Thursday, November 5, 2026
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नशा मुक्ति और सड़क सुरक्षा नियम अपनाकर नालसा के बने डॉन बच्चों के पेंटिंग ने दिया संदेश

नालसा के डॉन योजना के तहत स्कूली बच्चों ने नशामुक्त भारत एवं सड़क सुरक्षा पर पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से दिया जागरूकता संदेश*
नालसा नई दिल्ली एवं झालसा रांची के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ एवं प्रशासन की संयुक्त तत्वाधान में सचिव रूपा बंदना किरो की उपस्थिति में जिला परिवहन विभाग की ओर से एक दिवसीय पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान एवं सड़क सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पेंटिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा एवं नशा से होनेवाले वाले नुकसान को दर्शाते हुए समाज में जागरूकता का सन्देश दिया गया।इस दौरान संबंधित विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

पंकज मिश्रा के समर्थन ने पत्थर लोडिंग बन्द आन्दोल को दे दिया है धार। क्या पिघलेगा रेल मंत्रालय पर जमी पाकुड़ की उपेक्षा का बर्फ यक्ष प्रश्न

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तीन दिनों से रेल विकास की मांग को लेकर रैक लोडिंग कार्य बंद,करोड़ों का हो रहा नुकसान

पटना व दिल्ली की सीधी ट्रेनें शुरू करने और शताब्दी एक्सप्रेस व वंदे भारत ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है

ब्रिटिश शासन काल में 19 वीं शताब्दी के लगभग उत्तरार्ध में पाकुड़ साहेबगंज लूप रेल लाइन की स्थापना उस समय की गई थी, जब ब्रिटिशों की राजधानी कोलकाता हुआ करता था। चूँकि भागलपुर ब्रिटिशों का एक ऐसा केंद्र था जो इस पूरे पुरवोत्तर भारत पर नज़र रखी जाती थी , और ब्रिटिश शासन का ये बहुत महत्वपूर्ण केंद्र था।
स्वाभाविक रूप से ब्रिटिश सैनिक एवं अधिकारियों के मुभमेन्ट के लिए यह रेल लाइन काफी महत्वपूर्ण तथा एक तरह से ब्रिटिश शासन की लाइफ लाइन थी। उसी समय पाकुड़ क्षेत्र के उत्तम क़्वालिटी के पत्थरों पर ब्रिटिश नज़र पड़ी , जिसने उच्चतम ताप को बर्दाश्त करने वाले इन पत्थरों को ढोने के लिए इस रेलवे लाइन का उपयोग होने लगा जो आज भी जारी है।
रेलवे लाइनों पर पहले हेंड मेड तथा सोध के बाद मसीन मेड एक निश्चित आकार के पत्थर भी इसी क्षेत्र से आपूर्ति होने लगी।
रेलवे ने इन शताब्दियों में पाकुड़ से पत्थरों के द्वारा अरबों खरबों कमाया , लेकिन आज़ादी के बाद भी तमाम सरकारों के रेल मंत्रालय ने रेल सुविधा एवं यात्री सुविधाओं के नाम पर उपेक्षा के साथ छला। लगातार छले जाने में रेल सुविधाओं को बढ़ाने की बात तो छोड़ दें कई ट्रेनों को विभिन्न कारणों से चुरा कर यहाँ की जनता को ठेंगा दिखाया गया। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लगातार उदासीनता भी कम दोषी नहीं है।
ऐसे में स्थानीय व्यपारियों ने ही लोडिंग बंदी का झंडा बुलंद किया। राजनीति के गलियारों के क्षेत्र के कद्दावर नेता पंकज मिश्रा ने अपना समर्थन दे कर लोडिंग बन्दी के आन्दोल को एक धार दे दिया है। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि सिर्फ पत्थर क्यूँ कोयला ढुलाई पर भी लगे रोक
आन्दोल को विस्तार से नीचे जाने–

पाकुड़ के मालपहाड़ी व तिलभिट्टा रेलवे रैक प्वाइंट पर पिछले तीन दिनों से रेल विकास की मांग को लेकर पत्थर व्यवसायियों ने रैक लोडिंग का कार्य पूरी तरह ठप कर दिया हैं.यह आंदोलन झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा के आह्वान पर किया गया.आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.रैक लोडिंग बंद होने से तीन दिनों में लगभग दो करोड़ का नुकसान रेलवे को होने का अनुमान लगाया जा रहा हैं.वहीं रैक लोडिंग करने वाले दिहाड़ी मजदूरों को काम किए बिना ही घर लौटना पड़ रहा हैं. बताया गया कि यहां दोनों साइडिंग एरिया से प्रतिदिन औसतन करीब 6 से 10 रैक लोड होते हैं,जिससे रेलवे को भारी राजस्व प्राप्त होता है.वहीं आंदोलन के चलते 35 इंडेंट (रैक मांग) को वापस ले लिया गया है.उल्लेखनीय है कि पांच जनवरी को साहिबगंज में झामुमो नेता पंकज मिश्रा की अध्यक्षता में साहेबगंज और पाकुड़ जिले के पत्थर व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित की गई थी,जिसमें रेलवे रैक प्वाइंट से पत्थर ढुलाई करने वाले पाकुड़ और साहिबगंज के सभी पत्थर व्यवसायी शामिल हुए थे.बैठक में रेलवे पर आरोप लगाया गया कि भारी राजस्व देने के बावजूद पाकुड़ और साहिबगंज को रेल विकास के मामले में लगातार उपेक्षित रखा जा रहा है.व्यवसायियों ने पाकुड़ के लिए पटना और दिल्ली की सीधी ट्रेनें शुरू करने, शताब्दी एक्सप्रेस,वंदे भारत सहित प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठायी है.पत्थर एसोसिएशन का कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने तक रैक लोडिंग कार्य बंद रहेगा.यदि रेलवे प्रशासन ने शीघ्र पहल नहीं की,तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.पाकुड़ पत्थर एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार संगठन ने रेलवे में विकास की मांग को लेकर रैक लोडिंग कार्य बंद करने का निर्णय लिया है. शुक्रवार से रैक लोडिंग कार्य पूरी तरह बंद हैं.वहीं आगे भी रैक लोडिंग कार्य फिलहाल बंद रहेगा. संगठन के अगले निर्णय के बाद ही रैक लोडिंग पर विचार किया जाएगा.इधर इस मामले में गुड्स शेड सुप्रीटेंडें (ज़ीएसएस) पाकुड़ अमित कुमार से पूछने पर बताया की पिछले तीन दिनों से मालपहाड़ी और तिलभिटा रेलवे साइडिंग एरिया से रैक लोड पूरी तरह ठप हैं. प्रतिदिन 60 लाख से ऊपर सिर्फ रेलवे को नुकसान हो रहा हैं.अभी तक हड़ताल समाप्त होने की कोई सुचना प्राप्त नहीं हुई हैं.

पाकुड़ के प्रबुद्ध नागरिकों ने हड़ताल पर उठा रहे सवाल…

पाकुड़ शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने पत्थर रैक लोडिंग ठप किए जाने पर कई गंभीर सवाल उठाये हैं. सोशल मीडिया फेसबुक,इंस्टाग्राम और एक्स पर रेक लोडिंग ठप को लेकर पोस्ट और कमेंट्स किए जा रहे हैं. बताया सिर्फ पत्थर लोडिंग रोकने से कुछ नहीं होने वाला हैं.अगर रोकना हैं तो कोयला लोडिंग को बन्द करना होगा तभी मांगे पूरी होगी.बताया पाकुड़ रेलवे साइडिंग से प्रतिदिन कोयले का रेक लोडिंग होकर बाहर भेजे जा रहे हैं.जिससे अरबों का फायदा केंद्र सरकार और रेलवे को हो रहा उसे क्यों बंद नहीं किया गया.जबकि स्थानीय लोग पत्थर कारोबार से जुड़े हैं.भयादोहन और सॉफ्ट टारगेट लोकल व्यापारियों को कर दिया जाता हैं.अगर हिम्मत हैं तो कोयला को ठप करके दिखाए.बहरहाल पत्थर रेक लोडिंग पूरी तरह ठप हैं, अब देखना होगा आगे रेलवे विभाग क्या एक्शन लेती हैं. क्या रेलवे दबाव में आएगा? या फिर एकबार स्थानीय व्यापारियों को दोहन का शिकार से गुजरना होगा यह तो वक्त बताएगा.

डी ए वी विद्यालय में विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन

पाकुड़ में 17 जनवरी के विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह के आयोजन में न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं मीडिया के शीर्ष अधिकारी उपस्थित हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश, पाकुड़, उपायुक्त महोदय पाकुड़, एवं पुलिस अधीक्षक महोदया पाकुड़ के विद्यालय आगमन के पश्चात विद्यालय के एन सी बी टीम के द्वारा इन्हें गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी दी गई। इस कार्यक्रम में विद्यालय के 500 से भी ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया। उपायुक्त महोदय ने अपने संबोधन में बताया कि 500 से भी ज्यादा बच्चों को मंच प्रदान करना अपने आप में विद्यालय प्रबंधन के लिए बहुत बड़ा अवसर प्रदान करना है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को इस भव्य समारोह के आयोजन हेतु धन्यवाद एवं शुभकामना दिया। वहीं पुलिस अधीक्षक महोदया ने बालिका प्रतिभागियों की तारीफ की एवं बताया कि महिलाओं को मंच प्रदान करने से वे हमेशा देश को गौरांवित करेंगी।
प्रधान एवं जिला सत्र न्यायधीश ने विद्यालय परिवार को इस आयोजन हेतु शुभकामना दिया। सत्र 2025-26 में शैक्षणिक, खेल कूद, सी सी ए, सामाजिक क्षेत्र एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैकड़ों छात्र छात्राओं को इन अधिकारियों द्वारा पुरस्कार एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं इन पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय की वार्षिक पत्रिका *विद्या ज्योति* का विमोचन किया गया। सभी पदाधिकारियों ने घंटों बैठकर कार्यक्रम का लुत्फ उठाया।
इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने स्वयं अंकित चित्रों की एक प्रदर्शनी भी लगाई जो मोहक आकर्षक और प्रशंशनीय रही।

कोयला ब्लॉक में तृतीय वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़े की शुरुआत

डीजीएमएस सेंट्रल जोन धनबाद के निर्देशानुसार पचवारा सेंट्रल कॉल ब्लॉक ओसीपी में बीते 12 जनवरी से 24 जनवरी तक चल रहे तृतीय वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़ा 2025 के दरमियान बीते शनिवार 17 जनवरी को अमरपारा के आलू बेड़ा स्थित डीबीएल पीएसपीसीएल के कैंप कार्यालय के समीप एक भव्य कार्यक्रम बीसीसीएल सेंट्रल जोन धनबाद के डी जीएमएस श्री मिथिलेश कुमार के उपस्थिति में किया गया जबकि इस कार्यक्रम में डी जीएमएस द्वारा गठित कमेटी बीसीसीएल मुरैडिह फुलारी टांग ओसीपी के कन्वीनर त्रिभुवन सिंह चौहान कोलवारी इंजीनियर एक्सकैवेशन मनोज कुमार कोलवारीअभियंता अजीत सेठी माइनिंग अभियंताअशोक कुमार पाल इना कलवारी मैनेजर रणजीत सिंह कुलवारी सर्वैयर राजकुमार नायक सहित पीएसपीसीएल के एजेंट राकेश कुमार सिंह डीबीएल के प्रोजेक्ट हेड
बर्जेश कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे डीबीएल के कैंपकार्यालय प्रांगण में आयोजित उक्त खान सुरक्षा पखवाड़ा कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मिथिलेश कुमार द्वारा झंडोतोलन कर किया गया जबकि इस अवसर पर आलू बेड़ा गांव में संचालित चाइल्ड डेवलपमेंट पब्लिक स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे बच्चियों द्वारा संताली वह हिंदी भाषा में आकर्षक स्वागत गाना गाकर अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया इस कार्यक्रम के दरमियान डीबीएल सेंट्रल कोल माइंस में अपने एवं आसपास के लोगों को सुरक्षित रखकर अपने कार्य का निर्वाह करने पर उपस्थित कर्मियों को पुरस्कृत किया गया वहीं मंच का संचालन कर रहे डीबीएल के अमन कुमार ने अच्छे-अच्छे शायरी के साथ उपस्थित कर्मियों को खान सुरक्षा नियमों के अनुसार कार्य करने का अनुरोध किया जबकि मुख्य अतिथि डी जी एम एस मिथिलेश कुमार द्वारा खान सुरक्षा के नियमों को कड़ाई से पालन कर अपने कार्य को सफलतापूर्वक करने व सुरक्षा के कई बारीकियोंको उपस्थित कर्मियों को बताया और कहा कि अपने ब दूसरों की सुरक्षा करना ही सबसे बड़ा कार्य है जिसे हम सभी कर्मियों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कर अपने कार्य को करना चाहिए कार्यक्रम के पश्चात उक्त कमेटी द्वारा उत्खनन कार्य का काफी बारीकी से निरीक्षण किया गया और खान सुरक्षा मापदंडों को देखा और कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया इस अवसर पर डी बी एल के माइंस मैनेजर बी.के दिवाकर सिविल इंजीनियर राकेश चोरसिया निर्पेंद्र सिंह भी पी आर कंपनी के पी एम श्रीनिवास रेड्डी सहित कई अन्य कर्मी उपस्थित थे

तूहूं लूटो हमहुँ लुटव ,लूटे के आज़ादी बा, सबले ज्यादा उहे लुटिहें ,जेकरा देह पे खादी बा

बसमाता मौजा के दाग संख्या 536 के एक बीघा आठ कट्ठा जमीन का पत्थर खो गया है। अब बेचारी जमीन अबला की तरह लुट तो गई , कहीं शिकायत भी नहीं कर पाई। ख़बरनबीस की नजर पड़ी तो,समाचार प्रकाशन के बाद सीओ के नेतृत्व में हुई स्थल निरीक्षण ।

खननकर्ता कागज़ातों के साथ कार्यालय बुलाये गये।

कागज़ात जाँच के बाद होगी नापी और करवाई।

आजकल पाकुड़ जिला में एक कहावत हर चौक चौराहे पर सुनी जा रही हैं की
” तूहूं लूटो हमहुँ लुटव ,लूटे के आज़ादी बा,
सबले ज्यादा उहे लुटिहें ,जेकरा देह पे खादी बा ।”
(जिस तरह का लूट का माजरा सामने आया है, वो बिना सक्षम राजनैतिक संरक्षण के सम्भव नहीं। अब कागज़ात के साथ खननकर्ता पहुँचते हैं , या खादी का फोन यह तो बताना मुश्किल है, लेकिन मामला क्या है, जानना लोगों का अधिकार है।

पाकुड़ जिला काला पत्थर के नाम से जाना जाता है.जहाँ ईमानदारी से कारोबार करने वाले तो हैं परन्तु अधिकतर माइनिंग चोरी और राजस्व को हानि पहुँचाने वालों की कोई कमी नहीं हैं.मालपहाड़ी थाना क्षेत्र के बासमाता मौजा में हेना स्टोन वर्क्स के नाम की चर्चा इन दिनों तेजी से हो रही हैं.और होना भी क्यों नहीं चाहिए, क्यूंकि जिस स्थान और दाग पर सरकार ने उन्हें लीज दिया हैं वे लीज से हटकर अनावादी जमीन को भी खा गया हैं जिसकी चर्चा हो रही हैं.खनन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हेना स्टोन वर्क्स को बसमाता मौजा में खाता संख्या 10, 13, 03, 08,05 एवं 21 और प्लॉट संख्या 301, 302, 523, 524,525,526,527,529,530,531,532,508,509,512,533,539 हैं. जबकि कुल 6.37 एकड़ में लीज प्राप्त हैं.सूत्र बताते हैं की लीजधारक अपने लीज एरिया से हटकर दाग संख्या 536 कुल एक बीघा आठ कट्ठा जमीन जो की अनावादी हैं पूरा का पूरा खा गया हैं.सूत्रों की माने तो अनावादी जमीन खाने के बाद पाकुड़-राजग्राम पीडब्लूडी मुख्य सड़क पर अब खतरे की घंटी बज रही हैं.ब्लास्टिंग करते करते मुख्य सड़क से आवाजाही पर खतरा मंडराने लगा हैं.अगर समय रहते नहीं रोका गया तो बड़ा हादसा हो सकता हैं.

पत्थर माफियाओं का अब नहीं रहा प्रशासन से खौफ….

विश्वस्त सूत्रों की माने तो एक अगर पत्थर स्टोन लीज कराया जाए तो सीओ रिपोर्ट से लेकर डीएफओ रिपोर्ट और एलवाई बनाने तक करोड़ों रूपये खर्च हो जाते हैं.परन्तु अगर ईमानदारी से लीज दिया जाए तो दस लाख से अधिक खर्च नहीं होगा. अब सवाल उठता हैं की जब एक लीज लेने में नीचे से ऊपर तक करोड़ों खर्च कारोबारी करेंगे तो ईमानदारी से काम कैसे हो सकता हैं? आखिर इतने अधिक रूपये लिए जाते हैं किसी से छुपी नहीं हैं.ईमानदारी का चोला पहनकर भर्ष्टाचार पुरे चर्म पर हैं.पाकुड़ जिले के पाकुड़िया,महेशपुर के रद्दीपुर,सदर ब्लॉक के मालपहाड़ी हो या हिरणपुर ब्लॉक का पत्थर औद्योगिक क्षेत्र हो हर तरफ के पत्थर कारोबारी एक अंजान वसूली गेंग से परेशान हैं. स्वावभाविक हैं अवैध कारोबार करने के लिए जिम्मेवार लोग ही उकसा रहे हैं.बहरहाल जिले के सीमावर्ती साहेबगंज जिला में ईडी और सीबीआई के धमक के बाद भी पाकुड़ जिला में कोई असर नहीं दिख रहा हैं.अब आगे देखना होगा शासन और प्रशासन में बैठे अधिकारी आगे की कार्रवाई करती हैं या फिर खामोश होकर पन्ने पलटते हुए आगे बढ़ जायेंगे.

कहीं राजनीति संरक्षण में तो नहीं हो रहा कारोबार…

मालपहाड़ी थाना क्षेत्र में दर्जन भर ऐसे क्रेशर हैं जिनका वैध कागजात नहीं हैं. बिना वैध कागजात के ही चल रहा हैं.सूत्रों की माने तो कुछ सफेदपोश का खुला संरक्षण प्राप्त हैं.जब भी अधिकारीयों का गाड़ी जाती हैं अवैध कारोबारियों तक खबर पंहुचा दी जाती हैं. कुल मुलाकार अवैध कारोबार फल फूल रहा हैं.

अधिकारीयों की हो रही हैं रेकी…

जैसे ही अधिकारीयों की गाड़ी मालपहाड़ी थाना क्षेत्र में घुसती हैं रेकी करने वाले और पासिंग गिरोह के सदस्य मोबाईल से खबर कर देते हैं.पासिंग गिरोह के सदस्य पाकुड़-राजग्राम मुख्य सड़क के रेलवे लाइन,बाहिरग्राम के चाय पान दुकान में रहता हैं.इसके अलावे कोयला रोड से जाने के क्रम में दुर्गापुर गांव के आसपास भी लोग अधिकारीयों का रेकी करते हैं.

पटरी पर लोहा रख ट्रेन हादसे को अंजाम देने के प्रयास मामले में एक्शन में रेलवे पुलिस , तीन हिरासत में।

 

दैनिक प्रतिष्ठित अख़बार  “प्रभात मंत्र “के पाकुड़ ब्यूरो चीफ अबुल काशिम जी की कलम से-

पटरी पर भारी भरकम लोहा रखकर रेल हादसे को अंजाम देने के प्रयास मामले में रेलवे पुलिस पूरे एक्शन में है। घटना के बाद से ही रेलवे पुलिस इस मामले में संलिप्त असामाजिक तत्वों की पहचान में जुट गई है। रेलवे पुलिस गुप्तचर और तकनीकी सहारा लेकर असामाजिक तत्वों तक पहुंचने की हर संभव कोशिश कर रही है। पुलिस ने अब तक कई लोगों को हिरासत में भी लिया है और पूछताछ कर रही है। अभी तक पुलिस तिलभिठा स्टेशन के आसपास के गांवों में नजर रख रही है। इस मामले में शामिल लोगों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है। यह अलग बात है कि पुलिस को अभी तक खास सफलता हाथ नहीं लगी है। लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही घटना का खुलासा हो जाएगा। पुलिस ने अभी तक जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनसे पूछताछ तो जारी है ही, सच्चाई सामने लाने के लिए उनके मोबाइल के डिटेल्स भी खंगाल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक रेलवे पुलिस पूर्व में रेलवे से जुड़ी अपराधिक घटनाओं की फाइलें भी खोल रही है। इन फाइलों में से पुराने अपराधियों के नाम निकाल रही है। ताकि उन पूर्व अपराधियों से भी पूछताछ की जा सके। फिलहाल रेलवे पुलिस की तिलभिठा स्टेशन के आसपास के गांव पर ज्यादा नजर है। इनमें तिलभिठा, संग्रामपुर, कुमारपुर, रानीपुर, सेलिमपुर गांव शामिल है। सूत्रों के दावों के मुताबिक इन गांवों के अलावा ईलामी, तारानगर, पाली, दादपुर, कालिदासपुर आदि गांव पर भी नजर हैं। सूत्रों के मुताबिक इन गांवों में रेलवे पुलिस पैनी नजर रखी हुई है। असामाजिक तत्व या अपराधी किस्म के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस मामले में रेलवे पुलिस मुफस्सिल थाना की पुलिस की भी मदद ले रही है। यह भी चर्चा है कि रेलवे ने इस मामले को चुनौती के तौर पर लिया है और हर हाल में इसमें शामिल लोगों तक पहुंचना चाहती है। हालांकि रेलवे सूत्रों का कहना है कि पुलिस किसी बेगुनाह को फंसाना नहीं चाहती है। भले सौ अपराधी बच जाए, पर एक निर्दोष नहीं फंसे…. के कहावत पर काम कर रही है। इधर मंगलवार को पाकुड़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ऑफिस में काफी हलचलें देखी गई। आरपीएफ में पुलिस अधिकारी मामले को लेकर काफी गंभीर दिखे। आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर प्रकाश चौधरी एवं अन्य अधिकारी मामले पर गंभीर चिंतन करते नजर आए। उन्होंने मामले को लेकर ज्यादा कुछ तो नहीं बताया, लेकिन उनका कहना था कि अभी तक तो किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, बस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। लेकिन बहुत जल्द मामले का खुलासा होने वाला है। उन्होंने कहा कि कुछ नाम सामने आए हैं। इन लोगों तक पहुंचने की हर कोशिश की जा रही है।

वनांचल एक्सप्रेस थी निशाने पर

जिस तरीके से और जिस समय घटना को अंजाम देने की कोशिश की गई, उससे संभावना जताई जा रही है कि असामाजिक तत्वों के निशाने पर वनांचल एक्सप्रेस थी। लोगों में चर्चा है कि अपराधी किस्म के लोगों ने वनांचल एक्सप्रेस का हादसा कराकर लूटपाट के इरादे से पटरी पर लोहा रखा होगा। लोगों में हो रही इस चर्चे को बल इसलिए भी मिलता है, क्योंकि जिस वक्त पटरी पर लोहा रखे जाने की भनक लगी, उससे ठीक पहले रात करीब 10:00 बजे गया-हावड़ा एक्सप्रेस इसी रेल पटरी से होकर गुजरी थी। तब तक पटरी पर ऐसा कुछ भी नहीं था। इसके ठीक बाद वनांचल एक्सप्रेस आने का समय हो रहा था। पाकुड़ रेलवे स्टेशन में वनांचल एक्सप्रेस के आगमन का रात 10:30 बजे समय तय है। आधे घंटे के दौरान गया-हावड़ा एक्सप्रेस का पटरी से सही सलामत गुजर जाना और वनांचल एक्सप्रेस के गुजरने से पहले उसी पटरी पर लोहा रख देना, कहीं ना कहीं वनांचल एक्सप्रेस में हादसा कराकर लूटपाट के मंसूबे को बल जरूर मिलता है।

क्या है मामला

शनिवार की देर रात रेलवे अधिकारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रात करीब 10:15 बजे के आसपास पाकुड़-बरहरवा रेलखंड पर कुमारपुर फाटक से थोड़ी दूर पोल संख्या 156/12 के पास पटरी पर भारी भरकम लोहे का टुकड़ा मिला। इसी पटरी से निर्धारित समय पर वनांचल एक्सप्रेस गुजरने वाली थी। इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की खुशकिस्मती कहें या एक मालगाड़ी के लोको पायलट की सूझबूझ कहें, एक बड़ा रेल हादसा टल गया। पाकुड़ स्टेशन पर निर्धारित समय 10:23 बजे पहुंचने वाली वनांचल एक्सप्रेस से ठीक पहले एक मालगाड़ी गुजर रही थी। इसी मालगाड़ी के लोको पायलट को पटरी पर भारी भरकम लोहा रखे होने की भनक लग गई। इसके बाद लोको पायलट ने रेलवे के अधिकारियों को जानकारी दी। अधिकारियों को जानकारी मिलते ही रेलवे में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के निर्देश पर गुमानी रेलवे स्टेशन से उस समय खुल रही वनांचल एक्सप्रेस को बीच में ही रोक दिया गया। देर रात को ही रामपुरहाट एसी और रामपुरहाट एईएम की टीम स्थल पर पहुंच गई। अधिकारियों की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। पटरी से लोहे को हटाया गया और सबकुछ क्लियर होने के बाद ही वनांचल एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई गई। बताया जाता है कि इस मामले की वजह से वनांचल एक्सप्रेस तकरीबन डेढ़ घंटे तक रुकी रही। अगले दिन सुबह वर्धमान से डॉग स्क्वॉड की टीम भी बुलाई गई। सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर रघुवीर चोक्का भी पाकुड़ पहुंचे थे। इस मामले में पीडब्ल्यूआई उज्जवल कुमार के आवेदन पर रेलवे पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।

क्या आसन्न गर्मी में पाकुड़वासियों की हलक सुखी रह जायेगी ! गंगाजल के नाम पर कब तक ठगी जाएगी जनता?:मोनिता

15 साल से सिर्फ वादे, पाकुड़ अब तक गंगा जल से वंचित — जनता के धैर्य की परीक्षा कब तक?
पाकुड़ शहर की शहरी जलापूर्ति योजना पिछले पंद्रह वर्षों से फाइलों में कैद है। इस दौरान न जाने कितने जनप्रतिनिधि आए और चले गए, मगर पाकुड़ की जनता को आज तक गंगा का पानी नसीब नहीं हुआ। हर चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन हकीकत में शहरवासी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए जूझने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी आते ही पेयजल संकट विकराल रूप ले लेता है, पर प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना अब तक अधर में लटकी हुई है। सवाल यह है कि पाकुड़ की जनता को आखिर कब तक ठगा जाता रहेगा?
इसी जनआक्रोश के बीच जिला कांग्रेस कमिटी पाकुड़ की महासचिव श्रीमती मोनिता कुमारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई का समय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को स्वयं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के समक्ष उठाएंगी और पाकुड़ की जनता की पीड़ा से उन्हें अवगत कराएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राजमहल लोकसभा सांसद श्री विजय कुमार हांसदा एवं पाकुड़ विधायक श्रीमती निशात आलम को इस योजना की वास्तविक स्थिति से अवगत कराकर उन पर भी जनदबाव बनाया जाएगा, ताकि वर्षों से लटकी इस योजना को तत्काल गति मिल सके।
श्रीमती मोनिता कुमारी ने साफ शब्दों में कहा—
“अब बहुत हो चुका। पाकुड़ की जनता को सिर्फ वादे नहीं, गंगा जल चाहिए। हर हाल में शहर में गंगा जल पहुंचाने के लिए हम निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।”
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन जनता की इस जायज़ मांग पर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं, या फिर पाकुड़ को उसका हक़ मिलेगा।

घुसपैठ के पीछे की अनकही कहानी। भाग – 2

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क्रमांक 1 से आगे
भाग –2

बंगलादेशी घुसपैठ के द्वारा भारत के टुकड़े करने तथा आंतरिक रूप से असुरक्षित करने की मंशा में सी आई ए और आई एस आई क्यूँ ?
यह एक स्वाभाविक सवाल है। विभाजन के बाद कुछ हद तक आपसी बहुत सारे विषयों पर असहमति रहने के बाद भी भारत में सभी समुदायों ने आपस में मिलजुल कर रहना शुरू किया। सभी ने मिलकर देश को आगे ले जाने में अपनी सहयोगिता देना शुरू किया और रखा, तथा देश आगे की ओर तेजी से चल पड़ा।
लेकिन आसपास के देशों में भारत की साम्प्रदायिक एक जुटता के साथ आगे बढ़ना कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रहा था । उधर पश्चिमी देशों को भी भारत के अंदर की शांति और आगे बढ़ना रास नहीं आ रहा था। भारत की आंतरिक शांति तथा आगे बढ़ने से उपजे असन्तोष के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने दूरगामी स्वार्थ थे। लेकिन उस स्वार्थ को साधने के लिए कोई दूरगामी योजना लाज़मी थे। उसकी योजना ब्रिटिश शासन काल से ही अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने शुरू कर दी थी , जो आहिस्ते आहिस्ते भारत की आज़ादी के समय ही राजनैतिक बुद्धिजीवियों और विद्वानों को समझ में आने लगा था। बंगलादेश बनने के बाद योजना ने जोर और रंग पकड़ना शुरू किया।
देश में घुसपैठ कराकर कट्टरपंथियों ने हमें अस्थिर करने की योजना पर जोरदार काम शुरू किया।
इन दिनों आप देख रहे होंगे कि एक के बाद एक कई ऐसी पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं, जिसमें उस विशेष जगह के लोग शामिल नहीं थे , बल्कि अफवाहों के सहारे दूसरे स्थान की भीड़ बाहर से पुलिस पर पत्थरबाजी करने आये थे। इनके प्रायोजित होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता। देश की अखंडता एवं सौहार्द में जीने की बोखलाहट और असहजता बृहत तौर पर देखी जा रही है, देश से सात समंदर पार भी और देश के अंदर भी।
अंतरराष्ट्रीय साज़िश के अलिखित इतिहास कहते हैं , कि आज़ादी के बाद लगातार आगे बढ़ रहे भारत को रोकने के लिए बाहर से नहीं बल्कि अंदर से अस्थिर किये जाने की मंशा काम कर रही है। मूल भारत के हिन्दू और मुसलमान अलग अलग पंथ के रहने के बाद भी सांस्कृतिक रूप से मिलजुलकर रहते हैं। इसलिए दहाई दशकों से घुसपैठ कराकर उन्हें देश के हाईवे और रेलवे लाईनों के किनारे ऐसी जगहों पर घने रूप से तंग गलियों का निर्माण कर बसाया गया।
अंतरराष्ट्रीय साज़िशों की सोच ऐसी रही कि जब कभी हिंदुस्तान बाहरी या पड़ोसी देशों से युद्ध में उलझे तो ब्यापक रूप से आंतरिक अशांति फैलाकर हाईवे और रेल लाइनों को ऐसे बाधित कर दिया जाय कि सेना के मुभमेन्ट को रोका या प्रभावित किया जा सके। लेकिन हवाई मार्गों , उच्च स्तरीय टनल , रेलवे लाईनों की आंशिक रूप से घेराबंदी के साथ नए सुरक्षा मानकों पर काम ने एक और चिढ़न पैदा की।
इसी घुसपैठ के द्वारा अलगाववाद की सोच को भी देश में व्यापक रूप से पहुँचाना तथा यहाँ शांति से रह रहे लोगों को एक दूसरे के प्रति अस्वाभाविक विद्वेष प्रत्यारोपित करने की मंशा को साकार रूप देना ही उद्देश्य है और था।
इसके पीछे का प्रारंभिक उद्देश्य था कि महाराष्ट्र के नागपुर से नागालेंड तक के अधिसूचित कॉरिडोर को धर्मांतरण के द्वारा इनका एक अलग पहचान बनाकर भारत को दो और विभाजन का डँस दिया जा सके।
बंगलादेश से लगी सीमांत भारत के जिलों को जो अधिसूचित क्षेत्र में न पड़ते हों या आंशिक तौर पर पड़ते हों , उन्हें बृहत बंगलादेश के छुपी योजना के तहत बंगलादेश में मिला देना , तथा अधिसूचित कॉरिडोर को एक अलग पहचान के साथ अलग देश बनाने की अंतरराष्ट्रीय साज़िश पर काम चल रहा था। ताकि दुनियाँ के इस इलाके में भी सैनिक बेस बनाकर दुनियाँ के इस इलाके के देशों पर भी नज़र रखी जा सके। इस बात को नागालेंड , असम आदि राज्यों में उग्रवाद , आतंकी घटनाओं एवं सशस्त्र आन्दोलनों ने सावित किया, हँलांकि सात बहने राज्यों के विकास को दिल्ली ने भी अनदेखा किया , इसमें दो मत नहीं है। पर यहाँ बंगलादेशी और रोहंगिया घुसपैठ पश्चिम के अलग पहचान के देश की मंशा को मौन रूप से चोटिल करना शुरू किया , इसलिए पश्चिमी देशों ने भी शरणार्थियों एवं घुसपैठ के साथ आतंकवाद पर टर्राना शुरु किया।

ऐसा क्यूँ , तो जवाब है कि प्राकृतिक संसाधनों की कमी तथा अपने स्वार्थ जनित कारणों से घुसपैठ ने अपने पैर पूरे देश में पसारने शुरू किया , जिसके कारण अलग पहचान के लेंड की मंशा पर पानी फिरने की स्थिति दिखने लगी। झारखंड के संथालपरगना पर ख़ुफ़िया विभाग ने सरकार को रिपोर्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण आदिवासियों की जमीन पर बड़े पैमाने पर कई तरीकों से घुसपैठियों द्वारा कब्जा किया गया है। स्वाभाविक है कि इस तरह के रिपोर्ट सीआईए एवं अन्य सक्षम एजेंसियों को भी रही होगी। इधर जब तक सिर्फ भारत में आतंकवादी घटनाएं होती थी तो पश्चिम चुप था, लेकिन आतंकवाद ने पश्चिमी देशों को भी अपने आगोश में लेना शुरू किया तो आतंकवाद के विरोध में पश्चिमी बयानों की बयार भी चलने लगे।
जो भी हो 1990 के दशकों के आसपास अन्तर्राष्ट्रीय अलगाववादी सोचों ने बंगलादेश में 86 ऐसे ट्रेनिंग सेंटर भी चला रखे थे , जो घुसपैठ का सहयोग विभिन्न ढंग से करते थे, और उनमें अलगाववादी सोच तथा साम्प्रदायिक हिंसा की ज़हर के साथ गजबा ए हिंद की सोच भी आरोपित करते थे।
1996 में तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कोलकाता में एक प्रेसकन्फ्रेन्स में ऐसे ही ट्रेनिंग केन्द्रों की चर्चा की थी। कुलमिलाकर अंतर्राष्ट्रीय साज़िशों के परिदृश्य के परिणाम आज देखने को विभिन्न स्तरों पर दिख रही है।
अफवाहों से देश के माहौल को हमेशा बिगाड़ने के प्रयास बरबस दिख जा रहे हैं।
आज जब घुसपैठियों को बाहर करने की बात या कार्रवाइयाँ होतीं हैं तो एक विशेष क्लास के लोगों में बेचैनी और छटपटाहट के साथ अनाप शनाप बयान देखने सुनने को मिलते हैं , जो स्वाभाविक है , क्योंकि इस अंतरराष्ट्रीय साज़िश के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगाध पैसे लुटाये गये हैं , और तत्कालीन रूप से फ़ायदे के कारण देश के राजनीतिक और धार्मिक तारणहार जमकर बिके हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं का तो खैर कहना ही क्या।
इन साज़िशों को मैने किताबों में नहीं जमीन पर पढ़ा है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक रहा बल्कि मजदूरी ,लोरियों के सहचालक(खलासी) बनकर दूर सुदूर यात्राएं कर 1990 की दशक में देखा और व्यवहारिक रूप से पढ़ा है।
क्रमशः

आख़िर क्या थी मंशा , रेलवे को जानना है ज़रूरी।

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पाकुड़ रेलवे ट्रैक पर साजिश, वनांचल एक्सप्रेस थी निशाने पर, मालगाड़ी से टला बड़ा हादसा।

पाकुड़ जिले के तिलभीटा और कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के बीच शनिवार देर रात रेलवे ट्रैक पर रखे गए भारी लोहे के टुकड़े ने एक बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। घटनाक्रम पर गौर करें तो साफ होता है कि असामाजिक तत्वों का असली निशाना डाउन लाइन से गुजरने वाली वनांचल एक्सप्रेस थी, लेकिन संयोगवश उससे पहले मालगाड़ी गुजर जाने से बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, गया–हावड़ा एक्सप्रेस रात करीब 10 बजे पाकुड़ स्टेशन से सुरक्षित गुजर गई थी। इसके बाद ही अपराधियों ने डाउन लाइन पर करीब डेढ़ मीटर लंबा भारी लोहे का टुकड़ा रख दिया। इसी दौरान लगभग 10.15 बजे एक मालगाड़ी उस ट्रैक से गुजरी। लोहे का टुकड़ा इंजन और डिब्बों की चपेट में आ गया और घिसटते हुए करीब दो तीन सो मीटर तक आगे बढ़ गया। इस दौरान खंभा संख्या 156/04 के आगे तक कई स्लीपर और पटरी क्षतिग्रस्त हो गए। तेज रगड़ की आवाज सुनते ही मालगाड़ी के चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को रोका। तुरंत स्टेशन मास्टर को सूचना दी गई, जिसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की टीमें मौके पर पहुंचीं। ट्रैक की बारीकी से जांच और मरम्मत के बाद ही वनांचल एक्सप्रेस को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। घटना के कारण वनांचल एक्सप्रेस तिलभीटा या कोटालपोखर के बीच करीब एक से डेढ़ घंटे तक खड़ी रही और देर रात लगभग 12 बजे पाकुड़ स्टेशन पहुंच सकी।
जांच में यह भी सामने आया कि वनांचल एक्सप्रेस का पाकुड़ आगमन रात 10.23 बजे निर्धारित था और यह ट्रेन साहिबगंज जिले के बड़हरवा से रात 9.57 बजे रवाना होकर 10.15 बजे गुमानी स्टेशन पहुंची थी। इसी समय के आसपास ट्रैक पर लोहा रखे जाने से आशंका और गहरी हो गई है कि अपराधियों की मंशा इसी ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की थी।
रविवार को घटनास्थल पर आरपीएफ इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह, सीआईबी और जीआरपी के अधिकारी पहुंचे। वरीय अधिकारियों को सूचना मिलने के बाद रामपुरहाट से एसई राजकुमार साव और एईएम की टीम ने देर रात निरीक्षण किया। रविवार सुबह वर्द्धमान से डॉग स्क्वायड की टीम भी जांच के लिए पहुंची, हालांकि कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। बाद में सीनियर डिवीजनल सिक्योरिटी कमिश्नर रघुवीर चोक्का ने पाकुड़ पहुंचकर मामले की समीक्षा की।
रेलवे ट्रैक पर जानबूझकर लोहा रखने के मामले में पीडब्लूआई उज्जल कुमार के आवेदन पर रेलवे पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ कांड संख्या 18/26 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को गंभीर साजिश मानते हुए हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं।

सन बिहाइंड त वेष्ट , घुसपैठ की अनकहीकहानी।

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घुसपैठ के पीछे की कहानी( सन बिहाइंड द वेस्ट )
भाग – 1

बंगलादेश में पिछले तकरीबन एक पखवाड़े से कुछ ज़्यादा समय में आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं की हत्या हुई है। ये कट्टरपंथी सोच का न सिर्फ परिचायक है बल्कि यह उसी की परिणति है। जबकि विश्व के इस क्षेत्र का इतिहास कहता है कि यहाँ ऐसे कट्टरपंथी सोच नहीं थे , और बंगला भाषा भाषी इस क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द सद्भाव का सांस्कृतिक वातावरण था , और बंगाली हिन्दू – मुसलमान अपने अपने पंथ से आराध्य की आराधना कर सांस्कृतिक रूप से मिलजुल कर रहते थे।
लेकिन ब्रिटिश शासन काल में फूट डालो, राज करो की प्रवृत्ति ने दोनों समुदायों में धीरे धीरे दूरियाँ पैदा की और ये दूरियाँ आज़ादी और देश विभाजन के बाद हिंसक घटनाओं में परिवर्तित होता गया। आज की स्थिति इस क्षेत्र के देशों के चिंतन का विषय है। क्योंकि भारतीय राजनीति ने उन घुसपैठियों को अपना वोटबैंक बना कर कोढ़ में खाज का काम किया , और देश की साम्प्रदायिक एकता को भी घायल किया।
अपने पहले टर्म में ट्रम्प खुलकर आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद आदि पर बोलते थे, लेकिन इस बार उनके बदलते रंग भी एक अलग शंदेश देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं और मिशनरी के विदेशी फंडिंग आदि पर अंकुश भी कई बोखलाहटों का कारण बना। और बंगलादेशी घुसपैठ के संथालपरगना सहित पूरे झारखंड के अधिसूचित क्षेत्र एवं देश के अन्य भागों राज्यों आदि में पैर पसारने ने देश सहित विश्व की राजनैतिक मंच पर कई बदलाव किये । इन सभी विषयों पर विस्तार से कई खण्डों में क्रमशः चर्चा करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी या यूँ कहें कि अपहरण के बाद अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के बाबत कई अन्य देशों को भी धमकियां देना बंगलादेश और पाकिस्तान के लिए और चिंता का विषय है। ( हँलांकि उन्हें न चिंता है, न चिंतन करते हैं) क्योंकि चीन और भारत अमेरिका के लिए एक चुनौती बनता उन्हें दिख रहा है। ये चुनौती उन्हें आज से ही सिर्फ़ नहीं दिख रहा। भारत की आज़ादी को तो ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति से विभाजित कर घायल कर ही दिया था । और उसी समय से अंतरराष्ट्रीय साजिशें भारत को अस्थिर करने के लिए शुरू भी हो गया था , जिसमें अमेरिका और उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का बहुत बड़ा हाथ रहा।
उधर पाकिस्तान में पश्चिमी प्रभाव में उनकी गज़वा ए हिन्द की मंशा को अंदर ही अंदर हवा मिलना शुरू हो चुका था।
लेकिन पाकिस्तान को बंगालियों यानी आज के बंगलादेशियों से नफ़रत की पराकाष्ठा ने बंगालियों पर अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया। लाखों की संख्या में महिलाओं की अस्मत लूटी गई और लाखों की संख्या में बिना भेदभाव के मुसलमान , हिन्दू और अन्य मज़हबों तथा पंथ के बंगालियों की हत्या पाकिस्तानी सेना ने किया। अपने पड़ोसियों के साथ हो रहे ऐसे अत्याचार ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को नागवार गुजरा और सैनिक कार्रवाई कर उपेक्षित तथा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान यानी बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ाद करवाकर अलग देश बंगलादेश को वजूद में लाया गया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया और भारत के सामने अपने हथियार डाल दिया।
गज़वा ए हिन्द की मंशा रखने वाले कट्टरपंथी पाकिस्तान के तत्कालीन दोनों हिस्सों में थे , स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान का ये विभाजन उन्हें टीस दे गया।
हँलांकि भारत के कई टुकड़े करने की अंतरराष्ट्रीय मंशा भारत की आज़ादी के कई दशक पहले से चल रही थी। लेकिन पाकिस्तान के विभाजन की टीस ने इसे एक नये तरीके से हवा दी , और गज़वा ए हिन्द की दबी पड़ी चिनगारी को एक नई हवा दिशा मिली।
प्राकृतिक संसाधनों से एवं कई अन्य तरह से विपन्नता ने बंगलादेश और वहाँ के कट्टरपंथीयों को घुसपैठ की एक नई योजना का पाठ मिला , और भारत के असम , बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) एवं पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मज़हबी , सांस्कृतिक तथा भाषाई समानता के नाम पर काटकर बंगलादेश में मिलाने की योजना पर अंतरराष्ट्रीय साज़िशों ने काम करना शुरू किया , जिसमें पाकिस्तान , अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी तथा तत्कालीन अमेरिका समर्थित तालिबानी सक्रियता ने मिलकर काम करना शुरू किया। अब आई एस आई , सी आई ए एवं तालिवान क्यूँ। इस पर विस्तार से कहा जाएगा, लेकिन सीआईए की नाकामी और आईएसआई के साथ बंगलादेशी घुसपैठ के पीछे बृहत्तर मंशा से बोखलाए अमेरिका के टेरिफ एवं अन्य तरह के किये जा रहे पागलपन बहुत कुछ कहता और बयां करता है।
आगे क्रमशः