Thursday, November 5, 2026
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उपायुक्त मेघा भारद्वाज से मिलीं जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल, सुरक्षा व्यवस्था और किसानों के हित में सौंपा ज्ञापन

पाकुड़: पाकुड़ में उपायुक्त मेघा भारद्वाज के आगमन पर जिला परिषद सदस्य पिंकी मंडल ने गुलदस्ता भेंट कर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र की जनसमस्याओं, सुरक्षा व्यवस्था और किसानों के हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
पिंकी मंडल ने गोपीनाथपुर क्षेत्र में अस्थाई पुलिस कैंप स्थापित करने की मांग उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस कैंप बनने से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना पर रोक लग सकेगी। ग्रामीण लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने गोपीनाथपुर स्थित बासलोई नदी में मिलने वाले लगभग 1200 मीटर लंबे प्राकृतिक नाले को पक्का कराने की मांग भी रखी। उन्होंने बताया कि नाला जाम रहने के कारण बरसात के दिनों में पानी खेतों में भर जाता है, जिससे हजारों एकड़ फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
पिंकी मंडल ने कहा कि यदि नाले का पक्कीकरण कराया जाता है तो जल निकासी व्यवस्था सुचारू होगी, किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी और क्षेत्र के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक निरीक्षण कर जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

उपायुक्त के आदेशों की भी कर्मचारी उड़ाते हैं धज्जियाँ , DMFT फंड का तो छोड़िये , अपना वर्दीभत्ता तक निगल जाते हैं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी। पाकुड़ में अंधेर है नई उपायुक्त महोदया। सुधारिये न पाकुड़ को । निवेदन है जनता की🙏

स्थानीय लोगों को ही DMFT सहित सभी Vacancy में प्राथमिकता मिलनी चाहिए क्योंकि पाकुड़ जिला झारखण्ड का अनुसूचित जिला है।
पाकुड़ जिला में DMFT मद से कितने कर्मी कार्यरत हैं। उनकी मासिक परिलब्धि (मानदेय) कितनी है। कर्मी कितने दिनों से कार्यरत हैं और इनका चयन का आधार क्या है। योजना चयन या निरीक्षण में इनकी भूमिका क्या है?
हाथकाठी हिरणपुर में बिना आवादी वाले जगह पर चार जलमीनार बन गये ,अब वहीं आसपास आदिवासियों की नन सेलेबल जमीन पर अवैध आवादी बसाई जा रही है। क्या इस पर सवाल नहीं उठाये जा सकते हैं।
इन सबका निरीक्षण और जाँच होगा भैया !
इन्हीं सब बातों पर बिना प्रभावित हुए ध्यान दिया जाय तो कारवाई के पर्याप्त प्रमाण मिल जाएंगे।
लेकिन क्या ऐसा हो पायेगा ?
यही ज्वलन्त सवाल है।
अगर इस सवाल का जवाब ढूँढने कोई निकले तो उसे कोई जवाब नहीं मिलेगा। इस DMFT फंड पर पूर्व उपायुक्त के समय मे न जाने कितने सवाल उठे ,लेकिन सवाल निरुत्तर और ऐसे में कारवाई विहीन रह गए।
पटना से आयातित कर्मी इसमें काम करेंगे लाख रुपये से ऊपर के वे वेतनभोगी होंगे , और स्थानीय युवा सड़क पर बेरोजगार भटकेंगे तो अषन्तोष तो स्वाभाविक रूप से उपजेगा। यहाँ हर विभाग में हर अनहोनी करनी चलता रहेगा , कोई कुछ कहे तो फिर वे प्रताड़ित किये जायेंगे।
उपयोगी , जानकर और सक्षम अधिकारी तथा कर्मचारियों को सेंटिंग पोष्ट पर उनकी उपयोगिता को बर्बाद करेंगे और बिहार में पाँच सितारा होटल के भगीदार कर्मचारी अच्छी जगह पर अनुपयोगी होकर मौज करेंगे।
ऐसे ही अनुपयोगी चमचों के चँगुल और कॉकस में घिर कर हमारे लोकप्रिय व्यवहारिक मिलनसार और सभी के लिए सुलभ पूर्व विधायक और मंत्री आज जेल में हैं। ऐसे ही लोगों से घिरे रहने की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री कोड़ा साहब का राजनैतिक केरियर बर्बाद हुआ , लेकिन किसी स्तर पर कोई सीख नहीं लेते , और अच्छे लोग अपनी नादानी की वजह से भुगतते हैं।
आश्चर्य और विडंबना यह है , कि उपायुक्त तक के लिखित आदेश की अवहेलना करने का दुस्साहस वाले बन बैठे हैं।

राजनेताओं के हाथों का खिलोना बनने वाले सरकारी लोगों को आज पश्चिम बंगाल में झाँकना चाहिए ,लेकिन…
.
पूर्व डीसी के द्वारा लिपिक, सहायक का स्थानांतरण आदेश जारी करने के बाद भी स्थानांतरित लिपिक, सहायक अधिकतर अपने पूर्व जगह पर जमे रहना ऐसे में क्या समझा जाए, कई तो एक ही जगह पांच से दस साल से जमे है। क्या इनपर करवाई नहीं बनती है , या नहीं।

उस चिट्ठी का क्या हुआ। चतुर्थवर्गीय कमर्चारियों को सालाना वर्दीभत्ता मिलता है, क्या उसपर अमल होता है। स्वयं जिला मुखिया के कार्यालय कक्ष में इस आदेश का उल्लंघन होता दिखा है। हजारों चित्रों और वीडियो में इसका प्रमाण दिख जाएगा।
सब आदेश की अवहेलना होती है।
आख़िर किस मजबूरी में ?
क्यूँ ऐसा अंधेर मचा हुआ है ?
कुछ करें साहबाना , बचायें सरकारी और प्रशासनिक सम्मान को , निवेदन है।
और यहाँ के हम बीचवाले कब तक ताली बजाते हुए वाह वाह करेंगे ? लोग हम पर भी सवाल उठाते हैं झांकिये अपने भी गिरहवाँ में।
पल दो पल के शायर आएँगे और जाएँगे , लेकिन हम तो चले ही गये हैं।
हे भगवान ! ये शहर आपका है और आप ही यहाँ रह जाएंगे। विरासत में क्या दे जाएँगे अपनी पीढ़ी को !
सोचिये जरा , अब भी समय है।😥

घोटालों की जमीन बन चुके पाकुड़ में एक और नये घोटाले की आ रही बू , DMFT फंड में मची लूट की हो जांच : सुरेश

*पाकुड़ में DMFT फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने उठाई जांच की मांग

* पाकुड़ के हर बुद्धिजीवी इस आरोप पर एकमत।

* कुछ हो पायेगा ? शायद नहीं।

झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों को आवंटित की गई योजनाओं में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रबल संभावना बनी हुई है।
कागज पर सिमटी योजनाएं, RTI से भी नहीं मिल रही जानकारी
सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष रूप से विशेष प्रमंडल कार्यालय (Special Division) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“DMFT फंड का दुरुपयोग कर कई योजनाओं को केवल कागज और कलम तक सीमित रखा गया है। धरातल पर काम दिखाए बिना ही राशि की निकासी कर ली गई है। जब इन योजनाओं के संबंध में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग द्वारा सूचना देने में आनाकानी की गई, जो दाल में कुछ काला होने का स्पष्ट संकेत है।”
वेबसाइट पर डेटा गायब, ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता का अभाव
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2020 के बाद से कोई ऑडिट रिपोर्ट या जनहित से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की गई है। वर्ष 2020 के बाद से कई अधिकारी अध्यक्ष पद पर आए और गए, लेकिन खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं करना संदेह पैदा करता है।
बोकारो की तर्ज पर पाकुड़ में भी बड़े घोटाले का अंदेशा
हाल ही में बोकारो जिले में DMFT फंड में सामने आए कथित घोटाले का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 631 करोड़ रुपये की निकासी और कुल 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं। पाकुड़ जिले में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट की आशंका है।
क्या है DMFT फंड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि DMFT (District Mineral Foundation Trust) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
• फंडिंग: खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10% से 30% हिस्सा इस फंड में जमा करती हैं।
• उद्देश्य: इस राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए होना चाहिए।
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर पिछले 5 वर्षों के DMFT फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता की कमाई के पैसे का हिसाब मिल सके।

घोटालों की जमीन बन चुके पाकुड़ में एक और नये घोटाले की आ रही बू , DMFT फंड में मची लूट की हो जांच : सुरेश

*पाकुड़ में DMFT फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश कुमार अग्रवाल ने उठाई जांच की मांग

* पाकुड़ के हर बुद्धिजीवी इस आरोप पर एकमत।

* कुछ हो पायेगा ? शायद नहीं।

झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने पाकुड़ जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश अग्रवाल का दावा है कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों को आवंटित की गई योजनाओं में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की प्रबल संभावना बनी हुई है।
कागज पर सिमटी योजनाएं, RTI से भी नहीं मिल रही जानकारी
सुरेश कुमार अग्रवाल ने विशेष रूप से विशेष प्रमंडल कार्यालय (Special Division) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
“DMFT फंड का दुरुपयोग कर कई योजनाओं को केवल कागज और कलम तक सीमित रखा गया है। धरातल पर काम दिखाए बिना ही राशि की निकासी कर ली गई है। जब इन योजनाओं के संबंध में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग द्वारा सूचना देने में आनाकानी की गई, जो दाल में कुछ काला होने का स्पष्ट संकेत है।”
वेबसाइट पर डेटा गायब, ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता का अभाव
अग्रवाल ने जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर प्रहार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2020 के बाद से कोई ऑडिट रिपोर्ट या जनहित से जुड़ी जानकारी अपलोड नहीं की गई है। वर्ष 2020 के बाद से कई अधिकारी अध्यक्ष पद पर आए और गए, लेकिन खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं करना संदेह पैदा करता है।
बोकारो की तर्ज पर पाकुड़ में भी बड़े घोटाले का अंदेशा
हाल ही में बोकारो जिले में DMFT फंड में सामने आए कथित घोटाले का हवाला देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वहां वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान लगभग 631 करोड़ रुपये की निकासी और कुल 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं। पाकुड़ जिले में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर बंदरबांट की आशंका है।
क्या है DMFT फंड और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि DMFT (District Mineral Foundation Trust) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
• फंडिंग: खनन कंपनियां अपनी रॉयल्टी का 10% से 30% हिस्सा इस फंड में जमा करती हैं।
• उद्देश्य: इस राशि का उपयोग पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे बुनियादी कार्यों के लिए होना चाहिए।
सुरेश कुमार अग्रवाल ने मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर पिछले 5 वर्षों के DMFT फंड के खर्चों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता की कमाई के पैसे का हिसाब मिल सके।

बंगाल चुनाव में सरकार पोषित केरम क्लब और चुनाव आयोग के बीच बिछी है विसात। उपद्रवियों का भय ख़त्म , संगीनों के छाँव में मुखर हुए मतदाता।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान ने ये तो स्पष्ट शंदेश दे दिया कि मतों का ध्रुवीकरण हुआ है। हमेशा की तरह मतदान का प्रतिशत काफी संतोषजनक रहा , बल्कि अपेक्षाकृत बढ़े प्रतिशतता ने बंगाल के मतदाताओं की जागरूकता का भी परिचय दिया।
लेकिन इनसब बातों के बाद , जो सबसे बड़ी बात यह रही कि इसबार वो मतदाता भी मतदान केंद्र पर पहुँच कर मतदान करने में सफल रहे, जिन्हें या तो घर पर ही रोक दिया जाता था , या फिर उन्हें मतदान केंद्र से इसलिए बेरंग लौटना पड़ता था कि उनका मत पहले ही कोई और दे जाता था। लम्बी लाइनों ने गवाही दी कि लोग बिना भय के मतदान करने गये।
ऐसे ही एक परिवार से मुलाकात में यह पता चला कि उन्हें कई बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा था , लेकिन इसबार वे बेफिक्र मतदान कर पाए हैं।
बढ़े मतदान के प्रतिशत से दोनों मुख्य पार्टियाँ अपनी अपनी जीत के दावे कर रही हैं , पर मजहबी तौर पर ध्रुवीकरण स्पष्ट नज़र आई।
इसके कई कारण हैं। पहला तो यह है कि सभी पार्टियों के नेताओं के बयानों ने मतदाताओं को प्रभावित किया , दूसरा कारण सोशल मीडिया ने डाला। खाशकर हुमायु कबीर के स्टिंग ने उनकी नई नवेली पार्टी को काफी नुकसान पहुँचाया , और ओबैसी साहब से गठबंधन टूटने पर भी मतदाताओं के विश्वास को हिलाकर रख दिया। अल्पसंख्यक समुदाय को तृणमूल के अलावे कोई विकल्प नज़र नहीं आ रहा था। भाजपा को रोकने के लिए ममता से असंतुष्ट लोगों को भी तृणमूल पर ही अपना विश्वास दिखाना पड़ा। कोंग्रेस के समर्थक मतदाता भी राहुल गांधी के एक वाइरल बयान पर अंतिम समय में तृणमूल का रुख कर गये। जबकि सन्देशखाली की घटना ने बहुसंख्यक समुदाय को भाजपा का रुख करने को मजबूर किया। ममता बनर्जी के समर्थक रहे बहुसंख्यक भी मुर्शिदाबाद दंगे की ख़ौफ़नाक यादों और ममता सरकार की करवाई करने में उदासीन बेरुखी को भुलाये नहीं भूल पा रहे थे। मालदा के कालियाचक की घटना रहीसही कसर पूरी कर दी। धुलियान , बहरमपुर , मालदा , दुर्गापुर हर जगह मतदाताओं का मुख्य रूप से दो ही पार्टियों के प्रति ध्रुवीकरण अहसासा गया।
पिछले हर स्तर के कई चुनावों को जमीनी स्तर पर देखने से यह बात मंथन के बाद निकल कर आती है कि ध्रुवीकरण तृणमूल और भाजपा के पक्ष में गया है। बाबरी मस्जिद की नींव या हैदराबाद के चारमीनार का कोई प्रभाव मतदाताओं की बातों से नही दिखी।
इस पहले चरण में एक ओर तृणमूल और दूसरी ओर भाजपा के बीच ध्रुवीकरण सिमट कर रह गया।
आश्चर्य इस बात की है कि मुसलमान हित की बात करनेवाले बंगाल के ओबैसी की उपाधि पानेवाले हुमायु कबीर और स्वयं ओबैसी साहब मतदाताओं के मन से मतदान के समय उतरे-बिसरे दिखे। यहाँ तक कि हुमायु साहब को अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में भी उग्र विरोध का सामना करना पड़ा।
जो भी हो भाजपा इस बार एक और ऊँची छलाँग लगाने को आतुर है , भाजपा के विकल्प के रूप में दीदी में ही दम मतदान में दिखा, हँलांकि आगामी 4 तारीख़ को ही सब पता चलेगा कि ऊँट किस करवट बैठेगा , लेकिन बंगाल के ओबैसी हुमायु कबीर और ओबैसी साहब का मंचीय रुतवा मतगणना के दिन जमानत बचाने की जद्दोजहद में शायद दिखे।
चुनावी हिंसा के लिए बदनाम हो गये बंगाल में इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति के बाद भी , छिटपुट ही सही , लेकिन हिंसा ने बता दिया कि अतीत में चुनावी हिंसा का साम्राज्य कैसा रहा होगा। एक भी जान की हानि न होना और चुनाव के दौरान हत्याओं की अतीत की कहानी बहुत कुछ कहती सी है।
अब राज्य के जिस इलाकों में मतदान होना है , वो ममता के तृणमूल का गढ़ है। भाजपा के लिए यहीं सबसे बड़ी परीक्षा है। क्योंकि अतीत बताता है कि इन इलाकों में तृणमूल के मतदाताओं के अलावा कोई और मतदान केंद्र तक पहुँच ही नहीं पाता है। क्लब और केरम क्लबों की तकरीबन 3250 कमिटियाँ यहाँ तृणमूल के पक्ष में संगठित होकर कर उग्र और नीतिगत तरीके से काम करती है। वे पहले से ही रैलियों में जाने वाले परिवारों पर नज़र रखते हैं। मतदान के दिन भाजपा या किसी दूसरी पार्टी की रैली में जानेवाले परिवारों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने नहीं देते और उनका मत भी डाल दिया जाता रहा है। इसबार तीन लाख से अधिक केंद्रीय बलों की उपस्थिति इनको कहाँ तक क्या कर लेने देंगे ये वक़्त बताएगा।
लेकिन चुनाव के बाद जैसे तृणमूल विरोधियों से निपटने की परंपरा रही है , ठीक उसी तरह इसबार केंद्रीय बल चुनाव शांतिपूर्ण कराने, तथा विना किसी चुनावी हिंसा और हत्या न हो का ध्यान रखते हुए , मतदान के बाद उनसे चुनचुन कर निपट रहे हैं। केरम कमिटियों के जासूसों की तरह सेना के जासूस भी इस पर नजर रखे हुए हैं। दूसरी तरफ मतदाता इस बार केंद्रीय बलों की सुरक्षा की छाँव में मुखर हो गये हैं।
चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव को बिना हिंसा के शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष करने की जैसे कसम खा रखी है। वहाँ मतदाताओं को डराने धमकाने के सभी तकनिकों के गहन अध्ययन के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी वैसी ही विसात बिछा रखी है कि उपद्रवियों से चुनाव के पहले , चुनाव के दिन और मतदान के बाद कैसे निपटने हैं , इसकी पूरी तैयारी कर रखी है।
बाँकी पार्टियों की असली परीक्षा दूसरे दौर के मतदान के दौरान ही होना है। चार मई को सब खुलासा हो जाएगा। सम्मपूर्ण भारत बंगाल चुनाव और उसके नतीजे की ओर व्यग्रता से देख रहा है।

नोट:– मैंने किसी का नाम या स्थान और मुहल्ला चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए नहीं लिखा , और बातचीत करने वाले परिवारों-लोगों से ये वादा भी था।

25 अप्रैल को मासिक लोक अदालत के साथ एनआई एक्ट(चेक बाउंस) से संबंधित विशेष लोक अदालत का हुआ सफल आयोजन

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रभारी सचिव विशाल मांझी के देख रेख में मासिक लोक अदालत के साथ एनआई एक्ट (चेक बाउंस) से संबंधित विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में किया गया। उक्त मासिक लोक अदालत में कुल आठ बैंचो का गठन किया जिसमें 108(एक सौ आठ) वादों का निष्पादन किया गया एवं 11 लाख 50 हजार 7 सौ, रुपए का समझौता कराया गया जिसमें एनआई एक्ट (चेक बाउंस)से संबंधित 8 वाद का निष्पादन किया गया एवं 8 लाख 95 हजार का समझौता कराया गया। मौके पर न्यायिक पदाधिकारी समेत इंश्योरेंस कंपनियों के अधिवक्तागण, पदाधिकारीगण , विभिन्न बैंकों के अधिकारियों, वादी प्रतिवादी के अधिवक्तागण समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

पाकुड़ में वर्ल्ड मलेरिया डे पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

आज संत डॉन बॉस्को स्कूल, पाकुड़ में वर्ल्ड मलेरिया डे बड़े उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया, जिससे कार्यक्रम बेहद रोचक और प्रभावशाली बन गया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने मलेरिया से बचाव और उसके प्रभावों पर भाषण, नाटक तथा पोस्टर मेकिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों ने लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।

विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव शंकर दुबे ने अपने संबोधन में मलेरिया से बचाव के कई महत्वपूर्ण उपाय बताए। उन्होंने साफ-सफाई बनाए रखने, आसपास पानी जमा न होने देने तथा मच्छरों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने पर विशेष जोर दिया।
इस कार्यक्रम ने न केवल बच्चों में जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समाज को भी मलेरिया जैसी बीमारी से बचने के लिए प्रेरित किया।

*आज का खास : श्रीहृषीकेश और श्रीमहावीर पंचांग के अनुसार आज नहीं है विवाह के लिए कोई भी लग्न*

*आज मध्याह्न 12:19 बजे तक रहेगा भद्रा, भद्रा में नहीं करें कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य*

*कल शनिवार से शुरू होंगे विवाह के लग्न, पूर्णिमा तक अनवरत बजेगी शहनाई*

*आज का पंचांग 👇*

*आज का अंग्रेजी दिनांक :*
24.04.2026
श्रीसंवत् २०८३ शक: १९४८ सौम्यायन सौम्यगोल: बसंत ऋतु। श्रीसूर्य: उत्तरायण।
हिन्दी माह : बैशाख
पक्ष : शुक्ल
तिथि : अष्टमी
दिन : शुक्रवार
नक्षत्र : पुष्य
योग : धृति /शूल
करण : विष्टि/वव
सूर्योदय : सुबह 05:36 बजे।
सूर्यास्त : शाम 06:24 बजे।
ध्यानार्थ…यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पंचांग के अनुसार है। अतः स्थानीय समय बदल जायेगा।
आज का सूर्य : मेष राशि में।
आज का चंद्रमा : कर्क राशि में।
*———————–*
*आज का दिशा शूल :* पश्चिम।
*————————*
*आज का राहुकाल :*
दिन में 10:30 से 12:00 बजे तक।
*————————–*
*आज पर्व-त्यौहार व मुहूर्त :* आज बैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज दिन में 12:19 तक भद्रा भोग करेगा। भद्रा का वास धरती पर है। ऐसे में आज दिन में 12:19 तक सभी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं होंगे। आज श्री बगलामुखी जयंती है। दिन में 12:19 के बाद आज नामकरण, अन्नप्राशन, वधू प्रवेश, द्विरागमन, वाहन क्रय, सर्वदेव-प्रतिष्ठा, विपणिव्यापार के मुहूर्त हैं।
*————————-*
*आज का खास:*
आज 24 अप्रैल दिन शुक्रवार है। आज विवाह के लिए कोई भी शुभ लग्न नहीं है। इस सीजन का पहला लग्न 20 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन था। उसके बाद 21 अप्रैल को भी शादी की शहनाई बजी। तत्पश्चात तीन दिन 22, 23 और 24 अप्रैल को विवाह का कोई भी लग्न नहीं है। दो दिन ब्रेक के बाद कल दिन शनिवार 25 अप्रैल से एक बार फिर से विवाह के लग्न शुरू हो रहे हैं। इस बार वैशाख महीने में आगामी पूर्णिमा तिथि तक अनवरत अर्थात् सभी दिन विवाह के लग्न होंगे।
*———————–*
आलेख…
*पं. चेतन पाण्डेय*
*जन्मकुण्डली, वास्तु व कर्मकांड परामर्श*
*संपर्क : 9905507766*
*————————–*

अस्सी बरस की उम्र में जागा जोश पुराना था , सब कहते हैं बाबू कुंवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था ।

वीरता और शौर्य के प्रतीक बाबू कुंवर सिंह के विजयोत्सव दिवस पर कोटिश: नमन

गुरुवार को बाबू वीर कुंवर सिंह के बिजयोत्सव पर उनके तस्वीर पर माल्यार्पण व श्रद्धासुमन अर्पित किया गया ।कालखंड (1777-1858) बिहार के जगदीशपुर के एक महान राजपूत जमींदार और 1857 की प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख महान योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह थे। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व किया, गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) नीति अपनाई, गंगा पार करते हुए अंग्रेजों की गोलख बांह में लग गई बस क्या था वे तुरंत तलवार से अपनी बांह काटकर कर गंगा में विसर्जित कर दिए।
वीर कुंवर सिंह का जीवन बहुत भव्यता व संघर्ष भरा रहा ,वे स्वाभिमानी व व्यक्तित्व के स्वामी थे ।
उनका जन्म 13 नवंबर 1777 को बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता बाबू साहबजादा सिंह और माता पंचरत्न कुंवर थीं।
1857 की क्रांति में उन्होंने बिहार में अंग्रेजी सेना को कड़ी टक्कर दी, विशेषकर आरा और जगदीशपुर के क्षेत्रों में।
वे छापामार (गोरिल्ला) युद्ध में कुशल थे। उन्होंने आरा को अंग्रेजों से मुक्त कराया था और आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में अंग्रेजों को धूल चटाई।
जब वे गंगा पार कर रहे थे, तब अंग्रेजों की गोली से उनका बायां हाथ घायल हो गया। संक्रमण फैलने के डर से उन्होंने तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा को अर्पित कर दिया।
23 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर किले पर पुनः विजय प्राप्त की, लेकिन 26 अप्रैल 1858 को वे वीरगति को प्राप्त हुए।
इन्हें “बिहार का शेर” और बाबू साहब के नाम से भी जाना जाता है।
80 वर्ष की उम्र में भी वे युद्ध के मैदान में पूरी वीरता के साथ लड़े, जो उन्हें 1857 के नायकों में अद्वितीय बनाता है।
उनकी वीरता को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने 23 अप्रैल को विजय उत्सव के रूप में चिन्हित किया है। बाबू वीर कुंवर सिंह के बिजयोत्सव पर कोटिश: नमन !
उक्त अवसर पर भागीरथ तिवारी, कैलाश झा, संजय कुमार शुक्ला, प्रवीण कुमार सिंह , अरुण कुमार सिंह , सोहन कुमार सिंह रामदेव मंडल सहित अन्य उपस्थित थे ।

*पृथ्वी दिवस पर प्राकृतिक संरक्षण को बढ़ावा देने को लेकर न्यायालय परिसर में न्यायिक पदाधिकारी ने लगाए पौधे*

झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता में पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित की गई । जिसमें प्राकृतिक संरक्षण को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक अपर सत्र न्यायधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, न्यायधीश विजय कुमार दास न्यायालय कर्मी, लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार डिप्टी चीफ़ मो नुकुमुद्दीन शेख संजीव कुमार मंडल एलएडीसीएस के सहायक गंगाराम टुडू अज़फर हुसैन विश्वास समेत पैरा लीगल वॉलिंटियर्स ने वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिए एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया।