14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 40 जवानों को स्मरण करते हुए 14 फरवरी को काला दिवस के रूप में मनाते हुए शहर के इंद्रा चौक पर शनिवार को देर संध्या में सत्य सनातन संस्था ने आदर्श आचार संहिता का पालन करते हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वीरगति प्राप्त जवानों को भावपूर्ण नमन करते हुए उनकी शहादत को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया गया।
ज्ञात हो कि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान संस्था के अध्यक्ष रंजीत कुमार चौबे ने कहा कि मातृभूमि की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले जवानों का त्याग सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा गया कि राष्ट्र उनके बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा। श्री चौबे ने यह भी कहा आज पश्चिमी सभ्यताओं से बसीभूत होकर कई लोग रोज डे चॉकलेट डे किश डे और तो और वैलेंटाइन डे मनाते हैं परंतु देश के बीर जवानों को भूल जाते है आज के दिन देशवासियों को वीर जवानों की शहादत को याद कर एकजुटता प्रदर्शित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का सम्मान और स्मरण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। मौके पर संस्था के उपाध्यक्ष गौतम कुमार ,सयुक्त सचिव अजय भगत , कोषाध्यक्ष अमर ठाकुर ,जिला अध्यक्ष हर्ष भगत , सत्यम भगत ,बम भोला उपाध्याय ,सुमित पांडेय, सानू रजक ,संदीप त्रिवेदी , संतोष टिब्रीवाल, संतोष कुमार ,प्रसन्ना मिश्रा संतोष कुमार, आनंद कुमार , रवि भगत , मुन्ना शर्मा ,चुन्ना शर्मा सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे ।
संस्था ने पुलवामा हमले में शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, काला दिवस के रूप मे 14 फरवरी को काला दिवस के रूप में किया गया स्मरण
मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत् आज एक मामलों का हुआ सफल मध्यस्थता
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर चले रहे मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” के तहत् आज एक मामलों का सफल सुलह समझौता कराया गया। मामला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे मूल भरण पोषण वाद संख्या 254/2025 सोमीरोन खातून बनाम बदरूद्दीन अंसारी जिनका एक पुत्री भी है। जो वर्षों से अलग रह रहे दंपतियों को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने मिलकर रहने का संकल्प लिया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 का भूमिका एवं संबंधित दोनों पक्षों के अधिवक्ता का योगदान रहा। जिससे घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दिया। ये अभियान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर सचिव रूपा बंदना किरो के देख रेख में की जा रही है। इस दौरान मौके पर दंपतियों के परिजन, अधिवक्ता सुलेखा प्रमाणिक, न्यायालय कर्मी मौजूद रहे।
मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत् आज दो मामलों का हुआ सफल मध्यस्थता
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर चले रहे मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” के तहत् आज दो मामलों का सफल सुलह समझौता कराया गया। मामला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे दो मामले मूल भरण पोषण वाद संख्या 339/2025 संतोषनी मुर्मू बनाम संतोष सोरेन एवं दूसरा मामला मूल भरण पोषण वाद संख्या 275/2025 जासमीन खातून बनाम आलम शेख ,दोनों मामलों केvदंपतियों का एक छोटी बच्ची भी है।जो वर्षों से अलग रह रहे दंपतियों को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से दोनों मामलों में पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों वाद में पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने मिलकर रहने का संकल्प लिया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 का भूमिका एवं संबंधित दोनों पक्षों के अधिवक्ता का योगदान रहा। जिससे घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दिया। ये अभियान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के देख रेख में की जा रही है। मौके पर दंपतियों के परिजन, उभय पक्ष के अधिवक्ता मौजूद रहें।
आगामी 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने को लेकर पीडीजे की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में आगामी 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे की अध्यक्षता में इंश्योरेंस अधिवक्ता मेडिएटर अधिवक्ता के साथ महत्वपूर्ण बैठक की गई जिसमें मामलों से संबंधित कई बिंदु पर कानूनी पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया। जिसमें अधिक से अधिक मामलों का निष्पादन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दी गई। मौके पर अपर सत्र न्यायधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद डालसा सचिव रूपा बंदना किरो समेत इंश्योरेंस कंपनियों के अधिवक्तागण एवं अन्य उपस्थित रहें।
डी ए वी विद्यालय में चलाया गया फाइलेरिया मुक्ति अभियान कार्यक्रम
मंगलवार, 10 फरवरी 2027
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय विद्यालय डी ए वी पब्लिक स्कूल पाकुड़ के सभा भवन में फाइलेरिया उन्मूलन हेतु फाइलेरिया मुक्ति अभियान की शुरुआत की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय प्राचार्य डॉ विश्वदीप चक्रवर्ती, सिविल सर्जन पाकुड़, डॉ सुरेंद्र कुमार मिश्रा, डी एम ओ डॉ अमित कुमार, इंचार्ज सी एस सी सफर डॉ के के सिन्हा एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात विद्यालय के सभी बच्चों को तीन विभिन्न प्रकार की दवाएं खिलाई गई। दिनांक 10 फरवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक फाइलेरिया रोधी दवाओं का सामूहिक सेवन जिले के हर प्रखंड, विद्यालय एवं गांवों में कराया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं भारत सरकार द्वारा वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अपने अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ चक्रवर्ती एवं सिविल सर्जन पाकुड़, डॉ सुरेंद्र कुमार मिश्रा जी ने सभी जिलेवासियों से अपील की है कि फाइलेरिया रोधी दवा सुरक्षित एवं प्रभावी है। उनलोगों ने अपने अपील में बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव एक गंभीर बीमारी है जो समय पर दवा लेने से पूरी तरह रोकी जा सकती है । समय पर दवा नहीं लेने से आजीवन विकलांगता का कारण बन सकती है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वास्थ्य कर्मी के साथ साथ विद्यालय के संजय कुमार यादव, पपीया बनर्जी, अमृता दास, तूलिका बिस्वास आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
*मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत् आज एक मामलों का हुआ सफल मध्यस्थता*
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर चले रहे मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” के तहत् आज एक मामलों का सफल सुलह समझौता कराया गया। मामला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे ओरिजनल सूट संख्या 140/2025 मोजामूल अंसारी बनाम जमेला बीबी जो वर्षों से अलग रह रहे दंपतियों को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने मिलकर रहने का संकल्प लिया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 का भूमिका एवं संबंधित दोनों पक्षों के अधिवक्ता का योगदान रहा। जिससे घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दिया। मौके पर दंपतियों के परिजन, उभय पक्ष के अधिवक्ता मो सलीम एवं राजाधन किस्कू न्यायालय कर्मी उपस्थित रहें।
विकास के दौड़ में परंपरा को पूरी तरह कुचल देना भी विकास नहीं, महेशपुर अंबेडकर चौक पर दिखा टमटम
पूर्व सैनिक और पत्रकार राजेश प्रसाद की कलम से अतीत में झाँकता एक आलेख—-
इतिहास के पन्नों से झांकता विलुप्त होता एक साधन, एक सवारी
पाकुड़ (महेशपुर) : आज के तेज़ रफ्तार और डिजिटल दौर में जब सड़क पर दौड़ती मोटरसाइकिल, कार, ई-रिक्शा समेत अन्य मशीनी गाड़ी आम दृश्य बन चुके हैं, उसी बीच महेशपुर अंबेडकर चौक पर सोमवार को एक घोड़ा गाड़ी यानी टमटम का दिखना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। कुछ पल के लिए मानो समय थम-सा गया और लोग इतिहास के उन पन्नों में वापस लौट गए, जब टमटम (घोड़ागाड़ी) ही सफर का सबसे सम्मानित और भरोसेमंद साधन हुआ करता था।
——
*रामायण और महाभारत काल से जुड़ी है घोड़ा गाड़ी की परंपरा*
——
इतिहासकारों के अनुसार घोड़ा और रथ का उपयोग रामायण और महाभारत काल से ही भारत में होता आ रहा है। उस दौर में रथ केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि शौर्य, प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक था। राजाओं, सेनापतियों और दूतों की यात्रा रथों के माध्यम से ही होती थी। कालांतर में यही रथ साधारण जनजीवन में ढलते-ढलते घोड़ा गाड़ी और टमटम के रूप में विकसित हुआ।
—–
*अंग्रेजी शासन में टमटम का रहा स्वर्णिम दौर*
——
ब्रिटिश शासनकाल में टमटम ने एक व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था का रूप ले लिया। रेलवे स्टेशन, कचहरी, थाना और बाजारों में टमटम की कतारें लगती थीं। उस समय वर्तमान झारखंड का साहिबगंज जिला, जो गंगा नदी के कारण रेल और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा, वहाँ टमटम का व्यापक प्रचलन था। साहिबगंज, राजमहल और आसपास के इलाकों में टमटम चालक न केवल सवारी ढोते थे, बल्कि खबरें, संदेश और सामान भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे।
—–
*झारखंड की ग्रामीण संस्कृति में टमटम*
——
झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण समाज में टमटम केवल यातायात का साधन नहीं था, बल्कि शादी-ब्याह, मेले-ठेले और सामाजिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा रहा है। दूल्हे की बारात, देवी-देवताओं की शोभायात्रा और साप्ताहिक हाट, हर जगह टमटम की अहम भूमिका होती थी। साहिबगंज, पाकुड़, दुमका और गोड्डा जैसे जिलों में टमटम चलाना एक सम्मानजनक आजीविका मानी जाती थी।
—–
*सुविधा, सादगी और पर्यावरण मित्र साधन*
——
टमटम की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह ईंधन-रहित, पर्यावरण मित्र और कम खर्चीला साधन था। खराब सड़कों और कीचड़ भरे रास्तों में भी यह आसानी से चल जाता था। न शोर, न प्रदूषण, बस केवल घोड़े की टापों की आवाजें।
——
*तकनीक के आगे हारती परंपरा*
——
समय बदला, सड़कें पक्की हुईं और तकनीक ने रफ्तार पकड़ी। मोटर वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा के आगमन के साथ ही टमटम धीरे-धीरे हाशिए पर चला गया। घोड़े के रख-रखाव की बढ़ती लागत, सरकारी नियमों की अस्पष्टता और आधुनिक साधनों की सुविधा ने इस परंपरा को लगभग विलुप्त ही कर दिया।
——
*आज का दृश्य एक चेतावनी*
——
महेशपुर अंबेडकर चौक पर टमटम का सोमवार को दिखना केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक संकेत और चेतावनी है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत चुपचाप हमसे दूर होती जा रही है।
—–
*विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की मांगें*
—–
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार को टमटम को सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा देना चाहिए। पर्यटन स्थलों और मेलों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। टमटम चालकों के लिए प्रशिक्षण व आर्थिक सहायता की योजना बनानी चाहिए। स्कूलों और संग्रहालयों में इसके इतिहास को स्थान देना चाहिए।
—–
*संरक्षण नहीं तो स्मृति में सिमट जाएगी परंपरा*
——
अगर समय रहते टमटम जैसी परंपराओं का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी। सोमवार को अंबेडकर चौक पर टमटम का दिखना यह याद दिलाता है कि विकास के दौड़ में परंपरा को पूरी तरह कुचल देना भी विकास नहीं है। जरूरत है संतुलन की, जहां तकनीक के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति भी जीवित रहे।
—-
*क्या कहते है जानकार*
—-
स्थानीय इतिहास के जानकार प्रो. अजय मंडल (सेवानिवृत्त शिक्षक, साहिबगंज) बताते हैं कि 1960–70 के दशक तक साहिबगंज, राजमहल और पाकुड़ क्षेत्र में टमटम आम परिवहन का साधन था। स्टेशन से बाजार और गांव तक जाने के लिए यही सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता था।
महेशपुर के 75 वर्षीय बुजुर्ग रामचंद्र साह कहते हैं कि उनके जमाने में शादी-ब्याह में दूल्हा टमटम पर ही बैठकर जाता था। मेले में जाना हो या हाट, टमटम ही सहारा था। उस समय यह इज्जत की सवारी मानी जाती थी। पर्यावरणविद दीपक हेम्ब्रम का मानना है कि आज जब दुनिया प्रदूषण से जूझ रही है, टमटम जैसा साधन पूरी तरह ईंधन-रहित और पर्यावरण मित्र है। अगर इसे पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ा जाए तो यह रोजगार का भी अच्छा माध्यम बन सकता है। महेशपुर के एक पूर्व टमटम चालक सलीम अंसारी बताते हैं कि पहले दिनभर में अच्छी कमाई हो जाती थी। लेकिन अब लोग जल्दी गंतव्य पर पहुंचना चाहते हैं। घोड़े का चारा महंगा है, रख रखाव मुश्किल है, इसलिए उन्होंने यह काम छोड़ दिया है। इसके अलावा पशु-चिकित्सा सुविधा की कमी, सरकारी प्रोत्साहन का अभाव और बढ़ती शहरीकरण की रफ्तार ने इस परंपरा को लगभग समाप्त कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता मीना हांसदा कहती हैं कि सरकार अगर मेलों, पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक आयोजनों में टमटम को बढ़ावा दे तो यह परंपरा बच सकती है। इसे सांस्कृतिक धरोहर घोषित कर प्रशिक्षण और सब्सिडी दी जानी चाहिए।
10 से 25 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान
आम जन रहें तैयार , स्वास्थ्य विभाग है पूर्ण तैयार
एक भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से न छूटे, अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान: सिविल सर्जन
पाकुड़ जिले में फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन को लेकर 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र कुमार मिश्रा ने पुराने सदर अस्पताल परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिविल सर्जन डॉ. मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत लक्षित आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी लाभार्थी दवा सेवन से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने जेएसएलपीएस की सखी दीदी, सीएलएफ पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि घर-घर संपर्क कर लोगों को जागरूक करना, भ्रांतियों को दूर करना और दवा सेवन सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। उन्होंने सभी से अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे जन आंदोलन का रूप देने की अपील की।
सिविल सर्जन ने यह भी निर्देश दिया कि दवा खाली पेट न खिलाई जाए तथा दवा सेवन के दौरान सभी आवश्यक स्वास्थ्य मानकों का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर और सामूहिक दवा सेवन से इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान बूथ स्तर पर विशेष दवा सेवन दिवस का आयोजन किया जाएगा और क्षेत्रवार निगरानी भी की जाएगी। बेहतर कार्य करने वाले समूहों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।