Thursday, February 5, 2026
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सरकार के अव्यवहारिक निर्णय बन जाते है अपराध के नये कारण।

पाकुड़-तीन दशकों की पत्रकारिता में याद है,विभिन्न राजनैतिक पार्टियाँ हर विभाग में “इंसपेक्टर राज” ख़त्म करो के नारे लगाते थे। आज देश में प्रधानमंत्री मोदी कानून की पेंचीदगियों को समाप्त कर इसे सरल बनाने के सफलतम प्रयास में लगे हैं।निवेशकों और उद्योगों को वन विंडो सुविधा उपलब्ध कराने की बात की जाती है,ताकि उद्योग और व्यापार सुलभ हो सके।इधर लगभग प्रतिदिन अवैध रूप से लॉटरी पर खबरें प्रकाशित होती जा रही है।
इसके लिए प्रशासन और पुलिस को दोष देने की परम्परा भी बदस्तूर जारी है।एक समय लॉटरी झारखंड में बिकते थे,और वो अवैध नहीं था।
अचानक किसी राजनैतिक रूप से सत्ता पर काबिज़ किसी पार्टी के अव्यवहारिक सोच ने दम्भ भरी अंगड़ाई ली,और रातो रात झारखंड में लॉटरी बिकना अवैध हो गया।
यानि हर तरह के संरक्षण को एक मौका मिल गया,तथा वैध को अवैध के विशेषण के साथ चलने का रास्ता मिल गया।जिस गरीब शोषण के नाम पर लॉटरी पर रोक लगाई गई, उन्हीं गरीबों के शोषण का उसी लॉटरी के द्वारा अवैध का रास्ता एक अव्यवहारिक निर्णय ने खोल दिया।
खैर जहाँ लॉटरी अवैध है,वहीं हर तरह के शराब को वेध बनाकर रखा गया है। नये नये और निर्णयों को अव्यवहारिक रास्तों पर खींच ले जाने की चर्चा चल रही है।
हमारे देश में सरकारें ऐसे निर्णय के लिए मशहूर हैं,जहाँ चूहों को भी थानों के मालखाने में शराब परोसने की कहानी बन सकती है।सरकारी अव्यवहारिक निर्णनयों से अवैध के रास्ते खुलते रहे हैं,और गिनेचुने लोगों को सामान्य से माफिया बनकर अवैध रूप से अगाध बनाने और कमाने का मौका दिया गया है।
अब झारखंड में जाली लॉटरी छपकर बिक रहे हैं। बंगाल सहित अन्य प्रदेशों के सरकारी लॉटरी दशकों पहले यहाँ बिकते थे,लेकिन प्रतिबंध के बाद जाली भी छपने और बिकने लगे।गोवा सहित अन्य राज्यों की तरह स्थानीय शराब बेचने की बात होतीं हैं,लेकिन अन्य राज्यों की नक़ल सरकारी लॉटरी पर न कर क्या इसे व्यवहारिक कहा जा सकता है? यह चिंतन,मंथन और ….जाँच तक के विषय है।सवाल बहुत तरह के उठते हैं,जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।हर बात पर पुलिस और प्रशासन को दोष देना न्याय संगत दिखता ? अब पुलिस वाले क्या क्या करे ! राजनीति और पोषित गुर्गे अव्यवहारिक निर्णय लेते रहें,तो प्रशासन क्या क्या देखें ?
बिहार में शराब बंदी ने शराब के कारोबार को अवैध बना दिया , लेकिन क्या ये बंद हो गया ?
बिहार में शराबबंदी ने करोबार के रूपरेखा को एक नई दिशा दे दी।
माफिया नये नये पैदा लिए,और बंदी की निगरानी रखने वाले जिम्मेदारों को एक और नया रास्ता पैसे बनाने का मिल गया। पेरविकारो और दलालों को नया कारोबार मिल गया। बिहार के किस कोने में शराब चाहिए,आपके घर तक पहुँच जाएगा,आपको कहीं इसकी उपलब्धता के लिए जाना नहीं है।
झारखंड में अवैध होते ही लॉटरी जाली भी हो गये,और नये नये करोड़पतियों की गली गलियारों में उत्पत्ति हो गई।अब हम लक्ज़रियस गाड़ियों पर बकरी चुराएं,थैलों में लॉटरी पहुँचायें,आँचल की छावों में ड्रग्स की पुड़िया बाजारों में उपलब्ध कराएं। मतलब अवैध कमाने की हम हमारी मानसिकता को विभिन्न अवैध धंधों से पोषित करें,लेकिन ” जोतो दोष – नन्दो घोष” की तर्ज़ पर दोषी प्रशासन को ठहराएं।मुट्ठीभर स्वार्थ के लिए हम आपस में भिड़ मरें , लेकिन हर तरफ़ बिखरे अवैध के लिए ,सिर्फ प्रशासन दोषी !
हम कभी अपने बच्चों से यह पूछने की ज़हमत नहीं उठाते कि जब तुम्हारे पास कोई स्पष्ट रोजगार दिखता नहीं , तो विभिन्न सुविधाओं के रुप में दिखता इतने पैसे कहाँ से लाये !प्रशासन को दोष देने की परम्परा छोड़ हम अपने गिरेबान में भी झाँके – टटोले तो कुछ बात बने।
ख़ुद से सवाल करें कि , क्या हमारी मानसिकता और दुर्व्यसनों के लिए प्रशासन दोषी है?

कांग्रेस नगर प्रतिनिधि मंडल ने नवनियुक्त नगर थाना निरीक्षक से की शिष्टाचार मुलाकात

पाकुड़: नगर अध्यक्ष वंशराज गोप के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल के जिला महासचिव श्री कृष्णा यादव,नगर सचिव सुमन चौबे,नगर सक्रिय कार्यकर्ता यूसुफ अंसारी उर्फ रिंकू,मो० बबलू,विजय डोम,फिरोज अलम,तैमूर शेख,सद्दाम,सहित कई सक्रिय कार्यकर्ताओं ने पाकुड़ नगर थाना में नवनियुक्त नगर थाना निरीक्षक(पुलिस इंस्पेक्टर) श्री बबलू कुमार से शिष्टाचार मुलाकात की,इस दौरान पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत,सम्मान किया गया।इस अवसर पर नगर क्षेत्र में जाम से जुड़ी समस्या,कानून व्यवस्था दुरुस्त करने एवं नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत 21 वार्डो में जन समस्याओं के मामले को त्वरित समाधान हेतु श्री कृष्णा यादव एवं नगर अध्यक्ष ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।नगर थाना प्रभारी श्री बबलू ने कहा कि हम जनता के सेवक है इसलिए जनहित से जुड़ी समस्याओं को पूरी तत्परता के साथ समन्यव स्थापित कर पाकुड़ नगर को नई दशा एवं दिशा प्रदान की जाएगी इसके साथ ही उन्होंने,पाकुड़ की जनत की सराहना करते हुए कहा कि यहां सभी लोग सौहार्दपूर्वक माहौल में शांति प्रिय जीवन व्यतीत करते है जिसे और बेहतर बनाने हेतु मैं अथक प्रयासरत रहूंगा।

“बप्पा अगले बरस फिर जल्दी आना ” की प्रार्थना के साथ नम आंखों से दी गई गणपति बप्पा को विदाई

सार्वजनिक गणेश पूजा समिति, रेलवे मैदान,पाकुड़ द्वारा आयोजित रात 27 वें गणपति महोत्सव का समापन बीती रात भगवान गणेश की प्रतिमा विसर्जन के साथ ही हो गया।इस वर्ष गणपति महोत्सव को चार दिनों तक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।रेलवे मैदान पाकुड़ चार दिनों तक गणपति बप्पा मोरिया मंगलमूर्ति मोरया के जयकारों से गूंजता रहा।अब यह जयकारों की गुंज एक वर्ष उपरांत अपनी 27 वीं गणपति महोत्सव के लिए एक कदम और बढ़कर 28 वें वर्ष की ओर अग्रसर हो गई।27 वें गणपति महोत्सव में चार दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन सुनिश्चित हुआ जहां पड़ोसी राज्य बंगाल बिहार के साथ-साथ पाकुड़ जिले के भी अनेक कलाकारों ने अपनी कला का जौहर दिखाकर हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।चौथी और अंतिम दिन डांडिया और मटका फोड़ का कार्यक्रम किया गया,जिसमें समिति के सदस्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लेकर आनंद का लाभ उठाया।मटका फोड़ में समिति के ही सदस्य अजीत कुमार मंडल ने मटका फोड़ कर पुरस्कार अपने नाम किया।इसके उपरांत गणपति बप्पा का विशालकाय प्रतिमा को बड़े ट्रेलर में चढ़ाकर नगर भ्रमण कराया गया।इस शोभायात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुआ। इस बीच भारी पानी के फव्वारे के बीच भी समिति के सदस्य डांडिया करते हुए नाचते-गाते शहर भर में घूमते रहे।इस नगर भ्रमण के क्रम में पुलिस प्रशासन के लोग भी मुस्तादी के साथ अपनी ड्यूटी करते नजर आए ताकि रास्ते पर विसर्जन में कोई परेशानी ना हो।नगर भ्रमण करते हुए अंत में बागतीपाड़ा स्थित मनसा मंदिर तालाब के पास पहुंची,जहां विशालकाय गणपति बप्पा के प्रतिमा सहित मुशकराज का विसर्जन किया गया।विसर्जन के दौरान गणपति महोत्सव के कार्यकर्ता भावुक दिखे सभी की आंखें नम थी।सभी अपने प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश से यह कामना कर विनती कर रहे थे कि शीघ्र ही उन्हें अपना दर्शन दे और अगले साल जल्दी आए ताकि फिर हुए अपने भगवान की पूजा अर्चना कर सके।इस दौरान समिति के पूजनोत्सव को सफल बनाने में समिति के संस्थापक हिसाबी राय अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी संरक्षक संजय कुमार ओझा सचिव अजीत मंडल तनमय पोद्दार राणा शुक्ला संजय कुमार राय ओमप्रकाश नाथ पिन्टू हाजरा अविनाश पंडित मनीष कुमार सिंह अमन भगत अंकित शर्मा अंशु राज अंकित मंडल निर्भय सिंह जितेश राजा रवि पटवा बिट्टू राय रतुल दे अभिषेक कुमार मोनी सिंह रंजीत राम बूबाई रजक ओम प्रकाश नाथ अंकित मंडल अंकित शर्मा नितिन मंडल संजय मंडल सहित अन्य सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सक्रिय व महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुत्तों को रोजगार से जोड़ने का वादा भी बन सकता है चुनावी मुद्दा। चुनावी मुद्दों की संभावनाओं की कमी नहीं हमारे देश में😊

डॉ संजय की कलम….

कुत्ता कहीका

सर्वोच्च न्यायालय,कुत्ता और चुनाव

भारत का माननीय सर्वोच्च न्यायालय आजकाल चर्चा में है । सर्वोच्च न्यायालय है तो चर्चा भी स्वाभाविक है । अपने ही निर्णय को बदलना और ढेरों सुझाव से , देश का एक तबका चर्चा में शामिल हो गया है । समाचार पत्रों , इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बस एक ही चर्चा प्रमुखता से छाई हुई है ।
इधर रोड पर स्पीड ब्रेकर की भूमिका निभाने वाले और सड़क की कई दुर्घटना का कारण बनने वाले कुत्ता समाज भी काफी संख्या में एकत्र होकर, न्यायालय के फैसले पर गम्भीर चिंतन और अनुमोदन करता प्रतीत होता है ।
पूरे कुत्ते समाज ने भी अपने अपने तरीके से प्रतिक्रिया दी है । जो लवर रहे है यानी कुत्ता प्रेमी समाज ,उसे तो कुछ नहीं कर रहे हैं और जो उनके पक्ष में नहीं है, उनको शिकार बना रहे हैं ।
टी वी पर उनके पक्ष में बोलने वाली या वाले को दुम हिलाकर और विरोध में बोलने वाले पर गुर्रा कर अथवा भोंक कर अपना प्रतिक्रिया दे रहा हैं।
कुत्ता समाज के लिए, समर्थन और विरोध में जुलूस भी निकाले जा रहे हैं ।
उसमें कुत्ते भी शामिल हो रहे हैं । मन प्रसन्न हो जाता है कि हम एकं ऐसे लोकतंत्र में जी रहे हैं जहां कुत्ते के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय संजीदा हैं ।
यहां तक कि एक चैनल ने तो टीवी पर पैनलिस्ट की तरह एक कुत्ते को बुला लिया था । कुत्ता भी एक की गोद में बैठकर अपने भाग्य को इतरा रहा था ।
दिनकर को भी समझा रहा था कि परतंत्रता के समय ही नहीं कि श्वानो को दूध से नहलाए जाते थे और कवि को उस छोटे बच्चे के लिए दूध की तलाश में निकलना पड़ता है ।
कुत्ता कवि को बताता है इस स्वतंत भारत में और भी अधिक प्रगति हुई है ।

खैर जो भी हो आज भी हमारे समाज में कुत्ते को लेकर, लोग , अलग अलग राय रखते हैं ।
किसी के भाग्य को कोसना हो तो बोला जाता है कि उसके किस्मत में कुत्ता ने काट लिया । मैने भी मित्र से पूछ लिया कि उसको भी तो कुत्ता ने काट लिया तो वह तो प्रगति कर रहा है , तो उसने कहा कि काला कुत्ता काटने से बुरा होता है ।
अब मैं जिस रंग के कुत्ते को देखता हूं तो कोई भी रंग हो सफेद ही क्यों न हो । उसके अंदर का रंग बहुत काला दिखता था । जो भी हो मेरे मन में विचार आया कि फैसले जिसके भी हित में हो ,राजनीतिक दल आसानी से इसे एक मुद्दा बना सकते है। कोई दल पुराणों में वर्नित कुत्ता जी , को भैरव का रूप बता कर इनके कल्याण के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाने की बात कर सकते हैं।
अन्य दल कुत्ते को चुनाव में बड़ा मुद्दा बना सकते है। वे कुत्ते के कल्याण के लिए महती कदम उठाने की बात जनता से कर के वोट चोरी के आरोप से हट कर के कुत्ता समाज के विभिन्न पदों का सृजन कर रोजगार के अवसर भी पैदा करने की बात कर सकते हैं । पूरा मानवाधिकार वाले और लवर समाज एक होकर वोट करेंगे तो उनकी जीत पक्की हो जाएगी।
राजनीतिक दल अगर चाहे तो , नगरनिगम में कुत्ते से जुड़े विभाग बनाने का ऐलान कर सकते हैं ।केवल घोषणा ही तो करनी है।भारतीय वोटर को क्या चाहिए।अखिल भारतीय कुत्ता पालक अधिकारी बनाए जाए । इनका मूड ठीक रहे और कुत्ता जी इरिटेड होकर किसी को न काटे यह बात भी एक अधिकारी सोचे । इसका नाम डॉग इरिटेड ऑफिसर रखा जा सकता है ।
यानी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को राजनीतिक दल कोई तो नीति बनाकर जनता में जनादेश के लिए जाएं और अखिल भारतीय मंत्रालय भी खुलवाएं । बेशक सर्वोच्च न्यायालय ने कुत्ते पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। राजनीतिक दल जनता के बीच कुछ मुद्दों को लेकर जाएं ,और कुत्ते को रोजगार से जोड़ दें तो जीत उनकी हो सकती है ,और सत्ता में आकर विज्ञापन दे कर कुत्ते के लिए अखिल भारतीय अधिकारी से लेकर स्थानीय अधिकारी तक की बहाली कर सकते हैं ।
वोट चोरी , से ध्यान हटाकर कुछ सकारत्मक प्रचार करे और कुत्ते को रोजगार से जोड़े । जो भी हो समाज अभी भी कहता है। कुत्ता कहींका ।

27 वां गणपति महोत्सव पर पाकुड़ के रेलवे मैदान में समिति की ओर से भव्य तरीके से पूजा संपन्न कराने को लेकर की जा रही तैयारी

पूजा के संस्थापक हिसाबी राय के नेतृत्व में होगा सारा कार्यक्रम संपन्न,
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावे मटका फोड़ कार्यक्रम का होगा आयोजन
सार्वजनिक गणेश पूजा समिति रेलवे मैदान पाकुड़ इस साल 27 वां वर्ष मनाने जा रहा है।समिति की ओर से इस वर्ष भव्य कार्यक्रम भी आयोजित की जा रही है।ऐसे तो हर साल समिति की ओर से रेलवे मैदान में आकर्षक पंडाल के साथ साथ आकर्षक प्रतिमा व पूजा संपन्न कराया जाता रहा है, पर इस बार 27 वर्ष होने के उपलक्ष्य पर समिति की ओर से अलग करने की तैयारी की जा रही है। गणपति महोत्सव की तैयारी गणेश पूजा के संस्थापक हिसाबी राय के देखरेख में जोरों पर है। समिति के अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी ने बताया कि इस वर्ष रेलवे मैदान में गणपति महोत्सव का आयोजन 27 अगस्त से 30 अगस्त तक किया जाएगा। गणेश महोत्सव को सफल बनाने के लिए समिति के कार्यकर्तागण जोरदार तैयारी में जूटे हैं।
भगवान गणपति की भव्य प्रतिमा होगी स्थापित…
पूजा के अध्यक्ष अनिकेत गोस्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि गणेश पूजा के 27 वर्ष होने के उपलक्ष्य पर इस वर्ष विघ्नहर्ता भगवान बाबा गणपति की भव्य प्रतिमा रेलवे मैदान, पाकुड़ में स्थापित की जाएगी।चार दिवसीय आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में 27 अगस्त को गणपति प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा पुष्पांजलि एवं संध्या 7:30 बजे आरती तथा भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा,जिसमें जमालपुर के व्यास विजय चौधरी,मोनी सिंह,मुकेश मिश्रा,पुरण कुमार,शिवा मंडल एवं उनके मंडली द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत की जाएगी।दूसरे दिन संध्या में बच्चों का नृत्य प्रतियोगिता सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
डीसी व एसपी एक साथ करेंगें उद्घाटन…
उपरोक्त महोत्सव का उद्घाटन उपायुक्त पाकुड़ मनीष कुमार व पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी संयुक्त रूप से करेंगे।वहीं 28 अगस्त को नृत्य प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा 30 अगस्त को दोपहर तीन बजे डांडिया व मटका फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।इसके उपरांत प्रतिमा के नगर भ्रमण के बाद प्रतिमा का विसर्जन बागतीपाड़ा स्थित मनसा मंदिर तालाब में किया जाएगा।
गणेश पूजा के संस्थापक हिसाबी राय ने बताया कि गणपति महोत्सव के निमित पिन्टू हाजरा,सचिव अजित कुमार मंडल,तनमय पोद्दार,संजय राय,जितेश रजक,मनीष सिंह,विशाल साहा,बुबाय रजक,निर्भय सिंह,नितिन मंडल,अंशराज,अंकित मंडल,अंकित शर्मा,रातुल दे,अभिषेक राज चौधरी, ओमप्रकाश नाथ,अमन भगत रवि पटवा इत्यादि पूजा की तैयारी में उत्साह के साथ लगे हुए हैं,संपूर्ण रेलवे मैदान,पूजा स्थल और स्टेशन रोड को भगवा झंडे से सजाया जा रहा है।ध्रुव भगत के द्वारा भव्य पंडाल का निर्माण ध्रुव रिंकू भगत,पंडाल के मिस्री बिपु सरदार,राजु रजक के टीम के द्वारा करवाया जा रहा है व विद्युत सज्जा की तैयारी की जा रही हैं तथा पुरोहित सजल चटर्जी एवं काली राय के द्वारा पूजा की विधिवत तैयारी हो रही है।प्रतिमा शिल्पकार तोतन पाल गणपति के प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।पूजा स्थल के चारों ओर नगर परिषद पाकुड़ के द्वारा साफ सफाई करवाया जा रहा है।

आपकी उठी अँगुली को कोसें या दें धन्यवाद ! आपके सवालों ने हमें समाज के प्रेम से परिचित कराया।

“इसे मज़हब कहो या सियासत कहो,
खुदकशी का हुनर तुम सीखा तो चले,
लाओ बेलचें खोदो जमीं की तहें,
मैं कहाँ दफ़न हूँ ,कुछ पता तो चले।”

“तेरी उठी अँगुलियों ने समाज के प्यार से कराया परिचित”

आश्चर्य है कि कोई अंगुली उठाये उस पर जो समाज के लिए बिछा सा रहता हो। लुत्फुल हक़ एक ऐसा नाम जो समाज के लिए सीमाओं से बाहर जा कर हमेशा सहयोग की भावना से खड़ा रहता है। वो व्यवसायी है , व्यवसाय उनका पेसा है। अगर वो अपने व्यवसाय से ईमानदारी नहीं बरतेगा , तो क्या वे समाज के लिए हर तरह से खड़ा रह सकता है ? किसी के लिए भी हो बिना सामर्थ के किसी को सहयोग कर पाना असंभव है।
हम चिकनी सड़क पर भी चलते हैं, तो फिसलकर गिरते हैं। उनपर अंगुली उठाने वाले जरा पत्थर के व्यसाय के उबड़ खाबड़ रास्ते पर चल कर देखे , तो पता चलेगा। फिर भी लुत्फुल हक़ पर आज तक पत्थर व्यवसाय में किसी तरह से अंगूली अभी तक नहीं उठी है।
क्या देश विदेश की संस्थाएं पागल थीं कि लुत्फुल हक़ को सम्मान के योग्य समझा , क्या यहाँ की सरकारी संस्थाएं अकर्मण्य हैं कि उन्हें लुत्फुल हक़ द्वारा की जाने वाले पत्थर व्यवसाय में कमियां नहीं दिखतीं ?
अफ़सोस और आश्चर्य है कि एक व्यक्ति जो अपने काम के साथ हर तरह से समाज की सेवा कर रहा है , उसपर अंगुली उठा कर क्या सावित करना चाहते हैं लोग। क्या यही सकारात्मक पत्रकारिता है ?
पूरा इलाका इससे असहमत और आक्रोश में है। एक पत्रकार पर भी उनके साथ देने की बात कह अंगुली उठाई गई है। व्यक्तिगत रूप से मैं उस पत्रकार को सिर्फ पहचानता ही नहीं अच्छी तरह जानता भी हूँ। उस व्यक्ति ने अपनी पत्रकारिता की जिंदगी में कभी किसी को न तो प्रताड़ित किया, और न ही अपमानित किया। वो पत्रकार भी समय बेसमय जरूरतमंदों को साथ देता रहा है।
स्वाभाविक रूप से दो समान विचार के व्यक्ति में सम्बन्ध एक सहयोगात्मक आकार लेता है।
लिखना बहुत कुछ चाहता हूँ , लेकिन मैं अपनी मर्यादा की सीमा में ही रह कर सिर्फ इतना कहूँगा कि पत्रकारिता सकारात्मक करें।
समाज सेवी व्यवसायी लुत्फुल हक़ और मिलनसार पत्रकार पर उठाए गए अंगुली की यहाँ हर ओर जितनी भर्त्सना हो रही है , उससे उनदोनों के प्रति समाज का असीम प्रेम और आपके प्रति घृणा का परिचय स्वयं स्फूर्त दिख रहा है। उठाई गई अँगुली और अपनी समीक्षा आप (अज्ञात) स्वयं करें।
आपकी उठी अँगुली ने उन दोनों के प्रति समाज के अगाध प्रेम का परिचय भी राह चलते चर्चाओं से मिल रहा है।

ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन की बैठक में पाकुड़ शाखा ने भी की शिरकत , रखे वक्तब्य ।

ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन, पाकुड़ शाखा द्वारा केंद्रीय सभासदों की बैठक में पाकुड़ शाखा ने लिया भाग ।
ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कोलकाता की 130वी केंद्रीय सभासदों की बैठक जो 21 अगस्त से लेकर 23 अगस्त 2025 तक रेलवे कम्युनिटी हॉल नैहाटी में आयोजित हो रही है ,इसमें पाकुड़ शाखा की ओर से शाखा सचिव संजय कुमार ओझा एवं केंद्रीय सभासद विक्रम भारती ,प्रसून पाराशर एवं गौतम प्रसाद यादव ने भाग लिया । इस अवसर पर ईस्टर्न रेलवे के 40 शाखा से आए हुए सभी शाखा सचिव एवं केंद्रीय सभासदों ने अपना वक्तव्य रखा ।इस बैठक से पहले ईस्टर्न जोनल डेमोक्रेटिक वूमेन एवं यूथ कमिटी का सम्मेलन 21 तारीख को हुआ ,जिसमें ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महासचिव कामरेड शिवगोपाल मिश्रा तथा कामरेड वी वेणुगोपाल ने भाग लिया ।उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का सुझाव दिया तथा भरोसा दिलाया कि रेलवे के साथ जो भी मांगे लंबित है, उन सभी के लिए चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा ।पाकुड़ शाखा की ओर से शाखा सचिव संजय कुमार ओझा ने अपना वक्तव्य रखते हुए मुख्य रूप से ओपन लाइन में काम करने वाले सभी पर्यवेक्षकों के लिए साप्ताहिक विश्राम अथवा 15 दिन में 48 घंटे का एक विश्राम अवधि सुनिश्चित करने की मांग उठाई ,जो की रेलवे बोर्ड द्वारा प्रस्तावित है ।आज हमारे रेलवे विभाग में काम करने वाले सभी पर्यवेक्षक काम के अत्यधिक दबाव से मानसिक रोग ,शारीरिक रोग का शिकार हो रहे हैं तथा वह अपने पारिवारिक समस्याओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रहे हैं ।इन सब परिस्थितियों में उन्हें नियमित विश्राम देने की आवश्यकता है ,ताकि उनकी कार्य क्षमता मैं वृद्धि हो, परंतु पदाधिकारी के उत्पीड़न के कारण वह हताश एवं निराश हैं ।इसलिए ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन पाकुड़ शाखा की ओर से पूरे डिवीजन में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा ,जिसमें हावड़ा मंडल के सभी पर्यवेक्षक हस्ताक्षर करेंगे एवं आने वाले समय में इस मांग को मंडल प्रबंधक हावड़ा के समक्ष रखा जाएगा ।साथ ही साथ उन्होंने विगत दिनों में जिस प्रकार से सिगनलिंग विभाग के कर्मचारी की रेल दुर्घटना में मृत्यु हो रही है उससे काफी चिंतित होते हुए उन्होंने सिग्नल विभाग के कर्मचारियों के लिए रिस्क अलाउंस बहाल करने के लिए मांग उठाई । साथ ही उन्होंने सभी पर्यवेक्षक के कार्यालय में एसी लगाने हेतु एवं सभी इंटरलॉकिंग पैनल रुम में एसी लगाने के लिए भी मांग उठाई ।

आज भ्र्ष्टाचार , चार मरे पाँच घायल से निकल , बहुत दिनों बाद बच्चों के साथ जानकारी साझा कर सकारात्मक पत्रकारिता से मिली सन्तुष्टि।

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हर सुबह की तरह आज बुधवार को भी मैं राजपाड़ा के ऐतिहासिक नित्यकाली मंदिर में अपनी आस्था की हाज़री लगाने 9 बजे के आसपास पहुँचा। मन्दिर में कबूतरों का एक विशाल झुंड रोज मेरी प्रतीक्षा करता है। जाते ही वे सभी मेरे आसपास फड़फड़ाहट का कोलाहल करते स्नेह लुटाता है। मैं भी कुछ न कुछ उनके लिए ले जाता हूँ।

यहाँ भी कुछ बाँटने का अवसर मैंनें ढूँढ लिया…

लेकिन आज वहाँ मुझे बच्चों का भी स्कूल ड्रेस में एक बड़ा झुंड दिखा। सभी बच्चे मन्दिर के कोने कोने में घूम और देख रहे थे , स्वाभाविक रूप से मोबाइल के कैमरे भी सेल्फी के लिए चमक रहे थे। मैंनें अपनी दैनिक पूजा के बाद उन बच्चों से बातचीत करना चाहा , मैं ने उनसे पूछा कि आज स्कूल के बदले यहाँ आपलोग दिख रहे हैं !
उनके साथ आये शिक्षक भी वहीं थे। पता चला कि आज बेगलेस डे है। उनके शिक्षक उन्हें जिले से रूबरू कराने ऐतिहासिक जगहों पर घुमा रहे हैं। फिर वापस लौट कर विद्यालय में भी कार्यक्रम में भाग लेंगे।

मैंनें उन्हें पूछा मन्दिर घूम लिए ? उन्होंने बताया हाँ। वे फिर सिद्धो कान्हू पार्क भी जाने वाले थे। मैंनें मन्दिर और सिद्धो कान्हू पार्क और वहाँ स्थित मॉर्टेलो टावर तथा सन्थाल हूल के विषय मे विस्तार ऐतिहासिक जानकारी दी। उन्हें कभी पाकुड़ के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी किसी ने नहीं दी थी। अपने जिला के इन ऐतिहासिक जानकारी को सुनकर बच्चे बहुत खुश हुए। उन्हें लगा कि इतिहास के दृष्टिकोण से अपना जिला कितना समृद्ध है। उनके शिक्षक ने भी मुझे अपने स्कूल में आमंत्रित कर बच्चों को पाकुड़ और झारखंड के विषय में ऐतिहासिक जानकारी बताने , साझा करने का आग्रह किया। शिक्षक और शिक्षिका जो वहाँ उपस्थित थीं , के प्रयासों से मुझे काफी सन्तोष हुआ।
ऐसे भी किसी भी राज्य की प्रतियोगिता में राज्य के इतिहास से जुड़ी जानकारियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं और इस उम्र में ऐसी जानकारियाँ बच्चों की शिक्षा के आधार नींव को मजबूत करेगा।
पाकुड़ उपायुक्त ने बेगेलेष डे के कार्यक्रम को अपनी निगरानी में चलाकर बहुत ख़ूब किया है , लेकिन इसे सिर्फ विद्यालय के कार्यक्रम तक सीमित न रखकर शिक्षकों ने बहुत ही सराहनीय प्रयास का परिचय दिया है।
ऐसे बेगेलेष डे के कार्यक्रमों के समाचार मीडिया में आ रहे हैं लेकिन सिर्फ वहीं तक के जहाँ जिला प्रशासन मौजूद रहता है। प्रशासन अपना काम तो कर ही रहा है, पर उसके सकारात्मक प्रभाव कहाँ तक पड़ा है , यह भी जनता तक आनी चाहिए।
हम पत्रकारों का भी शिक्षा और छात्रों के प्रति यह जिम्मेदारी बनती है कि सिर्फ मध्यान्ह भोजन की कमी की खबरों तक सीमित न रह कम से कम सप्ताह में एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से वो जानकारी साझा करें , जो उनके जीवन और प्रतियोगी परीक्षाओं में काम आए।
जैसे विकास की रौशनी सिर्फ वहीं तक पहुँचती है, जहाँ तक बाबुओं की गाड़ी के चक्के घूमते हैं लेकिन कुछ बाबू पैदल सुदूर इलाकों तक भी पहुँच कर विकास को वहाँ तक पहुँचाने का काम भी तो कर रहे हैं। क्यूँ न हम पत्रकार भी सकारात्मक पत्रकारिता का परिचय देते हुए , कुछ ऐसा करें जो मील का पत्थर सावित हो।
भ्र्ष्टाचार तो आज की तारीख़ में शिष्टाचार बन गया है , पर कुछ जगहों पर सकारात्मक पहल भी दिखता है , उसे भी समाज को परोसें।
आज बच्चों की जिज्ञासाओं से मैं काफ़ी प्रभावित हुआ और उस विद्यालय के प्रयास से आनन्दित भी।
बिना किसी भेदभाव के अपने जिला के इतिहास को जानकर बच्चे भी आनन्दित और संतुष्ट दिखे।
जय हिंद , जय झारखंड , जिन्दावाद पाकुड़।

हर देश , हर समाज और हर संस्कृति का अपना अपना एक व्याकरण होता है ।

डॉ संजय की कलम—

भारत का व्याकरण
कामिनी , कंचन और कृति मनुष्य की स्वाभाविक कमजोरी है । फिर नम्रता , विनम्रता , विनय भाव और भी कई मनुष्य के आभूषण भी है। किंतु विनय तो ठीक पर छल विनय ठीक नहीं। स्वतंत्रता तो ठीक पर स्वछंदता ठीक नहीं। ऐसा लोग कहते हैं और लोग यूं ही कहते हैं , ऐसा मानना ठीक नहीं ।
मनुष्य है तो भाव पक्ष तो है ही ,उसी तरह वस्त्र है , कम वस्त्र है , संक्षिप्त है और अति संक्षिप्त भी है । टेस्ट ड्राइव भी है ,आप जैसा चाहो वैसा ठीक है ,पर सब के लिए ठीक हो आवश्यक नहीं । संविधान ने इसपर कुछ कहा नहीं और कहना भी नहीं चाहिए। पर,कोई तो कहता है ,किसी को तो कहना चाहिए । अब बात तो ऐसी हो गई कि एक नेता जी हुए दिल्ली के ,उनपर आरोप लगा वो जेल गए ,पर उनके तर्क थे और संविधान के बारे बात किया कि मुझे इस्तीफा क्यों देना चाहिए । पर बाकी राजनेताओं ने तो आरोप लगते ही इस्तीफा दिए । कई उदाहरण है , झारखंड भी उसमें है ।
फिर सही क्या है , किसे सही बोला जाए केजरीवाल जी को ? नहीं ,बिल्कुल नहीं।
फिर हम कैसे रहे न रहे ,ये मेरे मामले है , आप कौन ? तो ऐसा भारत में नहीं चलता। और नहीं चलना चाहिए किसी भी सभ्य देश और समाज में ऐसा नहीं चलना चाहिए ।
मेरा ऐसा मानना बिल्कुल नहीं है कि भारत को छोड़ बाकी असभ्य है ।मेरा मानना है कि कोई भी देश हो उसके कुछ मौलिक और पारंपरिक नियम तो होंगे। उनकी भाषा होगी।उनके यहां कुछ प्रचलित शब्द
होंगे , जैसे माता , पिता ,समाज ,भाई बहन , फिर शर्म भी एक शब्द होगा, हया भी होगी , कुल और परंपराएं भी होगी।
कुछ नियम भी होंगे,हर कुछ के यानि जानवरों और मनुष्यों के लिए अलग अलग दृष्टि भी होगी , मसलन सड़क पर हमारे यहां कुत्ते तनोरंजन करते मिल जाते है ।आप कुत्ते के द्वारा सड़क पर जो तनोरंजन करते देखते है ,आप उन्हें टेस्ट ड्राइव भी कह सकते है । लोग इसे स्वाभाविक मानते हैं पर अगर , मनुष्य ऐसा करने लगे तो समाज स्वीकार न करें शायद!
फिर हम एक अलग और श्रेष्ठ समाज में रहते हैं ।
तो भाषा के विकास के साथ व्याकरण की भी आवश्यकता महसूस हुए होंगे और हमारे यहां तो सूत्र रूप में व्याकरण रच दिया गया l आप कितना भी अच्छा बोले और लिखे पर अगर व्याकरण के अनुरूप न बोले तो गड़बड़ है ।
फिर,अभी भी हमारे गांवों में और कुछ छोटे शहरों में बड़े भाई का दोस्त भी बड़ा भाई बन जाता है ।उतना ही सम्मान जितना बड़े भाई का । दोस्त भी अपनी मर्यादा जानता है छोटे भाई बहन भी। महाविद्यालय के दिनों में श्वेत धूम्र सटीका यानी सिगरेट पीते कोई बड़े भाई के दोस्त ने देख लिया तो हालत खराब और यह वाकया अगर विद्यालय स्तर पर हो गई तो पिटाई बड़े भाई के दोस्त द्वारा ही होना तय ।
यह समाज और ये है समाज की खूबसूरती ।
हॉल के दिनों में दो संतो के द्वारा किश्तों में किए जाने वाले तनोरंजन पर जो टिप्पणी की गई ,उसपर बहुत बबेला हुआ ।संतों को भला बुरा कहा गया ।
पर मेरा मानना है कि आप अपने निजी जीवन को सुलभ बनाएं या सुलभ शौचालय ,ये आपकी मर्जी ,पर ये जो संत है ये सनातन समाज के अभिभावक हैं और इन्हें कोई नियुक्त नहीं करता पर ,इन्हें विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है ।समाज इनका आदर करता है और करता रहेगा ।
और एक स्वस्थ समाज और देश का एक व्याकरण होता है ,अगर हमें ठीक रहना है तो व्याकारण का अनुकरण नहीं अनुकीर्तन करना ही होगा ।

—– डॉ संजय
18अगस्त
कृष्ण पक्ष दशमी,सोमवार

*ब्यंगली एसोसिएशन झारखंड, पाकुड़ शाखा।*

स्वतंत्रता आन्दोलन के सर्व-कनिष्ट शहीद खुदीराम बोस के पुण्य तिथि आज दिनांक – 11 अगस्त 2025 ब्यंगली एसोसिएशन झारखंड के पाकुड़ शाखा के द्वारा उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया है। पाकुड़ शहर के खुदीराम चक में स्थित एसोसिएशन के समर्पित सदस्य श्रीमती बेला मजुमदार के द्वारा प्रतिष्ठित शहीद खुदीराम बोस के आदम कद मूर्ति पर माल्यार्पण कर शहीद को स्मरण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया है।
तत्कालीन अनुशिलन समिति के सदस्य होते हुए शहीद प्रफुल्ल चाकी के साथ मिलकर स्वतंत्रता आन्दोलन के एक हिस्से के रूप में किंग्सफोर्ड को मारने के कार्यक्रम में पकड़े गए एवं फांसी की सज़ा के कार्यान्वयन दिनांक – 11.08.1908 के दिन विहार के मुजफ्फरपुर केन्द्रीय कारागार में शहीद हो गए। शहीद खुदीराम बोस के जन्मतिथि एवं पुण्य तिथि ब्यंगली एसोसिएशन झारखंड के पाकुड़ शाखा के द्वारा प्रतिवर्ष श्रद्धा के साथ मानाया जाता है।
शहीद खुदीराम बोस के मूर्ति पर माल्यार्पण कार्यक्रम में राजकुमार टिबरीबलवाल, रोहित टिबरीबल, विजय दास, नीलरतन दास, फिरोज, श्याम भगत मोहम्मद कलीम, निरंजन घोष प्रबीर भट्टाचार्य, माणिकचंद्र देव, सोमनाथ दास, पंचानन सरकार, मानव घोष, संजय भगत एवं अन्य भाग लिये है।