Thursday, November 5, 2026
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सावधान मित्रों : आई टी एक्ट को पढ़ें और बिना डरे ब्लैकमेल करने वालों का करें कानूनन सामना। समान्य जनता और पत्रकारों से है विशेष अनुरोध🙏

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ज्यों ज्यों हमने प्रगति की, त्यो हमारी वैचारिक मोरल नीचे गिरती गई।
मोबाईल ने सुविधाएं तो दी , लेकिन हमें गिराया भी गर्त में।
मोबाइल गेम में फँस कितने भविष्य के होनहारों को खोया।
गुड़गांव की तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या क्या हम भूल सकते हैं।

बहुत पहले जब मोबाइल फोन पर 5 नम्बर से शरू होते हुए फोन आता था। फोन अनजान लड़कियों का आता था। वो फोन अगर आप उठा लिये तो आईएसडी चार्ज लगता था। लड़कियाँ मोहक बातें करतीं थी। तुरन्त फोन का एकाउंट खत्म हो जाता था। लोग मोहक बातों के चक्कर में तुरंत रिचार्ज करा कर लोग बात करते और फिर तुरंत पैसा खत्म।
उस समय मैं एक लीडिंग अखबार में था। मैंने न्यूज लिखते हुए अचानक फोन उठा लिया। लड़की की आवाज़ सुन मैनें अपना काम करते हुए ही कहा बोलिये बहन जी क्या सेवा कर सकता हूँ। कई सवालों के बाद भी मैं उन्हें बहन कहता रहा , तो उन्होंने फोन काट दिया और अपने पर्सनल नम्बर से फोन किया। उन्होनें कहा जो हम जैसे लोगों और अनजान लड़की को बहन कहे उसे ठगना और उनका पैसा बर्बाद करवाना उचित नहीं।
फिर मैनें पूरा मामला जानने के लिए पूरा माजरा पूछा तो जो मुझे बताया गया वह आश्चर्यजनक था।
उस समय गरीब परिवारों की महिलाओं को फोन माफ़िया जी अपना पूरा सेटअप शुविधा शुल्क के एवज में टेलीफोन एक्सचेंज चलाते थे और आईएसडी कॉल का पैसा काटकर चाँदी काटते थे। उसी में से घर चलाने एवं अन्य खर्चों के लिए उन लड़कियों को पेमेंट देते थे।
पूरा मामला उस समय मैनें देश के लीडिंग अखबार में प्रकाशित करवाया था।
समय बदलता गया , मोबाइल सुविधाओं में भी कई बदलाव आए और नेट का जमाना आया। इस तरह के अनैतिक कार्यों का तरीका भी बदलता गया। अब भी माफियाओं ने आम जनता को ठगना बन्द नही किया है।
डिजिटल गिरफ्तारी आदि के साथ अचानक वीडियो कोल पर नग्नता परोस कर लोगों को फँसा दिया जाता है और पैसे ऐंठे जाते हैं।

जाति से पत्रकार हूँ। स्वाभाविक रूप से समाजसेवा का रोगी रहा हूँ। इसका बहुत ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा है।
किसी अननोन नम्बर को भी उठाने की आदत रही है। सब जगह से पीड़ित व्यक्ति का अंतिम आशा पत्रकारों से ही बचा रहता है। हमलोग भी स्वयं को तीसमार खां समझते हैं। इसी तरह कुछ दिनों पहले हमारे शहर में एक दुर्घटना हुई थी, थोड़ा आंदोलन भी हुआ था। कुछ पत्रकार और लोग मेरे घर के गेरेज में खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। मैनें चर्चा में दुर्घटना पर दुख व्यक्त करते हुए विरोध के तरीकों की निंदा की। पत्रकार सभी हमसे सहमत थे, लेकिन कुछ सामान्य लोग असन्तुष्ट दिखे। मुझे दीर्घशंका लगी थी वहीं बाथरूम में मैं चला गया, और अंदर से ही उनलोगों की बात का जवाब देने लगा ।

खैर इसी बीच एक व्हाट्सएप पर फोन आया , स्वाभाविक रूप से किसी पीड़ित का समझ कर उठा लिया। वीडियो कॉल था फँस गया। एक लड़की थी और वीडियो आपत्तिजनक थी , मैनें गुस्से में अशोभनीय व्यवहार कर दिया , हँलांकि अपनी मूर्खता पर मैं बहुत हँसा। बाद में मुझे ब्लैकमेल करने और फिर बाद में डिजिटली काफी परेशान किया गया। मुझे स्वयं को पुलिस वाला बता कर एक व्यक्ति ने फोन किया और मुझे डिजिटली करवाई की धमकियाँ देने लगे। पहले तो मैं डरा फिर मैंनें स्वयं को संभाला और कहा कि अगर मैनें गलती की है, तो आप जीरो FIR दर्ज कर हमारे स्थानीय पुलिस को भेज दीजिये, वो करवाई करेंगे। क्योंकि अगर मैनें अपराध किया है, तो प्लेस ऑफ ऑकरेन्स तो हमारे यहाँ है और पुलिस यहाँ भी है। मेरी पाकुड़ पुलिस बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है।
चूँकि ये अपराध मैनें नहीं फोन पर उसने किया था।
खैर जो हो। उसके बाद भी कई फोन आये , मैनें उठाया ही नहीं । मुझे दबाब में काफ़ी मानसिक प्रताड़ित किया गया।
अब तो और भी कई एप आ गये हैं जिसपर स्वयं को बहुत समृद्ध बताते हुए , मित्र , नोकर सहयोगी आदि का आमंत्रण दिया जाता है। और बहुत सारे आम जनता इसमें फँस कर बर्बाद हो रहे हैं , और कई लोग आत्महत्या तक कर जाते हैं।
चूँकि बहुत मेरे कनिष्ठ मित्र लोग पत्रकार हैं इसलिए बचकर रहें , और अननोन नम्बर सीधे न उठाएं।
आजकल तो ………
इन सबके बावजूद आई टी एक्ट 2000 सरकार ने ऐसे ही दुरूपयोगों को ध्यान में रख कर कानून बनाया इस एक्ट की धारा 72 को विस्तार से पढ़ने और जानने से ऐसे ब्लैकमेल करने वाले से निपटा जा सकता है। इसलिए किसी धमकियों से बिना डरे ऐसे मामलों का कानूनन सामना करें। संवेधानिक रास्ता अपनाएं।
क्या है मोटे तौर पर इस धारा में—

साभार
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 की धारा 72, गोपनीयता और निजता के उल्लंघन से संबंधित है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति, जो किसी आधिकारिक शक्ति के तहत गोपनीय जानकारी या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तक पहुँच प्राप्त करता है, बिना सहमति के उसे प्रकट नहीं कर सकता है, अन्यथा उसे 2 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह धारा उन लोगों पर लागू होती है जो अपनी पहुँच का दुरुपयोग करते हैं, जैसे कि HR विभाग द्वारा कर्मचारी का वेतन या स्वास्थ्य डेटा लीक करना, या किसी की कॉल रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति के सार्वजनिक करना।
धारा 72 क्या कहती है?
यदि कोई व्यक्ति, किसी अन्य कानून या आईटी अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए, किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज या अन्य निजी जानकारी तक पहुँचता है।
और फिर उस जानकारी को किसी अन्य व्यक्ति को प्रकट (reveal) करता है।
तो उसे इस धारा के तहत दंडित किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
गोपनीयता का उल्लंघन: यह धारा किसी व्यक्ति की निजी और गोपनीय जानकारी (जैसे ईमेल, डेटा, रिकॉर्ड) के अनधिकृत प्रकटीकरण को रोकती है।
कॉल रिकॉर्डिंग: बिना अनुमति के किसी की कॉल रिकॉर्ड करना और उसे सार्वजनिक करना इस धारा का उल्लंघन माना जाता है, क्योंकि यह निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हनन है।
दंड: दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो साल का कारावास और/या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
उदाहरण:
किसी कंपनी के एचआर कर्मचारी द्वारा गोपनीय वेतन सूची लीक करना।
किसी व्यक्ति द्वारा किसी और की निजी बातचीत को रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर डालना।

समाधान का कारवां बढ़ चला है ,मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत् आज दो मामलों का हुआ सफल मध्यस्थता

नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश में चले रहे मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0” के तहत् आज दो मामलों का सफल सुलह समझौता कराया गया। मामला पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में चल रहे मूल भरण पोषण वाद संख्या 201/2025 बाहा टुडू बनाम बाबूलाल हेंब्रम जिनका एक पुत्री भी है। एवं दूसरा मामला मूल भरण पोषण वाद संख्या 313/2025 सलमा खातून बनाम समीम कुरैशी जिनका चार पुत्री भी है। वर्षों से अलग रह रहे दोनों दंपतियों को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से दोनों मामलों में पति पत्नी के बीच चल रहे आपसी मतभेद को समाप्त किया गया। दोनों मामलों में पति पत्नी ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक साथ रहने के लिए राजी हुए। दोनो पक्ष एक दूसरे के भावनाओं का ख्याल करते हुए संसारीक जीवन व्यतीत करने भविष्य में किसी प्रकार का वाद-विवाद उत्पन्न नहीं करने मिलकर रहने का संकल्प लिया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से टूटता परिवार एक हो गए। इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 का भूमिका एवं संबंधित दोनों पक्षों के अधिवक्ता का योगदान रहा। जिससे घर में खुशी लौट पाया। इस दौरान दंपति को एक साथ खुशी खुशी रहने मतभेद से बचने परिवार के साथ मिलजुल कर रहने का संदेश प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दिया। मौके पर दोनों दंपतियों के परिजन, अधिवक्ता न्यायालय कर्मी उपस्थित रहें।

पाकुड़ में मतपेटी कोषांग में समीक्षा बैठक हुई

नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 को लेकर मतपेटिका कोषांग की समीक्षा बैठक आयोजित #public #administration #all #everyone #UpdateNews #ElectionCommission #election2026

*जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 की तैयारियों को लेकर मतपेटिका कोषांग के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।*

बैठक के दौरान मतपेटिकाओं की उपलब्धता, सुरक्षित भंडारण, वितरण व्यवस्था, सीलिंग प्रक्रिया तथा मतदान के पश्चात मतपेटिकाओं के सुरक्षित संधारण से संबंधित बिंदुओं की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई।

*जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त श्री मनीष कुमार* ने निर्देश दिया कि मतपेटिकाओं से संबंधित सभी कार्य निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुरूप एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि मतपेटिकाओं की सुरक्षा एवं संधारण निर्वाचन प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि मतपेटिकाओं की जांच, सीलिंग एवं वितरण के दौरान निर्धारित मानकों का शत- प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा सभी आवश्यक अभिलेखों का संधारण व्यवस्थित एवं अद्यतन रखा जाए। उपायुक्त ने कहा कि निर्वाचन कार्य में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतपेटिका कोषांग सक्रिय एवं सजग रहकर कार्य करे तथा किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल वरीय पदाधिकारियों को अवगत कराए।

*बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए, मतपेटिका कोषांग से जुड़े पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।*
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*Teamprdpakur*

ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन ,पाकुड़ शाखा, ने हावड़ा मंडल के मंडल स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक में भाग लिया।

रेलवे हावड़ा मंडल के वर्ष 2026 के प्रथम पी एन एम बैठक में ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा की ओर से शाखा अध्यक्ष श्री अखिलेश कुमार चौबे एवं शाखा सचिव श्री संजय कुमार ओझा ने भाग लिया । ज्ञात हो कि यह त्रैमासिक बैठक हावड़ा मंडल में दिनांक 4 फरवरी से लेकर 5 फरवरी २०२६ तक हावड़ा मंडल कार्यालय में आयोजित किया गया ,जिसमें हावड़ा मंडल के सभी शाखा पाकुड़, अजीमगंज ,कटवा ,रामपुरहाट ,बर्दवान ,बैंडल एवं हावड़ा के अन्य शाखा के यूनियन के प्रतिनिधि गण एवं केंद्रीय प्रतिनिधि तथा मंडल प्रबंधक हावड़ा एवं संबंधित वरिष्ठ मंडल स्तरीय पदाधिकारी के साथ कर्मचारियों के कल्याण एवं रेलवे में व्यवस्थागत सुधार हेतु विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा द्वारा कर्मचारियों से संबंधित पूर्व में उठाए गए मांगों के ऊपर विस्तृत चर्चा की गई एवं विद्युत विभाग (सामान्य) के कर्मचारियों के लिए पोषाक भत्ता देने पर वरिष्ठ कार्मिक पदाधिकारी एवं वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई ।टीआर डी डिपार्टमेंट के टावर वैगन ड्राइवर के लिए 2400 ग्रेड पे में काम करने वाले कमी के लिए प्रथम श्रेणी के पास देने संबंधी विषय पर अंतिम निर्णय हुआ,जिसमें केवल क्षेत्रीय मुख्यालय कार्यालय कोलकाता से एक आदेश आना बाकी है। पाकुड़ शाखा के अंतर्गत काम करने वाले नलहटी ,चतरा एवं राजग्राम स्टेशन पर अवस्थित प्वांइट्समैन की ड्यूटी को 12 घंटा से घटकर 8 घंटा करने संबंधी निर्णय को अंतिम रूप दिया गया एवं इसकी स्वीकृति हेतु मुख्य कार्मिक पदाधिकारी कोलकाता को पत्र भेजा गया ।आशा है कि आने वाले एक महीने के अंदर इस पर नई ड्यूटी रोस्टर मिल जाएगी ।

*पुण्य तिथि पर याद किए गए डी ए वी के जनक महात्मा एन डी ग्रोवर*

पाकुड़, 6 फरवरी, 2026
स्थानीय विद्यालय डी ए वी पब्लिक स्कूल के प्रांगण में विद्यालय के प्रार्थना सभा में डी ए वी विद्यालय के जनक कहे जाने वाले महात्मा एन डी ग्रोवर की 18वीं पुण्य तिथि पर प्राचार्य एवं शिक्षकों द्वारा उनके तस्वीर पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया गया। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं उड़ीसा में सैकड़ों डी ए वी की आधारशिला रखने वाले महात्मा ग्रोवर साहब के शिक्षा के प्रति विचार एवं व्यवहार काफी अनुकरणीय है। अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ विश्वदीप चक्रबर्ती ने बताया कि महात्मा ग्रोवर जी का संपूर्ण जीवन प्रेरणादायक रहा है। वे एक सच्चे एवं महान कर्मयोगी थे। उनके अथक प्रयास एवं परिश्रम का परिणाम है कि पाकुड़ जैसे सुदूरवर्ती इलाके में 1998 में उन्होंने इस विद्यालय की स्थापना की। उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी शिक्षा एवं रोजगार पर बल दिया। यही वजह है कि सूबे के खूंटी सहित अन्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनके द्वारा सैकड़ों डी ए वी की स्थापना की गई। प्राचार्य डॉ चक्रवर्ती जी ने अफसोस जाहिर किया कि ग्रोवर जी के कार्यकाल में वे डी ए वी में क्यों नहीं थे, लेकिन उनकी विचारधारा को अपनाकर उन्होंने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी।
वहीं विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक संजीव कुमार मिश्रा ने ग्रोवर जी के साथ बिताए हुए पल को बच्चों एवं युवा शिक्षकों के साथ साझा करते हुए बताया कि ग्रोवर साहब डी ए वी सी एम सी के वाइस प्रेसिडेंट के साथ साथ पटना प्रक्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक भी थे। गरीब एवं बेसहारा बच्चों की शिक्षा एवं समाज को मुख्यधारा से जोड़ने में उनकी अहम भूमिका रही। उनके कार्यकाल में कार्य करने वाले अन्य शिक्षकगण अमित कुमार, साइबल बनर्जी, संजय कुमार यादव, रंजीत कुमार मंडल आदि ने भी उनके तस्वीर पर पुष्प अर्पित किया एवं बताया कि इस दिवस को हमलोग स्मृति दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लेते हैं।

देश के आसमान में चमका “चाँद” रिस्तेदारों के साथ इलाके का दिल और चेहरा हुआ रोशन

अफराहीम ने जेआरएफ की परीक्षा में पाई सफलता,देश में नंबर वन रैंक

देश की प्रतिष्ठित फेलोशिप में शामिल जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) की परीक्षा में मोहम्मद अफराहीम उर्फ चांद ने सफलता हासिल किया है। यूजीसी नेट या सीएसआईआर नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से दी जाने वाली इस प्रतिष्ठित फैलोशिप में कामयाबी हासिल कर अफ्राहिम का पीएचडी में अनुसंधान और असिस्टेंट प्रोफेसर के लक्ष्य की ओर बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।अफ्राहिम ने ना सिर्फ परीक्षा में सफलता पाई है बल्कि राजनीति विज्ञान विषय में पूरे देश में नंबर वन रैंक लाया है। अफराहीम ने 100 परसेंटाईल के साथ ऑल इंडिया रैंक वन प्राप्त किया हैं.अफराहीम ने न केवल यह सर्वोच्च रैंक हासिल किया हैं बल्कि राजनीति विज्ञान विषय में 274 अंक अर्जित कर देश के सर्वाधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों में स्थान बनाया हैं.इस सफलता से जहां अफ्राहिम काफी खुश है, वहीं परिवार में जश्न का माहौल है। पिता मो. आसीम ईमाम,मां आशमा परवीन, बड़ी बहन जेबा ईमाम अनवर, सबा ईमाम, मामा पत्रकार राणा मकसूद सहित परिवार के तमाम सदस्य और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है। इस संबंध में अफ्राहिम ने बताया कि पॉलिटिकल साइंस में कुल 88,529 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 63,468 छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। आज जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फैलोशिप) का परिणाम आया। यह परिणाम मेरे जीवन का सबसे अहम हिस्सा था। अब आगे का लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता खुल गया है। मैं अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए और ज्यादा मेहनत करूंगा। मुझे अपने खुदा और माता-पिता की दुआओं पर पूरा भरोसा है। मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन और मेरी मेहनत खाली नहीं जाएगी अफराहीम ने बताया की मेरा मुख्य उद्देश्य सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करना है.मुझे अपने मेहनत पर पूरा भरोसा हैं युपीएससी परीक्षा जरूर पास करूँगा.

प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से बुजुर्ग पिता को पुत्र ने लगाया गले मतभेद हुआ खत्म

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय स्थित प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय में मूल भरण पोषण वाद संख्या 297/2025 हज़ीकुल अब्दुल गनी मियां बनाम इसराइल अंसारी जो दोनों रिश्ते में पिता पुत्र है। बुजुर्ग पिता हज़ीकुल अब्दुल गनी मियां का उनके पुत्र इसराइल अंसारी के साथ वर्षों से चल रहे मतभेद को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से समाप्त किया गया। पिता पुत्र ने आपसी मतभेद को भूलाकर एक दूसरे के साथ रहने को लेकर राजी हुए। पत्नी के मृत्यु के बाद बुजुर्ग पिता हज़ीकुल अब्दुल गनी मियां भरण पोषण चिकित्सा समेत कई प्रकार के मुसीबतों को झेल रहे थे। आज मामलों के सुलह समझौते होने से बुजुर्ग पिता को पुनः पुत्र का सहारा मिल पाया। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने दोनों पिता पुत्र को खुशी खुशी साथ रहने एवं विवाद से बचने का संदेश दिया। ये अभियान मेडिएशन फॉर द नेशन 2.0 नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के देखरेख में की जा रही है।

बल्लभपुर–फारसा मार्ग की जर्जर स्थिति पर एसडीपीआई का गंभीर संज्ञान।

बल्लभपुर और फारसा के बीच स्थित मुख्य सड़क की हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह सड़क टूट चुकी है, बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से रोज़ाना स्कूली बच्चे, मज़दूर, किसान और आम नागरिक आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की बदहाल स्थिति के कारण कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।

एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य जनाब मोहम्मद हंजेला शेख हाल ही में इस मार्ग से गुजर रहे थे। उन्होंने स्वयं सड़क की भयावह स्थिति को देखा और इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि यह सड़क केवल आवाजाही का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक जीवन की जीवनरेखा है। इसके बावजूद लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं होना अत्यंत चिंताजनक है।

जनाब मोहम्मद हंजेला शेख ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग की कि बल्लभपुर–फारसा सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए तथा स्थायी समाधान के तहत सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो एसडीपीआई जनहित में आंदोलन करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

एसडीपीआई आम जनता की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि मानती है और इस मुद्दे पर हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे न्याय, लगातार कयावद चल रही है।

साप्ताहिक डोर टू डोर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में पाकुड़ जिले के सभी प्रखंडों के अंतर्गत पाडेरकोला, लेटबाड़ी, बड़ाघघरी, जबरदाहा, समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों जादू टोना प्रथाओं के नाम पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया।साथ ही सड़क दुर्घटना के शिकार, प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के शिकार व्यक्तियों को मिलने वाले कानूनी लाभ समेत पॉश अधिनियम, बाल विवाह रोकथाम के कई बिंदु पर ग्रामीणों को जागरूक की गई। इस दौरान पैरा लीगल वॉलिंटियर्स भरत साहा, सुजाता घोष, रानी साहा, मोलिता कुमारी, जयंती टुडू, सीमा साहा, मिरु बेसरा, सौरव यादव, मैनुल शेख का अहम भूमिका रही।

सेवा ही मेरा धर्म; गरीबों की आंखों में रोशनी लौटाना ही मेरा संकल्प है : बजरंगी यादव

साहिबगंज में नि:शुल्क मोतियाबिंद शिविर, 350 मरीज ऑपरेशन के लिए चिन्हित

साहिबगंज/राजमहल: सेवा, संवेदना और संकल्प का संगम एक बार फिर बुधवार को भरतिया कॉलोनी स्थित अयोध्या धाम परिसर में देखने को मिला, जहां जिले के लोकप्रिय नेता व समाजसेवी बजरंगी प्रसाद यादव की पहल पर नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों ने पहुंचकर आंखों की जांच कराई। जांच के बाद मोतियाबिंद से पीड़ित करीब 350 लोगों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया, जिनका नि:शुल्क उपचार साहिबगंज स्थित दीप आई हॉस्पिटल में किया जाएगा।

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350 मरीज चिन्हित, दीप आई हॉस्पिटल में होगा नि:शुल्क ऑपरेशन

अयोध्या धाम परिसर में शिविर का शुभारंभ भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री सह पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी समाजसेवी बजरंगी प्रसाद यादव, शहर के गणमान्य चंदेश्वर सिन्हा उर्फ बोधि सिन्हा, दीप आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ कुलदीप कुमार एवं नेत्र सर्जन डॉ सुजाता विश्वास की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम प्रभारी राजेश यादव द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया, वहीं मुख्य अतिथि बजरंगी प्रसाद यादव को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। शिविर में आधुनिक मशीनों के माध्यम से लाभुकों का आई टेस्ट एवं अन्य आवश्यक जांच की गई। चिन्हित मरीजों के लिए आने-जाने, रहने एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।

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सेवा से मिलता है आत्मिक सुकून: बजरंगी प्रसाद यादव

आयोजक बजरंगी प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के सेवा कार्यों से उन्हें आत्मिक सुकून मिलता है। उन्होंने कहा कि आंखों की बीमारी के कारण उन्होंने स्वयं भी काफी पीड़ा सही है, इसलिए आंखों से जुड़ा दर्द वे गहराई से समझते हैं। यही वजह है कि वे चाहते हैं कि कोई भी जरूरतमंद आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित न रहे।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि जो भी मोतियाबिंद से पीड़ित और आर्थिक रूप से कमजोर मरीज हैं, वे आगे आकर इस शिविर का लाभ उठाएं। ऐसे सभी जरूरतमंद मरीजों का ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क कराया जाएगा। राजमहल और साहिबगंज में शिविर का आयोजन किया गया है। वहाँ प्रत्येक बुधवार को मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को चिह्नित कर, उनका निशुल्क ऑपरेशन दीप आई हॉस्पिटल में किया जाएगा।

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ढाई लाख से अधिक ऑपरेशन, दशकों की सेवा का अनुभव: डॉ कुलदीप कुमार

मौके पर दीप आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ कुलदीप कुमार ने कहा कि वे पिछले कई दशकों से लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नि:शुल्क एवं सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवा में लगे हुए हैं। अब तक वे करीब ढाई लाख से अधिक लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कर चुके हैं, जबकि दस लाख से अधिक लोगों की आंखों की जांच कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि गांव-गांव तक जाकर नि:शुल्क शिविरों के माध्यम से सेवा देने का सौभाग्य उन्हें मिला है और बजरंगी प्रसाद यादव द्वारा आयोजित इस शिविर में भी एक बार फिर जरूरतमंदों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

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पूर्व में चश्मा वितरण से बदली हजारों की जिंदगी:

बजरंगी प्रसाद यादव ने बताया कि पिछले वर्ष सितंबर माह में उनके माध्यम से करीब दो हजार से अधिक लोगों के बीच नि:शुल्क चश्मा का वितरण कराया गया था। चश्मा मिलने के बाद लोगों के चेहरे पर लौटी मुस्कान और नई रोशनी ने उन्हें इस तरह के सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मोतियाबिंद से पीड़ित लोग भी उसी तरह बेहतर दृष्टि के साथ सम्मानजनक जीवन जी सकें।
आयोजकों ने आम लोगों से अपील की कि इस जनसेवा से जुड़ी जानकारी को अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक पहुंचाएं, ताकि गरीब और असहाय लोगों की आंखों में फिर से रोशनी लौट सके।