Friday, November 6, 2026
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बहुत चतुर हैं, नशा परोसने वाले कारोबारी, वैध कारोबार और समाजसेवा की कंबल के अंदर बेख़ौफ़ पी रहे हैं घी

याद है आपको ? पिछले वर्ष 22 दिसम्बर को नशे की अंधेरी गलियों में भटकती युवा पीढ़ी और बीमार भविष्य की आशंका से चिंतित वर्तमान (अभिवावक और बुद्धिजीवियों) की चर्चा कर मैंने आपको बताया था, कि इस धंधे में कैसे सफेदपोशों और पुराने शातिरों द्वारा चाँदी काटी जा रही है।

उस लेख से हमारे प्रान्त में तो कुम्भकर्णी नींद नहीं टूटी, लेकिन पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की कालियाचक पुलिस ने तकरीबन पाँच लाख की फेंसीडील सिरफ के साथ एक आदमी को गिरफ़्तार कर लिया था। जी हाँ फेंसीडील सिरफ पाकुड़ में एक ट्रांसपोर्ट से मंगाया जाता है, आमतौर पर ट्रांसपोर्ट कम्पनियों पर इतना विश्वास रहता है, कि उन्हें जाँच या जाँच के नाम पर किसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। फिर ट्रांसपोर्ट में अगर भेजने वाले और रिसीभ करनेवाले भी एक ही गुट के लोग हों और ट्रांसपोर्ट भी अपना ही हो , तो सूचना के लीक होने की संभावना भी शून्य हो जाती है। यहाँ तो ट्रांसपोर्ट में थोक में ये नशीला पेय पदार्थ दवा की चादर ओढ़े पहुँच जाती है, लेकिन यहाँ से इसे पश्चिम बंगाल भेजने का तरीका काफ़ी रईशजादाना है। छोटी चार चक्के वाली बंगाल और खाशकर सिलीगुड़ी के ज़्यादातर नम्बर वाली गाड़ियों से ये खेपें पहुँचाई जाती है। मेरे सूत्रों के अनुसार ऐसी लक्ज़री छोटी प्राइवेट गाड़ियों पर दो या उससे ज़्यादा आदमी रात में ऐसे समय मे निकलते हैं, कि बस वो निकल लेते है आसानी से, ठीक इसी प्रकार यही गाड़ियाँ उधर से विभिन्न तरह के ड्रग्स की खेप लेकर पाकुड़ आते हैं, कभी कभी इन गाड़ियों में एक आध महिलाएं और बच्चों को भी आते जाते साथ ले लिया जाता है, कि सन्देह से परे ….बस समझ लो भैया।

इन लोगों के पाकुड़ में ठहरने की व्यवस्था स्टेशन के पास के एक ऐसे होटल में किया जाता है, या फ़िर एक व्यक्तिगत विवाह भवन के कमरों में किया जाता है, कि सामान्यतया किसी आम आदमी को कुछ समझ में नही आता, या यह कहें कि उनके काम और समझ से परे की बात पर उनका ध्यान नही जाता, और प्रशासन या पारखी नजरें उन तक पहुँच नही पातीं। इस धंधे में स्थानीय तौर पर ऐसे लोग जुड़े हैं, जो ऐसे अबैध धंधों के पुराने खिलाड़ी है, और इतना पैसा बना चुके हैं, कि कभी कभी समाजसेवी का लीबादा भी ओढ़ लेते हैं, और वैध धंधों की ख़ूबशूरत दीवारें तो अपनी काली करतूतों को छुपाने के लिए उन्होनें बना ही रखा है।
22 दिसम्बर को मैंने आपसे क्या कहा बताया था, एक नज़र यहीं इसी पेज पर नीचे फ़िर से डाल लें—

पाकुड़  जिला मुख्यालय के अभिवावकों और बुद्धिजीवियों में इन दिनों एक चिंता और चर्चा आम है, कि नगर के नवयुवक आहिस्ते से नशे के चंगुल में इस क़दर फँसते जा रहे हैं, कि आनेवाले वर्षों में एक सम्पूर्ण पीढ़ी बर्बादी के जबड़ों में सिमट जाएगा। उल्लेखनीय है,कि पाकुड़ पत्थर, बीड़ी और अब कोयले उद्योग के लिए मशहूर तो रहा है, लेकिन जितना यह वैध उद्योगों के लिए मशहूर रहा है, उतना ही अवैध उद्योगों के लिए बदनाम भी। पश्चिम बंगाल से गलबहियां खेलतीं इस जिले की सीमाएं बंग्लादेश की सीमाओं से भी काफ़ी नजदीक है। स्वाभाविक रूप से ऐसे में तस्करी इस इलाके में एक बड़ी समस्या रही है। पहले भी सी आर, भी सी पी और अवैध हथियार सीमापार से आते थे, बदले में आयोडाइड नमक सहित अन्य कई सामग्रियों को उस पार भेजा जाता था, उसके बाद सूता सहित अन्य सामग्रियों का विनिमय तस्करी इस पार-उस पार होता था, आज के दिनों में नशे की विनिमय तस्करी हो रही है।

सूत्रों के अनुसार बतातें चलें कि इन दिनों इस पार से तस्कर फेंसीडील सिरफ बंग्लादेश भेज रहे हैं और उस पार से ड्रग्स की अवैध आयात कर रहे हैं। इस धंधे में नगर और आस पास के पुराने तस्कर सहित कई सफेदपोशों की संलिप्तता की ओर सूत्र इशारा करते हैं। नक़ली नोटों सहित अन्य बस्तुओं के पुराने खिलाड़ी इस नशे के कारोबार में लगे हैं और स्थानीय भटके हुए युवाओं को इस नशे के भवँर जाल में उपयोग कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं।

पिछले दिनों शहर के बुद्धिजीवियों ने सोसल मीडिया पर इशारों ही इशारों में नशे की जाल में जकड़ते युवाओं पर चिंता जताते हुए, पीढ़ी के बर्बाद होने की आशंका व्यक्त की, साथ ही मीडिया को भी आड़े हाथों लेते हुए नाराजगी जताई, जो स्वाभाविक भी है। लेकिन मीडिया के लोगों की मजबूरी पर किसी आलोचक की नज़र नही जाती। मीडिया के पास कलम तो है, लेकिन सुरक्षा के लिए हथियार नहीं है। अवैध खनन पर लिखने पर माफ़िया धमकियाँ देते हैं, अपनी पहुँच का उपयोग कर निष्पक्ष मिडिया को करते हैं मानसिक रूप से प्रताड़ित।

खैर इस पर अपनी बात बाद में जरूर रखूँगा, लेकिन फ़िल्वक पाकुड़ में नशे की गिरफ्त में जाते पूरी युवा पीढ़ी एक चिंता का विषय तो बन ही गया है। पुलिस और प्रशासन की नज़र भी इस सामाजिक समस्या और नशे के अवैध कारोबार की ओर बरबस खींच ही गया है। मीडिया ने भी अपनी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इस ओर अपनी शोध शुरू कर दी है।

इधरअनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजित कुमार बिमल ने कहा कि पुलिस नशीले पदार्थ बेचने वालों पर पैनी नजर रख रही है। अगर कोई व्यक्ति या सिंडिकेट इस तरह का काम कर रही है तो इसकी इसकी सूचना दें, पुलिस कार्रवाई करेगी। किसी भी सूरत में नशीले पदार्थ बेचने वालों को बर्दाश्त नही की जाएगी। लेकिन इसकी सूचना दे कौन ये बड़ा सवाल है ? आख़िर पुलिस का अपना सुचना तंत्र क्या करता है, क्या इस मामले में भी मीडिया ही मुखबिर बने ?
आनेवाले दिनों में शायद इस अवैध कारोबार के खिलाड़ियों के चेहरों से पुलिस नक़ाब खींचने में सफ़ल हो जाए।

वसंत ऋतु में कैसे रखे अपनों का ख्याल

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इन दिनों सर्दी खाँसी और कफ जनित बीमारियों ने मेरे और मेरे घर के साथ घर – घर मे दस्तख दी है। ऋतुओं के सन्धिकाल में ऐसी बीमारियाँ अपनी उपस्थिति मानव जीवन में बनाती रहती हैं।

इस समय कैसे रहा जाय और सावधानियों के साथ किन औषधीय गुणवाले घरेलू उपाय किये जांय, इस विषय पर मेरे फेसबुक मित्र prakash dubey ने एक आलेख बसंत ऋतु के संदेश के नाम से पोष्ट किया है। आप सभी मित्र भी प्रकाश भाई के निम्न आलेख से फ़ायदा लें, इसलिए हु ब हु उसे प्रस्तुत कर रहा हूँ।

वसंत ऋतु का संदेश
खान-पान का ध्यान विशेष-वसंत ऋतु का है संदेश
18 फरवरी 2022 शुक्रवार से वसंत ऋतु प्रारंभ।

ऋतुराज वसंत शीत व उष्णता का संधिकाल है। इसमें शीत ऋतु का संचित कफ सूर्य की संतप्त किरणों से पिघलने लगता है, जिससे जठराग्नि मंद हो जाती है और सर्दी-खाँसी, उल्टी-दस्त आदि अनेक रोग उत्पन्न होने लगते हैं। अतः इस समय आहार-विहार की विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
आहार : इस ऋतु में देर से पचनेवाले, शीतल पदार्थ, दिन में सोना, स्निग्ध अर्थात घी-तेल में बने तथा अम्ल व रसप्रधान पदार्थो का सेवन न करें क्योंकि ये सभी कफ वर्धक हैं। (अष्टांगहृदय ३.२६)

वसंत में मिठाई, सूखा मेवा, खट्टे-मीठे फल, दही, आईसक्रीम तथा गरिष्ठ भोजन का सेवन वर्जित है। इन दिनों में शीघ्र पचनेवाले, अल्प तेल व घी में बने, तीखे, कड़वे, कसैले, उष्ण पदार्थों जैसे- लाई, मुरमुरे, जौ, भुने हुए चने, पुराना गेहूँ, चना, मूँग , अदरक, सौंठ, अजवायन, हल्दी, पीपरामूल, काली मिर्च, हींग, सूरन, सहजन की फली, करेला, मेथी, ताजी मूली, तिल का तेल, शहद, गौमूत्र आदि कफनाशकपदार्थों का सेवन करें।भरपेट भोजन ना करें | नमक का कम उपयोग तथा १५ दिनों में एक कड़क उपवास स्वास्थ्य के लिए हितकारी है। उपवास के नाम पर पेट में फलाहार ठूँसना बुद्धिमानी नही है।

विहार : ऋतु-परिवर्तन से शरीर में उत्पन्न भारीपन तथा आलस्य को दूर करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठना, व्यायाम, दौड़, तेज चलना, आसन तथा प्राणायाम (विशेषकर सूर्यभेदी) लाभदायी है। तिल के तेल से मालिश कर सप्तधान उबटन से स्नान करना स्वास्थ्य की कुंजी है।

वसंत ऋतु के विशेष प्रयोग
२ से ३ ग्राम हरड चूर्ण में समभाग मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से ‘रसायन’ के लाभ प्राप्त होते हैं |
१५ से २० नीम के पत्ते तथा २-३ काली मिर्च १५-२० दिन चबाकर खाने से वर्षभर चर्मरोग, ज्वर, रक्तविकार आदि रोगों से रक्षा होती है।
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसमें नींबू का रस और थोडा नमक मिला के सेवन करने से मंदाग्नि दूर होती है।
५ ग्राम रात को भिगोयी हुई मेथी सुबह चबाकर पानी पीने से पेट की गैस दूर होती है।
रीठे का छिलका पानी में पीसकर २-२ बूँद नाक में टपकाने से आधासीसी (सिर) का दर्द दूर होता है।
१० ग्राम घी में १५ ग्राम गुड़ मिलाकर लेने से सूखी खाँसी में राहत मिलती है।
१० ग्राम शहद, २ ग्राम सोंठ व १ ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम चाटने से बलगमी खाँसी दूर होती है।

सावधानी : मुँह में कफ आने पर उसे तुरंत बाहर निकाल दें। कफ की तकलीफ में अंग्रेजी दवाइयाँ लेने से कफ सूख जाता है, जो भविष्य में टी.बी., दमा, कैंसर जैसे गम्भीर रोग उत्पन्न कर सकता है| अतः कफ बढ़ने पर ? जकरणी जलनेति का प्रयोग करें।