सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले के अंतर्गत संचालित सभी मनरेगा भंडार (वेंडर/भंडारण इकाइयों) की व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा भंडारों की नियुक्ति में कई स्तरों पर सरकारी नियमों की अनदेखी की गई है, जिसके कारण पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अग्रवाल ने कहा कि वह जिला प्रशासन से यह मांग करेंगे कि जिन भी व्यक्तियों को मनरेगा वेंडर के रूप में नियुक्त किया गया है, उनकी नियुक्ति किस परिस्थिति और आधार पर की गई, इसकी संपूर्ण समीक्षा की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेज, नियुक्ति प्रक्रिया, अनुमति पत्र, पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया का खुलासा किया जाना चाहिए।सामाजिक कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अनेक भंडारों द्वारा जमा किए गए जीएसटी (GST) की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए सभी वेंडरों द्वारा अब तक कितना जीएसटी जमा किया गया है, इसका भी ब्योरा सार्वजनिक किया जाए और संबंधित दस्तावेज प्रशासन द्वारा जांचे जाएं।इसके साथ ही अग्रवाल ने मनरेगा योजनाओं के तहत विभिन्न भंडारों द्वारा सामग्री आपूर्ति में उपयोग किए गए वाहनों के नंबर तथा परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है। उनके अनुसार, यह आवश्यक है कि यह स्पष्ट किया जाए कि किस वाहन से कौन-सी सामग्री भेजी गई और क्या वह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी।
सुरेश अग्रवाल ने कहा कि यदि उन्हें इस जांच प्रक्रिया का दायित्व संभालने का अवसर मिले, तो वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सही, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा वास्तविक स्थिति सामने आए। उन्होंने जिला प्रशासन से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द जांच की कार्रवाई शुरू की जाए।
सुरेश अग्रवाल ने अनियमितता के विरुद्ध फिर उठाई आवाज़ , निष्पक्ष जाँच की की माँग।
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