Thursday, November 5, 2026
Home Blog Page 27

विकास के दौड़ में परंपरा को पूरी तरह कुचल देना भी विकास नहीं, महेशपुर अंबेडकर चौक पर दिखा टमटम

पूर्व सैनिक और पत्रकार राजेश प्रसाद की कलम से अतीत में झाँकता एक आलेख—-

इतिहास के पन्नों से झांकता विलुप्त होता एक साधन, एक सवारी

पाकुड़ (महेशपुर) : आज के तेज़ रफ्तार और डिजिटल दौर में जब सड़क पर दौड़ती मोटरसाइकिल, कार, ई-रिक्शा समेत अन्य मशीनी गाड़ी आम दृश्य बन चुके हैं, उसी बीच महेशपुर अंबेडकर चौक पर सोमवार को एक घोड़ा गाड़ी यानी टमटम का दिखना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। कुछ पल के लिए मानो समय थम-सा गया और लोग इतिहास के उन पन्नों में वापस लौट गए, जब टमटम (घोड़ागाड़ी) ही सफर का सबसे सम्मानित और भरोसेमंद साधन हुआ करता था।
——
*रामायण और महाभारत काल से जुड़ी है घोड़ा गाड़ी की परंपरा*
——
इतिहासकारों के अनुसार घोड़ा और रथ का उपयोग रामायण और महाभारत काल से ही भारत में होता आ रहा है। उस दौर में रथ केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि शौर्य, प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक था। राजाओं, सेनापतियों और दूतों की यात्रा रथों के माध्यम से ही होती थी। कालांतर में यही रथ साधारण जनजीवन में ढलते-ढलते घोड़ा गाड़ी और टमटम के रूप में विकसित हुआ।
—–
*अंग्रेजी शासन में टमटम का रहा स्वर्णिम दौर*
——
ब्रिटिश शासनकाल में टमटम ने एक व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था का रूप ले लिया। रेलवे स्टेशन, कचहरी, थाना और बाजारों में टमटम की कतारें लगती थीं। उस समय वर्तमान झारखंड का साहिबगंज जिला, जो गंगा नदी के कारण रेल और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा, वहाँ टमटम का व्यापक प्रचलन था। साहिबगंज, राजमहल और आसपास के इलाकों में टमटम चालक न केवल सवारी ढोते थे, बल्कि खबरें, संदेश और सामान भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे।
—–
*झारखंड की ग्रामीण संस्कृति में टमटम*
——
झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण समाज में टमटम केवल यातायात का साधन नहीं था, बल्कि शादी-ब्याह, मेले-ठेले और सामाजिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा रहा है। दूल्हे की बारात, देवी-देवताओं की शोभायात्रा और साप्ताहिक हाट, हर जगह टमटम की अहम भूमिका होती थी। साहिबगंज, पाकुड़, दुमका और गोड्डा जैसे जिलों में टमटम चलाना एक सम्मानजनक आजीविका मानी जाती थी।
—–
*सुविधा, सादगी और पर्यावरण मित्र साधन*
——
टमटम की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह ईंधन-रहित, पर्यावरण मित्र और कम खर्चीला साधन था। खराब सड़कों और कीचड़ भरे रास्तों में भी यह आसानी से चल जाता था। न शोर, न प्रदूषण, बस केवल घोड़े की टापों की आवाजें।
——
*तकनीक के आगे हारती परंपरा*
——
समय बदला, सड़कें पक्की हुईं और तकनीक ने रफ्तार पकड़ी। मोटर वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा के आगमन के साथ ही टमटम धीरे-धीरे हाशिए पर चला गया। घोड़े के रख-रखाव की बढ़ती लागत, सरकारी नियमों की अस्पष्टता और आधुनिक साधनों की सुविधा ने इस परंपरा को लगभग विलुप्त ही कर दिया।
——
*आज का दृश्य एक चेतावनी*
——
महेशपुर अंबेडकर चौक पर टमटम का सोमवार को दिखना केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि एक संकेत और चेतावनी है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत चुपचाप हमसे दूर होती जा रही है।
—–
*विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की मांगें*
—–
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार को टमटम को सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा देना चाहिए। पर्यटन स्थलों और मेलों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। टमटम चालकों के लिए प्रशिक्षण व आर्थिक सहायता की योजना बनानी चाहिए। स्कूलों और संग्रहालयों में इसके इतिहास को स्थान देना चाहिए।
—–
*संरक्षण नहीं तो स्मृति में सिमट जाएगी परंपरा*
——
अगर समय रहते टमटम जैसी परंपराओं का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे केवल किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी। सोमवार को अंबेडकर चौक पर टमटम का दिखना यह याद दिलाता है कि विकास के दौड़ में परंपरा को पूरी तरह कुचल देना भी विकास नहीं है। जरूरत है संतुलन की, जहां तकनीक के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति भी जीवित रहे।
—-
*क्या कहते है जानकार*
—-
स्थानीय इतिहास के जानकार प्रो. अजय मंडल (सेवानिवृत्त शिक्षक, साहिबगंज) बताते हैं कि 1960–70 के दशक तक साहिबगंज, राजमहल और पाकुड़ क्षेत्र में टमटम आम परिवहन का साधन था। स्टेशन से बाजार और गांव तक जाने के लिए यही सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता था।
महेशपुर के 75 वर्षीय बुजुर्ग रामचंद्र साह कहते हैं कि उनके जमाने में शादी-ब्याह में दूल्हा टमटम पर ही बैठकर जाता था। मेले में जाना हो या हाट, टमटम ही सहारा था। उस समय यह इज्जत की सवारी मानी जाती थी। पर्यावरणविद दीपक हेम्ब्रम का मानना है कि आज जब दुनिया प्रदूषण से जूझ रही है, टमटम जैसा साधन पूरी तरह ईंधन-रहित और पर्यावरण मित्र है। अगर इसे पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ा जाए तो यह रोजगार का भी अच्छा माध्यम बन सकता है। महेशपुर के एक पूर्व टमटम चालक सलीम अंसारी बताते हैं कि पहले दिनभर में अच्छी कमाई हो जाती थी। लेकिन अब लोग जल्दी गंतव्य पर पहुंचना चाहते हैं। घोड़े का चारा महंगा है, रख रखाव मुश्किल है, इसलिए उन्होंने यह काम छोड़ दिया है। इसके अलावा पशु-चिकित्सा सुविधा की कमी, सरकारी प्रोत्साहन का अभाव और बढ़ती शहरीकरण की रफ्तार ने इस परंपरा को लगभग समाप्त कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता मीना हांसदा कहती हैं कि सरकार अगर मेलों, पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक आयोजनों में टमटम को बढ़ावा दे तो यह परंपरा बच सकती है। इसे सांस्कृतिक धरोहर घोषित कर प्रशिक्षण और सब्सिडी दी जानी चाहिए।

10 से 25 फरवरी तक चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान

आम जन रहें तैयार , स्वास्थ्य विभाग है पूर्ण तैयार

एक भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से न छूटे, अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान: सिविल सर्जन

पाकुड़ जिले में फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन को लेकर 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र कुमार मिश्रा ने पुराने सदर अस्पताल परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिविल सर्जन डॉ. मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत लक्षित आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी लाभार्थी दवा सेवन से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने जेएसएलपीएस की सखी दीदी, सीएलएफ पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि घर-घर संपर्क कर लोगों को जागरूक करना, भ्रांतियों को दूर करना और दवा सेवन सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। उन्होंने सभी से अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे जन आंदोलन का रूप देने की अपील की।
सिविल सर्जन ने यह भी निर्देश दिया कि दवा खाली पेट न खिलाई जाए तथा दवा सेवन के दौरान सभी आवश्यक स्वास्थ्य मानकों का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर और सामूहिक दवा सेवन से इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान बूथ स्तर पर विशेष दवा सेवन दिवस का आयोजन किया जाएगा और क्षेत्रवार निगरानी भी की जाएगी। बेहतर कार्य करने वाले समूहों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

पत्थर के धूल बने आफ़त , बीमारियों की आशंका से लोग हलकान

*दिनरात अवैध पत्थर खनन और धूल उगलती क्रशरों की भारी कीमत चुका रहे हैं स्थानीय निवासी*

– पातालफोड़ खुदाई से स्थानीय लोगों में है दहशत

पाकुड़ (महेशपुर) : महेशपुर प्रखंड के शहरग्राम के अमलागाछी व नारायणटोला गांव के लोग दिनरात पत्थर खनन और धूल उगलती क्रशरों की भारी कीमत चुका रहे हैं। पत्थर उद्योग ने क्षेत्र के पर्यावरण और जन स्वास्थ्य पर ऐसी चोट की है, जिसकी भरपाई आसान नहीं है। इन खदानों से अवैध खनन लगातार जारी है, स्थानीय भाषा में इतनी गहरी खुदाई को पातालफोड़ खुदाई कहते हैं। इस तरह की खुदाई खान अधिनियम 1952 का खुला उल्लंघन है। अधिनियम कहता है कि खनन उच्चतम बिंदु से निम्नतम बिंदु के छह मीटर की गहराई तक ही हो सकता है। अधिनियम में खदान में 18 वर्ष से कम उम्र के मजदूर से काम कराना प्रतिबंधित है। साथ ही मजदूरों को काम के निश्चित घंटे, चेहरे को ढंकने के लिए मास्क, चिकित्सा सुविधा, समान मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने को कहा गया है। लेकिन पत्थर खदानों में इन प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है।
——
*सड़क किनारे स्थित क्रशरों के धूलकण से लोग लगातार हो रहे हैं प्रभावित*
——-
पत्थर व्यवसायियों पर खनन विभाग मेहरबान है। क्षेत्र में अवैध खनन का धंधा भी फल-फूल रहा है। सड़क किनारे स्थित क्रशरों के धूलकण से लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। क्रशर के मालिकों एवं कर्मियों के द्वारा नियम को ताक पर रखकर क्रशर संचालित किया जा रहा है। धूलकण के कारण मुख्य सड़क पर दिन में ही चारों ओर अंधेरा छा जाता है, जिस कारण राहगीर एवं स्थानीय लोग परेशान रहते हैं। धूलकण के कारण आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती है।
——
*इस गोरख धंधा पर अंकुश लगाने में विभाग पूरी तरह से विफल*
——-
खनन विभाग की मिली भगत के चलते पत्थर खदान संचालकों की मनमानी अपने चरम पर है। सूत्रों की मानें तो खदान की आड़ में पत्थर के अवैध कारोबार बिना माइनिंग चालान एवं एक ही चलान पर कई बार ढुलाई कर हो रहा है। इस कारण सरकार को प्रतिमाह करोड़ों का चूना लग रहा है। लेकिन इस गोरख धंधे से जुड़े लोग रातों रात लखपति बन रहे हैं। विभाग इस गोरख धंधा पर अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल रही है।
——
*विभाग के संरक्षण में चल रहा है अवैध कारोबार – सूत्र*
——–
सूत्रों की माने तो अवैध कारोबार में विभाग को एक मोटी रकम पहुंचाई जाती है, जिस कारण नियमों को ताक पर रखकर क्रशर संचालन किए जा रहे हैं।

प्रखंड परिसर में ही हो रहा अंधेर , हर ओर क्यूँ है चुप्पी

*चिराग तले अंधेरा कहावत को चरितार्थ करता प्रखंड कार्यालय परिसर में घटिया ईंटों से बाउंड्री वॉल निर्माण*

– गुणवत्ता व पारदर्शिता पर उठे सवाल

पाकुड़ (हिरणपुर) : हिरणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में चल रहे बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य में प्रयुक्त ईंटों की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाउंड्री वॉल के निर्माण में तीन नंबर (घटिया) ईंटों का उपयोग किया जा रहा है, जो मानक के अनुरूप नहीं है। निर्माण स्थल पर कार्य कर रहे मिस्त्री से जब ईंटों की गुणवत्ता के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने स्वयं स्वीकार किया कि कार्य में घटिया किस्म की ईंटें लगाई जा रही है। देखने मात्र से ही स्पष्ट प्रतीत होता है कि प्रयुक्त ईंटें कमजोर और निम्न गुणवत्ता की है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
——-
*चिराग तले अंधेरा*
——–
चिंताजनक बात यह है कि यह निर्माण कार्य हिरणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में ही हो रहा है। जब सरकारी कार्यालय के समीप इस प्रकार का घटिया कार्य किया जा रहा है, तो दूर-दराज के इलाकों में चल रहे सरकारी योजनाओं की स्थिति क्या होगी, यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
——-
*योजनास्थल से सूचना पट्ट भी नदारद*
——–
नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी योजना के अंतर्गत कार्य प्रारंभ करने से पूर्व योजना संबंधी सूचना पट्ट लगाया जाना अनिवार्य होता है, जिसमें योजना का नाम, प्राक्कलित राशि, कार्य अवधि एवं संवेदक का नाम अंकित रहता है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उक्त निर्माण स्थल पर कोई सूचना पट्ट भी नहीं लगाया गया है, जिससे कार्य की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहा है। घटिया ईंटों से निर्मित बाउंड्री वॉल की टिकाऊ क्षमता संदिग्ध मानी जा रही है। यदि समय रहते इसकी जांच नहीं हुई, तो भविष्य में समय से पहले ही दीवार के क्षतिग्रस्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ सुरक्षा का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। स्थानीय लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है तथा दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। यह मामला न केवल निर्माण गुणवत्ता से जुड़ा है, बल्कि सरकारी योजनाओं में व्याप्त संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।

महेशपुर के दमदमा में सरकारी स्वास्थ्य भवन बना निजी आवास

*सरकारी अस्पताल बना निजी आवास! दमदमा में 3 साल से उप स्वास्थ्य केंद्र पर एक परिवार का कब्जा*

– मुखिया के आदेश पर खड़े हुए बड़े सवाल

– उक्त गांव या आसपास नहीं है कोई भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र

पाकुड़ (महेशपुर) : महेशपुर प्रखंड के दमदमा गांव में सरकारी व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गांव का एकमात्र उप स्वास्थ्य केंद्र, जहां ग्रामीणों को प्राथमिक इलाज मिलना चाहिए था, वह पिछले करीब तीन वर्षों से एक परिवार का निजी आवास बना हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि पंचायत के मुखिया द्वारा दिए गए बिना किसी तारीख के एक लिखित कागज के आधार पर यह व्यवस्था की गई है। अब इस पूरे मामले ने पंचायत अधिकार, सरकारी नियम और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कैसे शुरू हुई कहानी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दमदमा गांव निवासी रीना बीवी के पति का निधन हो जाने के बाद वह रहने के लिए जगह की तलाश में थी। इसी दौरान वह गांव में बने उप स्वास्थ्य केंद्र में रहने लगी। बताया जा रहा है कि यह उप स्वास्थ्य केंद्र करीब 16 वर्ष पूर्व बना था, लेकिन तब से बंद पड़ा है। रीना बीवी ने बाद में दूसरी शादी कर ली। वर्तमान में वह अपने मौजूदा पति आजीबुल शेख के साथ उसी उप स्वास्थ्य केंद्र भवन में रह रही है। भवन के अंदर खाना बनाने से लेकर सोने तक की पूरी व्यवस्था कर ली गई है और घरेलू सामान भी रखा गया है।

मुखिया के बिना तारीख के आदेश पर मिला आश्रय

रीना बीवी का कहना है कि रहने के बाद वह पंचायत के मुखिया अनिल कोड़ा के पास गई थी, जहां से उन्हें एक लिखित कागज दिया गया। उक्त आवेदन की प्रति उपलब्ध है, जिसमें यह उल्लेख है कि रीना बीवी के परिवार द्वारा पूर्व में उक्त जमीन दान में दी गई थी। हालांकि, मुखिया द्वारा दिए गए कागज में यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार कब से वहां रह रहा है, कितने समय तक रहने की अनुमति है, या घर निर्माण की स्थिति क्या है। आवेदन में किसी प्रकार की तारीख का उल्लेख भी नहीं है, जिससे पूरे प्रकरण की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे है।

जल्द खाली कराया जाएगा अस्पताल भवन – मुखिया

इस संबंध में जब मुखिया अनिल कोड़ा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें जल्द ही भवन खाली करने का आदेश दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब मामला तीन साल पुराना बताया जा रहा है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

इस बाबत कोई जानकारी ही नहीं है – चिकित्सा पदाधिकारी

इस संदर्भ में महेशपुर चिकित्सा पदाधिकारी सुनील कुमार किस्कू से बात किया गया, तो उन्होंने कहा कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। यहाँ पर यह सोचनीय है कि जो डॉ महेशपुर में वर्षों से पदस्थापित हैं, उन्हें इस मामले की जानकारी ही नहीं है, जो काफी चिंताजनक है।

घर तैयार या गुमराह करने की कोशिश

रीना बीवी का दावा है कि अब उनका घर बनकर तैयार हो गया है और वे जल्द ही उप स्वास्थ्य केंद्र खाली कर देंगी। हालांकि यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं दूसरे के घर को अपना बताकर प्रशासन और ग्रामीणों को गुमराह तो नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में आधिकारिक सत्यापन अब तक नहीं हुआ है।
——
*बड़ा सवाल : क्या मुखिया को है यह अधिकार*
——
बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी पंचायत प्रतिनिधि को सरकारी स्वास्थ्य भवन में किसी को रहने देने की अनुमति देने का अधिकार है । यदि भवन बंद भी पड़ा था, तब भी वह सरकारी संपत्ति है। ऐसे में बिना सक्षम प्रशासनिक आदेश के किसी परिवार को वहां रहने देना नियमों के विरुद्ध माना जा सकता है।

जांच की उठी मांग

ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि यदि उप स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से बंद है तो उसे चालू कराने की पहल होनी चाहिए थी, न कि उसे निजी आवास में बदल दिया जाए। मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कारवाई की मांग उठने लगी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है। क्या सरकारी भवन खाली कराया जाएगा या फिर यह मामला कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा।

गांव में नहीं है कोई स्वास्थ्य सुविधा

बताते चलें कि दमदमा गांव और आसपास के टोले में वर्तमान में कोई भी संचालित स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। छोटी मोटी बीमारी, गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण या आपात स्थिति में ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव या प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ता खराब होने से मरीजों को भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उप स्वास्थ्य केंद्र चालू होता तो गांव को बड़ी राहत मिलती। ऐसे में जिस भवन को स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बनना था, उसे निजी आवास में तब्दील हो जाना काफी खेदजनक है।

क्या कहते हैं सरकारी नियम

सरकारी भवन (विशेषकर स्वास्थ्य विभाग की संपत्ति) का उपयोग केवल निर्धारित सरकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है। बिना सक्षम प्राधिकारी (जैसे सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग या अंचल प्रशासन) की अनुमति के किसी भी व्यक्ति को आवासीय उपयोग की अनुमति देना नियमों के विरुद्ध है। पंचायत प्रतिनिधि को सरकारी स्वास्थ्य भवन को निजी आवास के रूप में आवंटित करने का अधिकार नहीं होता है। सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा या उपयोग प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। यदि जमीन दान में दी गई थी, तब भी भवन निर्माण के बाद वह स्वास्थ्य विभाग की संपत्ति है।

अपनी माँगों के समर्थन में रेलकर्मियों ने किया धरना प्रदर्शन

आज दिनांक 8 फरवरी 2026 को ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा द्वारा कामरेड अखिलेश चौबे की अध्यक्षता में स्टेशन प्रबंधक कार्यालय पाकुड़ के समक्ष शाम 4:00 बजे से लेकर 5:00 तक एक धरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस धरणा के माध्यम से मंडल प्रबंधक, हावड़ा को ज्ञापन भी सौपा गया,जिसमें कोल साइडिंग में काम करने वाले कर्मचारी के लिए कंपनी द्वारा सुविधा बहाल कराना शामिल है। इस अवसर पर कई मांगों को लेकर एक विक्षोभ प्रदर्शन किया गया जिसमें आठवी वेतन आयोग को जल्द से जल्द लागू करना ,नए श्रमिक कानून को रद्द करना तथा प्रत्येक विभाग में रिक्त पदों की को जल्द से जल्द भरना,LDCE के लिए अलग से 10% डायरेक्ट भर्ती कोटा निश्चित करना , सभी सेफ्टी कैटेगरी के कर्मचारियों को रिस्क एवं हार्ड ड्यूटी भत्ता देने , सभी विभाग के ग्रेड 1 एवं ग्रेट 2 टेक्नीशियन के पदों का विलय करना ,सभी पॉइंट्स मैन के लिए चार स्तरीय पे संरचना स्वीकृत करना, रनिंग स्टाफ के लिए 25% किलोमीटर भत्ता को बढ़ाना, सभी कर्मचारियों के माता-पिता को भी प्रिविलेज पास एवं चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना ,नए कार्य एवं नई लाइनों के लिए अतिरिक्त पदों का सृजन करना इत्यादि कई मांगों को लेकर संगठन ने यह धरणा किया। साथ ही साथ एकीकृत पेंशन योजना में पुरानी पेंशन योजनाओं की सभी सुविधाओं को शामिल करने संबंधी मांग भी उठाई गई।शाखा सचिव संजय कुमार ओझा ने बताया कि ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन,ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के आह्वान पर आगामी एक महीने तक क्रमबद्ध आंदोलन, धरना एवं प्रदर्शन करेगी ताकि अपनी मांगों के समर्थन में यह आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचे एवं केंद्र सरकार रेलवे में कार्य करने वाले समर्पित कर्मचारियों के आवश्यक मांगों को संज्ञान में ले और यथाशीघ्र इसे पूरा करने का प्रयास करें। इस अवसर पर आप सभी रेलवे कर्मचारियों से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में इस धरना कार्यक्रम में शामिल होकर अपने हक की आवाज को बुलंद करने का कार्य करेंगे । इस अवसर पर ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन, पाकुड़ शाखा के निलेश प्रकाश, बिहारी कुमार ,कुंदन कुमार, अमर कुमार मल्होत्रा, गौतम कुमार यादव, प्रीतम कुमार मंडल, विक्टर विजय जेम्स,निरंजन कुमार, रामकुमार यादव, संजीत कुमार, कुमार विकास ,कलीम अंसारी, पिंटू पटेल ,दयाशंकर प्रसाद, ,गौतम कुमार पांडे, अजय माल, नीरज कुमार ,अमित कुमार ,बमबम ठाकुर,श्यामल कुमार माल, सहित सैकड़ो रेल कर्मचारी शामिल थे ।

ST. DON BOSCO SCHOOL, PAKUR में वार्षिक समारोह का भव्य आयोजन

आज दिनांक 08 फरवरी 2026 (रविवार) को ST. DON BOSCO SCHOOL, PAKUR में वार्षिक समारोह का अत्यंत भव्य, गरिमामयी एवं सफल आयोजन किया गया। यह समारोह विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट मंच सिद्ध हुआ।
इस विशेष अवसर पर जिले के सम्माननीय उपायुक्त श्री मनीष कुमार, DSO श्री राहुल कुमार, DPS के प्रधानाचार्य एवं K.K.M. कॉलेज, पाकुड़ के प्रधानाचार्य श्री युगल किशोर झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने अपने प्रेरणादायक संबोधन के माध्यम से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें अनुशासन, परिश्रम, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व समझाया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री शिव शंकर दुबे एवं उप-प्रधानाचार्य श्री अजय कुमार त्रिवेदी ने भी अपने ओजस्वी संबोधन में विद्यार्थियों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने हेतु भरपूर प्रोत्साहन दिया। उनके कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विद्यालय निरंतर शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य, गीत, नाटक एवं अन्य रंगारंग कार्यक्रमों ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों को तैयार कराने में विद्यालय के नृत्य शिक्षक श्री राजा एवं नसरिन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अत्यंत आकर्षक एवं अनुशासित प्रस्तुतियाँ दीं।
इसके साथ ही कराटे प्रशिक्षक शमोजम्मिल अंसारी की अहम भूमिका से कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा और अनुशासन की दिशा मिली। उनके प्रशिक्षण में प्रस्तुत कराटे प्रदर्शनों ने दर्शकों को रोमांचित किया और विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम की सफल एंकरिंग में श्री रणबीर कुमार लाल एवं श्री सुमित पंडित की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से एंकर श्री रणबीर कुमार लाल ने अपनी मधुर एवं सुरीली आवाज़ में गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस सफल आयोजन के पीछे विद्यालय के समस्त शिक्षकों का अथक परिश्रम, समर्पण एवं टीमवर्क सराहनीय रहा। साथ ही विद्यालय के कार्यालय स्टाफ पिंकी, राकेश एवं आरती ने पूरे कार्यक्रम से संबंधित समस्त आधिकारिक कार्यों को अत्यंत कुशलता एवं जिम्मेदारी के साथ संभाला।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पिंकी, संध्या, बिनय, हिमांशु, रवि, शिवा, प्रीतिलता, रणबीर, आरती, सुजीत, बबीता, सोमा, प्रकाश, पूर्वाशा, सुमित, पिया, सोमनाथ, राकेश, पंकज, रुमा, कौशल , अफरीन सहित सभी शिक्षकगण एवं स्टाफ सदस्यों का योगदान अत्यंत प्रशंसनीय रहा।
समापन अवसर पर विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों के आयोजन की निरंतरता बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

डीसी ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, बोले– निष्पक्ष चुनाव में कोई समझौता नहीं

चुनाव चिन्ह आवंटित, 99 प्रत्याशी मैदान में

चुनाव से पहले बंगाल से आ रही कार से 3.50 लाख नकद जब्त

पाकुड़: पाकुड़ नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 को लेकर जिले में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए। इसे लेकर समाहरणालय सभागार में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। उपायुक्त ने बताया कि अंतिम सूची प्रकाशन के बाद अध्यक्ष पद के लिए 10 और वार्ड सदस्य पद के लिए 89 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं। सभी प्रत्याशियों को राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चुनाव चिन्ह प्रदान कर दिया गया है।उन्होंने बताया कि प्रत्याशियों को मतदान केंद्रों की सूची, पहचान पत्र, अंतिम प्रत्याशी सूची, व्यय लेखा संधारण के लिए रेड चार्ट, आदर्श आचार संहिता की मार्गदर्शिका तथा निर्वाचन अभिकर्ता नियुक्ति से संबंधित आवश्यक प्रपत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही व्यय लेखा जांच की निर्धारित तिथियों की जानकारी भी दी गई है।

कड़ी निगरानी व्यवस्था

स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है। जिले में 12 सेक्टर मजिस्ट्रेट, चार फ्लाइंग स्क्वॉड टीम, चार स्टेटिक सर्विलांस टीम, दो बीएसटी, दो वीवीटी तथा पांच लेखा टीम लगातार निगरानी में जुटी हुई हैं। चुनाव संबंधी गतिविधियों की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। जांच अभियान के दौरान एसएसटी टीम द्वारा 3 लाख 50 हजार रुपये नकद जब्त किए गए हैं। मामले में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए आयकर विभाग को सूचना दे दी गई है।

प्रशिक्षण पूरा, स्ट्रांग रूम का निर्माण

उपायुक्त ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों का चिन्हांकन कर लिया गया है और मतदान कर्मियों का प्रथम चरण का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। मतगणना के लिए बाजार समिति परिसर में स्ट्रांग रूम का निर्माण कार्य चल रहा है। इस बार सभी मतदान केंद्रों को तंबाकू निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। जिला प्रशासन ने प्रत्याशियों, राजनीतिक दलों एवं मतदाताओं से शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक माहौल में चुनाव संपन्न कराने में सहयोग की अपील की है।

गाँव गाँव पहुँच रहा विधिक जागरूकता , लोगों में जागरूकता के प्रति उत्साह।

हिरणपुर प्रखंड के जबरदाहा पंचायत भवन में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर प्रभारी सचिव संजीत कुमार चंद्र के मार्गदर्शन में आज हिरणपुर प्रखंड के जबरदाहा पंचायत भवन में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। पारा लीगल वॉलिंटियर्स आनंद मुर्मू ने नालसा के डॉन योजना आशा, जागृति योजना पर प्रकाश डालते हुए जागरूक की। जिसमें बाल विवाह रोकथाम, नशा से बचने,समेत जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ से मिलने वाले निःशुल्क कानूनी सहायता पर जागरूक की गई। मौके पर पंचायत के प्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहें।

मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत मामलों का हुआ सफल मध्यस्थता

नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर चले रहे मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” के तहत् आज एक मामलों का सफल सुलह समझौता कराया गया। मामला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे मूल भरण पोषण वाद संख्या 292/2025 फूलटूसी खातून बनाम जामिल शेख जिनका एक छः वर्षीय छोटी बच्ची है। वर्षों से अलग रह रहे दंपतियों को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने मिलकर रहने का संकल्प लिया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 का भूमिका एवं संबंधित दोनों पक्षों के अधिवक्ता का योगदान रहा। जिससे घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दिया। मौके पर दंपतियों के परिजन, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मी उपस्थित रहें।