल, क्रिकेट खिलाड़ी नीतिश सिंह, श्याम सिंह, सन्नी यादव, अर्जुन गोस्वामी, शेषनाथ कुमार, आकाश सिंह,चिंटू सिंह समेत अन्य मौजूद थे।

कैसी चली है अबके हवा मेरे शहर में!

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क्या हो गया है हमारे समाज को ? किस मानसिकता का शिकार हो गया है युवावर्ग ? क्यूँ हो गई है सोच इतनी हिंसक ?
अजीबो-गरीब घनाएं सामने आ रही हैं।

पाकुड़ के मालपहाड़ी ओपी क्षेत्र के चंगाडंगा बागान टोला में बीते दिनों सनकी पति द्वारा पत्नी की दिनदहाड़े हत्या कर भागने की कोशिश के नकाम प्रायस के दौरान पुलिस के गिरफ्त में आ जाने की खबर। हाज़त में चिल्लाने और बार बार बेहोश होने के कारण पुलिस ने मानवीयता दिखाते हुए,अपने रूम में सुलाया। अमानवीय व्यवहार वाले उस युवक ने पुलिस वालों को चकमा दे अपनी फरारी से पुलिस पर दाग लगाया और सस्पेंशन का सामूहिक दण्ड भी दिलवा दिया।

गुरुवार को उसी थाना क्षेत्र के चंगाडंगा बागान टोला में ही रात को सनकी पत्नी ने पति सजारुल शेख का हत्या करने की कोशिश की, नाकामयाब रही। फिलहाल पत्नी को पुलिस गिरफ्तार कर लिया है और पति सजारुल शेख का सदर अस्पताल सोनाजोरी में इलाज चल रहा है।

इधर अन्नपूर्णा कालोनी के एक युवक ने दिल्ली में आत्महत्या कर ली।

पूरे पाकुड़ समाज का हर वर्ग सम्प्रदाय हतप्रभ है। क्यूँ पूरा युवा समाज स्वयं एवं अन्य तथा परिवार के प्रति इतना हिंसक हो गया है ? पूरे समाज को मनोवैज्ञानिक इलाज की जरुरत है। मैं स्वयं अवाक हूँ ।
अभी इससे ज़्यादा लिखने में भी स्वयं को असमर्थ पाता हूँ।😥

कोयला ले जा रहे हो, तो हमें भी बिजली के उजाले दो भई! पड़ोसी और दोस्ती का दस्तूर तो यही कहता है

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जब कभी कोई उद्योग कहीं लगाया जाता है जहाँ अधिक मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है तो उस उद्योग कम्पनी द्वारा अपने उपयोग, तथा कम्पनी के कारण विस्थापित लोगों के उपयोग के लिए स्थानीय स्तर पर विजली उत्पादन का स्रोत बनाया जाता है। अपने उपयोग के बाद शेष बिजली स्थानीय ग्रिड को दे दिया जाता है। जिससे उस क्षेत्र के लोगों को बिजली की कमी कम से कम उस उद्योग के कारण न हो।

जब कोई खनन किसी और प्रदेश या देश के लिए बिजली उत्पादन हेतु किया जाता हो तो खनन क्षेत्र में ऐसा और आवश्यक और उचित हो जाता है, क्योंकि खनन करने या करवानेवाली कम्पनी को बिजली उत्पादन का अनुभव होता है , तथा उन्हें एवं उनके विस्थापितों के लिए बिजली आवश्यक होता है।

पाकुड़ में पश्चिम बंगाल के सरकारी बिजली कम्पनी को कोयला ब्लॉक खनन के लिए मिला है। बीजीआर कम्पनी को बंगाल विद्युत विभाग ने खनन, परिवहन एवं लोडिंग की जिम्मेदारी दी है।

पश्चिम बंगाल विद्युत विभाग ने खनन पर नज़र रखने के लिए अपना कार्यालय भी खोल रखा है, लेकिन ये सिर्फ़ दलालों के भरोसे है। जिस खनन क्षेत्र को बंगाल बिजली बोर्ड ने बीजीआर को दे रखा है, उसका देखभाल के उद्देश्य के लिए यह भी ध्यान रखना है कि खनन क्षेत्र में चोरी सहित किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हो रही, या फिर विस्थापितों को सभी देय सुविधायें समुचित मिल रही या नही। क्योंकि सरकार ने कोल ब्लॉक बंगाल बिजली विभाग को दिया है, इसलिए वे कैसे और किससे खनन करा रहे ये उनका मामला है।

अगर केप्टिव पावर प्लांट लगाकर वे अपना एवं विस्थापितों के उपयोग की बिजली नहीं बना सकते और वो हमारे पाकुड़ के ही ग्रिड से लेंगे, तो वे हमारे पड़ोसी राज्य के हैं, अपने यहाँ से हमारे स्थानीय ग्रिड में उतनी बिजली मंगा लें कि पाकुड़ के लोगों को बिजली की कमी न हो।

ये कैसा न्याय है, कि हमारे आँगन से कोयला खोदकर आप ले जाएं, बिजली भी उत्पादन करें, और हमें हमारी उजाले से अलग रखें। हमारे हिस्से की बिजली हमारे ग्रिड से तो लें, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़े रखें।

आश्चर्य इस बात का है, कि हमारे रहनुमाई करने वाले नेतृत्व भी रहबरी पर उतर कर इधर उधर की बातों में उलझाए रखते हैं।

आप इधर उधर की बात न करें, ले जाएँ कोयला, लेकिन उजालों से कहें पाकुड़ के आँगन में भी बिजली की कमी न हो। हमारे हक़ पर यूँ डाका न डाले। प्रकाश और विकास की हमें भी जरुरत है, अपनी और उनकी विकास काफ़ी नहीं है हजूर।

हमारे घर अँधेरा क्यूँ भाई, जबकि हमारा हक़ मरनेवालों का आँगन है चकाचौंध ! कोई तो जवाब दो

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पाकुड़ में बिजली का गुम होते रहना इस भीषण गर्मी में एक समस्या है। लोग हैरान परेशान हैं। समाचार माध्यमों द्वारा बिजली समस्या पर वक़्त बेवक़्त काफ़ी लिखा जाता है।

बड़े नेताओं की तो छोड़िए, छुटभैय्ये नेता भी बिजली की अंधेरी दुनियां में चिल पों कर अपनी नेतागिरी को चमका रहे हैं।
उधर उपायुक्त सीएसआर फंड पर बैठकें करते हैं। एक नही लगभग हर माह एक करते है। कोल कम्पनियों से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, अन्य संरचनाओं के निर्माण, मेडिकल केम्प लगाने आदि पर तलब करते हैं।

कुल मिलाकर विस्थापितों को सभी सुविधाएं उपलब्ध हो इसकी तलब कर जानकारी लेते हैं और उसके विस्तार तथा सही रूप से संचारण हो इसका निर्देश भी देते हैं। लेकिन जो लोग विस्थापित नहीं हुए, कोल कम्पनी उनका हिस्सा और अधिकार जो हड़प रहे हैं, उस ओर जाने-अनजाने न तो राजनीति और न ही शासन-प्रशासन की नज़र जाती है। न कोई आंदोलन न ही निर्देश दिया जाता है।

एक बड़े उद्योग के लगने पर उसे बड़ी मात्रा में बिजली की भी आवश्यकता होती है। कम उत्पादन वाले झारखंड में पाकुड़ वासियों को जो उनके उपयोग के लिये बिजली मिलती है, उसमें पहले से ही क्रशरों द्वारा बिजली की खपत बड़े पैमाने पर थी, अब विद्युत उत्पादन करनेवाली कम्पनी एक खनन करनेवाली कम्पनी से खनन करा रही है। अर्थात दो दो बड़ी कम्पनी काम कर रही है, और हमारे हिस्से की बिजली खपत कर रही है, जबकि इन कम्पनियों को अपनी खपत की और विस्थापितों सहित क्षेत्र के विकास के लिए “केप्टिव पावर प्लांट” लगाने की आवश्यकता और नियम भी है। इसके लिए जरूरी नहीं कि स्टीम पावर प्लांट ही लगाएं, बल्कि नदी नालों के किनारे पर सोलर पावर प्लांट लगा कर भी अपने, अपने विस्थापितों की आवश्यकता लायक एक से पाँच मेगावाट विजली उत्पादन करना चाहिए, लेकिन ऐसा है नहीं, जबकि हमारे यहाँ से कोयला ले जाकर ये बिजली ही उत्पादन कर रहे हैं।

कुछ दलाल टाइप लोग के कारण, और हमारे कमजोर कम पढ़े लिखे जनप्रतिनिधियों की अकर्मण्यता हमारे हिस्से के अधिकार लूटने के बाद भी एक दम से दम मारे रहते हैं। कभी कभी विस्थापितों के लिए आवाज़ उठाते भी हैं, तो वो आवाजें चाँदी के जूतों से बंद करा दी जाती रही हैं। बदकिस्मती हमारी कि गर्मी की तपिश में भी हमारी जनता बिना बिजली के रहने को मजबूर रहती है, और हमारे हक़ मरनेवालों के आँगन में बिजली की चकाचौंध है।

डीसी ने सीएसआर मामलों को लेकर सभी कोल कंपनी तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

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बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 में सीएसआर अंर्तगत किए जाने वाले कार्यों की योजना पर चर्चा करते हुए कोल कम्पनियों के प्रतिनिधियों को आवश्यक निर्देश दिया

पाकुड़। उपायुक्त श्री मृत्युंजय कुमार बरणवाल की अध्यक्षता में सीएसआर मामलों को लेकर कंपनी तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक का आयोजन समाहरणालय सभा कक्ष में किया गया। इस बैठक में मुख्य रूप से सीएसआर से कंपनी अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के विकास करने हेतु आवश्यक निर्देश दिया गया। बीजीआर (सीएसआर) कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2023 -24 में शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, विभिन्न संरचनाओं के निर्माण आदि क्षेत्रों में कार्य किए जा रहे हैं। उपायुक्त ने अमड़ापाड़ा प्रखंड में मेडिकल कैंप लगाने का निर्देश दिया। मेडिकल लगाने के पूर्व व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि प्रखंड के लोगों को मेडिकल कैंप के बारे में जानकारी मिल सके। उपायुक्त ने सभी कोल कम्पनियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि सीएसआर मद का उपयोग अमड़ापाड़ा प्रखंड में ज्यादा से ज्यादा हो। साथ ही साथ उपायुक्त ने प्रकृति विहार पार्क को सौन्दयीकरण करने का निर्देश दिया। एंडेवर अकादमी को लेकर उपायुक्त ने नये भवन का चयन करने का निर्देश दिया और कहा कि अभी कोचिंग में एक ही बैच संचालित किए जा रहे हैं। नये भवन मिल जाने के बाद बैच की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी।

इस बैठक में उप विकास आयुक्त मो० शाहिद अख्तर, सहायक समाहर्ता डॉ कृष्णकांत कनवाड़िया, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री अजय सिंह बड़ाईक, जिला कल्याण पदाधिकारी श्री विजन उरांव, जिला खनन पदाधिकारी प्रदीप कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक मुकुल राज, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अंजू कुमारी, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार, जिला खेल पदाधिकारी राहुल कुमार,बीजीआर के वाइस प्रेसिडेंट अनिल रेड्डी, एसएमपीओ पवन कुमार एवं विभिन्न कोल कम्पनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पाकुड़ के समाजसेवी लुत्फ़ल हक को हाउस ऑफ कॉमन लंदन में मिला अवार्ड

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पत्थर के व्यवसायी को ख़ुदा ने दिया है ऐसा नर्म दिल,कि मिल रहे अवार्ड ख़ुद गौरवान्वित हो रहा।

लुत्फ़ल हक पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव उदितनगर के रहने वाले हैं। वे अपनी शुरुआती जिंदगी काफी ग़रीबी से गुजारे हैं।जब पेट की आग बुझ नहीं पा रहे तो वे पश्चिम बंगाल से झारखंड के पाकुड़ रोजगार की तलाश में आ गए और वे स्टोन क्रशर में मजदूरी करने लगे। मजदूरी करते करते वे अपने बच्चों को बड़ा किया। धीरे-धीरे वे पत्थर की व्यवसाय में जुड़े और वर्तमान में वे पत्थर व्यवसाय के साथ-साथ समाज सेवा के कार्य में जुड़ गए। प्रतिदिन वे अपने निजी खर्च से ढाई सौ से तीन सौ गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं । आज लुत्फुल हक़ जरूर सामर्थवान हैं, लेकिन कभी भूखे रहे पेट ने भूख की जलन को भुला नही।

शायद इसी लिए " लुत्फुल की समाज सेवा कहती है, कि " दर्द-ए-दिल दर्द-ए-ज़िगर जाने, और बेदर्द कोई ख़ाक जाने" उनके पास जो भी फरियादी आते हैं वो खाली हाथ नहीं जाते हैं।

जो लोग ईमानदारी से अपनी जिंदगी में सही दिशा में योजना के साथ मेहनत करते हैं, वे जरूर ही अपनी जिंदगी में सफलता हासिल करते हैं। क्योंकि कई बार इंसान की किस्मत भले ही साथ नहीं दे, लेकिन उसके द्वारा किया गया कठिन परिश्रम उसे सफलता हासिल करवाने में मदद करता है। यह कोई स्वप्न नहीं बल्कि हकीकत है। इस हकीकत को पाकुड़ के चर्चित समाजसेवी लुत्फ़ल हक ने कर दिखाया है। लुत्फ़ल हक को यूनाइटेड किंगडम में हाउस ऑफ कॉमन लंदन में आयोजित इंडो-यूके ग्लोबल बिजनेस कॉन्क्लेव एंड अवार्ड 2023 में ब्रिटिश गवर्मेंट की मिनिस्टर ने अवार्ड से नवाजा है। लुत्फ़ल हक को जरूरतमन्दों, असहाय और गरीबों को सहायता करने को लेकर अवार्ड से नवाजा है।झारखंड राज्य के सबसे पिछड़ा जिला पाकुड़ में रहते हुए और अपने छोटे से व्यवसाय से हर जरूरतमंदों को सहयोग करना, गरीबों को दान देना आदि की चर्चा हाउस ऑफ कॉमन लंदन में भी सुनने को मिला। अवार्ड कार्यक्रम में ब्रिटिश गवर्मेंट के सांसद सह शैडो मिनिस्टर फोर इंटरनेशनल ट्रेड यूके पार्लियामेंट रूथ कैडबरी ने अपने हाथों से नवाजा है। कार्यक्रम में ब्रिटिश सरकार के सांसद लार्ड रिचर्ड हेरिंगटन, सांसद बोर्नेस बर्मा, सांसद सीमा मल्होत्रा, सांसद बेलरी वाज, सांसद बीरेंद्र शर्मा, सांसद शैलेश वारा मौजूद थे। मंत्री रूथ कैडबरी ने लुत्फ़ल हक के कार्यों की सराहना की है। वे कहती है दिन दुखियों, गरीबों और लाचारों का मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है। इधर लुत्फ़ल हक को ब्रिटिश गवर्मेंट की शैडो मिनिस्टर से अवार्ड मिलते ही उनके आंसू छलक पड़े। लुत्फ़ल हक कहते हैं कि जीवन में सबसे बड़ी खुशी उस काम को करने में है, जिसे लोग कहते हैं कि तुम नहीं कर सकते हो। इसलिए मैं गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा में लग चुका हूं। मेरे जिस्म में जब तक जान रहेगा, मैं गरीबों की सेवा करता रहूंगा।

लुत्फ़ल हक को भारत के साथ साथ विदेशों में भी मिले है अवार्ड…

लुत्फ़ल हक को सर्वप्रथम मुंबई में आयोजित अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा परिषद द्वारा आयोजित सम्मेलन में उन्हें समाजसेवा के क्षेत्र में कर रहे कार्यों को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री ने उन्हें सम्मानित किया था।इसके बाद कोलकाता में आयोजित बंगाल इंटरनेशनल एक्सलेंस अवार्ड- 2023 में शर्मिला टैगोर, मुंबई में आयोजित इंटरनेशनल एक्सलेंस अवार्ड माधुरी दीक्षित और ग्लोबल एक्सलेंस अवार्ड सोनाली बेंद्रे ने अवार्ड से नवाजा है। वहीं आगरा में आयोजित इंडो-नेपाल बांग्लादेश मीडिया सम्मिट कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य कानून मंत्री एसपी सिंह बघेल ने सम्मानित किया था। इसके अलावा मलेशिया के कुआलालंपुर में मलेशिया के पूर्व मंत्री ने सम्मानित किया था।

जनता की समस्याओं का समाधान हो सबकी प्राथमिकताः उपायुक्त

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पाकुड़। आम जनमानस के समस्याओं के समाधान और त्वरित निष्पादन को लेकर उपायुक्त श्री मृत्युंजय कुमार बरणवाल के द्वारा समाहरणालय सभागार में जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने जनता दरबार में आकर अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखा। इस दौरान उपायुक्त द्वारा वहां उपस्थित सभी लोगों से एक-एक कर उनकी समस्याएँ सुनी गयी एवं आश्वस्त किया गया कि संज्ञान में आए हुए सभी शिकायतों की जाँच कराते हुए जल्द से जल्द सभी का समाधान किया जाएगा।

इसके अलावे जनता दरबार के दौरान जमीन से संबंधित, शिक्षा विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से संबंधित मामले एवं विभिन्न आवेदन शिकायत के रूप में आये, जो कि जिले के विभिन्न विभागों से संबंधित थे। ऐसे में जनता दरबार में सभी शिकायतकर्ता की समस्याएँ को सुनने के पश्चात उपायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निदेशित किया गया कि सभी आवेदनों का भौतिक जांच करते हुए, उसका समाधान जल्द से जल्द करें। इसके अलावे उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह के अंदर अपना प्रतिपुष्टि उपायुक्त कार्यालय को समर्पित करे, ताकि शिकायतों के निष्पादन में आसानी हो।