Wednesday, February 4, 2026
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आख़िर क्या थी मंशा , रेलवे को जानना है ज़रूरी।

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पाकुड़ रेलवे ट्रैक पर साजिश, वनांचल एक्सप्रेस थी निशाने पर, मालगाड़ी से टला बड़ा हादसा।

पाकुड़ जिले के तिलभीटा और कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के बीच शनिवार देर रात रेलवे ट्रैक पर रखे गए भारी लोहे के टुकड़े ने एक बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। घटनाक्रम पर गौर करें तो साफ होता है कि असामाजिक तत्वों का असली निशाना डाउन लाइन से गुजरने वाली वनांचल एक्सप्रेस थी, लेकिन संयोगवश उससे पहले मालगाड़ी गुजर जाने से बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, गया–हावड़ा एक्सप्रेस रात करीब 10 बजे पाकुड़ स्टेशन से सुरक्षित गुजर गई थी। इसके बाद ही अपराधियों ने डाउन लाइन पर करीब डेढ़ मीटर लंबा भारी लोहे का टुकड़ा रख दिया। इसी दौरान लगभग 10.15 बजे एक मालगाड़ी उस ट्रैक से गुजरी। लोहे का टुकड़ा इंजन और डिब्बों की चपेट में आ गया और घिसटते हुए करीब दो तीन सो मीटर तक आगे बढ़ गया। इस दौरान खंभा संख्या 156/04 के आगे तक कई स्लीपर और पटरी क्षतिग्रस्त हो गए। तेज रगड़ की आवाज सुनते ही मालगाड़ी के चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को रोका। तुरंत स्टेशन मास्टर को सूचना दी गई, जिसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचीं। ट्रैक की बारीकी से जांच और मरम्मत के बाद ही वनांचल एक्सप्रेस को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। घटना के कारण वनांचल एक्सप्रेस तिलभीटा या कोटालपोखर के बीच करीब एक से डेढ़ घंटे तक खड़ी रही और देर रात लगभग 12 बजे पाकुड़ स्टेशन पहुंच सकी।
जांच में यह भी सामने आया कि वनांचल एक्सप्रेस का पाकुड़ आगमन रात 10.23 बजे निर्धारित था और यह ट्रेन साहिबगंज जिले के बड़हरवा से रात 9.57 बजे रवाना होकर 10.15 बजे गुमानी स्टेशन पहुंची थी। इसी समय के आसपास ट्रैक पर लोहा रखे जाने से आशंका और गहरी हो गई है कि अपराधियों की मंशा इसी ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की थी।
रविवार को घटनास्थल पर आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह, सीआईबी और जीआरपी के अधिकारी पहुंचे। वरीय अधिकारियों को सूचना मिलने के बाद रामपुरहाट से एसई राजकुमार साव और एईएम की टीम ने देर रात निरीक्षण किया। रविवार सुबह वर्द्धमान से डॉग स्क्वायड की टीम भी जांच के लिए पहुंची, हालांकि कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। बाद में सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर रघुवीर चोक्का ने पाकुड़ पहुंचकर मामले की समीक्षा की।
रेलवे ट्रैक पर जानबूझकर लोहा रखने के मामले में पीडब्लूआई उज्जल कुमार के आवेदन पर रेलवे पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ कांड संख्या 18/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीर साजिश मानते हुए हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं।

सन बिहाइंड त वेष्ट , घुसपैठ की अनकहीकहानी।

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घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1

बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः

सन बिहाइंड त वेष्ट , घुसपैठ की अनकहीकहानी।

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घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1

बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः

जिला आजसू को मिला नया नेतृत्व , इतिहास के पन्नों में पार्टी ने झाँका।

आलोक जॉय पॉल बने जिला कार्यकारी अध्यक्ष
आजसू पार्टी पाकुड़ जिला समिति को मिला नया नेतृत्व

पाकुड़-आजसू पार्टी के संगठन को मज़बूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पार्टी के मांडू विधायक तिवारी महतो, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर तथा केंद्रीय उपाध्यक्ष जोनाथन टुडू द्वारा आलोक जॉय पॉल को आजसू पार्टी, पाकुड़ जिला समिति का जिला कार्यकारी अध्यक्ष एवं मोफ़िज अलम को जिला सचिव तथा महेशपुर प्रभारी मनोनीत किया है। इस नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखा गया।
नियुक्ति की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस निर्णय का स्वागत किया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि आलोक जॉय पॉल के नेतृत्व में आजसू पार्टी जिले में और अधिक सशक्त होकर उभरेगी।
अपने विचार व्यक्त करते हुए आलोक जॉय पॉल ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य है की समाज में दबे-कुचले व्यक्ति तथा उनके अधिकारों का हनन किसी भी व्यक्ति या संस्थान के द्वारा न हो सके उसके लिए तत्पर होकर कार्य करेंगे। पाकुड़ जिले में पार्टी को मज़बूत करना, अधिक से अधिक युवाओं और आम जनता को पार्टी से जोड़ना तथा संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देना है।उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे।
मौके पर आजसू पार्टी के पूर्व नेता अख़्तर आलम की घर वापसी भी करायी गई।
इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आलोक जॉय पॉल एवं मोफ़िज अंसारी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में आजसू पार्टी पाकुड़ जिले में नई ऊंचाइयों को छुएगी।
मौके पर दिग्विजय कुमार, पूर्व नगर अध्यक्ष संजीव कुमार पासवान, पूर्व आई० टी० सेल प्रभारी सात्विक भगत, सनी तिवारी, कार्तिक हाज़रा, सोनू अंसारी, वहाब शेख, बापी हाज़रा, बिनोद कुमार, मोनू कुमार, तूफ़ान शेख, सुनील, सूरज राय, गौतम, रवि सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

फर्जी एडवाइस से 12 करोड़ से अधिक की निकासी मामले पर पाकुड़ पहुंची CID, शुरू की जांच

पाकुड़ जिला कल्याण कार्यालय के बैंक खाते से फर्जी एडवाइस के जरिए 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार 600 रुपये की अवैध निकासी के मामले की जांच के लिए सीआईडी की टीम पाकुड़ पहुंची। सीआईडी के डीएसपी रविंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का सहित नाजिर व अन्य कर्मियों से घंटों पूछताछ की। इस दौरान टीम ने मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों का भी गहन अवलोकन किया।बताया गया कि इस अवैध निकासी के संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का की लिखित शिकायत पर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।प्राथमिकी में कार्यालय अधीक्षक, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित करीब डेढ़ दर्जन लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मामले का खुलासा 8 दिसंबर 2025 को हुआ था, जब भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, पाकुड़ के मुख्य प्रबंधक ने आईटीडीए निदेशक सह जिला कल्याण पदाधिकारी को पत्र भेजकर फर्जी निकासी की जानकारी दी थी। इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को नगर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी.शुरुआत में मामले की जांच नगर थाना पुलिस कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता और बड़ी राशि को देखते हुए जांच सीआईडी को सौंप दी गई।इस संबंध में एसपी निधि द्विवेदी ने बताया कि सीआईडी की टीम मामले की जांच के लिए पाकुड़ पहुंच चुकी है और अब पूरी जांच सीआईडी द्वारा ही की जाएगी।

पहाड़िया बच्चों में छिपी है रचनात्मक प्रतिभा: एसडीओ

बोन पोखरिया के आंगन में चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन

छोटे-छोटे बच्चों ने दिखलाई जबरदस्त चित्रकला की झलक

आदम पहाड़िया जनजाति बच्चों में जबरदस्त प्रतिभा छिपी हुई है। इसकी झलक पाकुड़ जिले के सुदूर इलाके में स्थित बोन पोखरिया गांव के कार्यक्रम में देखने को मिली जब छोटे-छोटे पहाड़िया बच्चों ने कलम और कूची से आर्ट पेपर पर सुंदर-सुंदर चित्र उकेरे। प्रकृति और पर्यावरण विषय पर आधारित चित्र प्रतियोगिता में करीब 100 बच्चे शामिल हुए जिन्होंने जल-जंगल, पशु, पक्षी समेत अन्या कई चित्र बनाए। बच्चों ने अंग्रेजी में कई गीत भी गाए। कार्यक्रम का आयोजन पशुपतिनाथ सनातन- संस्कृति सेवा संस्थान, कौशल्या ज्योति, माधव- आशा सेवा संस्थान और केएन मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने मिलकर किया था। कार्यक्रम का विषय था बोन पोखरिया के आंगन में चित्रांकन व शिक्षण सामग्री तथा कंबल वितरण समारोह। आयोजन का उद्देश्य था आदिम पहाड़िया जनजाति के बच्चों का सर्वांगीण विकास और प्रतिभा को उभारना।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पाकुड़ के अनुमंडल अधिकारी साइमन मरांडी ने चित्र बनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की तारीफ की और कहा कि पहाड़िया बच्चों में रचनात्मक प्रतिभा छिपी हुई है। जरूरत है उन्हें उभारने की। इसके लिए बच्चों को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। जिसके लिए सरकार के साथ-साथ समाज के लोगों को भी मिलजुल कर प्रयास करना होगा। सामाजिक संस्थाओं को भी मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि परहित सरसी धर्म नहीं भाई। एसडीओ ने कहा कि झारखंड की सरकार और पाकुड़ जिला प्रशासन कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए तत्परता से काम कर रहा है।
फादर सोलेमान, प्रणव जी, दीपक जी, सिस्टर एंटोनी, सिस्टर सिल्वा रानी ने भी बच्चों को संबोधित किया। बच्चों को संस्थाओं की ओर से कंबल, जैकेट, कपड़े, कॉपी कलम आदि सामान दिए गए। इस मौके पर सोलेमान ने बच्चों की पढ़ाई से संबंधित कुछ समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।

हत्या मामले में दोषी करार के बाद अदालत परिसर से फरार हुए दो अपराधी

पाकुड़: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत में हत्या के एक मामले में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के तुरंत बाद चकमा देकर दो सजा-याप्ता दोषी न्यायालय परिसर से फरार हो गए। फरार आरोपियों की पहचान शिवधन मोहाली एवं नरेन मोहली के रूप में हुई है। दोनों की धरपकड़ को लेकर पुलिस ने संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। न्यायालय परिसर से दो सजा-याप्ता दोषी के फरार होने की पुष्टि एसपी निधि द्विवेदी ने की है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या चूक हुई है या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि फरार सजा-याप्ता नरेन मोहली और शिवधन मोहली के खिलाफ जमीन विवाद को लेकर भोलानाथ मोहली की हत्या किए जाने का मामला दर्ज है। इस संबंध में मृतक की पत्नी श्रीफूल मोहली ने 12 जनवरी 2019 को अमड़ापाड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अमड़ापाड़ा थाना कांड संख्या 04/2019 में नरेन मोहली, शिवधन मोहली सहित कुल पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने जैसे ही सभी आरोपियों को दोषी करार देने का फैसला सुनाया, सजा-याप्ता को न्यायाधीश के कटघरे से बाहर लाया गया। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात जवान द्वारा बाहर लाते समय नरेन और शिवधन न्यायालय परिसर से फरार हो गए।

स्वास्थ्य सेवा में पाकुड़ रेलवे के आगे बढ़ते कदम , कर्मियों में खुशी।

पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन द्वारा एक वृहत स्वास्थ्य शिविर लगाया गया जिसमें ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल हावड़ा से कई चिकित्सक एक साथ अपनी पूरी टीम के साथ आए एवं यहां के रेल कर्मियों के स्वास्थ्य की वृहत स्तर पर जांच की । रेलवे प्रशासन द्वारा लगातार रेल कर्मियों की स्वास्थ्य की जांच को अधिक से अधिक कर उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं । ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा द्वारा किए जा रहे क्रमबद्ध प्रयास के चलते आज रेलवे प्रशासन द्वारा पाकुड़ में जो की हावड़ा मंडल के अंतिम छोर पर स्थित है ,लगातार स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन हो रहा है ,ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा के शाखा सचिव संजय कुमारओझा ने बताया कि हमने माननीय मंडल प्रबंधक हावड़ा से मांग रखी थी कि प्रत्येक वर्ष कम से कम चार बार वृहत मेडिकल कैंप का आयोजन पाकुड़ में किया जाए ,क्योंकि पाकुड़ हावड़ा मंडलीय अस्पताल से काफी दूरी पर स्थित है इसलिए मंडल प्रबंधक हावड़ा ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए वर्ष 2026 के प्रथम महीने में ही पाकुड़ में स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया।आने वाले मार्च या अप्रैल में दूसरा एक स्वास्थ्य के कैंप का भी आयोजन किया जाएगा ।
इस अवसर पर ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल हावड़ा से अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर आर के मंडल,डॉक्टर नयन मनी विश्वास, मंडलीय मेडिकल चिकित्सा पदाधिकारी प्रसूति विभाग, डॉक्टर शिवानी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर, मृदुला मंडल चिकित्सा पदाधिकारी,डॉक्टर मृणाल कुमार मंडल अपर मंडलीय चिकित्सा पदाधिकारी, रामपुरहाट डॉक्टर अब्दुस समीम मियां मंडलीय चिकित्सा पदाधिकारी ,रामपुरहाट द्वारा अपने पूरे दलबल के साथ आज कैंप में शामिल हुए इस अवसर पर कल 63 रेलवे कर्मियों के स्वास्थ्य की जांच की गई जिसमें कल महिला रोगियों की संख्या 13 तथा रक्त जांच 45 लोगों का किया गया । इस अवसर पर ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा के शाखा अध्यक्ष अखिलेश कुमार चौबे ,शाखा सचिव संजय कुमार ओझा ,शाखा के कोषाध्यक्ष अमर कुमार मल्होत्रा ,निलेश प्रकाश, विक्टर जेम्स , गौतम कुमार यादव,संतोष कुमार इत्यादि आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय दिखे । शाखा सचिव संजय कुमार ओझा ने बताया कि पाकुड़ में रेल कर्मियों हेतु चिकित्सा सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए रामपुरहाट के तर्ज पर एक हेल्थ यूनिट का निर्माण किया जा रहा है।बहुत जल्द ही यह लॉकअप डिस्पेंसरी नए हेल्थ यूनिट में शिफ्ट हो जाएगी ,जो की सिग्नल विभाग के ऑफिस के बगल में माल गोदाम रोड पथ पर अवस्थित होगी और नए हेल्थ यूनिट में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा ।

मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए धैर्य , अनुशासन और मेहनत ही असली ताकत – शिव शंकर दुबे

परीक्षा की तैयारी: आज का अनुशासन ही कल की पहचान है
परीक्षा का समय किसी भी विद्यार्थी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक समय होता है। यह वह समय है जब केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी का धैर्य, अनुशासन, आत्मनियंत्रण और मेहनत भी परखी जाती है। जो छात्र इस समय को गंभीरता से लेते हैं, वही भविष्य में सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचते हैं।
प्रधानाचार्य शिव शंकर दुबे जी का मानना है कि परीक्षा में सफलता अचानक नहीं मिलती। यह रोज़ की गई छोटी-छोटी मेहनत, समय की सही योजना और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम होती है। जो विद्यार्थी रोज़ एक निश्चित समय पर पढ़ाई करते हैं, समय पर सोते-जागते हैं और अपने कार्य को टालते नहीं हैं, वे तनाव से दूर रहते हैं और आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।
धैर्य परीक्षा की तैयारी का सबसे बड़ा हथियार है। अगर कोई विषय या अध्याय पहली बार में समझ न आए, तो निराश होना कमजोरी नहीं, बल्कि प्रयास छोड़ देना कमजोरी है। बार-बार अभ्यास करने से ही कठिन विषय सरल बनते हैं। याद रखें—असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी होती है।
अनुशासन हमें यह सिखाता है कि मनोरंजन और पढ़ाई में संतुलन कैसे बनाया जाए। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियाँ विद्यार्थियों की सबसे बड़ी बाधा हैं। जो छात्र इनसे दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही समय का सही उपयोग कर पाते हैं।
परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे चरित्र, जिम्मेदारी और मेहनत की सच्ची पहचान है। आज की गई लापरवाही कल पछतावे में बदल सकती है, और आज की मेहनत कल गर्व का कारण बन सकती है। इसलिए हर विद्यार्थी को चाहिए कि वह पूरे मन, पूरे अनुशासन और पूरे धैर्य के साथ अपनी तैयारी करे।जो आज खुद पर नियंत्रण रखता है, वही कल अपने भविष्य को नियंत्रित करता है।अनुशासन और धैर्य के बिना मेहनत अधूरी है, और मेहनत के बिना सफलता असंभव।

रेल सुविधाओं से जुड़ी माँगों, एवं आन्दोल जायज़ झामुमो व्यवसायियों के साथ : पंकज मिश्रा

पाकुड़ के पत्थर व्यवसायियों को झामुमो का समर्थन, रेल लोडिंग बंद के फैसले को बताया जायज़

पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसायियों को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का खुला समर्थन मिला है। झामुमो के प्रवक्ता पंकज मिश्रा ने व्यवसायियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और आगामी दिनों में प्रस्तावित रेल लोडिंग बंद के समर्थन का ऐलान किया।

बैठक के दौरान पत्थर व्यवसायियों ने कहा कि पाकुड़ जैसे औद्योगिक जिले की लगातार रेलवे उपेक्षा की जा रही है। न तो पाकुड़ से दिल्ली के लिए कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध है और न ही राजधानी एक्सप्रेस, वंदे भारत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव यहां दिया गया है। इससे व्यापार के साथ-साथ आम यात्रियों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पंकज मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन जनता और स्थानीय व्यवसायियों की जायज़ मांगों से जुड़ा है। उन्होंने कहा,
“जब तक जनता की मांग पूरी नहीं होगी, तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि पाकुड़ क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी, प्रमुख ट्रेनों का ठहराव और रैक लोडिंग से जुड़ी समस्याओं का समाधान बेहद जरूरी है। झामुमो इन मुद्दों को रेलवे और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएगा।

इस मौके पर पत्थर व्यवसायियों ने एकजुट होकर कहा कि अगर मांगों पर जल्द ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।