Sunday, March 22, 2026
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कोयले की कालिमा के अंधकार से निकला सोहराय पर सौगात का प्रकाश

सोहराई पर्ब को लेकर साडी सेट का वितरण.
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी संथाली समाज का महापर्व सोहराय को लेकर स्थानीय डीबीएल सेंट्रल कॉल कंपनी द्वारा अपने कॉल उत्खनन क्षेत्र से विस्थापित व प्रभावित पांच गांव की महिलाओं व बच्चियों के बीच सी एस आर योजना के तहत साड़ी सेट का वितरण किया जा रहा है बीते बुधवार को आलू बेड़ा कैंप कार्यालय के समीप एक शिविर का आयोजन कर कंपनी के प्रोजेक्ट हेड बर्जेश कुमार के द्वारा स्वयं अपने हाथों से महिलाओं के बीच साड़ी सेट का वितरण किया गया जबकि बीते मंगलवार को डीबीएल कॉल कंपनी द्वारा न्यू कथाल्डीह गांव में एक शिविर का आयोजन कर वहां के महिलाओं के बीच कंपनी के प्रोजेक्ट हेड बर्जेश कुमार के निर्देशानुसार साड़ी सेट का वितरण किया गया है बुधवार को वितरण किए गए इस सारे सेट कार्यक्रम मैं डीबीएल कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक समन्वयक संजीव कुमार सिंह सीनियर जनरल मैनेजर मनोज कुमार सिंहा माइंस मैनेजर भावेश कुमार दिवाकर वीपीआर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एस श्रीनिवास रेड्डी लाइजनिंग मैनेजर संजय दास जेपी राय सहित अन्य पदाधिकारी व कर्मी मौजूद थे इस अवसर पर डीबीएल कॉल कंपनी के स्थानीय प्रोजेक्ट हेड स एबीपी बर्जेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में पूरे संताल परगना सहित संपूर्ण झारखंड में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा संताली समाज का महा पर्ब सोहरय को लेकर कंपनी अपने परियोजना क्षेत्र के विस्थापित व प्रभावित गांव कटहल दी आमझरी तालझारी सिंह डेहरी औरआलू बेड़ा गांव के महिलाओं के बीच सी एस आर योजना के तहत साड़ी सेट का वितरण कर रही है साथ ही गांव के सजावट के लिए आर्थिक सहयोग भी गांव के ग्राम प्रधानों के माध्यम से किया जा रहा है इस साल करीब 1000 से ज्यादा साडीसेट का वितरण किया जाएगा साड़ी पाकर ग्रामीण महिलाएं काफी खुश नजर आई और कंपनी के कार्य की काफी शरण सरहाना करते हुए कहा कि कंपनी प्रति बर्ष सोहराई पर्ब के अवसर पर हम लोगों के बीच साडी सेट का वितरण करती है
बिदित हो कि सोहराई पर्ब व सरस्वती पूजा के अवसर पर आलूबेरा गाँव में एक मेला का आयोजन किया जाता है

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के अंग कुटुंब न्यायालय ने सावित कर रखा है कि यहाँ तारीख़ें नही समाधान ही मिलता है

पति पत्नी के बीच चल रहे मतभेद हुआ समाप्त एक हुए दंपति

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे मूल भरण पोषण वाद संख्या 267/2025 रूपाली खातून बनाम सफीकुल शेख जो वर्षों से अलग रह रहे थे।जिनका एक 3 वर्ष के पुत्री मलिका खातून है। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के निरंतर अथक प्रयास से विवाहित जोड़ों के बीच चल रहे विवादों को सुलझाकर उन्हें फिर से एक किया गया है। आपसी मतभेद को समाप्त कर दंपति एक साथ रहने के लिए राजी हुए। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दंपतियों को आपस में मिल जुल कर रहने , दुबारा मतभेद ना हो, वैवाहिक जीवन में एक दूसरे को समझते हुए मिलजुलकर एक साथ खुशी-खुशी रहने का संदेश दिया। मौके पर दोनों पक्षों के परिवार सदस्य,कोर्ट कर्मी उभय पक्ष से संबंधित अधिवक्ता सलेहा नाज़, अब्बास अली उपस्थित रहे।

प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से दंपति ने आपसी मतभेद को किया समाप्त

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे ओरिजनल सूट वाद संख्या 157/2025 सायुद शेख बनाम सालेमा खातून जो वर्षों से अलग रह रहे थे। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से दोनों पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने के साथ एक दूसरे को माला पहनाया।साथ में एक छोटा बच्चा भी है। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का आशीर्वाद दिया। मौके पर दोनों पक्षों के परिवार के सदस्य अधिवक्ता मुकेश कुमार, सुलेखा प्रमाणिक उपस्थित रहें।

संत डोनबोस्को विद्यालय में वार्षिक खेल कूद की हुई शुरुआत

संत डॉन बॉस्को स्कूल, पाकुड़ में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता 2026 का प्रथम दिन बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला खेल पदाधिकारी (DSO) श्री राहुल कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत एवं मार्च पास्ट से हुई। खेल मैदान में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे जोश और खेल भावना के साथ भाग लिया। खेल गतिविधियों में भाग लेकर सभी बच्चे अत्यंत आनंदित दिखाई दिए।
इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री शिव शंकर दुबे ने अपने संबोधन में खेलकूद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल न केवल शारीरिक विकास के लिए आवश्यक हैं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास को भी बढ़ाते हैं।
मुख्य अतिथि श्री राहुल कुमार ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें नियमित रूप से खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय द्वारा आयोजित इस भव्य खेल आयोजन की प्रशंसा की।
पूरा विद्यालय परिसर आज खेल भावना, अनुशासन और उल्लास से सराबोर नजर आया। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के आगामी दिनों को लेकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखा गया।

पीड़ा है रेल से उपेक्षित पाकुड़ की और आशा है बाबूलाल मरांडी से इसलिए सवाल भी उन्हीं से कर रहे लोग

*पाकुड़ की रेल पीड़ा और एकमात्र आशा बाबूलाल मरांडी*

पाकुड़ एक शांत, सरल और सहनशील जिला है। भौगोलिक रूप से यह दो ओर से पश्चिम बंगाल से जुड़ा है और सामाजिक रूप से यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहां की जनता का जीवन संघर्षों से भरा है। उनके सपने बहुत छोटे हैं—बस इतना कि दो वक्त की रोटी मिल जाए, बच्चों की पढ़ाई किसी तरह चल जाए और बीमार पड़ने पर इलाज के लिए शहर भागना न पड़े। बड़े-बड़े सपने, जैसे उद्योग, उच्च शिक्षा, आधुनिक अस्पताल, बेहतर रोजगार या सशक्त प्रशासन—ये सब यहां की आम जनता के मन में आकार ही नहीं ले पाते।

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां के सुविधा-संपन्न और संभ्रांत वर्ग जन आंदोलनों से दूरी बनाए रखते हैं। राजनीतिक दल चुनाव के समय जनता को साधन की तरह इस्तेमाल करते हैं और चुनाव खत्म होते ही उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। सरकारें भी जनता को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय लोकलुभावन योजनाओं के सहारे एक पराश्रित जीवन की ओर धकेल देती हैं। ठीक वैसे ही जैसे पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के सामने दाना डाल दिया जाता है—जीवन तो चलता है, पर उड़ान की कोई गुंजाइश नहीं रहती।

पाकुड़ की भोली-भाली जनता अपने और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बड़े संघर्षों में शामिल होने से भी कतराती है। शायद उन्होंने मान लिया है कि उनका भाग्य पहले ही लिख दिया गया है।

विडंबना यह है कि पाकुड़ जिला काला पत्थर उद्योग के लिए पूरे एशिया में जाना जाता है। यहीं से निकला कोयला पश्चिम बंगाल और पंजाब को रोशन करता है। कहा जाता है कि जहां कोयला होता है, वहां विकास अपने आप आता है। लेकिन पाकुड़ ने इस कथन को झूठा साबित कर दिया है। यहां न तो उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा है, न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, न बेहतर आवागमन के साधन। संसाधन यहां हैं, लेकिन विकास कहीं और चला जाता है।

पाकुड़ रेलवे स्टेशन हावड़ा–गुवाहाटी मुख्य रेलखंड पर स्थित है। यह पूर्व रेलवे के हावड़ा मंडल का एकमात्र जिला मुख्यालय स्टेशन है। रेल राजस्व संग्रहण में हावड़ा मंडल देश में दूसरे स्थान पर है। सिर्फ कोयला और पत्थर की माल ढुलाई से रेलवे हर वर्ष लगभग 3600 करोड़ रुपये का राजस्व कमाती है। इसके बावजूद पाकुड़ को यात्री सुविधाओं के नाम पर उपेक्षा ही मिली है।

यह अत्यंत दुखद है कि जैसे राजनीतिक दल जनता को उनके हाल पर छोड़ देते हैं, ठीक वैसे ही रेल प्रशासन भी पाकुड़ की जनता को उनकी समस्याओं के साथ जीने के लिए मजबूर कर रहा है। जनता जिन जनप्रतिनिधियों को लोकसभा और विधानसभा भेजती है, वे शायद ही कभी पाकुड़ की आवाज लोकतंत्र के मंदिर तक पहुंचाते हैं। अगर ऐसा होता, तो आज पाकुड़ रेलवे स्टेशन इस कदर उपेक्षित न होता।

हाल ही में 17–18 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा देश को पांच-पांच अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात दी गई। चिरूपल्ली–एनजेपी, नागरकोइल–एनजेपी, बेंगलुरु–राधिकापुर, बालूरघाट–बेंगलुरु और अलीपुरद्वार – बंगलुरु अमृतभरत एक्सप्रेस—ये सभी ट्रेनें पाकुड़ से होकर गुजरीं। लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि एक भी ट्रेन का ठहराव पाकुड़ स्टेशन पर नहीं दिया गया।

यह सिर्फ एक तकनीकी निर्णय नहीं, बल्कि पाकुड़ की जनता की भावनाओं पर सीधा आघात है। यह वही स्टेशन है जो रेलवे को हजारों करोड़ का राजस्व देता है, लेकिन जब सुविधा की बात आती है तो उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।

हालांकि इतिहास गवाह है कि जब मालदा–बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस की घोषणा हुई थी और उसका ठहराव पाकुड़ में नहीं था, तब पाकुड़ के वरिष्ठ अधिवक्ता सुकु उपाध्याय की पहल और झारखंड के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी जी के त्वरित हस्तक्षेप से उसी दिन 14 जनवरी को बेंगलुरु–मालदा अमृत भारत एक्सप्रेस का ठहराव पाकुड़ में सुनिश्चित हुआ था।

आज एक बार फिर पाकुड़ की जनता उम्मीद भरी आंखों से बाबूलाल मरांडी जी की ओर देख रही है। उन्हें भरोसा है कि वे फिर से आगे आएंगे और पाकुड़ के साथ हो रहे इस सौतेले व्यवहार को समाप्त करेंगे। जनता चाहती है कि सभी नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव पाकुड़ में हो। साथ ही पाकुड़ होकर पटना और नई दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन चलाई जाए, ताकि यह जिला देश की मुख्यधारा से सही मायनों में जुड़ सके।

झारखंड और संथाल परगना प्रक्षेत्र में बाबूलाल मरांडी जी एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनकी स्वीकार्यता सर्वव्यापी है। केंद्र में भाजपा-नीत एनडीए सरकार है और उनका सीधा संवाद केंद्रीय नेतृत्व और मंत्रियों से है। ऐसे में यह अपेक्षा अस्वाभाविक नहीं है।

आज जरूरत है उसी इच्छाशक्ति की, जिसके लिए बाबूलाल मरांडी जी पहले से जाने जाते रहे हैं। जनता को आज भी भरोसा है कि वे पाकुड़ की पीड़ा को समझते हैं और सही समय पर निर्णायक कदम उठाएंगे।

यह सिर्फ ट्रेन के ठहराव का सवाल नहीं है, यह पाकुड़ के सम्मान, भविष्य और अधिकार का सवाल है। और इस सवाल का जवाब देने की उम्मीद आज भी बाबूलाल मरांडी जी से ही है।

नशा मुक्ति और सड़क सुरक्षा नियम अपनाकर नालसा के बने डॉन बच्चों के पेंटिंग ने दिया संदेश

नालसा के डॉन योजना के तहत स्कूली बच्चों ने नशामुक्त भारत एवं सड़क सुरक्षा पर पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से दिया जागरूकता संदेश*
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ एवं प्रशासन की संयुक्त तत्वाधान में सचिव रूपा बंदना किरो की उपस्थिति में जिला परिवहन विभाग की ओर से एक दिवसीय पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान एवं सड़क सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पेंटिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा एवं नशा से होनेवाले वाले नुकसान को दर्शाते हुए समाज में जागरूकता का सन्देश दिया गया।इस दौरान संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

पंकज मिश्रा के समर्थन ने पत्थर लोडिंग बन्द आन्दोल को दे दिया है धार। क्या पिघलेगा रेल मंत्रालय पर जमी पाकुड़ की उपेक्षा का बर्फ यक्ष प्रश्न

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तीन दिनों से रेल विकास की मांग को लेकर रैक लोडिंग कार्य बंद,करोड़ों का हो रहा नुकसान

पटना व दिल्ली की सीधी ट्रेनें शुरू करने और शताब्दी एक्सप्रेस व वंदे भारत ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है

ब्रिटिश शासन काल में 19 वीं शताब्दी के लगभग उत्तरार्ध में पाकुड़ साहेबगंज लूप रेल लाइन की स्थापना उस समय की गई थी, जब ब्रिटिशों की राजधानी कोलकाता हुआ करता था। चूँकि भागलपुर ब्रिटिशों का एक ऐसा केंद्र था जो इस पूरे पुरवोत्तर भारत पर नज़र रखी जाती थी , और ब्रिटिश शासन का ये बहुत महत्वपूर्ण केंद्र था।
स्वाभाविक रूप से ब्रिटिश सैनिक एवं अधिकारियों के मुभमेन्ट के लिए यह रेल लाइन काफी महत्वपूर्ण तथा एक तरह से ब्रिटिश शासन की लाइफ लाइन थी। उसी समय पाकुड़ क्षेत्र के उत्तम क़्वालिटी के पत्थरों पर ब्रिटिश नज़र पड़ी , जिसने उच्चतम ताप को बर्दाश्त करने वाले इन पत्थरों को ढोने के लिए इस रेलवे लाइन का उपयोग होने लगा जो आज भी जारी है।
रेलवे लाइनों पर पहले हेंड मेड तथा सोध के बाद मसीन मेड एक निश्चित आकार के पत्थर भी इसी क्षेत्र से आपूर्ति होने लगी।
रेलवे ने इन शताब्दियों में पाकुड़ से पत्थरों के द्वारा अरबों खरबों कमाया , लेकिन आज़ादी के बाद भी तमाम सरकारों के रेल मंत्रालय ने रेल सुविधा एवं यात्री सुविधाओं के नाम पर उपेक्षा के साथ छला। लगातार छले जाने में रेल सुविधाओं को बढ़ाने की बात तो छोड़ दें कई ट्रेनों को विभिन्न कारणों से चुरा कर यहाँ की जनता को ठेंगा दिखाया गया। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लगातार उदासीनता भी कम दोषी नहीं है।
ऐसे में स्थानीय व्यपारियों ने ही लोडिंग बंदी का झंडा बुलंद किया। राजनीति के गलियारों के क्षेत्र के कद्दावर नेता पंकज मिश्रा ने अपना समर्थन दे कर लोडिंग बन्दी के आन्दोल को एक धार दे दिया है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि सिर्फ पत्थर क्यूँ कोयला ढुलाई पर भी लगे रोक
आन्दोल को विस्तार से नीचे जाने–

पाकुड़ के मालपहाड़ी व तिलभिट्टा रेलवे रैक प्वाइंट पर पिछले तीन दिनों से रेल विकास की मांग को लेकर पत्थर व्यवसायियों ने रैक लोडिंग का कार्य पूरी तरह ठप कर दिया हैं.यह आंदोलन झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा के आह्वान पर किया गया.आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.रैक लोडिंग बंद होने से तीन दिनों में लगभग दो करोड़ का नुकसान रेलवे को होने का अनुमान लगाया जा रहा हैं.वहीं रैक लोडिंग करने वाले दिहाड़ी मजदूरों को काम किए बिना ही घर लौटना पड़ रहा हैं. बताया गया कि यहां दोनों साइडिंग एरिया से प्रतिदिन औसतन करीब 6 से 10 रैक लोड होते हैं,जिससे रेलवे को भारी राजस्व प्राप्त होता है.वहीं आंदोलन के चलते 35 इंडेंट (रैक मांग) को वापस ले लिया गया है.उल्लेखनीय है कि पांच जनवरी को साहिबगंज में झामुमो नेता पंकज मिश्रा की अध्यक्षता में साहेबगंज और पाकुड़ जिले के पत्थर व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित की गई थी,जिसमें रेलवे रैक प्वाइंट से पत्थर ढुलाई करने वाले पाकुड़ और साहिबगंज के सभी पत्थर व्यवसायी शामिल हुए थे.बैठक में रेलवे पर आरोप लगाया गया कि भारी राजस्व देने के बावजूद पाकुड़ और साहिबगंज को रेल विकास के मामले में लगातार उपेक्षित रखा जा रहा है.व्यवसायियों ने पाकुड़ के लिए पटना और दिल्ली की सीधी ट्रेनें शुरू करने, शताब्दी एक्सप्रेस,वंदे भारत सहित प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठायी है.पत्थर एसोसिएशन का कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने तक रैक लोडिंग कार्य बंद रहेगा.यदि रेलवे प्रशासन ने शीघ्र पहल नहीं की,तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.पाकुड़ पत्थर एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार संगठन ने रेलवे में विकास की मांग को लेकर रैक लोडिंग कार्य बंद करने का निर्णय लिया है. शुक्रवार से रैक लोडिंग कार्य पूरी तरह बंद हैं.वहीं आगे भी रैक लोडिंग कार्य फिलहाल बंद रहेगा. संगठन के अगले निर्णय के बाद ही रैक लोडिंग पर विचार किया जाएगा.इधर इस मामले में गुड्स शेड सुप्रीटेंडें (ज़ीएसएस) पाकुड़ अमित कुमार से पूछने पर बताया की पिछले तीन दिनों से मालपहाड़ी और तिलभिटा रेलवे साइडिंग एरिया से रैक लोड पूरी तरह ठप हैं. प्रतिदिन 60 लाख से ऊपर सिर्फ रेलवे को नुकसान हो रहा हैं.अभी तक हड़ताल समाप्त होने की कोई सुचना प्राप्त नहीं हुई हैं.

पाकुड़ के प्रबुद्ध नागरिकों ने हड़ताल पर उठा रहे सवाल…

पाकुड़ शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने पत्थर रैक लोडिंग ठप किए जाने पर कई गंभीर सवाल उठाये हैं. सोशल मीडिया फेसबुक,इंस्टाग्राम और एक्स पर रेक लोडिंग ठप को लेकर पोस्ट और कमेंट्स किए जा रहे हैं. बताया सिर्फ पत्थर लोडिंग रोकने से कुछ नहीं होने वाला हैं.अगर रोकना हैं तो कोयला लोडिंग को बन्द करना होगा तभी मांगे पूरी होगी.बताया पाकुड़ रेलवे साइडिंग से प्रतिदिन कोयले का रेक लोडिंग होकर बाहर भेजे जा रहे हैं.जिससे अरबों का फायदा केंद्र सरकार और रेलवे को हो रहा उसे क्यों बंद नहीं किया गया.जबकि स्थानीय लोग पत्थर कारोबार से जुड़े हैं.भयादोहन और सॉफ्ट टारगेट लोकल व्यापारियों को कर दिया जाता हैं.अगर हिम्मत हैं तो कोयला को ठप करके दिखाए.बहरहाल पत्थर रेक लोडिंग पूरी तरह ठप हैं, अब देखना होगा आगे रेलवे विभाग क्या एक्शन लेती हैं. क्या रेलवे दबाव में आएगा? या फिर एकबार स्थानीय व्यापारियों को दोहन का शिकार से गुजरना होगा यह तो वक्त बताएगा.

डी ए वी विद्यालय में विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन

पाकुड़ में 17 जनवरी के विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह के आयोजन में न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं मीडिया के शीर्ष अधिकारी उपस्थित हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश, पाकुड़, उपायुक्त महोदय पाकुड़, एवं पुलिस अधीक्षक महोदया पाकुड़ के विद्यालय आगमन के पश्चात विद्यालय के एन सी बी टीम के द्वारा इन्हें गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी गई। इस कार्यक्रम में विद्यालय के 500 से भी ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया। उपायुक्त महोदय ने अपने संबोधन में बताया कि 500 से भी ज्यादा बच्चों को मंच प्रदान करना अपने आप में विद्यालय प्रबंधन के लिए बहुत बड़ा अवसर प्रदान करना है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को इस भव्य समारोह के आयोजन हेतु धन्यवाद एवं शुभकामना दिया। वहीं पुलिस अधीक्षक महोदया ने बालिका प्रतिभागियों की तारीफ की एवं बताया कि महिलाओं को मंच प्रदान करने से वे हमेशा देश को गौरांवित करेंगी।
प्रधान एवं जिला सत्र न्यायधीश ने विद्यालय परिवार को इस आयोजन हेतु शुभकामना दिया। सत्र 2025-26 में शैक्षणिक, खेल कूद, सी सी ए, सामाजिक क्षेत्र एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैकड़ों छात्र छात्राओं को इन अधिकारियों द्वारा पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं इन पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय की वार्षिक पत्रिका *विद्या ज्योति* का विमोचन किया गया। सभी पदाधिकारियों ने घंटों बैठकर कार्यक्रम का लुत्फ उठाया।
इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने स्वयं अंकित चित्रों की एक प्रदर्शनी भी लगाई जो मोहक आकर्षक और प्रशंशनीय रही।

कोयला ब्लॉक में तृतीय वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़े की शुरुआत

डीजीएमएस सेंट्रल जोन धनबाद के निर्देशानुसार पचवारा सेंट्रल कॉल ब्लॉक ओसीपी में बीते 12 जनवरी से 24 जनवरी तक चल रहे तृतीय वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़ा 2025 के दरमियान बीते शनिवार 17 जनवरी को अमरपारा के आलू बेड़ा स्थित डीबीएल पीएसपीसीएल के कैंप कार्यालय के समीप एक भव्य कार्यक्रम बीसीसीएल सेंट्रल जोन धनबाद के डी जीएमएस श्री मिथिलेश कुमार के उपस्थिति में किया गया जबकि इस कार्यक्रम में डी जीएमएस द्वारा गठित कमेटी बीसीसीएल मुरैडिह फुलारी टांग ओसीपी के कन्वीनर त्रिभुवन सिंह चौहान कोलवारी इंजीनियर एक्सकैवेशन मनोज कुमार कोलवारीअभियंता अजीत सेठी माइनिंग अभियंताअशोक कुमार पाल इना कलवारी मैनेजर रणजीत सिंह कुलवारी सर्वैयर राजकुमार नायक सहित पीएसपीसीएल के एजेंट राकेश कुमार सिंह डीबीएल के प्रोजेक्ट हेड
बर्जेश कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे डीबीएल के कैंपकार्यालय प्रांगण में आयोजित उक्त खान सुरक्षा पखवाड़ा कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मिथिलेश कुमार द्वारा झंडोतोलन कर किया गया जबकि इस अवसर पर आलू बेड़ा गांव में संचालित चाइल्ड डेवलपमेंट पब्लिक स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे बच्चियों द्वारा संताली वह हिंदी भाषा में आकर्षक स्वागत गाना गाकर अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया इस कार्यक्रम के दरमियान डीबीएल सेंट्रल कोल माइंस में अपने एवं आसपास के लोगों को सुरक्षित रखकर अपने कार्य का निर्वाह करने पर उपस्थित कर्मियों को पुरस्कृत किया गया वहीं मंच का संचालन कर रहे डीबीएल के अमन कुमार ने अच्छे-अच्छे शायरी के साथ उपस्थित कर्मियों को खान सुरक्षा नियमों के अनुसार कार्य करने का अनुरोध किया जबकि मुख्य अतिथि डी जी एम एस मिथिलेश कुमार द्वारा खान सुरक्षा के नियमों को कड़ाई से पालन कर अपने कार्य को सफलतापूर्वक करने व सुरक्षा के कई बारीकियोंको उपस्थित कर्मियों को बताया और कहा कि अपने ब दूसरों की सुरक्षा करना ही सबसे बड़ा कार्य है जिसे हम सभी कर्मियों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कर अपने कार्य को करना चाहिए कार्यक्रम के पश्चात उक्त कमेटी द्वारा उत्खनन कार्य का काफी बारीकी से निरीक्षण किया गया और खान सुरक्षा मापदंडों को देखा और कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया इस अवसर पर डी बी एल के माइंस मैनेजर बी.के दिवाकर सिविल इंजीनियर राकेश चोरसिया निर्पेंद्र सिंह भी पी आर कंपनी के पी एम श्रीनिवास रेड्डी सहित कई अन्य कर्मी उपस्थित थे

तूहूं लूटो हमहुँ लुटव ,लूटे के आज़ादी बा, सबले ज्यादा उहे लुटिहें ,जेकरा देह पे खादी बा

बसमाता मौजा के दाग संख्या 536 के एक बीघा आठ कट्ठा जमीन का पत्थर खो गया है। अब बेचारी जमीन अबला की तरह लुट तो गई , कहीं शिकायत भी नहीं कर पाई। ख़बरनबीस की नजर पड़ी तो,समाचार प्रकाशन के बाद सीओ के नेतृत्व में हुई स्थल निरीक्षण ।

खननकर्ता कागज़ातों के साथ कार्यालय बुलाये गये।

कागज़ात जाँच के बाद होगी नापी और करवाई।

आजकल पाकुड़ जिला में एक कहावत हर चौक चौराहे पर सुनी जा रही हैं की
” तूहूं लूटो हमहुँ लुटव ,लूटे के आज़ादी बा,
सबले ज्यादा उहे लुटिहें ,जेकरा देह पे खादी बा ।”
(जिस तरह का लूट का माजरा सामने आया है, वो बिना सक्षम राजनैतिक संरक्षण के सम्भव नहीं। अब कागज़ात के साथ खननकर्ता पहुँचते हैं , या खादी का फोन यह तो बताना मुश्किल है, लेकिन मामला क्या है, जानना लोगों का अधिकार है।

पाकुड़ जिला काला पत्थर के नाम से जाना जाता है.जहाँ ईमानदारी से कारोबार करने वाले तो हैं परन्तु अधिकतर माइनिंग चोरी और राजस्व को हानि पहुँचाने वालों की कोई कमी नहीं हैं.मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के बासमाता मौजा में हेना स्टोन वर्क्स के नाम की चर्चा इन दिनों तेजी से हो रही हैं.और होना भी क्यों नहीं चाहिए, क्यूंकि जिस स्थान और दाग पर सरकार ने उन्हें लीज दिया हैं वे लीज से हटकर अनावादी जमीन को भी खा गया हैं जिसकी चर्चा हो रही हैं.खनन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हेना स्टोन वर्क्स को बसमाता मौजा में खाता संख्या 10, 13, 03, 08,05 एवं 21 और प्लॉट संख्या 301, 302, 523, 524,525,526,527,529,530,531,532,508,509,512,533,539 हैं. जबकि कुल 6.37 एकड़ में लीज प्राप्त हैं.सूत्र बताते हैं की लीजधारक अपने लीज एरिया से हटकर दाग संख्या 536 कुल एक बीघा आठ कट्ठा जमीन जो की अनावादी हैं पूरा का पूरा खा गया हैं.सूत्रों की माने तो अनावादी जमीन खाने के बाद पाकुड़-राजग्राम पीडब्लूडी मुख्य सड़क पर अब खतरे की घंटी बज रही हैं.ब्लास्टिंग करते करते मुख्य सड़क से आवाजाही पर खतरा मंडराने लगा हैं.अगर समय रहते नहीं रोका गया तो बड़ा हादसा हो सकता हैं.

पत्थर माफियाओं का अब नहीं रहा प्रशासन से खौफ….

विश्वस्त सूत्रों की माने तो एक अगर पत्थर स्टोन लीज कराया जाए तो सीओ रिपोर्ट से लेकर डीएफओ रिपोर्ट और एलवाई बनाने तक करोड़ों रूपये खर्च हो जाते हैं.परन्तु अगर ईमानदारी से लीज दिया जाए तो दस लाख से अधिक खर्च नहीं होगा. अब सवाल उठता हैं की जब एक लीज लेने में नीचे से ऊपर तक करोड़ों खर्च कारोबारी करेंगे तो ईमानदारी से काम कैसे हो सकता हैं? आखिर इतने अधिक रूपये लिए जाते हैं किसी से छुपी नहीं हैं.ईमानदारी का चोला पहनकर भर्ष्टाचार पुरे चर्म पर हैं.पाकुड़ जिले के पाकुड़िया,महेशपुर के रद्दीपुर,सदर ब्लॉक के मालपहाड़ी हो या हिरणपुर ब्लॉक का पत्थर औद्योगिक क्षेत्र हो हर तरफ के पत्थर कारोबारी एक अंजान वसूली गेंग से परेशान हैं. स्वावभाविक हैं अवैध कारोबार करने के लिए जिम्मेवार लोग ही उकसा रहे हैं.बहरहाल जिले के सीमावर्ती साहेबगंज जिला में ईडी और सीबीआई के धमक के बाद भी पाकुड़ जिला में कोई असर नहीं दिख रहा हैं.अब आगे देखना होगा शासन और प्रशासन में बैठे अधिकारी आगे की कार्रवाई करती हैं या फिर खामोश होकर पन्ने पलटते हुए आगे बढ़ जायेंगे.

कहीं राजनीति संरक्षण में तो नहीं हो रहा कारोबार…

मालपहाड़ी थाना क्षेत्र में दर्जन भर ऐसे क्रेशर हैं जिनका वैध कागजात नहीं हैं. बिना वैध कागजात के ही चल रहा हैं.सूत्रों की माने तो कुछ सफेदपोश का खुला संरक्षण प्राप्त हैं.जब भी अधिकारीयों का गाड़ी जाती हैं अवैध कारोबारियों तक खबर पंहुचा दी जाती हैं. कुल मुलाकार अवैध कारोबार फल फूल रहा हैं.

अधिकारीयों की हो रही हैं रेकी…

जैसे ही अधिकारीयों की गाड़ी मालपहाड़ी थाना क्षेत्र में घुसती हैं रेकी करने वाले और पासिंग गिरोह के सदस्य मोबाईल से खबर कर देते हैं.पासिंग गिरोह के सदस्य पाकुड़-राजग्राम मुख्य सड़क के रेलवे लाइन,बाहिरग्राम के चाय पान दुकान में रहता हैं.इसके अलावे कोयला रोड से जाने के क्रम में दुर्गापुर गांव के आसपास भी लोग अधिकारीयों का रेकी करते हैं.