15 साल से सिर्फ वादे, पाकुड़ अब तक गंगा जल से वंचित — जनता के धैर्य की परीक्षा कब तक?
पाकुड़ शहर की शहरी जलापूर्ति योजना पिछले पंद्रह वर्षों से फाइलों में कैद है। इस दौरान न जाने कितने जनप्रतिनिधि आए और चले गए, मगर पाकुड़ की जनता को आज तक गंगा का पानी नसीब नहीं हुआ। हर चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन हकीकत में शहरवासी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए जूझने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी आते ही पेयजल संकट विकराल रूप ले लेता है, पर प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक अधर में लटकी हुई है। सवाल यह है कि पाकुड़ की जनता को आखिर कब तक ठगा जाता रहेगा?
इसी जनआक्रोश के बीच जिला कांग्रेस कमिटी पाकुड़ की महासचिव श्रीमती मोनिता कुमारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई का समय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को स्वयं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के समक्ष उठाएंगी और पाकुड़ की जनता की पीड़ा से उन्हें अवगत कराएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राजमहल लोकसभा सांसद श्री विजय कुमार हांसदा एवं पाकुड़ विधायक श्रीमती निशात आलम को इस योजना की वास्तविक स्थिति से अवगत कराकर उन पर भी जनदबाव बनाया जाएगा, ताकि वर्षों से लटकी इस योजना को तत्काल गति मिल सके।
श्रीमती मोनिता कुमारी ने साफ शब्दों में कहा—
“अब बहुत हो चुका। पाकुड़ की जनता को सिर्फ वादे नहीं, गंगा जल चाहिए। हर हाल में शहर में गंगा जल पहुंचाने के लिए हम निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।”
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन जनता की इस जायज़ मांग पर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं, या फिर पाकुड़ को उसका हक़ मिलेगा।
क्या आसन्न गर्मी में पाकुड़वासियों की हलक सुखी रह जायेगी ! गंगाजल के नाम पर कब तक ठगी जाएगी जनता?:मोनिता
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