ज्यों ज्यों हमने प्रगति की, त्यो हमारी वैचारिक मोरल नीचे गिरती गई।
मोबाईल ने सुविधाएं तो दी , लेकिन हमें गिराया भी गर्त में।
मोबाइल गेम में फँस कितने भविष्य के होनहारों को खोया।
गुड़गांव की तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या क्या हम भूल सकते हैं।
बहुत पहले जब मोबाइल फोन पर 5 नम्बर से शरू होते हुए फोन आता था। फोन अनजान लड़कियों का आता था। वो फोन अगर आप उठा लिये तो आईएसडी चार्ज लगता था। लड़कियाँ मोहक बातें करतीं थी। तुरन्त फोन का एकाउंट खत्म हो जाता था। लोग मोहक बातों के चक्कर में तुरंत रिचार्ज करा कर लोग बात करते और फिर तुरंत पैसा खत्म।
उस समय मैं एक लीडिंग अखबार में था। मैंने न्यूज लिखते हुए अचानक फोन उठा लिया। लड़की की आवाज़ सुन मैनें अपना काम करते हुए ही कहा बोलिये बहन जी क्या सेवा कर सकता हूँ। कई सवालों के बाद भी मैं उन्हें बहन कहता रहा , तो उन्होंने फोन काट दिया और अपने पर्सनल नम्बर से फोन किया। उन्होनें कहा जो हम जैसे लोगों और अनजान लड़की को बहन कहे उसे ठगना और उनका पैसा बर्बाद करवाना उचित नहीं।
फिर मैनें पूरा मामला जानने के लिए पूरा माजरा पूछा तो जो मुझे बताया गया वह आश्चर्यजनक था।
उस समय गरीब परिवारों की महिलाओं को फोन माफ़िया जी अपना पूरा सेटअप शुविधा शुल्क के एवज में टेलीफोन एक्सचेंज चलाते थे और आईएसडी कॉल का पैसा काटकर चाँदी काटते थे। उसी में से घर चलाने एवं अन्य खर्चों के लिए उन लड़कियों को पेमेंट देते थे।
पूरा मामला उस समय मैनें देश के लीडिंग अखबार में प्रकाशित करवाया था।
समय बदलता गया , मोबाइल सुविधाओं में भी कई बदलाव आए और नेट का जमाना आया। इस तरह के अनैतिक कार्यों का तरीका भी बदलता गया। अब भी माफियाओं ने आम जनता को ठगना बन्द नही किया है।
डिजिटल गिरफ्तारी आदि के साथ अचानक वीडियो कोल पर नग्नता परोस कर लोगों को फँसा दिया जाता है और पैसे ऐंठे जाते हैं।
जाति से पत्रकार हूँ। स्वाभाविक रूप से समाजसेवा का रोगी रहा हूँ। इसका बहुत ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा है।
किसी अननोन नम्बर को भी उठाने की आदत रही है। सब जगह से पीड़ित व्यक्ति का अंतिम आशा पत्रकारों से ही बचा रहता है। हमलोग भी स्वयं को तीसमार खां समझते हैं। इसी तरह कुछ दिनों पहले हमारे शहर में एक दुर्घटना हुई थी, थोड़ा आंदोलन भी हुआ था। कुछ पत्रकार और लोग मेरे घर के गेरेज में खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। मैनें चर्चा में दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए विरोध के तरीकों की निंदा की। पत्रकार सभी हमसे सहमत थे, लेकिन कुछ सामान्य लोग असन्तुष्ट दिखे। मुझे दीर्घशंका लगी थी वहीं बाथरूम में मैं चला गया, और अंदर से ही उनलोगों की बात का जवाब देने लगा ।
खैर इसी बीच एक व्हाट्सएप पर फोन आया , स्वाभाविक रूप से किसी पीड़ित का समझ कर उठा लिया। वीडियो कॉल था फँस गया। एक लड़की थी और वीडियो आपत्तिजनक थी , मैनें गुस्से में अशोभनीय व्यवहार कर दिया , हँलांकि अपनी मूर्खता पर मैं बहुत हँसा। बाद में मुझे ब्लैकमेल करने और फिर बाद में डिजिटली काफी परेशान किया गया। मुझे स्वयं को पुलिस वाला बता कर एक व्यक्ति ने फोन किया और मुझे डिजिटली करवाई की धमकियाँ देने लगे। पहले तो मैं डरा फिर मैंनें स्वयं को संभाला और कहा कि अगर मैनें गलती की है, तो आप जीरो FIR दर्ज कर हमारे स्थानीय पुलिस को भेज दीजिये, वो करवाई करेंगे। क्योंकि अगर मैनें अपराध किया है, तो प्लेस ऑफ ऑकरेन्स तो हमारे यहाँ है और पुलिस यहाँ भी है। मेरी पाकुड़ पुलिस बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है।
चूँकि ये अपराध मैनें नहीं फोन पर उसने किया था।
खैर जो हो। उसके बाद भी कई फोन आये , मैनें उठाया ही नहीं । मुझे दबाब में काफ़ी मानसिक प्रताड़ित किया गया।
अब तो और भी कई एप आ गये हैं जिसपर स्वयं को बहुत समृद्ध बताते हुए , मित्र , नोकर सहयोगी आदि का आमंत्रण दिया जाता है। और बहुत सारे आम जनता इसमें फँस कर बर्बाद हो रहे हैं , और कई लोग आत्महत्या तक कर जाते हैं।
चूँकि बहुत मेरे कनिष्ठ मित्र लोग पत्रकार हैं इसलिए बचकर रहें , और अननोन नम्बर सीधे न उठाएं।
आजकल तो ………
इन सबके बावजूद आई टी एक्ट 2000 सरकार ने ऐसे ही दुरूपयोगों को ध्यान में रख कर कानून बनाया इस एक्ट की धारा 72 को विस्तार से पढ़ने और जानने से ऐसे ब्लैकमेल करने वाले से निपटा जा सकता है। इसलिए किसी धमकियों से बिना डरे ऐसे मामलों का कानूनन सामना करें। संवेधानिक रास्ता अपनाएं।
क्या है मोटे तौर पर इस धारा में—
साभार
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 की धारा 72, गोपनीयता और निजता के उल्लंघन से संबंधित है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति, जो किसी आधिकारिक शक्ति के तहत गोपनीय जानकारी या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तक पहुँच प्राप्त करता है, बिना सहमति के उसे प्रकट नहीं कर सकता है, अन्यथा उसे 2 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह धारा उन लोगों पर लागू होती है जो अपनी पहुँच का दुरुपयोग करते हैं, जैसे कि HR विभाग द्वारा कर्मचारी का वेतन या स्वास्थ्य डेटा लीक करना, या किसी की कॉल रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति के सार्वजनिक करना।
धारा 72 क्या कहती है?
यदि कोई व्यक्ति, किसी अन्य कानून या आईटी अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए, किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज या अन्य निजी जानकारी तक पहुँचता है।
और फिर उस जानकारी को किसी अन्य व्यक्ति को प्रकट (reveal) करता है।
तो उसे इस धारा के तहत दंडित किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
गोपनीयता का उल्लंघन: यह धारा किसी व्यक्ति की निजी और गोपनीय जानकारी (जैसे ईमेल, डेटा, रिकॉर्ड) के अनधिकृत प्रकटीकरण को रोकती है।
कॉल रिकॉर्डिंग: बिना अनुमति के किसी की कॉल रिकॉर्ड करना और उसे सार्वजनिक करना इस धारा का उल्लंघन माना जाता है, क्योंकि यह निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हनन है।
दंड: दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो साल का कारावास और/या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
उदाहरण:
किसी कंपनी के एचआर कर्मचारी द्वारा गोपनीय वेतन सूची लीक करना।
किसी व्यक्ति द्वारा किसी और की निजी बातचीत को रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर डालना।